सानिया मिर्ज़ा

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सानिया मिर्ज़ा
Sania Mirza.jpg
देश Flag of India.svg भारत
निवास भारत का ध्वज हैदराबाद
जन्म 15 नवम्बर 1985 (1985-11-15) (आयु 28)
जन्म स्थान भारत का ध्वज india r
कद {{{height}}}
वज़न {{{weight}}}
व्यवसायिक बना {{{turnedpro}}}
सन्यास लिया N/A
खेल शैली दायें हाथ से; दोनों हाथों से बैकहैंड
व्यवसायिक पुरस्कार राशि US$930,868
एकल
कैरियर रिकार्ड: 169-76
कैरियर उपाधियाँ: 1
सर्वोच्च वरीयता: No. 26 (30 अगस्त, 2007)
ग्रैंड स्लैम परिणाम
ऑस्ट्रेलियाई ओपन 3r (2005), 2r (2007)
फ़्रेंच ओपन 2r (2007
विम्बलडन 2r (2005)
अमरीकी ओपन 4r (2005)
युगल
कैरियर रिकार्ड: 108-53
कैरियर उपाधियाँ: 7
सर्वोच्च वरीयता: No. 18 (27 अगस्त, 2007)

ज्ञानसंदूक आखिरी बार बदला गया: 30 जुलाई, 2007.

पदक रिकार्ड
महिला टेनिस
एशियाई खेल
स्वर्ण 2006 दोहा मिश्रित युगल
रजत 2006 दोहा एकल
रजत 2006 दोहा टीम

सानिया (जन्म: 15 नवंबर 1986) भारत की एक टेनिस खिलाड़ी हैं। सानिया मिर्जा का जन्म मुम्बई मे हुआ। उनके करिअर का सर्वश्रेष्ठ स्थान विश्व मे २९ है।

सानिया के पिता इमरान मिर्ज़ा एक खेल संवाददाता थे। कुछ समय के बाद उन्हें हैदराबाद जाना पडा जहां एक पारंपरिक शिया खानदान के रुप सानिया का बचपन गुजरा। निज़ाम क्लब हैदराबाद में सानिया ने छ्ह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरु किया था। महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस प्लेयर सीके भूपति से सानिया ने अपनी शुरुआती कोचिंग ली।

उनके पिता के पास इतने पैसे नही थे जो वह सानिया को प्रोफेशनल ट्रेनिंग करवा सकें। इसके लिए उन्होंने कुछ बड़े व्यापारिक समुदायों से स्पॉंशरशिप ली। जीवेके इंड्रस्ट्रीज और एडीडास ने सानिया मिर्ज़ा को 12 साल से ही स्पॉंशर करना शुरु कर दिया। उसके बाद उनके पिता ने उनकी ट्रेनिंग का जिम्मा ले लिया।

अपने कॅरियर की शुरुआत उन्होंने 1999 में विश्व जूनियर टेनिस चैम्पियनशिप में हिस्सा लेकर किया। इसके बाद उन्होंने कई अंतररार्ष्ट्रीय मैचों में हिस्सा लिया और सफलता भी पाई। 2003 उनके जीवन का सबसे रोचक मोड़ बना जब भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद सानिया मिर्ज़ा ने विम्बलडन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की।

वर्ष 2004 में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2005 के अंत में उनकी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 42 हो चुकी थी जो किसी भी भारतीय टेनिस खिलाड़ी के लिए सबसे ज्यादा थी। 2009 में वह भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं।