पृथ्वी

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पृथ्वी  पृथ्वी का खगोलीय प्रतीक
"अपोलो १७ चन्द्रयान द्वारा लिया गया पृथ्वी का द ब्लू मार्बल" चित्र। अरबी प्रायद्वीप, अफ़्रीका और मेडागास्कर चकती के उपरी अर्द्ध भाग में हैं, जबकि अंटार्कटिका नीचले भाग में।
1972 में अपोलो 17 चन्द्रयान द्वारा लिया गया पृथ्वी का "द ब्लू मार्बल" चित्र।
युग जे2000[सा 1]
उपसौर 151930000 किमी
(1.01559 AU)[सा 2]
अपसौर 147095000 किमी
(0.9832687 AU)[सा 2]
अर्ध मुख्य अक्ष 149598261 किमी
(1.00000261 AU)[1]
विकेन्द्रता 0.01671123[1]
परिक्रमण काल 365.256363004 दिन [2]
1.00001742096 वर्ष)
औसत परिक्रमण गति 29.78 किमी/सै॰[3]
(107200 किमी/घण्टा)
माध्य कोणान्तर 358.617 डिग्री
झुकाव सूर्य की विषुवत रेखा पर 7.155 डिग्री;
अचर समतल से 1.57869 डिग्री[4]
जे2000 सूर्यपथ से 0.00005 डिग्री
आरोह  पात का अनुलम्ब जे2000 सूर्यपथ से -11.26064 डिग्री[3]
Argument of perihelion 102.94719 डिग्री[3]
उपग्रह
भौतिक विशेषताएँ
माध्य त्रिज्या 6371.0 किमी[6]
विषुवतीय त्रिज्या 6378.1 किमी[7][8]
ध्रुवीय त्रिज्या 6356.8 किमी[9]
सपाटता 0.0033528[10]
1/298.257222101 (ETRS89)
परिधि
तल-क्षेत्रफल
  • 510072000 वर्ग किमी[11][12][सा 4]
  •  (148940000 वर्ग किमी (29.2%) भूमि
  •   361132000 वर्ग किमी (70.8%) जल)
आयतन 1.08321×1012 घन किमी[3]
द्रव्यमान 5.97219×1024 किग्रा[13]
(3.0×10-6 सौर द्रव्यमान)
माध्य घनत्व 5.514 ग्राम/घन सेमी[3]
विषुवतीय सतह गुरुत्वाकर्षण 9.807 मी॰/वर्ग सै॰[14]
(1 g)
पलायन वेग 11.186 किमी/सै॰[3]
नाक्षत्र घूर्णन
काल
0.99726968 दिन[15]
(23 घण्टे 56 मिनट 4.100 सैकण्ड)
विषुवतीय घूर्णन वेग 1,674.4 किमी/घंटा (465.1 मी/सेक)[16]
अक्षीय नमन 23 डिग्री 26 मिनट 21.4119 सै॰[2]
अल्बेडो
सतह का तापमान
   केल्विन
   सेल्सियस
न्यून माध्य अधि
184 के॰[17] 288 के॰[18] 330 के॰[19]
−89.2 °C 15 °C 56.7 °C
वायु-मंडल
सतह पर दाब 101.325 किलो पास्कल (मासत)
संघटन

पृथ्वी, जिसे विश्व अथवा द वर्ल्ड भी कहा जाता है (तथा कम प्रचलन में भूमि अथवा गैय अथवा लेटिन में टेरा[21]), सूर्य का तीसरा ग्रह है। यह सौर मंडल में व्यास, द्रव्यमान और घनत्व की दृष्टि से सबसे बड़ा पार्थिव ग्रह है। इसका पृथ्वी, पृथ्वी ग्रह, भूमि, संसार और टेरा[22] के रूप में भी उल्लेख होता है।रेडियोमीत्रिक समयांकन की विधि द्वारा खोजे गये वैज्ञानिक प्रमाण संकेत देतें है कि पृथ्वी की आयु ४.५४ अरब वर्ष (4.54 billion years) पहले,[23][24][25][26]

