पुरुवश

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यदुकुल[संपादित करें]

भारतीय पुराण में कइ वंश, युद्ध ,उपनिषद आदी हैं। पुराण[1] के अनुसार मानव जाती का शुरूवाद ब्रह्मा और उनके पुत्र मनु से हुआ। मनु के बाद कई महान राजा थे जैसे कि नहुश, पुरूरवा, ययति आदी। ययति के पुत्र थे यदू। यदु ने बचपन में ही अपने पिता के वृद्दता को अपनाने के लिए तय्यार था।इस महान सोच के लिए वह मशहूर है। वे एक त्रुटिहीन महाराजा थे और पूरा वंश ही यादव वंश कहलाया गया। यदुकुल क शुरुवद यदु से हुआ और श्रीकृष्ण के जीवनकाल में इस कुल का अन्त हुआ।यदव बहुत हि ञानिऔर शूर योधा थे।यदुकुल में ही पैदा हुए थे सारे श्रीकृष्ण के पूर्वज जैसे कि वासुदेव, और श्रीकृष्ण के संतान जैसे कि प्रद्यमन और अनिरुद्ध।

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द्वारका में आज भी यदुकुल के अस्थित्व के निशान हमें मिलते हैं। आज भी भारत में कै परिवार ,यादव नाम अपनाते हैं।लेकिन यह बात अभी भी पक्कि नहीं है कि यादव कुल या यदुवंश और आज के यादव नाम में कुछ संबंध है या नहीं।हामकि कोइ संबंध हो या ना हो , आज भी यादाव नामक लोगों कि संख्या बहुत बड़ा है।

यदुकुल के इतिहास[संपादित करें]

यादव वंश भारतीय इतिहास का एक मशहूर वंश है। इस वंश की महानगरी है द्वारका।इसी महान वंश में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। श्रीकृष्ण का जन्म वसुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में हुआ था। लेकिन श्रीकृष्ण की रक्षा के लिए उनका पर्वरिश नंदा और यशोदा ने किए।

यादव वंश को यदुकुल भी कहा जाता है। लेकिन श्रीकृष्णा के अंतिम दिन में उन्होने शराबि जोश में एक दूसरे को तिन से मार डाला था।इसमें बलराम का भी मृत्यू हुआ। इतनी मशहूर वंश क अंत ऐसे होते हुए देख्रकर श्रीकृष्ण उदास हो गए।और वे भी अपने मृत्यु अपनाने के लिए तय्यार हो गए। अपने पैर पे लगी तीर से उनकी मृत्यु हुइ।

इस वंश का राज भारत के तुंगभद्रा नदी से नर्मदा नदी तक फैला था।इस कुल में लगभग 71 राजाएँ रहें हैंं। पुराण के अनुसार यदुकुल के एक राजा हैं पुरुवश। वे राजा मधू के पुत्र थे। पुरुवश के पुत्र का नाम था पुरुहोत्और पुरुहोत्र के पुत्र का नाम था अंशु।

पुरुवश[संपादित करें]

पुरुवश इस कुल के अड़तालिसवी राजा थे।[2] श्रीकृष्ण का जन्म पंद्रह पीडियों बाद हुआ था।वे एक वीर और प्रज्ञ राजा थे। हालाकी वे एक मशहूर राजा नहीं थे। पुराणों में इस कुल के भाग होने के अलावा किसी विशिष्ट कर्म के लिए उन्होंने प्रशंसा नहीं पायी। पुरूवश ने भी अपने पूर्वजों के समान वंश का नाम रोशन करते हुए उसे आगे बढाया।पुरुवश अपने पूर्वजों के समान एक योधा थे और अपने पूर्वजों के समान ही उसने अपने कुल ओर राज्य का ख्याल रखा। पुरुवश राजा अपने नाम के समान एक नेक और उत्तम पुरुष थे। उनके एक ही पुत्र था। इस पुत्र का नाम था पुरुहोत्र।

हमारे पुराणों में ऐसे कई राजाएँ थे जिनके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिलती। लेकिन इस बात क कोई संदेह नहीं है कि ये भी बेहतरीन राजाएं थे।

  1. http://www.vedicgranth.org/other-granths/puraana
  2. http://www.speakingtree.in/allslides/71-generation-of-lord-shri-krishna