अयोध्या

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अयोध्या
—  शहर  —
View of अयोध्या, India
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला फैजाबाद
जनसंख्या
घनत्व
75,000 (200१ के अनुसार )
• ९
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
10.24 km² (4 sq mi)
• ९३ मीटर

Erioll world.svgनिर्देशांक: 26°48′N 82°12′E / 26.8, 82.2 अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है। यह फैजाबाद जिला के अन्तर्गत आता है। यह सरयू नदी (घाघरा नदी) के दाएं तट पर बसा है। प्राचीन काल में इसे 'कौशल देश' कहा जाता था। अयोध्या हिन्दुओं का प्राचीन और सात पवित्र तीर्थस्थलों में एक है।

इतिहास[संपादित करें]

भारत के प्राचीन नगर एवं स्थान

अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। कई शताब्दियों तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। यहां आज भी हिन्दू, बौद्ध, इस्लाम और जैन धर्म से जुड़े अवशेष देखे जा सकते हैं। जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित पांच तीर्थंकरों का जन्म हुआ था।

इसका महत्व इसके प्राचीन इतिहास में ही निहित है क्योंकि भारत के प्रसिद्ध एवं प्रतापी क्षत्रियों (सूर्यवंशी) की राजधानी यही नगर रहा है। उक्त क्षत्रियों में दाशरथी रामचंद्र अवतार के रूप में पूजे जाते हैं। पहले यह कोसल जनपद की राजधानी था। प्राचीन उल्लेखों के अनुसार तब इसका क्षेत्रफल 96 वर्ग मील था। यहाँ पर सातवीं शाताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहाँ 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3,000 भिक्षु रहते थे।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

इस प्राचीन नगर के अवशेष अब खंडहर के रूप में रह गए हैं जिसमें कहीं कहीं कुछ अच्छे मंदिर भी हैं। वर्तमान अयोघ्या के प्राचीन मंदिरों में सीतारसोई तथा हनुमानगढ़ी मुख्य हैं। कुछ मंदिर 18वीं तथा 19वीं शताब्दी में बने जिनमें कनकभवन, नागेश्वरनाथ तथा दर्शनसिंह मंदिर दर्शनीय हैं। कुछ जैन मंदिर भी हैं। यहाँ पर वर्ष में तीन मेले लगते हैं - मार्च-अप्रैल, जुलाई-अगस्त तथा अक्टूबर-नंवबर के महीनों में। इन अवसरों पर यहाँ लाखों यात्री आते हैं। अब यह एक तीर्थस्थान के रूप में ही रह गया है।

रामकोट[संपादित करें]

शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित रामकोट अयोध्या में पूजा का प्रमुख स्थान है। यहां भारत और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का साल भर आना जाना लगा रहता है। मार्च-अप्रैल में मनाया जाने वाला रामनवमी पर्व यहां बड़े जोश और धूमधाम से मनाया जाता है।

त्रेता के ठाकुर[संपादित करें]

यह मंदिर उस स्थान पर बना है जहां भगवान राम ने अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया था। लगभग 300 साल पहले कुल्लू के राजा ने यहां एक नया मंदिर बनवाया। इस मंदिर में इंदौर के अहिल्याबाई होल्कर ने 1784 में और सुधार किया। उसी समय मंदिर से सटे हुए घाट भी बनवाए गए। कालेराम का मंदिर नाम से लोकप्रिय नये मंदिर में जो काले बलुआ पत्थर की प्रतिमा स्थापित है वह सरयू नदी से हासिल की गई थी।

हनुमान गढ़ी[संपादित करें]

नगर के केन्द्र में स्थित इस मंदिर में 76 कदमों की चाल से पहुँचा जा सकता है। कहा जाता है कि हनुमान यहाँ एक गुफा में रहते थे और रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे। मुख्य मंदिर में बाल हनुमान के साथ अंजनि की प्रतिमा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में आने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नागेश्वर नाथ मंदिर[संपादित करें]

कहा जाता है कि नागेश्वर नाथ मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था। माना जाता है जब कुश सरयू नदी में नहा रहे थे तो उनका बाजूबंद खो गया था। बाजूबंद एक नाग कन्या को मिला जिसे कुश से प्रेम हो गया। वह शिवभक्त थी। कुश ने उसके लिए यह मंदिर बनवाया। कहा जाता है कि यही एकमात्र मंदिर है जो विक्रमादित्य के काल के यहां बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

कनक भवन[संपादित करें]

हनुमान गढ़ी के निकट स्थित कनक भवन अयोध्या का एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर सीता और राम के सोने मुकुट पहने प्रतिमाओं के लिए लोकप्रिय है। इसी कारण बहुत बार इस मंदिर को सोने का घर भी कहा जाता है। यह मंदिर टीकमगढ़ की रानी ने 1891 में बनवाया था। इस मन्दिर के श्री विग्रह (श्री सीताराम जी) भारत के सुन्दरतम स्वरूप कहे जा सकते है। यहाँ नित्य दर्शन के अलावा सभी समैया-उत्सव भव्यता के साथ मनाये जाते हैं।