पृथ्वी न केवल मानव (human) का अपितु अन्य लाखों प्रजातियों (species) का भी घर है[27] और साथ ही ब्रह्मांड में एकमात्र वह स्थान है जहाँ जीवन (life) का अस्तित्व पाया जाता है। इसकी सतह पर जीवन का प्रस्फुटन लगभग एक अरब वर्ष पहले प्रकट हुआ। पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिये आदर्श दशाएँ (जैसे सूर्य से सटीक दूरी इत्यादि) न केवल पहले से उपलब्ध थी बल्कि जीवन की उत्पत्ति के बाद से विकास क्रम में जीवधारियों ने इस ग्रह के वायुमंडल (the atmosphere) और अन्य अजैवकीय (abiotic) परिस्थितियों को भी बदला है और इसके पर्यावरण को वर्तमान रूप दिया है। पृथ्वी के वायुमंडल में आक्सीजन की वर्तमान प्रचुरता वस्तुतः जीवन की उत्पत्ति का कारण नहीं बल्कि परिणाम भी है। जीवधारी और वायुमंडल दोनों अन्योन्याश्रय के संबंध द्वारा विकसित हुए हैं। पृथ्वी पर श्वशनजीवी जीवों (aerobic organisms) के प्रसारण के साथ ओजोन परत (ozone layer) का निर्माण हुआ जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र (Earth's magnetic field) के साथ हानिकारक विकिरण को रोकने वाली दूसरी परत बनती है और इस प्रकार पृथ्वी पर जीवन की अनुमति देता है।[28]

पृथ्वी का भूपटल (outer surface) कई कठोर खंडों या विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है जो भूगर्भिक इतिहास (geological history) के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान को विस्थापित हुए हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से धरातल का करीब ७१% नमकीन जल (salt-water) के सागर से आच्छादित है, शेष में महाद्वीप और द्वीप; तथा मीठे पानी की झीलें इत्यादि अवस्थित हैं। पानी सभी ज्ञात जीवन के लिए आवश्यक है जिसका अन्य किसी ब्रह्मांडीय पिण्ड के सतह पर अस्तित्व ज्ञात नही है।

पृथ्वी की आतंरिक रचना तीन प्रमुख परतों में हुई है भूपटल, भूप्रावार और क्रोड। इसमें से बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है और एक ठोस लोहे और निकल के आतंरिक कोर (inner core) के साथ क्रिया करके पृथ्वी मे चुंबकत्व या चुंबकीय क्षेत्र को पैदा करता है।

पृथ्वी बाह्य अंतरिक्ष (outer space), में सूर्य और चंद्रमा समेत अन्य वस्तुओं के साथ क्रिया करता है वर्तमान में, पृथ्वी मोटे तौर पर अपनी धुरी का करीब ३६६.२६ बार चक्कर काटती है यह समय की लंबाई एक नाक्षत्र वर्ष (sidereal year) है जो ३६५.२६ सौर दिवस (solar day)[29] के बराबर है पृथ्वी की घूर्णन की धुरी इसके कक्षीय समतल (orbital plane) से लम्बवत (perpendicular) २३.४ की दूरी पर झुका (tilted) है जो एक उष्णकटिबंधीय वर्ष (tropical year) (३६५.२४ सौर दिनों में) की अवधी में ग्रह की सतह पर मौसमी विविधता[30] पैदा करता है।

पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा (natural satellite) है, जिसने इसकी परिक्रमा ४.५३ बिलियन साल पहले शुरू की। यह अपनी आकर्षण शक्ति द्वारा समुद्री ज्वार पैदा करता है, धुरिय झुकाव को स्थिर रखता है और धीरे-धीरे पृथ्वी के घूर्णन को धीमा करता है।

