वृष्णि

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वृष्णियों, यौधेयों, पौरवों व अन्य कुलों की भूमि।

वृष्णि अथवा वृष्णि(अहीर)[1][2] एक वैदिक भारतीय कुल है, जिनका निकास यदु के वंशज वृष्णि से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ययाति के पुत्र यदु, और यदु के पुत्र सात्वत के वंश से वृष्णि थे। उनकी दो पत्नियाँ थी गांधारी और माद्री। माद्री से उन्हें एक पुत्र हुआ देवमीढ़(देवमीढुष)। वसुदेव, कृष्ण के पिता, देवमीढ़(देवमीढुष) के पोते थे।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Shastri, Swami Dharanand (संपा॰). Laghusiddhantakaumudi--Vardaraj Virchit. Motilal Banarsidass Publisher. पृ॰ 897. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788120822146.
  2. DSSSB P.G.T. Bharti Pariksha Sanskrit. Upkar Prakashan. पृ॰ 67. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788174823953.
  3. Pargiter F.E. (1922, reprint 1972). Ancient Indian Historical Tradition, Delhi: Motilal Banarsidass, pp.103-7