हैदराबाद, भारत

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यह लेख भारत के एक नगर के बारे में है, यदि आप पाकिस्तान के नगर हैदराबाद के बारे में जानना चाहते हैं तो हैदराबाद, पाकिस्तान पर जाएं।
हैदराबाद
హైదరాబాదు
—  महानगर  —
चार मीनार प्रसिद्ध स्मारक और हैदराबाद का प्रतीक
चार मीनार प्रसिद्ध स्मारक और हैदराबाद का प्रतीक
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य आंध्र प्रदेश
ज़िला हैदराबाद
मुख्यमंत्री कोनीजेती रोसैया
राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी
जनसंख्या
घनत्व
7,57,27,000 (2006 के अनुसार )
• 221,163
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
625 (241 वर्ग मीटर) कि.मी²
• 536 मीटर मीटर
आधिकारिक जालस्थल: http://www.ghmc.gov.in/

Erioll world.svgनिर्देशांक: 17°21′58″N 78°28′34″E / 17.366°N 78.476°E / 17.366; 78.476

हैदराबाद (तेलुगु: హైదరాబాదు,उर्दु: حیدر آباد) भारत के राज्य आन्ध्र प्रदेश की राजधानी है। इसका दूसरा नाम भाग्यनगर है। आन्ध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र मे स्थित इस महानगर की जनसंख्या लगभग ६१ लाख है। भारत के महानगरों में जनसंख्या के आधार पर यह ५वें स्थान पर है।

हैदराबाद अपने उन्नत इतिहास, संस्कृति, उत्तर तथा दक्षिण भारत के स्थापत्य के मौलिक संगम, तथा अपनी बहुभाषी संस्कृति के लिये भौगोलिक तथा सांस्कृतिक दोनों रूपों में जाना जाता है। हैदराबाद वह स्थान रहा है जहां हिन्दू और मुस्लिम शांतिपूर्वक शताब्दियों से साथ साथ रह रहे हैं।

यह भारत के सर्वाधिक विकसित नगरों मे से एक है और भारत में सूचना प्रौधोगिकी एवं जैव प्रौद्यौगिकी का केन्द्र बनता जा रहा है । हुसैन सागर से विभाजित, हैदराबाद और सिकंदराबाद जुड़वां शहर हैं। हुसैन सागर का निर्माण सन १५६२ में इब्राहीम कुतुब शाह के शासन काल में हुआ था, और यह एक मानव निर्मित झील है। चारमीनार, इस क्षेत्र में प्लेग महामारी के अंत की यादगार के तौर पर मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने १५९१ में, शहर के बीचों बीच बनवाया था।

स्थापना[संपादित करें]

गोलकोंडा का पुराना क़िला राज्य की राजधानी के लिए अपर्याप्त सिद्ध हुआ और इसलिए लगभग 1591 में क़ुतुबशाही वंश में पाँचवें, मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने पुराने गोलकोंडा से कुछ मील दूर मूसा नदी के किनारे हैदराबाद नामक नया नगर बनाया। चार खुली मेहराबों और चार मीनारों वाली भारतीय-अरबी शैली की भव्य वास्तुशिल्पीय रचना चारमीनार, क़ुतुबशाही काल की सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती है। यह वह केंद्र है, जिसके आसपास बनाई गई मक्का मस्जिद 10 हज़ार लोगो को समाहित कर सकती है। हैदराबाद अपने सौंदर्य और समृद्धि के लिए जाना जाता है। चारमीनार के बगल में लाड-बाजार, गुलजार हौज, मशहूर विक्रय केंद्र है। चारमीनार के एक तरफ भाग्यलक्ष्मी का प्रसिद्ध मंदिर है।

नामकरण[संपादित करें]

हैदरबाद नाम के पीछे कई धारणायें हैं । एक प्रसिद्ध धारणा है कि इस शहर को बसाने के बाद मुहम्मद कुली कुतुब शाह एक स्थानीय बंजारा लड़की भागमती से प्रेम कर बैठा था, लड़की से शादी के बाद उसने इस शहर का नाम भाग्यनगरम् रखा। इस्लाम स्वीकार करने के बाद, भागमती का नाम हैदर महल हुआ - और शहर का भी नया नाम हैदराबाद ("हैदर का बसाया गया शहर") [1]

इतिहास[संपादित करें]