ग्रह के प्रारंभिक इतिहास के दौरान एक धूमकेतु की बमबारी ने महासागरों[31] के गठन में भूमिका निभाया। बाद में छुद्रग्रह (asteroid) के प्रभाव ने सतह के पर्यावरण पर महत्वपूर्ण बदलाव किया।

नाम

पृथ्वी अथवा पृथिवी नाम पौराणिक कथा पर आधारित है जिसका महराज पृथु से है। अन्य नाम हैं - धरा, भूमि, धरित्री, रसा, रत्नगर्भा इत्यादि। अंग्रेजी में अर्थ और लातीन भाषा में टेरा।

रासायनिक संरचना

पृथ्वी की रचना में निम्नलिखित तत्वों का योगदान है

  1. 34.6% आयरन
  2. 29.5% आक्सीजन
  3. 15.2% सिलिकन
  4. 12.7% मैग्नेशियम
  5. 2.4% निकेल
  6. 1.9% सल्फर
  7. 0.05% टाइटेनियम
  8. शेष अन्य

धरती का घनत्व पूरे सौरमंडल मे सबसे ज्यादा है। बाकी चट्टानी ग्रह की संरचना कुछ अंतरो के साथ पृथ्वी के जैसी ही है। चन्द्रमा का केन्द्रक छोटा है, बुध का केन्द्र उसके कुल आकार की तुलना मे विशाल है, मंगल और चंद्रमा का मैंटल कुछ मोटा है, चन्द्रमा और बुध मे रासायनिक रूप से भिन्न भूपटल नही है, सिर्फ पृथ्वी का अंत: और बाह्य मैंटल परत अलग है। ध्यान दे कि ग्रहो (पृथ्वी भी) की आंतरिक संरचना के बारे मे हमारा ज्ञान सैद्धांतिक ही है।

आंतरिक संरचना

पृथ्वी की आतंरिक संरचना शल्कीय अर्थात परतों के रूप में है जैसे प्याज के छिलके परतों के रूप में होते हैं। इन परतों की मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषताओं अथवा यांत्रिक विशेषताओं के आधार पर किया जा सकता है। पृथ्वी की ऊपरी परत भूपर्पटी एक ठोस परत है, मध्यवर्ती मैंटल अत्यधिक गाढ़ी परत है और बाह्य क्रोड तरल तथा आतंरिक क्रोड ठोस अवस्था में है।

पृथ्वी की आतंरिक संरचना के बारे में जानकारी का स्रोतों को दो हिस्सों में विभक्त किया जा सकता है। प्रत्यक्ष स्रोत, जैसे ज्वालामुखी से निकले पदार्थो का अध्ययन, वेधन से प्राप्त आंकड़े इत्यादि, कम गहराई तक ही जानकारी उपलब्ध करा पते हैं। दूसरी ओर अप्रत्यक्ष स्रोत के रूप में भूकम्पीय तरंगों का अध्ययन अधिक गहराई की विशेषताओं के बारे में जानकारी देता है।

यांत्रिक लक्षणों के आधार पर पृथ्वी को स्थलमण्डल, दुर्बलता मण्डल, मध्यवर्ती मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड मे बनाता जाता है। रासायनिक संरचना के आधार पर भूपर्पटी, ऊपरी मैंटल, निचला मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटा जाता है।

पृथ्वी की आतंरिक संरचना
गहराई परतें
किलोमीटर मील
0–60 0–37 स्थलमण्डल (स्थानिक रूप से ५ और २०० किमी के बीच परिवर्तनशील)
0–35 0–22 भूपर्पटी (परिवर्तनशील ५ से ७० किमी के बीच)
35–60 22–37 … सबसे ऊपरी मैंटल
35–2,890 22–1,790 मैंटल
100–200 62–125 दुर्बलता मण्डल (एस्थेनोस्फियर)
35–660 22–410 ऊपरी मैंटल
660–2,890 410–1,790 निचला मैंटल
2,890–5,150 1,790–3,160 बाह्य क्रोड
5,150–6,360 3,160–3,954 आतंरिक क्रोड