आचार्यपीठ श्री लक्ष्मण किला[संपादित करें]

महान संत स्वामी श्री युगलानन्यशरण जी महाराज की तपस्थली यह स्थान देश भर में रसिकोपासना के आचार्यपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। श्री स्वामी जी चिरान्द(छपरा) निवासी स्वामी श्री युगलप्रिया शरण 'जीवाराम' जी महाराज के शिष्य थे । ईस्वी सन् १८१८ में ईशराम पुर (नालन्दा) में जन्मे स्वामी युगलानन्यशरण जी का रामानन्दीय वैष्णव-समाज में विशिष्ट स्थान है।

आपने उच्चतर साधनात्मक जीवन जीने के साथ ही आपने 'रघुवर गुण दर्पण','पारस-भाग','श्री सीतारामनामप्रताप-प्रकाश' तथा 'इश्क-कान्ति' आदि लगभग सौ ग्रन्थों की रचना की है। श्री लक्ष्मण किला आपकी तपस्या से अभिभूत रीवां राज्य (म.प्र.) द्वारा निर्मित कराया गया। ५२ बीघे में विस्तृत आश्रम की भूमि आपको ब्रिटिश काल में शासन से दान-स्वरूप मिली थी। श्री सरयू के तट पर स्थित यह आश्रम श्री सीताराम जी आराधना के साथ संत-गो-ब्राह्मण सेवा संचालित करता है। श्री राम नवमी , सावन झूला ,तथा श्रीराम विवाह महोत्सव यहाँ बड़ी भव्यता के साथ मनाये जाते हैं। यह स्थान तीर्थ-यात्रियों के ठहरने का उत्तम विकल्प है। सरयू की धार से सटा होने के कारण यहाँ सूर्यास्त दर्शन आकर्षण का केंद्र होता है।

जैन मंदिर[संपादित करें]

हिन्दुओं के मंदिरों के अलावा अयोध्या जैन मंदिरों के लिए भी खासा लोकप्रिय है। जैन धर्म के अनेक अनुयायी नियमित रूप से अयोध्या आते रहते हैं। अयोध्या को पांच जैन र्तीथकरों की जन्मभूमि भी कहा जाता है। जहां जिस र्तीथकर का जन्म हुआ था, वहीं उस र्तीथकर का मंदिर बना हुआ है। इन मंदिरों को फैजाबाद के नवाब के खजांची केसरी सिंह ने बनवाया था।

बाबरी मसजिद बनाम राम मंदिर[संपादित करें]

अयोध्या पिछले कुछ वर्षों से वहां के एक विवादास्पद ढांचे को लेकर विवाद का केंद्र था जिसके बारे में कई लोगों की यह राय थी कि वह 'राम मंदिर' है, जबकि कुछ लोग इसे 'बाबरी मस्ज़िद' कहते थे। 1992 को इस बाबरी मसजिद को हिंदूवादी संगठनों ने ढ़ाह दिया, जिसके बाद से उस स्थल को लेकर विवाद और गहरा गया था। दिनाँक 30/09/2010 को लखनऊ उच्च न्यायलय ने फैसला दिया। इस फैसले में उच्च न्यायालय ने यह जमीन तीन भागों में राममंदिर न्यास, निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांटने का आदेश दिया लेकिन किसी भी पक्ष को ये फैसला पसंद नहीं आया और सुन्नी वक्फ बोर्ड व हाशिम अंसारी ने इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी तथा बाद में राममंदिर न्यास, निर्मोही अखाड़े ने भी उच्चतम न्यायालय में अपील की। ये मामला अब उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।

गम्यता[संपादित करें]

वायु मार्ग-

अयोध्या का निकटतम एयरपोर्ट लखनऊ में है जो लगभग 140 किमी. की दूरी पर है। यह एयरपोर्ट देश के प्रमुख शहरों से विभिन्न फ्लाइटों के माध्यम से जुड़ा है।

रेल मार्ग-

फैजाबाद अयोध्या का निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन मुगल सराय-लखनऊ लाइन पर स्थित है। उत्तर प्रदेश और देश के लगभग तमाम शहरों से यहां पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग-

उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम की बसें लगभग सभी प्रमुख शहरों से अयोध्या के लिए चलती हैं। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग से अयोध्या जुड़ा हुआ है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Legge, James (1886): A Record of Buddhistic Kingdoms: Being an account by the Chinese Monk Fa-Hien of his travels in India and Ceylon (A.D. 399-414) in search of the Buddhist Books of Discipline. Oxford, Clarendon Press. Reprint: New York, Paragon Book Reprint Corp. 1965.
  • Thomas, F. W. (1944): “Sandanes, Nahapāna, Caṣṭana and Kaniṣka : Tung-li P’an-ch’i and Chinese Turkestan.” New Indian Antiquary VII. 1944, p. 90.
  • Watters, Thomas (1904-1905): On Yuan Chwang’s Travels in India. Thomas Watters. London. Royal Asiatic Society. Reprint: Delhi. Mushiram Manoharlal. 1973.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]