सुल्तान कुली कुतुब मुल्क , गोलकुंडा सल्तनत के शासक परिवार, "कुतुब शाही" राजवंश का संस्थापक था । १५१२ मे स्वतंत्र सल्तनत बनने से पहले यह राजवंश बहमनी सल्तनत के आधीन था । १५९१ में इस राजवंश के एक शासक मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने मूसी नदी के तट पर हैदराबाद शहर की स्थापना की , यह स्थान परिवर्तन, पुराने मुख्यालय गोलकुंडा में राजवंश को हो रही पानी की कमी के कारण करना पडा । कहा जाता है कि, इससे पहले कि प्लेग की महामारी उसकी नये बसाये शहर में फ़ैल पाती, उस पर काबू पाया जा सका, इसलिये उसने, सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुये, उसी साल, चारमीनार बनवाने का भी आदेश दिया । १६वीम शताब्दी और शुरुआती १७वीं शताब्दी में, जैसे जैसे कुतुब शाही राजवंश की शक्ति और सत्ता बढती गयी, हैदराबाद हीरों के व्यापार का केंन्द्र बनता गया । महारानी एलीजाबेथ के राजमुकुट में जड़ा विश्व में सर्वाधिक प्रसिद्ध कोह-ए-नूर, गोलकुंड़ा की हीरों की खानें से ही निकला है । कुतुब शाही राजवंश ने हैदराबाद में हिन्दुस्तानी-फारसी और हिन्दुस्तानी-इस्लामी साहित्य के विकास में भी सहयोग किया । कुछ सुल्तान स्थानीय तेलगू संस्कृति के संरक्षक भी माने जाते हैं । १६वीं शताब्दी में शहर गोल्कुंडा की जनसंख्या के बसने के लियेबढा और फ़लतः कुतुब शाही शासकों की राजधानी बन गया । हैदराबाद अपने बागों और सुखद मौसम के लिये जाना जाने लगा । १६८७ में, मुगल शासक ऒरंगजेब ने हैदराबाद पर अधिकार कर लिया । इस कम समय के मुगल शासन के दॊरान, हैदराबाद का सॊभाग्य क्षय होने लगा । जल्द ही, मुगल शासक के द्वारा नियुक्त शहर के सूबेदार ने अधिक स्वायत्ता पा ली । १७२४ में असफ़ जाह प्रथम , जिसे मुगल सम्राट ने "निजाम-ए-मुल्क" का खिताब दिया था, ने एक विरोधी अधिकारी को हैदराबाद पर अधिकार स्थापित करने में हरा दिया । इस तरह आसफ़ जाह राजवंश का प्रारंभ हुआ, जिसने हैदराबाद पर भारत की अंग्रेजों से स्वतंत्रता के एक साल बाद तक शासन किया । आसफ़ जाह के उत्तराधिकारीयों ने हैदराबाद पर राज्य किया, वे निजाम कहलाये । इन सात निजामों के राज्य में हैदराबाद सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों भांति विकसित हुआ । हैदराबाद राज्य की आधिकारिक राजधानी बन गया और पुरानी राजधानी गोलकुंडा छोंड़ दी गयी । बड़े बड़े जलाशय जैसे कि निजाम सागर, तुंगबाद्र, ओसमान सागर, हिमायत सागर और भी कई बनाये गये । नगार्जुन सागर के लिये सर्वे भी इसी समय शुरु किया गया, जिसे भारत सरकार ने १९६९ में पूरा किया । जब १९४७ में भारत स्वतन्त्र हुआ, ब्रितिश शासन से हुयी शर्तों के तहत हैदराबाद ने; जिसका प्रतिनिधित्व मुख्य मन्त्री, मंत्रिमण्डल और निजाम कर रहे थे, स्वतन्त्र होने को चुना, एक मुक्त शासक की भान्ति या ब्रिटिश साम्राज्य की रियासत की भान्ति । भारत ने हैदराबाद पर आर्थिक नाकाबन्दी लगा दी | परिणामतः हैरदराबाद राज्य को एक विराम समझॉता करना पडा | भारत की स्वतन्त्रता के करीब एक साल बाद, १७ सितम्बर १९४८ के दिन निजाम ने अधिमिलन प्रपत्र पर हस्ताक्षर किये | १ नवम्बर १९५६ को भारत का भाषायी आधार पर पुर्नसंगठन किया गया | हैदराबाद राज्य के प्रदेश नये बने आन्ध्र प्रदेश्, मुंबई (बाद मे महाराष्ट्र), और कर्नाटक राज्यों मे तेलुगुभाषी लोगं के अनुसार बांट दिये गये | इस तरह हैदराबाद नये बने राज्य आन्ध्र प्रदेश की राजधानी बना |

भूगोल और पर्यावरण[संपादित करें]

हैदराबाद शहर दक्षिण भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य, तेलंगाना क्षेत्र मे स्थित है | यह देक्कन क्षेत्र मे है जो, समुद्र तट से ५४१ मीटर, ६२५किमी क्षेत्र ऊपर स्थित है |

