जौनपुर
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| जौनपुर जिला jaunpur جون پور ضلع |
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|---|---|
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उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले की अवस्थिति |
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| राज्य | उत्तर प्रदेश, |
| प्रशासनिक प्रभाग | वाराणसी |
| मुख्यालय | जौनपुर, उत्तर प्रदेश |
| जनसंख्या | ४,४७६,०७२ (२०११) |
| शहरी जनसंख्या | ३३३,६४९ |
| साक्षरता | ७३.६६% |
| लिंगानुपात | १०१८ |
| तहसील | शाहगंज, बदलापुर, मछली शहर,जौनपुर , मडियाहू और केराकत |
| लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र | जौनपुर, मछली शहर |
| औसत वार्षिक वर्षण | ९८७ मिमी |
| आधिकारिक जालस्थल | |
जौनपुर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। मध्यकाल में शर्की शासकों की राजधानी रहा जौनपुर वाराणसी से 58 किमी. दूर है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] भूगोल
जौनपुर जिला वाराणसी प्रभाग के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित है।इसकी भूमिक्षेत्र २४.२४०N से २६.१२०N अक्षांश और ८२.७०E और ८३.५०E देशांतर के बीच फैली हुई है।गोमती और सई मुख्य पैतृक नदियों हैं। इनके अलावा, वरुण,पिली और मयुर आदि छोटी नदिया हैं।मिट्टी मुख्य रूप से रेतीले, चिकनी बलुई हैं। जौनपुर अक्सर बाढ़ की आपदा से प्रभावित रहता है।जौनपुर जिले मे खनिजों की कमी है।जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल ४०३८ किमी२ है।
[संपादित करें] जनसंख्या
जौनपुर जिला की वास्तविक जनसंख्या ४,४७६,०७२(भारतीय जनगणना २०११) है । जिनमे २,२१७,६३५ पुस्र्ष तथा २,२५८,४३७ महिलाए है ।
| २०११ | २००१ | |
|---|---|---|
| वास्तविक जनसंख्या | ४,४७६,०७२ | ३,९११,६७९ |
| नर | २,२१७,६३५ | १,९४१,९०३ |
| महिला | २,२५८,४३७ | १,९६९,७७६ |
| जनसंख्या वृद्धि | १४.४३% | २१.६८% |
| क्षेत्र Sq. किलोमीटर | ४,०३८ | ४,०३८ |
| घनत्व/किमी२ | १,१०८ | ९६९ |
| उत्तर प्रदेश जनसंख्या अनुपात | २.२४% | २.३५% |
| लिंग अनुपात (1000 से प्रति) | १०१८ | १०१४ |
| बाल लिंग अनुपात (0-6 आयु) | ९३० | ९३० |
| औसत साक्षरता | ७३.६६% | ५९.८४% |
| पुरुष साक्षरता | ८६.०६% | ७६.१८% |
| महिला साक्षरता | ६१.७०% | ४४.०७% |
| कुल बाल जनसंख्या (0-6 आयु) | ६४३,०२० | ७८३,७७१ |
| पुरुष जनसंख्या (0-6 आयु) | ३३५,६४३ | ४०६,०८४ |
| महिला जनसंख्या (0-6 आयु) | ३०७,३७७ | ३७७,६८७ |
| साक्षर | २,८२३,५२८ | १,८७१,६७४ |
| पुरुष साक्षर | १,६१९,६५७ | १,१७०,०२२ |
| महिला साक्षर | १,२०३,८७१ | ७०१,६५२ |
[संपादित करें] इतिहास
इस शहर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फिरोज तुगलक ने अपने चचेरे भाई सुल्तान मुहम्मद की याद में की थी। सुल्तान मुहम्मद का वास्तविक नाम जौना खां था। इसी कारण इस शहर का नाम जौनपुर रखा गया। 1394 के आसपास मलिक सरवर ने जौनपुर को शर्की साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। शर्की शासक कला प्रेमी थे। उनके काल में यहां अनेक मकबरों, मस्जिदों और मदरसों का निर्माण किया गया। यह शहर मुस्लिम संस्कृति और शिक्षा के केन्द्र के रूप में भी जाना जाता है। यहां की अनेक खूबसूरत इमारतें अपने अतीत की कहानियां कहती प्रतीत होती हैं। वर्तमान में यह शहर चमेली के तेल, तम्बाकू की पत्तियों, इमरती और स्वीटमीट के लिए लिए प्रसिद्ध है।
