पुरुवश

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

भारतीय पुराण में कइ वंश, युद्ध ,उपनिषद आदी हैं। पुराण[1] के अनुसार मानव जाती का शुरूवाद ब्रह्माभ्रह्म और उनके पुत्र मनु से हुआ। मनु के बाद कई महान राजा थे जैसे कि नहुश, पुरूरवा, ययति आदी। ययति के पुत्र थे यदू। यदु ने बचपन में ही अपने पिता के वृद्दता को अपनाने के लिए तय्यार था।इस महान सोच के लिए वह मशहूर है। वे एक त्रुटिहीन महाराजा थे और पूरा वंश ही यादव वंश कहलाया गया। यदुकुल क शुरू यदु से हुआ और कृष्ण के जीवनकाल मे इस कुल की बहुत विकास हुआ प्रसिद्धि पाया ।यदव बहुत हि वीर और शूर योधा थे।यदुकुल में ही पैदा हुए थे सारे श्रीकृष्ण के पूर्वज जैसे कि वासुदेव, और श्रीकृष्णके संतान जैसे कि प्रद्यमन और अनिरुद्ध।

पुरुवश १२.jpg

यादव वंश भारतीय इतिहास का एक मशहूर वंश है। इस वंश की महानगरी है द्वारका।इसीद्वारका।इसी महान वंश में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। श्रीकृष्णयादव का जन्म वसुदेव और देवकि के पुत्र के रूप में हुआ था। लेकिन श्रीकृष्ण की रक्षा के लिए उनका पर्वरिश नंदावंश औरको यशोदायदुकुल नेभी किए।कहा जाता है।

पुरुवंश[संपादित करें]

भारतीय पुराण में कइ वंश, युद्ध ,उपनिषद आदी हैं। पुराण[2] के अनुसार मानव जाती का शुरूवाद ब्रह्मा और उनके पुत्र मनु से हुआ। मनु के बाद कई महान राजा थे जैसे कि नहुश, पुरूरवा, ययति आदी। ययति के पुत्र थे यदू। यदु ने बचपन में ही अपने पिता के वृद्दता को अपनाने के लिए तय्यार था।इस महान सोच के लिए वह मशहूर है। वे एक त्रुटिहीन महाराजा थे और पूरा वंश ही यादव वंश कहलाया गया। यदुकुल क शुरुवद यदु से हुआ और क्रिष्ण के जीवनकाल मे इस कुल का अन्त हुआ।यदव बहुत हि ञनिऔर शूर योधा थे।ञदुकुल में ही पैदा हुए थे सारे श्रीकृष्ण के पूर्वज जैसे कि वासुदेव, और श्रीकृष्ण के संतान जैसे कि प्रद्यमन और अनिरुद्ध।

इस वंश का राज भारत के तुंगभद्रा नदी से नर्मदा नदी तक फैला था।इस कुल में लगभग 71 राजाएँ रहें हैंं। पुराण के अनुसार यदुकुल के एक राजा हैं पुरुवश। वे राजा मधू के पुत्र थे। पुरुवश के पुत्र का नाम था पुरुहोत्और पुरुहोत्र के पुत्र का नाम था अंशु। पुरुहोत्र।


पुरुवश इस कुल के अड़तालिसवी राजा थे।[3] श्रीकृष्ण का जन्म पंद्रह पीडियों बाद हुआ था।वे एक वीर और प्रज्ञ राजा थे। हालाकी वे एक मशहूर राजा नहीं थे। पुराणों में इस कुल के भाग होने के अलावा किसी विशिष्ट कर्म के लिए उन्होंने प्रशंसा नहीं पायी। पुरूवश ने भी अपने पूर्वजों के समान वंश का नाम रोशन करते हुए उसे आगे बढाया।पुरुवश अपने पूर्वजों के समान एक योधा थे और अपने पूर्वजों के समान ही उसने अपने कुल ओर राज्य का ख्याल रखा। पुरुवश राजा अपने नाम के समान एक नेक और उत्तम पुरुष थे। उनके एक ही पुत्र था। इस पुत्र का नाम था पुरुहोत्र बढाया।

इस वंश का राज भारत के तुंगभद्रा नदी से नर्मदा नदी तक फैला था।इस कुल में लगभग 71 राजाएँ रहें हैंं। पुराण के अनुसार यदुकुल के एक राजा हैं पुरुवश। वे राजा मधू के पुत्र थे। पुरुवश के पुत्र का नाम था पुरुहोत्और पुरुहोत्र के पुत्र का नाम था अंशु।

पुरुवश[संपादित करें]

पुरुवश इस कुल के अड़तालिसवी राजा थे।[4] श्रीकृष्ण का जन्म पंद्रह पीडियों बाद हुआ था।वे एक वीर और प्रज्ञ राजा थे। हालाकी वे एक मशहूर राजा नहीं थे। पुराणों में इस कुल के भाग होने के अलावा किसी विशिष्ट कर्म के लिए उन्होंने प्रशंसा नहीं पायी। पुरूवश ने भी अपने पूर्वजों के समान वंश का नाम रोशन करते हुए उसे आगे बढाया।पुरुवश अपने पूर्वजों के समान एक योधा थे और अपने पूर्वजों के समान ही उसने अपने कुल ओर राज्य का ख्याल रखा। पुरुवश राजा अपने नाम के समान एक नेक और उत्तम पुरुष थे। उनके एक ही पुत्र था। इस पुत्र का नाम था पुरुहोत्र।

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 11 फ़रवरी 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 फ़रवरी 2017.
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 11 फ़रवरी 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 फ़रवरी 2017.
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 29 अक्तूबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 फ़रवरी 2017.
  4. "संग्रहीत प्रति". मूल से 29 अक्तूबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 फ़रवरी 2017.