मूल हैदराबाद शहर मूसी नदी के किनारे स्थापित हुआ था। इसे अब ऐतिहासिक पुराना शहर कहा जाता है, जहां चारमीनार, मक्का मस्जिद आदि बने हैं, वह नदी के दक्षिणी किनारे पर बसा है। नगर का केन्द्र नदी के उत्तर में स्थानांतरित हो गया है। यहां कई सरकारी इमारतें व मुख्य स्थल बने हैं, खासकर हुसैन सागर झील के दक्षिण में। इस नगर की त्वरित प्रगति साथ जुड़े सिकंदराबाद व अन्य पड़ोसी क्षेत्रों सहित हुई है, जिससे यह महानगरों की श्रेणी में आ गया है। यहां का मौसम इस प्रकार से है:

  • ग्रीष्म काल (मई): औसत अधिकतम तापमान: 40 डिग्री से० औसत न्यूनतम : 25 डिग्री से०
  • हेमन्त काल (दिसंबर): औसत अधिकतम तापमान 28 डिग्री से०, औसत न्यूनतम: 13 डिग्री से०
  • अधिकतम अंकित : 45.6 शिग्री से०, न्यूनतम अंकित:6.1 डिग्री से०
  • वार्षिक वर्षा: 79 से.मी.
  • भुगर्भीय प्रणाली: आर्कियन
  • मृदा: लाल बलुआ, साथ ही काली कॉटन मृदा के क्षेत्र भि हैं।
  • निकटवर्ती भूभाग: पथरीला/पहाड़ी (हैदराबाद के निकटवर्ती क्षेत्र अपनी संदर पाषाण बनावट के लिये प्रसिद्ध हैं। )
  • जलवायु: उष्णकटिबन्धीय नम एवं शुष्क

चिकित्सकीय पर्यटन[संपादित करें]

यदि किसी को कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, तो हैदराबाद, उभरता हुआ सर्वश्रेष्ठ स्थानों में से एक है, उपचार हेतु। नगर पहले ही औषधि का केन्द्र है, जहां औषधियों का कई करोड़ का व्यापार है। यहां कई सस्ते व अच्छे अस्पताल भी हैं।

नागरिक प्रशासन[संपादित करें]

नगर का प्रशासन ग्रेटर हैदराबद नगरमहापालिका द्वारा संचालित है। [2] इस पालिका के अध्यक्ष यहां के महापौर हैं, जिन्हें कई कार्यपालक क्षमताएं निहित हैं। पालिका की मुख्य क्षमता नगरमहापालिका आयुक्त, एक आइ ए एस के पास है, जो आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त होता है।

हैदराबाद एक सौ 50 म्युनिसिपल वार्ड्स में बंटा हुआ है। प्रत्येक वार्ड का एक कॉर्पोरेटर होता है, जो पालिका के चुनावों में चयनित होता है। हैदराबाद में एक जिला है, जो जिला मैजिस्ट्रेट के अधीन आता है। इन्हें कलेक्टर भी कहा जाता है। कलेक्टर संपत्ति आंकड़ों व राजस्व संग्रहण का प्रभारी होता है। यही नगर में होने वाले चुनावों की प्रक्रिया का निरीक्षण भी करता है। महानगरीय क्षेत्र में रंगारेड्डी जिला भी आता है, जो पूर्व हैदराबाद में से काट कर बना था।

अन्य महानगरों की भांति, यहां भी एक पुलिस आयुक्त, आई पी एस होता है। हैदराबाद पुलिस राज्य गृह मंत्रालय के अधीन आती है। हैदराबाद में पाँच पुलिस मंडल हैं, प्रत्येक का एक पुलिस उपायुक्त है। यहां की यातायात पुलिस भी हैदराबाद पुलिस के अधीन,अर्ध-स्वायत्तता प्राप्त संस्था है।

यहां एक राज्य उच्च न्यायालय है। इसके साथ ही दो निचले न्यायालय भी हैं। ये हैं: स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट: नागरिक (दीवानी) मामलों हेतु, व सैशन कोर्ट: आपराधिक(फौजदारी) मामलों हेतु।

हैदराबाद में दो लिक सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं: हैदराबाद एवं सिकंदराबाद। साथ ही शहर के कई भाग, दो अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के भी भाग हैं। यहां तेरह विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।

आधिकारिक रूप से भारत सरकार हैदराबाद को महानगर मानती है।

अर्थ व्यवस्था[संपादित करें]

हैदराबाद आंध्र प्रदेश की वित्तीय एवं आर्थिक राजधानी भी है। यह शहर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद, कर एवं राजस्व का सर्वाधिक अंशदाता है। 1990 के दशक से इस शहर का आर्थिक प्रारूप बदल कर, एक प्राथमिक सेवा नगर से बहु-सेवा वर्णक्रम स्वरूप हो गया है, जिसमें व्यापार, यातायात, वाणिज्य, भण्डारण, संचार, इत्यादि सभी सम्मिलित हैं। सेवा उद्योग मुख्य अंशदाता है, जिसमें शहरी श्रमशक्ति कुल शक्ति का 90% है।

