कोच्चि

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कोच्चि
अरब सागर की रानी
—  city  —
एर्नाकुलम, वेम्बानाड झील से दॄश्य
एर्नाकुलम, वेम्बानाड झील से दॄश्य
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य केरल
ज़िला एर्नाकुलम
पहापौर मर्सी विलियम्स
उप महापौर सी. के. मणिशंकर
जनसंख्या
घनत्व
महानगर
5,96,473[1] (2001 के अनुसार )
• 6,250 /किमी2 (16,187 /वर्ग मील)
• 14,63,000[2] (2005 के अनुसार )
लिंगानुपात 1.017 /
साक्षरता 94.3%%
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
समुद्रतट
94.88 कि.मी² (37 वर्ग मील)
• 0 मीटर (0 फी॰)
• 48 km (30 मील)
मौसम
वर्षा
Am (कॉपेन)
     2,743 mm (108 in)
आधिकारिक जालस्थल: www.corporationofcochin.org

Erioll world.svgनिर्देशांक: 9°58′37″N 76°16′12″E / 9.977°N 76.27°E / 9.977; 76.27 कोचीन या कोच्चि केरल प्रान्त का एक तटीय शहर है। कोच्चि भारत का एक प्रमुख पत्तन है। इसे अरब सागर की राणी माना जाता हैं । केरल की सबसे बडी शहर ओर वाणिज्य की केन्द्र हैं।केरल के तटवर्ती शहर कोच्चि को अरब सागर की रानी कहा जाता है। केरल का यह शहर औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों का केन्द्र है। कोच्चि में पुर्तगाली, यहूदी, ब्रिटिश, फ्रेंच, डच और चाइनीज संस्कृति का मिला जुला रूप देखने को मिलता है। पुर्तगालियों के आगमन से पूर्व कोच्चि का इतिहास स्पष्ट नहीं है।

पुर्तगालियों का आना कोच्चि के इतिहास में अहम पड़ाव साबित हुआ। कोच्चि के राजाओं ने इन विदेशियों का स्वागत किया क्योंकि उन्हें कालीकट के जमोरिन की शत्रुता के कारण एक शक्तिशाली सहयोगी की तलाश थी। यहूदियों ने भी केशव राम वर्मा के शासनकाल में राजकीय संरक्षण प्राप्त किया। ये यहूदी मूल रूप से कोदनगलूर से व्यापार के उद्देश्य से आए थे। 17वीं शताब्दी में कोच्चि का बंदरगाह डच के अधीन हो गया था। आगे चलकर 1795 में कोच्चि पर अंग्रेजों ने अधिकार जमा लिया था जो भारत के आजादी के साथ ही मुक्‍त हुआ।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

डच महल[संपादित करें]

यह महल मूल रूप से पुर्तगालियों द्वारा बनवाया गया और कोचीन के राजा वीर केरला वर्मा को भेंट किया गया था। बाद में डच का इस पर अधिकार हो गया। उन्होंने 1663 में किले की मरम्मत कराई और किले को नया रूप दिया। इस किले में कोचीन के कई राजाओं का राज्याभिषेक हुआ था। इस किले में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों से संबंधित पेंटिंग्‍स बनी हुई है।महाल

बोलघट्टी महल[संपादित करें]

इस महल को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। डच लोगों द्वारा बनवाया गया यह महल बोलघट्टी द्वीप पर स्थित है। इस महल को अब एक लक्जरी होटल में तब्दील कर दिया गया है। बोलघट्टी में एक गोल्फ कोर्स भी है। यहां पर लोग पिकनिक मनाने भी आते है।

हिल महल[संपादित करें]

19वीं शताब्दी में कोच्चि के राजा द्वारा यह महल बनवाया गया था। अब इसे केरला पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है। संग्रहालय में चित्रकारी, नक्काशी और राजकीय वंश से संबंधित वस्तुओं को रखा गया हैं।

बेशन बंगला[संपादित करें]

इन्डो-युरोपियन शैली में बना यह बंगला 1667 ई. में बनवाया गया था। डच किले के स्ट्रोमबर्ग बेशन में स्थित होने के कारण इसका नाम बेशन बंगला पड़ा। इसकी छत में टाइलें लगी हुईं हैं और बरांमदा लकड़ी का बना हुआ है।

मरीन ड्राइव[संपादित करें]

कोच्चि के समुद्र तट के किनारे बना यह सड़क पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी बहुत भाता है। यहां से समुद्र का नजारा बेहद आकर्षक लगता है। 140 मीटर लंबे इस सड़क को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया गया है। रेड कारपेट अल्ट्रा टाइल से बनी इस सड़क को शानमुगम रोड के नाम से भी जाना जाता है। मरीन ड्राइव के आसपास का इलाका बेहद खूबसूरत है। यहां हमेशा फिल्‍म की शुटिंग भी होती रहती है।

चेराई बीच[संपादित करें]

कोच्चि से 25 किमी दूर चेराई बीच की सुंदरता देखते ही बनती है। नारियल और खजूर के पेड़ों के अलावा पारंपरिक केरला के मकान इस बीच की खूबसूरती में चार चांद लगाते है। यहां डोल्फिन मछलियों को देखा जा सकता है।

सेन्ट फ्रान्सिस चर्च[संपादित करें]

