एम. के. स्टालिन

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M. K. Stalin
மு.க. ஸ்டாலின்
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पदस्थ
कार्यभार ग्रहण 
2009

पदस्थ
कार्यभार ग्रहण 
2006
निर्वाचन क्षेत्र Thousand Lights

जन्म 1 मार्च 1953 (1953-03-01) (आयु 61)
Madras, Madras State, India
राजनैतिक पार्टी DMK
जीवन संगी Durga alias Saantha
संतान Udhayanidhi Stalin

Senthamarai Sabarisan

आवास Chennai, Tamil Nadu, India
वेबसाइट www.mkstalin.net

मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन (तमिल: மு.க. ஸ்டாலின்) (जन्म 1 मार्च 1953) एक भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व अभिनेता हैं जिन्हें एम.के. स्टालिन नाम से बेहतर तरीके से जाना जाता है. वे तमिलनाडु के मशहूर राजनेता करुणानिधि के तीसरे बेटे और उनकी दूसरी पत्नी श्रीमती दयालु अम्मल की संतान हैं, उनका नाम जोसेफ स्टालिन के नाम पर रखा गया था जिनकी मृत्यु उनके जन्म के वर्ष में ही हुई थी. स्टालिन ने चेन्नई में मद्रास विश्वविद्यालय के नंदनम आर्ट्स कॉलेज से इतिहास में अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की है.[1] स्टालिन 2006 के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु सरकार में ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन मंत्री बने. 29 मई 2009 को स्टालिन को राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला द्वारा तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया गया था.[2] उनके बड़े भाई एम.के. अझगिरी रसायन और उर्वरक मंत्री हैं. उसकी सौतेली बहन कनिमोझी एक राज्य सभा सदस्य हैं.[3]

स्टालिन डीएमके के कोषाध्यक्ष और युवा मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत हैं.

राजनीतिक जीवन[संपादित करें]

स्टालिन का जन्म मद्रास में हुआ था जिसे अब चेन्नई के रूप में जाना जाता है. उनका राजनीतिक करियर 14 वर्ष की आयु में 1967 के चुनावों में प्रचार के साथ शुरू हुआ था. 1973 में स्टालिन को द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) की आम समिति में निर्वाचित किया गया था.

वे उस समय सुर्खियों में आए जब उन्हें आपातकाल का विरोध करने के लिए आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत जेल में बंद कर दिया गया था.[4] स्टालिन 1989 के बाद से तमिलनाडु विधानसभा के लिए चेन्नई के थाउजेंड लाइट्स निर्वाचन क्षेत्र से चार बार चुने गए हैं. स्टालिन 1996 में इस शहर के पहले सीधे तौर पर निर्वाचित मेयर बने थे.[5]

2001[6] में स्टालिन एक बार फिर से मेयर चुने गए, हालांकि उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने तमिलनाडु नगर कानून (संशोधन) अधिनियम, 2002 को अधिनियमित किया था, यह एक ऐसा क़ानून है जो एक व्यक्ति को सरकार में दो निर्वाचित पद रखने से रोकता है. इस क़ानून को पूर्वव्यापी रूप से स्टालिन के मामले पर लागू किया गया था (वे एक निर्वाचित विधायक थे) जिसे व्यापक रूप से उन्हें चेन्नई के मेयर पद से हटाने के उद्देश्य से उठाये गए कदम के रूप में देखा गया था.[7] हालांकि मद्रास उच्च न्यायालय ने इस क़ानून को यह कहते हुए अप्रभावी करार दिया था कि वैधानिक निकायों को पूर्वव्यापी रूप से लोगों के "मौलिक अधिकारों" को प्रभावित करने वाले कानून बनाने से "रोका" नहीं गया था. हालांकि अदालत ने यह माना कि मद्रास (अब चेन्नई) सिटी नगर निगम अधिनियम, 1919 के तहत एक व्यक्ति लगातार दो कार्यकालों के लिए मेयर नहीं बन सकता है यद्यपि स्टालिन के विपरीत पहले के मेयर सीधे तौर पर निर्वाचित नहीं हुए थे. स्टालिन ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील नहीं की.[8]

मीसा जो आतंकवाद और गुंडा अधिनियम के काफी करीब है, इसके तहत 1975 में पहली बार गिरफ्तार किये जाने के बाद से स्टालिन को विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर कई बार गिरफ्तार किया गया है, और उन्हें पूर्व में गंभीर शारीरिक दंड भी दिया जा चुका है. करुणानिधि को आधी रात को गिरफ्तार किया जाना जिसमें करुणानिधि, स्टालिन, मारान और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया और उन पर फ्लाईओवर घोटाले का आरोप लगाया गया था. इसे व्यापक रूप से राजनीतिक प्रतिशोध[9] का कदम समझा गया था क्योंकि एफआईआर या पुलिस में शिकायत शुक्रवार रात को दर्ज कराई गयी थी और गिरफ्तारियां इसके कुछ ही घंटों के बाद शनिवार सुबह को की गयी थीं.[10] हालांकि यह गिरफ्तारी 2001 में हुई थी, अदालत में आरोप पत्र चार साल बाद 2005 में दायर किया गया था.[11]