हैदराबाद को मोतीयों का नगर भी कहा जाता है। और सूचना प्रौद्योगिकी में तो इसने बंगलौर को भी पछाड़ दिया है। मोतिओं का बाजार चार मीनार के पास स्थित है। मोतिओं से बने आभूषण चारकमान बाज़ार से या अन्य मुख्य बाज़ारों से भी लिये जा सकते हैं। चाँदी के उत्पाद (बर्तन व मूर्तियां, इत्यादि), साड़ियां, निर्माल एवं कलमकारी पेंटिंग्स व कलाकृतियां, अनुपम बिदरी हस्तकला की वस्तुएं, लाख की रत्न जड़ित चूड़ियाँ, रेशमी व सूती हथकरघा वस्त्र यहां बनते हैं, व इनका व्यापार सदियों से चला आ रहा है।

आंध्र प्रदेश को पूर्व हैदराबाद राज्य से कई बड़े शिक्षण संस्थान, अनुसंधान प्रयोगशालाएं, अनेकों निजी एवं सार्वजनिक संस्थान मिले हैं। मूल शोध हेतु अवसंरचना सुविधाएं यहां देश की सर्वश्रेष्ठ हैं, जिसके कारण ही एक बड़ी संख्या में शिक्षित लोग देश भर से यहां आकर बसे हुए हैं।

हैदराबाद औषधीय उद्योग का भी एक प्रमुख केन्द्र है, जहां डॉ० रेड्डीज़ लैब, मैट्रिक्स लैबोरेटरीज़, हैटरो ड्रग्स लि०, डाइविस लैब्स, औरोबिन्दो फार्मा लि० तथा विमता लैब्स जैसी बड़ी कम्पनियां स्थापित हैं। जीनोम वैली एवं नैनोटैक्नोलॉजी पार्क जैसी परियोजनाओं द्वारा, जैव प्रौद्योगिकी की अत्यधिक संरचनाएं यहां स्थापित होने की भरपूर आशा है। [3]

हैदराबाद में भी, भारत के कई अन्य शहरों की ही भांति, भू-संपदा व्यापार (रियल एस्टेट) भी खूब पनपा है। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी को धन्यवाद है, जिसके कारण यहां की प्रगति कुछ ही वर्षों में चहुमुखी हो गयी है। शहर में कई बड़े शॉपिंग मॉल भी बने हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग[संपादित करें]

हैदराबाद शहर, अपनी सूचना प्रौद्योगिकी एवं आई टी एनेबल्ड सेवाएं, औषधि, मनोरंजन उद्योग (फिल्म) के लिये प्रसिद्ध है। कई कॉल सेंटर, बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बी पी ओ) कम्पनियां, जो सूचना प्रौद्योगिकी व अन्य तकनीकी सेवाओं से संबंधित हैं, यहां 1990 के दशक में स्थापित की गयीं, जिन्होंने इसे भारत क्के कॉल सेंटर सेटप शहरों में से एक बनाया।

एक उप-शहर भी बसाया गया है- हाईटेक सिटी, जहां कई सू.प्रौ, एवं आई टी ई एस कम्पनियों ने अपने प्रचालन आरम्भ किये। सूचना प्रौ. के इस त्वरित विस्तार की कारण कभी-कभी इस शहर को साइबराबाद भि कहा गया है। साथ ही इसे बंगलौर के बाद द्वितीय साइबर वैली भी कह जाता है। [4] इस शहर में डिजिटल मूलसंरचना में काफी निवेश हुआ है। इस निवेश से कई बड़ी कंपनियों ने अपने परिसर भी बसाये हैं। कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपने केन्द्र शहर में खोले हैं। ऐसे मुख्य केन्द्र माधापुर व गाचीबावली में अधिक हैं।

हैदराबाद विश्व की फॉर्चून 500 कम्पनियों को भी आकर्षित कर यहां निवेश करा चुका है। इंटलेक्ट इंकॉ, की सेमिइंडिया में अच्छी डिल होने के बाद से हैदराबाद एक वैश्विक शहर बन गया है। यहीं पर भारत की प्रथम फैब सिटी, जिसमें सिलिकॉन चिप उत्पादन सुविधा हो, 3 बिलियन डॉलर के ए एम डी-सेमीइंडिया कॉनसॉर्शियम के निवेश से स्थापित हो रही है[5] -->

भू सम्पदा[संपादित करें]