1503 ई. में बना यह चर्च भारत का सबसे पुराना यूरोपियन चर्च है। प्रोटेस्टेंट डच द्वारा इसे 1779 में पुन:स्थापित किया गया। 1795 में अंग्रेजों ने इसे एंजलिकन चर्च में तब्दील कर दिया। कहा जाता है कि वास्को डि गामा को इस चर्च में दफनाया गया था। बाद में उसके अवशेष को पुर्तगाल ले जाया गया था।

ऐतिहासिक संग्रहालय[संपादित करें]

इडापल्ली में स्थित इस संग्रहालय में केरल के इतिहास को मूर्ति के माध्यम से दर्शाया गया है। संग्रहालय के बाहर परशुराम की प्रतिमा है। उसे देखकर लगता है जैसे वह आगंतुकों का अभिनंदन कर रही हो। कहा जाता है कि परशुराम ने ही केरल की स्थापना की थी।

पल्लिपुरम किला[संपादित करें]

यह किला यूरोपियन की प्राचीनतम स्मारकों में एक है। इसे 1503 में पुर्तगालियों ने बनवाया था। डच ने 1661 में इस किले पर अधिकार कर लिया और त्रावनकोर के राज्य को 1789 में बेच दिया था।

परीक्षित थंपुरम संग्रहालय[संपादित करें]

इस संग्रहालय में 19वीं शताब्दी की पेंटिंग, प्राचीन मुद्राएं, पत्थरों की मूर्तियां, पेंटिंग की प्रतिलिपियां, प्लास्टर ऑफ पेरिस आदि को रखा गया है। कोचीन के शाही परिवारों से जुड़ी अनेक वस्तुएं भी आपको यहां देखने को मिल जाएगीं।

कांजिरामट्टम मस्जिद[संपादित करें]

कोच्चि से 30 किमी की दूरी पर यह पवित्र मस्जिद स्थित है। कहा जाता है कि मुस्लिम संत शेख फरीद की कब्रगाह पर इसका निर्माण हुआ है। जनवरी में यहां चंदनाकूदम पर्व आयोजित किया जाता है।

कलादी[संपादित करें]

यह स्थान आठवीं शताब्दी के महान भारतीय दार्शनिक आदि‍ शंकराचार्य की जन्मभूमि है। शंकराचार्य की याद में यहां दो मंदिर बनाए गए हैं। एक मंदिर दक्षिणामूर्ति और दूसरा देवी शारदा को समर्पित है।

गम्यता[संपादित करें]

वायुमार्ग-

कोचीन का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत के प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ा हुआ है। इंडियन एयरवेज और जेट एयरवेज की फ्लाइट से कोच्चि पहुंचा जा सकता है।

रेलमार्ग-

एरनाकुलम में दो रेलवे स्टेशन हैं। एक उत्तर और दूसरा दक्षिण में। यहां से कोच्चि जाने के लिए बस या टैक्सी की सेवाएं ली जा सकती हैं। एरनाकुलम भारत के अनेक शहरों से रेलगाड़ियों के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग-

कोच्चि सड़क मार्ग से अनेक पर्यटन केन्द्रों और शहरों से जुड़ा हुआ है। बैंगलोर से कोच्चि की दूरी 565 किमी, कोयंबटूर से 223 किमी, गोवा से 848 किमी, मद्रास से 694 किमी और मैसूर से 470 किमी है। राज्य परिवहन निगम की बसें कोच्चि के लिए नियमित रूप से चलती हैं।

प्रसिद्ध वस्तुएं[संपादित करें]

कोच्चि और उसके आसपास के क्षेत्रों से अनेक यादगार और लोकप्रिय वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। मट्टनचेरी, जिव स्ट्रीट और एम जी रोड़ खरीददारी के लिए प्रसिद्ध हैं। मट्टनचेरी से मसाले, चाय, काफी और स्मारिकाएं खरीदी जा सकती हैं। इसके साथ ही मुखोटे, पीतल की आकृतियां और लकड़ियों से बने श्रृंगार के बक्से खरीदे जा सकते हैं। यहां से प्राचीन काल के बर्तन भी खरीदे जा सकते हैं। मालाबार में मसालों की दुकानों से ताजे मसालों की खरीददारी की जा सकती है।

भ्रमण समय[संपादित करें]

सितंबर से मई की अवधि कोच्चि के पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Ma Huan: Ying Yai Sheng Lan, The Overall Survey of the Ocean's Shores, translated by J.V.G. Mills, 1970 Hakluyt Society, reprint 1997 White Lotus Press. ISBN 974-8496-78-3
  • Plunkett, R, Cannon, T, Davis, P, Greenway, P & Harding, P (2001), Lonely Planet South India, Lonely Planet, ISBN 1-86450-161-8
  • Manorama Yearbook 2003 (English Edition) ISBN 81-900461-8-7
  • Robert Charles Bristow - Cochin Saga, Paico Pub. House; [2d ed.] edition (1967), OCLC 1659055
  • Unemployment in Kerala at the turn of the century Insights from the CDS gulf migration studies - K. C. Zachariah, S. Irudaya Rajan
  • Kochi Rajyacharithram by KP Padmanabha Menon. P(1914)
  • Akhilavijnanakosam Malayalam Encyclopedia — D C Books Multimedia Series.

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]


  1. "Census India - Kerala, p.11". http://www.censusindia.gov.in/. 
  2. United Nations World Urbanization Prospects