तमिलनाडु में स्टालिन ने 2009 के आम चुनाव में चुनाव प्रचार और अंततः डीएमके-गठबंधन-संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की जीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.[12]

वंश विवाद[संपादित करें]

डीएमके के विरोधी, कुछ राजनीतिक प्रेक्षक और डीएमके पार्टी के सबसे-वरिष्ठ सदस्य इस बात की आलोचना करते हैं कि करूणानिधि नेहरू-गांधी परिवार की तर्ज पर एक राजनीतिक वंशवाद शुरू करने की कोशिश में स्टालिन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. डीएमके का साथ छोड़ देने वाले वाइको सबसे अधिक मुखर रहे हैं और कुछ राजनीतिक प्रेक्षक इसे वाइको को किनारे करने के एक कदम के रूप में देखते हैं क्योंकि उन्हें स्टालिन के लिए एक खतरे के रूप में देखा गया था.

हालांकि डीएमके के सूत्रों और जिन लोगों ने 70 और 80 के दशक की राजनीतिक उथल-पुथल को देखा है वे इसका खंडन करते हैं और कहते हैं कि स्टालिन अपनी स्वयं की योग्यता के आधार पर आगे आये हैं. उनका कहना है कि स्टालिन अपने कदमों के बूते आगे बढ़े हैं, 1975 से ही उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है जब उन्हें मीसा के तहत जेल में बंद किया गया था और आपातकाल के दौरान जेल के अंदर इतनी क्रूरता से उनकी पिटाई की गयी थी कि उन्हें बचाने की कोशिश में डीएमके पार्टी के उनके साथी कैदी की मौत हो गयी थी.[13]

स्टालिन 1989 और 1996 में एक विधायक थे जब उनके पिता करुणानिधि मुख्यमंत्री थे, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था. उन्होंने अपनी लड़ाई खुद लड़ी और 1996 में चेन्नई के 44वें मेयर बने जिसमें उन्हें पहले सीधे तौर पर निर्वाचित मेयर के रूप में चुना गया था. विधायक के रूप में यह उनका चौथा कार्यकाल था जब उन्हें करुणानिधि मंत्रिमंडल में एक मंत्री बनाया गया, इस तरह उनकी प्रगति धीमी और स्थिर है. वे आगे बताते हैं कि करुणानिधि ने यहां तक कि अपने अन्य पुत्रों एम.के. मुत्थू और एम.के. अझगिरी को भी गलत कार्यों के लिए दोषी पाए जाने पर निष्कासित कर दिया था.[14] स्टालिन, अपनी सौतेली बहन कनीमोझी के साथ मिलकर करोड़ों की संपत्ति जुटाने वाले ए राजा को समर्थन देने के लिए अपने पिता के खिलाफ हैं.

फ़िल्मी सफ़र[संपादित करें]

1980 के दशक के दौरान उन्होंने कुछ तमिल फिल्मों में काम किया है. उन्होंने 1990 के दशक के मध्य में सन टीवी के टेलीविजन धारावाहिकों में भी अभिनय किया है.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • विश्व के राजनीतिक परिवार
  • नेपोलियन (अभिनेता)
  • एम.के. अझगिरी (नेता)

संदर्भ[संपादित करें]

  1. इंडिया टुडे
  2. स्टालिन नेम्ड टीएन डिप्टी सीएम
  3. काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ऑफ तमिलनाडु
  4. डेली एक्सेलसियर ...एडिटोरियल
  5. टूवार्ड्स सिंगारा चेन्नई - इंटरव्यू विथ दी मेयर - www.chennaibest.com
  6. rediff.com: स्टालिन रि-इलेक्टेड मेयर ऑफ मद्रास
  7. मेयर्स ऑफिस स्लिप आउट ऑफ स्टालिन्स हैंड-सिटिज़- दी टाइम्स ऑफ इंडिया
  8. दी टेलीग्राफ - कोलकाता: नेशन
  9. rediff.com: करुणानिधि, स्टालिन अरेस्टेड
  10. rediff.com: पर्सनल एजेंडा प्रिविलेड ओवर रूल ऑफ दी लॉ: अरुण जेटली
  11. चार्जशीट फाइल्ड आउट ऑफ पॉलिटिकल वेन्डेटा: डीएमके - Sify.com
  12. स्टालिन बिकम्स डिप्टी चीफ मिनिस्टर इन तमिलनाडु ऐसा कहा जाता है कि वे ही तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे क्योंकि उनके पिता डॉ.एम.करूणानिधि को लगता है कि समस्याओं का सामना करने में वे एम.के.अलागिरी की तुलना में अधिक सक्षम हैं.
  13. पॉलिटिक्स: स्पेशल सीरीज; एम के स्टालिन
  14. तहलका - दी पीपुल्स पेपर

बाह्य कड़ियां[संपादित करें]