यहां के शहरीकरण, व लोगों के छोटे शहरों को व्यवसाय के लिये छोड़कर यहां बसने से, यहां की जनसंख्या में एक बड़ी वृद्धि हुई है। इसी का परिणाम है ग्रेटर हैदराबाद, जिसमें पड़ोसी गाँव भी शामिल हैं। इनके साथ ही यहां एक मुद्रिका मार्ग, बाहरी मुद्रिका मार्ग, कई सेतु व नीःशुल्क-पथ भी हैं। इस कारण कई बाहरी क्षेत्र अपनी सीमाएं खोते जा रहे हैं, व भू संपदा के भाव ऊंचे उठते जा रहे हैं। साथ ही यहां अनेकों गगन चुंबी अट्टालिकाएं उठतीं जा रहीं हैं।

आवागमन[संपादित करें]

एम एम टी एस नैकलेस रोड मैट्रो स्टेशन

सड़क[संपादित करें]

हैदराबाद शेष भारत से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। मुख्य राजमार्ग हैं:- एन एच 7, एन ए 9 एवं एन एच 202आंध्र प्रदॆश सड़क राज्य परिवन निगम [6] 1932 में निज़ाम राज्य रेल-सड़क यातायात प्रभाग की इकाई के रूप में स्थापित हुआ था, जिसमें आरंभिक 27 बसें थीं, जो अब बढ़कर 19,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यहां एशिया का तीसरा सबसे बड़ा बसों का बेड़ा है। इसमें 72 बस प्लेटफॉर्म हैं, जहां इतनी ही बसें एक ही समय में यात्रियों को चढ़ा सकतीं हैं। इसका आधिकारिक नाम है महत्मा गाँधी बस स्टेशन, जिसे स्थानीय लोग [इमलीवन]] बस स्टेशन कहते हैं। राज्य परिवहन निगम पॉइंट से पॉइंट बस सेवा प्रदान करता है, जो सभी मुख्य नगरों को जोड़ती है। शहर में निगम की 4000 से अधिक बसें दौड़तीं हैं।[7] पीले रंग का ऑटोरिक्शा, जिसे ऑटो कहा जाता है, अधिकतर प्रयुक्त टैसी सेवा है। हाल ही में कार व मोटरसाइकिल टैसी सेवाएं भी आरंभ हुईं हैं।

रेल सेवा[संपादित करें]

यहां लाइट रेल यातायात प्रणाली है, जिसे मल्टी मॉडल टआंस्पोर्ट सिस्टम (एम एम टी एस) कहते हैं। यह रेल व सड़क यातायात को जोड़ता है। दक्षिण पश्चिम रेलवे का मुख्यालय सिकंदराबाद में स्थित है। तीन मुख्य रेलवे स्टेशन हैं:- सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन, हैदराबाद रेलवे स्टेशन (या नामपल्ली) और काचिगुडा रेलवे स्टेशन।

वायु सेवा[संपादित करें]

बेगमपेट हवाई अड्डा अन्तर्देशीय व अन्तर्राजीय विमान सेवा देता है। एक नया विमानक्षेत्र शम्साबाद में बन चुका है। पहले सभी बड़े शहरों की भांति यहां वयु यातायात संकुलन समस्या होती थी, परंतु नया हवाई अड्डा बन जाने से वह दूर हो चुकी है। यहां ट्रैफिक संकुलन की समस्या सड़कों पर बहुत दिखायी देती है। यह ऑटो, कार, इत्यादि की अत्यधिक संख्या के कारण होती है। इससे निबटाने के लिये अनेकों सेतु, फ्लाईओवर निर्माण हुए, परंतु यह वैसी की वैसी बनी हुई है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इससे निबटने के लिये दिल्लीकोलकाता की भांति ही यहां भी मैट्रो ट्रेन शुरु करने की मंजूरी दे दी है। [8] इसके पूर्ण हो जाने पर आशा है, कि यह समस्या काफी हद तक सुलझ जाये गी।

जनसांख्यकी[संपादित करें]

2006 में नगर की जनसंख्या 36 लाख आकलित की गयी थी जबकि बृहत्तर महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या 61 लाख से अधिक आकलित की गयी है। धार्मिक तथा सांस्कृतिक रूप से यह शहर हिन्दू, मुस्लिमईसाइयों से जुड़ा हुआ है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं- तेलुगु, हिन्दी, उर्दूदक्कनी। यहाँ जनजातीय मूल के लोगों की भी खासी जनसंख्या है, जो कि काम की तलाश में यहाँ आव्रजित हुए हैं। यहाँ बनजारे भी मिलते हैं, जो अपनी एक भिन्न संस्कृति व भाषा वाले हैं। उनकी भाषा को Gorboli कहा जाता है, जो यूरोप में रोमा लोगों द्वारा बोली जाने वाली रोमा भाषा से निकट संबंध रखती है। तेलुगु, हिन्दी व दक्कनी मूल जनसंख्या की स्थानीय भाषाएँ हैं। व्यापार में पर्याप्त मात्रा में अंग्रेज़ी भी बोली जाती है। भारत के विभिन्न भागों के लोगों ने हैदराबाद को अपना गृहनगर बनाया है।