पृथ्वी के अंतरतम की यह परतदार संरचना भूकंपीय तरंगों के संचलन और उनके परावर्तन तथा प्रत्यावर्तन पर आधारित है जिनका अध्ययन भूकंपलेखी के आँकड़ों से किया जाता है। भूकंप द्वारा उत्पन्न प्राथमिक एवं द्वितीयक तरंगें पृथ्वी के अंदर स्नेल के नियम के अनुसार प्रत्यावर्तित होकर वक्राकार पथ पर चलती हैं। जब दो परतों के बीच घनत्व अथवा रासायनिक संरचना का अचानक परिवर्तन होता है तो तरंगों की कुछ ऊर्जा वहाँ से परावर्तित हो जाती है। परतों के बीच ऐसी जगहों को असातत्य (Discontinuity) कहते हैं।

स्थलमंडल

रूप बदलती पृथ्वी

अन्य चट्टानी के विपरित पृथ्वी का भूपटल कुछ ठोस प्लेटो मे विभाजित है जो निचले द्रव मैंटल पर स्वतण्त्र रूप से बहते रहती है। इस गतिविधी को प्लेट टेक्टानिक कहते है। (वर्तमान में) आठ प्रमुख प्लेट:

  1. उत्तर अमेरिकी प्लेट – उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी उत्तर अटलांटिक और ग्रीनलैंड
  2. दक्षिण अमेरिकी प्लेट – दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी दक्षिण अटलांटिक
  3. अंटार्कटिक प्लेट – अंटार्कटिका और “दक्षिणी महासागर”
  4. यूरेशियाई प्लेट – पूर्वी उत्तर अटलांटिक, यूरोप और भारत के अलावा एशिया
  5. अफ्रीकी प्लेट – अफ्रीका, पूर्वी दक्षिण अटलांटिक और पश्चिमी हिंद महासागर
  6. भारतीय -आस्ट्रेलियाई प्लेट – भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और हिंद महासागर के अधिकांश
  7. नाज्का प्लेट – पूर्वी प्रशांत महासागर से सटे दक्षिण अमेरिका
  8. प्रशांत प्लेट – प्रशांत महासागर के सबसे अधिक (और कैलिफोर्निया के दक्षिणी तट!)

पृथ्वी का भूपटल काफी नया है। खगोलिय पैमाने पर यह बहुत छोटे अंतराल ५००,०००,००० वर्ष मे बना है। क्षरण और टेक्टानीक गतिविधी पृथ्वी के भूपटल को नष्ट कर नया करते रहती है, इस तरक ऐतिहासिक भौगोलिक गतिविधियो के प्रमाण (क्रेटर) नष्ट होते रहते है। पृथ्वी के शुरुवाती इतिहास के प्रमाण नष्ट हो चुके है। पृथ्वी की आयू ४.५ अरब वर्ष से लेकर ४.६ अरब वर्ष है लेकिन पृथ्वी की सबसे पूरानी चट्ठान ४ अरब वर्ष पूरानी है, ३ अरब वर्ष से पूराने चट्टाने दूर्लभ है। जिवित प्राणियो के जिवाश्म की आयू ३.९ अरब वर्ष से कम है। जिवन के प्रारंभ के समय के कोई प्रमाण उपलब्ध नही है।

जल की उपस्थिति

पृथ्वी की सतह का ७०% हिस्सा पानी से ढंका है। पृथ्वी अकेला ग्रह है जिस पर पानी द्रव अवस्था मे सतह पर उपलब्ध है। (टाइटन पर द्रव इथेन या मिथेन हो सकती है, युरोपा की सतह के निचे द्रव पानी हो सकता है।) हम जानते है कि जिवन के लिये द्रव जल आवश्यक है। सागरो की गर्मी सोखने की क्षमता पृथ्वी के तापमान को स्थायी रखने मे महत्वपूर्ण है। द्रव जल पृथ्वी सतह के क्षरण और मौसम के लिये महत्वपूर्ण है। (मंगल पर भूतकाल मे शायद ऐसी गतिविधी हुयी हो सकती है।)

