साड़ी
साड़ी (कुछ इलाकों में सारी कहा जाता है) भारतीय औरत का मुख्य परिधान है। यह शायद विश्व की सबसे लंबी और पुराने परिधानों में से गिना जाता है। यह लगभग 5 से 6 यार्ड लम्बी बिना सिली हुए कपड़े का टुकड़ा होता है जो ब्लाउज या चोली और साया के उपर लपेटकर पहना जाता है।
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तरह तरह की साड़ियाँ [संपादित करें]
साड़ी पहनने के कई तरीक़े होते हैं जो भौगोलिक स्थिति और पारंपरिक मूल्यों और रुचियों पर निर्भर करता है। अलग-अलग शैली की साड़ियों में कांजीवरम साड़ी, बनारसी साड़ी, पटोला साड़ी और हकोबा मुख्य हैं। मध्य प्रदेश की चंदेरी, महेश्वरी, मधुबनी छपाई, असम की मूंगा रशम, उड़ीसा की बोमकई, राजस्थान की बंधेज, गुजरात की गठोडा, पटौला, बिहार की तसर, काथा, छत्तीसगढ़ी कोसा रशम, दिल्ली की रशमी साड़ियां, झारखंडी कोसा रशम, महाराष्ट्र की पैथानी, तमिलनाडु की कांजीवरम, बनारसी साड़ियां, उत्तर प्रदेश की तांची, जामदानी, जामवर एवं पश्चिम बंगाल की बालूछरी एवं कांथा टंगैल आदि प्रसिद्ध साड़ियाँ हैं।
उदभव और इतिहास [संपादित करें]
यह भी देखें [संपादित करें]
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
सारी कड़ियाँ अँग्रेजी में हैं:-
- साड़ी
- साड़ी का इतिहास
- साड़ी पहनने के 18 तरीक़े
- साड़ी खरीददारी
- पारंपरिक भारतीय तरीका
- साड़ी पहनने के दिशा निर्देश
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