संस्कृति[संपादित करें]

हैदराबाद अनेक विभिन्न संस्कृतियों व परंपराओं का मिलन-स्थल है। ऐतिहासिक रूप से यह वह शहर रहा है, जहाँ उत्तर व दक्षिण भारत की भिन्न सांस्कृतिक व भाषिक परंपराएँ मिश्रित होती हैं। अतः यह दक्षिण का द्वार या उत्तर का द्वार कहा जाता है। यहाँ दक्षिण भारतीय संस्कृति के बीच हैदराबाद की मुस्लिम संस्कृति भी अंतर्विष्ट है।

यह एक अनुपम विश्वबन्धु नगर (कॉस्मोपॉलिटन) है, जहाँ ईसाइयत, हिन्दू धर्म, इस्लाम, जैनधर्म व जरथुष्ट्र धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। हैदराबादियों ने अपनी खुद की एक भिन्न संस्कृति विकसित कर ली है, जिसमें प्राचीन तेलुगु लोगों की हिन्दू परंपराओं तथा सदियों पुरानी इस्लामी परंपराओं का मिश्रण है। तेलुगु, उर्दू व हिन्दी यहाँ की प्रमुख भाषाएँ हैं (यद्यपि बाद की दो अपने मानक स्वरूप में नहीं पायी जातीं और दक्कनी बोली की ओर अग्रसर रहती हैं)। यहाँ बोली जाने वाली तेलुगु भाषा में अनेक उर्दू शब्द भी मिल सकते हैं। तथा यहाँ बोली जाने वाली उर्दू भी मराठी व तेलुगु से प्रभावित है, जिससे एक बोली बनी है जिसे हैदराबादी उर्दू या दक्कनी कहा जाता है। यहाँ का प्रसिद्ध उस्मानिया विश्वविद्यालय भारत का पहला उर्दू माध्यम विश्वविद्यालय है। यहाँ की एक बड़ी जनसंख्या अंग्रेजी बोलने में भी कुशल है।

हैदराबाद की लगभग सभी संस्कृतियों की महिलाएँ या तो परंपरागत भारतीय परिधान साड़ी पहनती हैं, या सलवार कमीज़ (विशेषकर युवतर जनसंख्या)। मुस्लिम महिलाओं का एक बड़ा भाग बुरका या हिजाब पहनता है। पुरुष प्रायः आज का सुविधा का परिधान पैंट-शर्ट पहनते हैं, परंतु लुंगी व शर्ट, धोती कुर्ता (दोनों हिन्दू) तथा कुर्ता पाजामा (प्रायः मुस्लिम) भी बहुत पहना जाता है।

हैदराबादी व्यंजन में परंपरागत आंध्र और तेलंगाना व्यंजन पर व्यापक इस्लामी प्रभाव है. हैदराबादी व्यंजनों के यहां कई रेस्त्रां हैं. शहर के सभी होटलों में एक या इससे ज्यादा रेस्त्रां हैं जो लोकप्रिय है. बावर्ची, पाराडाइड, हैदराबाद हाउस हैदराबादी व्यंजनों को उपलब्ध कराने वाले कुछ मशहूर रेस्त्रां हैं.

हैदराबाद का सबसे प्रमुख व्यंजन हैदराबाद बिरयानी है. अन्य व्यंजनों में खुबानी का मिठा, फेनी, पाया और हलीम (रमजान के महीने का प्रमुख मांसाहारी व्यंजन).

भारतीय मिठाई की दुकानें घी की मिठाइयों के लिए मशहूर हैं. पुल्ला रेड्डी मिठाइयां शुद्ध घी की मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है. नामपल्ली का कराची बेकरी फल बिस्कुटों, ओस्मानिया बिस्कुट और दिलखुश के लिए मशहूर हैं. पुराने शहर के अजीज बाग पैलेस में रहने वाला परिवार बादाम की जैली बनाता है.

चित्र:Hydmall.jpg
माल्स हैदराबाद संस्कृति का अहम हिस्सा हैं.