[संपादित करें] प्रशासनिक प्रभाग
जौनपुर जिला मे ६ तहसिल है - शाहगंज, बदलापुर, मछलीशहर, जौनपुर, मडियाहु और केराकत, ३ लोकसभा सीट(एक जौनपुर जिले में पूरी तरह से है, जबकि अन्य दो मछलीशहर और सईदपुर जिले के कवर हिस्सा है)।१० विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र है। जिले को २१ विकास खंड में विभाजित किया गया है-सोंधी(शाहगंज), सुइथाकला, खुटहन, कारंजाकला, बदलापुर, महाराजगंज, सुजानगंज, बक्शा, मुंगरा बादशाहपुर, मछलीशहर, मडियाहूँ, बरसठी, रामपुर, रामनगर, जलालपुर, केराकत, डोभी, मुफ्तीगंज, धर्मापुर, सिकरारा और सिरकोनी । इसके अलावा जिले को 27 थानाओ में बांटा गया है।-कोतवाली, सदर, लाइन बाजार, जाफराबाद, खेतासराय, शाहगंज, सर्पताहन, केराकत, चंदवक, जलालपुर, सरायख्वाजा, गौर बादशाहपुर, बदलापुर, खुटहन, सिंग्रमाऊ, बक्शा, सुजानगंज, महाराजगंज, मुंगरा बादशाहपुर, पवारा, मछलीशहर, मीरगंज, सिकरारा, मडियाहूँ , रामपुर, बरसठी, नेवाधिया और सुरेरी। र्==अर्थव्यवस्था== जिले का आर्थिक विकास मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। इस का मुख्य कारण जिले में भारी उद्योग का अभाव है । कई उद्योग वाराणसी-जौनपुर राजमार्ग के साथ आ रहे हैं । एक कपास मिल कारंजाकला के निकट काम कर रही है । सतहरिया में भी एम/एस राजा का मैदा मिल है ।, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स, होव्किंस कुकर लिमिटेड, अमित ऑयल एंड वेगेताब्ल्ले, चौधराना स्टील ltd,सुर्या एल्यूमीनियम की तरह ८५ औद्योगिक इकाइयों चल रहे हैं । जौनपुर जिला मे एक पशुपालन डेयरी की स्थापना की गयी है । जौनपुर जिला की जनसंख्या के तीन चौथाई कृषि पर निर्भर है। by sandeep kumar "jaunpuri"
[संपादित करें] मुख्य आकर्षण
===अटाला मस्जिद===satsangptk--45-
अटाला मस्जिद का निर्माण कार्य १३७७ में शुरू हुआ था जो १४०८ में जाकर इब्राहिम शर्की के शासनकाल में पूरा हुआ। यह मस्जिद शर्की वास्तुशिल्प के प्रारंभिक और सबसे बेहतरीन उदाहरणों में एक है। मस्जिद की सबसे प्रमुख विशेषता इसके अग्रभाग में उठा हुआ प्रार्थना कक्ष है। मस्जिद के तीन तोरण द्वार हैं जिनमें सुंदर सजावट की गई है। बीच का तोरण द्वार सबसे ऊंचा है और इसकी लंबाई २३ मीटर है।
[संपादित करें] जामी मस्जिद
जौनपुर की इस सबसे विशाल मस्जिद का निर्माण हुसैन शाह ने १४५८-७८ के बीच करवाया था। एक ऊंचे चबूतर पर बनी इस मस्जिद का आंगन ६६ मीटर और ६४.५ मीटर का है। प्रार्थना कक्ष के अंदरूनी हिस्से में एक ऊंचा और आकर्षक गुंबद बना हुआ है।
[संपादित करें] शाही किला
शाही किला गोमती के बाएं किनारे पर शहर के दिल में स्थित है।शाही किला फिरोजशाह ने १३६२ ई. में बनाया था इस किले के भीतरी गेट की ऊचाई २६.५ फुट और चौड़ाई १६ फुट है. केंद्रीय फाटक ३६ फुट उचा है।इसके एक शीर्ष पर वहाँ एक विशाल गुंबद है। शाही किला मे कुछ आदि मेहराब रहते हैं जो अपने प्राचीन वैभव की कहानी बयान करते है।
