नागार्जुन सागर परियोजना

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नागार्जुन सागर परियोजना के अन्तर्गत बना बांध

यह भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना हैं। नागार्जुन सागर बाँध परियोजना इस बाँध को बनाने की परिकल्पना १९०३ में ब्रिटिश राज के समय की गयी थी। १० दिसम्बर १९५५ में इस बाँध की नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। उन्होने उस समय यह कहा था।

"When I lay the foundation stone here of this Nagarjunasagar, to me it is a sacred ceremony". "This is the foundation of the temple of humanity of India, i.e. symbol of the new temples that we are building all over India". नागार्जुन बाँध हैदराबाद से 150 किमी दूर, कृष्णा नदी पर स्थित है। इसका निर्माण १९६६ में पूरा हुआ था। ४ अगस्त १९६७ में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा इसकी दोनों नहरों में पहली बार पानी छोड़ा गया था।

यह भारत का सब से उँचा और लंबा बाँध है। इस बाँध से निर्मित नागार्जुन सागर झील दुनिया की तीसरी सब से बड़ी मानव निर्मित झील है। [यह जानकारी अल्पना वर्मा द्वारा जोड़ी गयी है।]

नदी[संपादित करें]

कृष्णा नदी पर स्थित है।

स्थान[संपादित करें]

गुंटूर, आंध्र प्रदेश, भारत

उद्देश्य[संपादित करें]

मुख्यत गुंटूर के किसानो को लाभ मिलता है। पहली unit १९७८ में और ८वि unit १९८५ में लगाई गयी थी। -नालगोंडा क्षेत्र को पीने का पानी भी इसी बांध से मिलता है। -दाहिनी मुख्य नहर का नाम-- जवाहर नहर है। -बायीं मुख्य नहर का नाम लाल बहादुर नहर है।

नागार्जुन बाँध बनाते समय हुई खुदाई में नागार्जुनकोंडा में तीसरी सदी के बोध के अवशेष मिले हैं। यहाँ खुदाई के दौरान महा चैत्या स्तूप के भी अवशेष प्राप्त हुए.यहाँ कभी विहार, बोद्ध मोनेस्ट्री और एक विश्व विद्धयालय हुआ करता था।

लाभान्वित होने वाले राज्य[संपादित करें]

आंध्र प्रदेश

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]