शिक्षा और शोधकार्य[संपादित करें]

आरंभ में हैदराबाद में मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध दो महाविद्यालय थे। लेकिन 1918 में निज़ाम ने उस्मानिया विश्वाविद्यालय की स्थापना की और अब यह भारत के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है। हैदराबाद विश्वविद्यालयों की स्थापना 1974 में हुई। एक कृषि विश्वविद्यालय और कई ग़ैर सरकारी संस्थान, जैसे अमेरिकन स्टडीज़ रिसर्च सेंटर और जर्मन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओरिएंटल रिसर्च भी हैं।

हैदराबाद में सार्वजनिक व निजी सांस्कृतिक संगठन बड़ी संख्या में हैं, जैसे राज्य द्वारा सहायता प्राप्त नाट्य, साहित्य व ललित कला अकादमियाँ। सार्वजनिक सभागृह रबींद्र भारती नृत्य व संगीत महोत्सवों के लिए मंच प्रदान करता है और सालारजंग संग्रहालय में दुर्लभ वस्तुओं का संगृह है, जिनमें संगेयशब, आभूषण, चित्र और फ़र्नीचर शामिल हैं।

क्षेत्रीय केन्द्र[संपादित करें]

हैदराबाद क्षेत्रीय केन्द्र की स्थापना जनवरी, 1987 में की गई थी। दो उत्तरी तटीय ज़िले श्रीकाकुलम और विजयनगरम को छोड़कर यह क्षेत्रीय केन्द्र पूरे आंध्र प्रदेश को समाहित करता है। इस क्षेत्रीय केन्द्र का औपचारिक उद्घाटन इग्नू के संस्थापक वी. सी प्रोफ़ेसर जी. रामा रेड्डी द्वारा 2 फ़रवरी, 1987 को किया गया था। कुछ ही वर्षों में इसने 60 अध्ययन केन्द्रों की स्थापना की और 120 से ज़्यादा कार्यक्रम अध्ययन केन्द्रों में उपलब्ध कराने लगा।[2]

हिन्दी संस्थान[संपादित करें]

हैदराबाद केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में हुई। शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत यह केंद्र स्कूलों/कॉलेजों एवं स्वैच्छिक हिन्दी संस्थाओं के हिन्दी अध्यापकों के लिए 1 से 4 सप्ताह के लघु अवधीय नवीकरण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिसमें हिन्दी अध्यापकों को हिन्दी के वर्तमान परिवेश के अंतर्गत भाषाशिक्षण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान कराया जाता है। वर्तमान में हैदराबाद केंद्र का कार्यक्षेत्र आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र एवं केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी एवं अण्डमान निकोबार द्वीप समूह हैं। हैदराबाद केंद्र पर हिन्दी शिक्षण पारंगत पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाता है।

सालारजंग संग्रहालय

मीडिया[संपादित करें]

सिनेमा[संपादित करें]

हैदराबाद भारत के दूसरे सबसे बड़े चलचित्र उद्योग का गृह भी है:- तेलुगु सिनेमा। यहां प्रतिवर्ष सैंकडों फिल्में बनायीं जातीं हैं। .

खेलकूद[संपादित करें]


हैदराबाद के प्रसिद्ध खिलाड़ी[संपादित करें]

Indoor Stadium

राष्ट्रीय खेल[संपादित करें]

स्टेडियम[संपादित करें]

The earliest stadium built in the city is the Lal Bahadur Shastri Stadium. Formerly known as Fateh Maidan, it was, till recently, the city's only stadium that could conduct International cricket matches. The first cricket match was played here was on November 19, 1955. With the construction of the Rajiv Gandhi International Cricket Stadium at Uppal, it is unlikely that any more cricket matches will be held here.

आकर्षण[संपादित करें]

