सामग्री पर जाएँ

वृष्णि

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
वृष्णियों, यौधेयों, पौरवों व अन्य कुलों की भूमि।

वृष्णि एक प्राचीन वैदिक भारतीय कबीला था जिन्हें वृष्णिपाल अर्थात हिंदी में गडरिया कहा है , ऐसा माना जाता है कि वृष्णि ययाति के पुत्र यदु के वंशज सात्वत के के पुत्र थे। कृष्ण वृष्णि की एक खानाबदोश जनजाति गडरिया से हैं, जिन्हें सात्वत के नाम से जाना जाता है, जो मथुरा के पास देश में रहते थे। इन सातत्वों या अधिक उचित रूप से कहें तो जिन यादवों की वे एक शाखा थे, उनका उल्लेख पाणिनि ने किया था।[1]

वृष्णि का अर्थ हिंदी में भेड़ होता है वृष्णिपाल मेषपालकों(गडरियों) का वैदिक नाम है और गडरिया जाति वैदिक युग मे वृष्णि काबिले से सम्बंधित है जिसमें न्यग्रोध वृक्ष, यमुनादि नदियों की पूजन-परम्परा थी।[2]

प्राचीन साहित्य में वृष्णि

[संपादित करें]

ऐसा माना जाता है कि वृष्णि, अंधक, कुकुर, भोज और सुरसेन क्रोष्टु के वंशज सात्वत के वंशज थे। इन कुलों को सात्वत वंश के नाम से भी जाना जाता था।

मनुस्मृति (X.23) में सात्वतों को व्रात्य वैश्यों की श्रेणी में रखा गया है।[3]

पाणिनि ने अपनी अष्टाध्यायी (IV.1.114, VI.2.34) में अंधकों के साथ-साथ वृष्णियों का भी उल्लेख किया है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वृष्णियों को एक संघ (आदिवासी संघ) के रूप में वर्णित किया गया है। महाभारत (द्रोण पर्व, 141.15) में वृष्णि और अंधक को व्रात्य कहा गया है।[4]

हरिवंश (II.4.37-41) के अनुसार, वृष्णि देवी एकानमशा की पूजा करते थे, जिन्हें उसी पाठ (II.2.12) में अन्यत्र नंदगोप की बेटी के रूप में वर्णित किया गया है।[5]

महाभारत के शांतिपर्व (81.25) में, कुकुर, भोज, अंधक और वृष्णि को एक साथ संघ के रूप में संदर्भित किया गया है, और वासुदेव कृष्ण को संघमुख्य (संघ के प्रमुख) के रूप में संदर्भित किया गया है।[6]

सन्दर्भ

[संपादित करें]
  1. Mitra, Khagendranath (1952). The Dynamics of Faith: Comparative Religion (अंग्रेज़ी में). University of Calcutta. Krishna belongs to a nomadic tribe of Abhiras known as Sāttvatas who inhabited the country near Mathura. These Sāttvatas or more properly the Yadavas of whom they were a branch were mentioned by Panini.
  2. Vāgvikalpa: Ḍô. Ānandaprakāśa Dīkshita abhinandana-grantha : kāvyaśāstra, bhaktikāvya, Śailīvijñāna, evaṃ samīkshā se sambandhita maulika lekhoṃ kā sandarbha grantha. Vibhūti Prakāśana. 1986.
  3. Buhler, G. (2004-12). The Laws of Manu (अंग्रेज़ी में). Cosmo Publications. पृ॰ 279. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7755-876-0. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  4. Raychaudhury, H.C. (1972). Political History of Ancient India, Calcutta: University of Calcutta, pp.126-8
  5. Bhattacharji, Sukumari (2000). The Indian Theogony: Brahmā, Viṣṇu and Śiva (अंग्रेज़ी में). Penguin Books India. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-14-029570-2.
  6. Hemchandra Raychaudhuri (1927). Political History Of Ancient India.