[संपादित करें] लाल दरवाजा मस्जिद
इस मस्जिद का निर्माण १४५० के आसपास हुआ था। लाल दरवाजा मस्जिद बनवाने का श्रेय सुल्तान महमूद शाह की रानी बीबी राजी को जाता है। इस मस्जिद का क्षेत्रफल अटाला मस्जिद से कम है। लाल पत्थर के दरवाजे से बने होने के कारण इसे लाल दरवाजा मस्जिद कहा जाता है।
[संपादित करें] खालिश मुखलिश मस्जिद
यह मस्जिद १४१७ ई. में बनी थी। मस्जिद का निर्माण मलिक मुखलिश और खालिश ने करवाया था।
[संपादित करें] शाही ब्रिज
गोमती नदी पर बने इस खूबसूरत ब्रिज को मुनीम खान ने 1568 ई. में बनवाया था।शर्कीकाल में जौनपुर में अनेकों भव्य भवनों, मस्जिदों व मकबरों का र्निमाण हुआ. फिरोजशाह ने 1393 ई0 में अटाला मस्जिद की नींव डाली थी, लेकिन 1408 ई0 में इब्राहिम शाह ने पूरा किया.इब्राहिम शाह ने जामा मस्जिद एवं बड़ी मस्जिद का र्निमाण प्रारम्भ कराया, इसे हूसेन शाह ने पूरा किया। शिक्षा, संस्क़ृति, संगीत, कला और साहित्य के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले जनपद जौनपुर में हिन्दू- मुस्लिम साम्प्रदायिक सद् भाव का जो अनूठा स्वरूप शर्कीकाल में विद्यमान रहा है, उसकी गंध आज भी विद्यमान है.
मोटे अक्षर===शीतला चौकिया धाम=== यहां शीलता माता का लोकप्रिय प्राचीन मंदिर बना हुआ है। मन्दिर के साथ ही एक बहुत ही खूबसुरत तालाब भी है, श्रद्धालुओं का यहां नियमित आना-जाना लगा रहता है।
[संपादित करें] यमदाग्नी आश्रम
यह आश्रम एक धार्मिक केन्द्र के रूप में विख्यात है। संत परशुराम से संबंध रखने वाला यह आश्रम आसपास के क्षेत्र से लोगों को आकर्षित करता है।
[संपादित करें] अन्य दर्शनीय स्थल
उपरोक्त लोकप्रिय दर्शनीय स्थलों के अलावा भी जौनपुर में देखने के लिए बहुत कुछ है। उदारहण के लिए शाही किल, ख्वाब गाह, दरगाह चिश्ती, पान-ए-शरीफ, जहांगीरी मस्जिद, अकबरी ब्रिज और शर्की सुल्तानों के मकबरें प्रमुख हैं।
[संपादित करें] आवागमन
- वायु मार्ग
जौनपुर का निकटतम एयरपोर्ट वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट (बाबतपुर एयरपोर्ट) है, जो यहां से 28 किमी. की दूरी पर है। एअरपोर्ट, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या ५६ पर है और यात्रा में औसतन ४५ मिनट का समय लगता है।
- रेल मार्ग
जौनपुर में २ मुख्य रेलवे स्टेशन हैं, १. जौनपुर जंक्शन, २. जौनपुर सिटी स्टेशन। जौनपुर का रेलवे स्टेशन लखनऊ वाराणसी और मुगलसराय रेललाइन पर पड़ता है। गंगा यमुना एक्सप्रेस, सरयू एक्सप्रेस, वरूण एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस जौनपुर को अनेक शहरों से जोड़ती है।
- सड़क मार्ग
जौनपुर आसपास के अनेक शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। वाराणसी, इलाहाबाद, अयोध्या, लखनऊ, गोरखपुर, आजमगढ़ आदि शहरों से जौनपुर के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है।
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
- सन्त मथुरा सिंह महाविद्यालय, मदारपुर, जौनपुर
- जौनपुर शहर
- एपार जौनपुर - ओपार जौनपुर - मादरडीह गांव के उत्खनन से खुल रहे अतीत के पन्ने
- एपार जौनपुर - ओपार जौनपुर-2
- एपार जौनपुर-ओपार जौनपुर : उत्खनन की प्रतीक्षा में एक और स्थल
- jaunpur population 2011