चार मीनार हैदराबाद के सबसे प्रमुख एवं लोकप्रिय आकर्षणों में से है
एन टी आर बाग
  • चार मीनार – नगर का मुख्य चिन्ह, जिसमें चार भव्य मीनारें हैं।
  • फलकनुमा महल – नवाब विकार-अल-उमरा द्वारा बनवाया हुआ, स्थापत्यकला का अनोख उदाहरण।
  • गोलकुंडा किला – शहर के किनारे स्थित, गोलकुंडा का किला, भारत के प्रसिद्ध व भव्य किलों में से एक है।
  • चौमहला महल- यह आसफ जाही वंश का स्थान था, जहां निज़ाम अपने शाही आगन्तुकों का सत्कार किया करते थे। 1750 में निज़ाम सलाबत जंग ने इसे बनवाया था, जो इस्फहान शहर के शाह महल की तर्ज़ पर बना है। यहां एक महलों का समूह है, जो दरबार हॉल के रूप में प्रयुक्त होते थे।
  • सलारजंग संग्रहालय – यह पुरातन वस्तुओं का एक व्यक्ति संग्रह वाला सबसे बड़ा संग्रहालय है। कई शताब्दियों के संग्रह यहां मिलते हैं।
  • मक्का मस्जिद – यह पत्थर की बनी है, व चारमीनार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह अपने आकार, स्थापत्य एवं निर्माण में अद्वितीय है।
  • बिडला मंदिर (हैदराबाद, आंध्र प्रदेश) – यह हिन्दू मंदिर, नगर में एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है, जहां से नगर का नज़ारा दिखाई देता है, व पूरे नगर से यह दिखाई देता है। यह श्वेत संगमर्मर का बना है।
  • बिडला तारामंडल – नगर के बीच में नौबत पहाड पर स्थित, तारामंडल खगोल विज्ञान को नगर का नमन है।
  • चिलकुर बालाजी – श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित यह मंदिर मेहंदीपटनम से 23 कि.मी. दूर है। इसे वीसा-बालाजी भी कहते हैं, क्योंकि लोगों की यह मान्यता है, कि अमरीकी वीज़ा का इंटरव्यू इनकी कृपा से सकारात्मक परिणाम देता है।
  • नेहरू जैविक उद्यानएशिया का सबसे बड़ा।
  • हुसैन सागर – यह कृत्रिम झील हैदराबाद को सिकंदराबाद से अलग करती है। इसके अंदर, बीच में गौतम बुद्ध की एक 18 मी. ऊंची प्रतिमा स्थापित है। इस द्वीप पर जिस पत्थर पर यह बनी है, उसे स्थानीय लोग जिब्राल्टर का पत्थर कहते हैं।
  • लाद बाजार - यहाँ चूड़ी बाज़ार है, जो चार मीनार के पश्चिम में है।
  • कमल सरोवर - जुबली हिल्स पर स्थित, तालाब के चारों ओर बना एक सुंदर बगीचा है, जिसे एक इतालवी अभिकल्पक द्वारा बनाया हुआ बताया जाता है। यह वर्तमान में हैदराबाद नगरपालिक निगम द्वारा अनुरक्षित है। यह कुछ दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों का घर भी है।
  • पुरानी हवेली - निज़ाम का आधिकारिक निवास।
  • कुतुब शाही मकबरे - कुतुबशाही वंश के शासकों के मकबरे यहैँ स्थित हैं, यह गोलकोंडा किले के निकट Shaikpet में है।
  • पैगाह मकबरा
  • संघी मंदिर - भगवान् वेंकटेश्वर को समर्पित एक मंदिर है।
  • स्नो वर्ल्ड - यह एक मनोरंजन पार्क है, जो कि इस उष्णकटिबंधीय शहर में लोगों बहुत कम तापमान व हिम का अनुभव देता है।
  • वर्गल सरस्वती देवी मंदिर - यह हैदराबाद से 50 किमी. दूरी पर मेडचल महामार्ग पर स्थित मंदिर है। यह एक बड़ी शिला पर स्थित है। इस मार्ग पर आरटीसी बसें उपलब्ध हैं।
  • माधापुर - हैदराबाद के अनेक सूचना-प्रौद्योगिकी तथा सूचना-प्रौद्योगिकी-समर्थीकृत-सेवाओं संबधित कार्यालयों का स्थान।
  • रामोजी फिल्म सिटी संसार का सबसे बड़ा समाकलित फ़िल्म स्टूडियो सम्मिश्र है जो लगभग 2000 एकड़ में फैला है। यह एशिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन एवं मनोरंजन केंद्रों में से एक है। 1996 में उद्घाटित। यह हैदराबाद से 25 किमी. दूर विजयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-9) पर स्थित है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. International Telugu Institute (तेलुगु: Antarjātīya Telugu Saṃstha). Telugu Vāṇi. pp. 12. 
  2. "GHMC comes into existence". The Hindu. http://www.hindu.com/2007/04/17/stories/2007041719080100.htm. अभिगमन तिथि: 2007-04-17. 
  3. "The Genome Valley, Hyderabad". http://www.iciciknowledgepark.com/icicikp/iciciinnerfiles/genomevalley.htm. अभिगमन तिथि: 2006-03-06. 
  4. "Report on IT exports of India". http://finance.indiainfo.com/news/2005/05/11/1105it-exports.html. अभिगमन तिथि: 2006-03-05. 
  5. "Foundation Laid for Fab City". Cyberabad Times. http://www.cyberabadtimes.net/2006/06/fab-city-foundation-day-070606.asp. अभिगमन तिथि: 2006-03-05. 
  6. APSRTC official web site "APSRTC". http://apsrtc.gov.in APSRTC official web site. अभिगमन तिथि: 2006-08-29. 
  7. Information about APSRTC "AP State Road Transport Corporation". http://www.aponline.gov.in/apportal/departments/departments.asp?dep=30&org=199&category=about Information about APSRTC. अभिगमन तिथि: 2006-08-29. 
  8. "Hyderabad Growth Corridor - Outer ring road". http://www.ourmch.com/. अभिगमन तिथि: 2006-08-29.