वायुमंडल

पृथ्वी के वातावरण मे ७७% नायट्रोजन, २१% आक्सीजन, और कुछ मात्रा मे आर्गन, कार्बन डाय आक्साईड और जल बाष्प है। पृथ्वी पर निर्माण के समय कार्बन डाय आक्साईड की मात्रा ज्यादा रही होगी जो चटटानो मे कार्बोनेट के रूप मे जम गयी, कुछ मात्रा मे सागर द्वारा अवशोषित कर ली गयी, शेष कुछ मात्रा जिवित प्राणियो द्वारा प्रयोग मे आ गयी होगी। प्लेट टेक्टानिक और जैविक गतिविधी कार्बन डाय आक्साईड का थोड़ी मात्रा का उत्त्सर्जन और अवशोषण करते रहते है। कार्बनडाय आक्साईड पृथ्वी के सतह का तापमान का ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा नियंत्रण करती है। ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी सतह का तापमान ३५ डीग्री सेल्सीयस होता है अन्यथा वह -२१ डीग्री सेल्सीयस से १४ डीग्री सेल्सीयस रहता; इसके ना रहने पर समुद्र जम जाते और जिवन असंभव हो जाता। जल बाष्प भी एक आवश्यक ग्रीन हाउस गैस है।

रासायनिक दृष्टी से मुक्त आक्सीजन भी आवश्यक है। सामान्य परिस्थिती मे आक्सीजन विभिन्न तत्वो से क्रिया कर विभिन्न यौगिक बनाती है। पृथ्वी के वातावरण मे आक्सीजन का निर्माण और नियंत्रण विभिन्न जैविक प्रक्रियाओ से होता है। जिवन के बिना मुक्त आक्सीजन संभव नही है।

चंद्रमा

चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। यह सौरमंडल का पाचवाँ सबसे विशाल प्राकृतिक उपग्रह है जिसका व्यास पृथ्वी का एक चौथाई तथा द्रव्यमान १/८१ है | बृहस्पति के उपग्रह lo के बाद चन्द्रमा दूसरा सबसे अधिक घनत्व वाला उपग्रह है | सूर्य के बाद आसमान में सबसे अधिक चमकदार निकाय चन्द्रमा है | समुद्री ज्वार और भाटा चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण आते है | चन्द्रमा की तात्कालिक कक्षीय दूरी, पृथ्वी के व्यास का ३० गुना है इसीलिए आसमान में सूर्य और चन्द्रमा का आकार हमेशा सामान नजर आता है |पृथ्वी के मध्य से चन्द्रमा के मध्य तक कि दूरी ३८४,४०३ किलोमीटर है। यह दूरी पृथ्वी कि परिधि के ३० गुना है। चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से १/६ है। यह पृथ्वी की परिक्रमा २७.३ दिन मे पूरा करता है और अपने अक्ष के चारो ओर एक पूरा चक्कर भी २७.३ दिन में लगाता है| यही कारण है कि हम हमेशा चन्द्रमा का एक ही पहलू पृथ्वी से देखते हैं| यदि चन्द्रमा पर खड़े होकर पृथ्वी को देखे तो पृथ्वी साफ़-साफ़ अपने अक्ष पर घूर्णन करती हुई नजर आएगी लेकिन आसमान में उसकी स्थिति सदा स्थिर बनी रहेगी अर्थात पृथ्वी को कई वर्षो तक निहारते रहो वह अपनी जगह से टस से मस नहीं होगी | पृथ्वी- चन्द्रमा-सूर्य ज्यामिति के कारण "चन्द्र दशा" हर २९.५ दिनों में बदलती है।

चुंबकीय क्षेत्र

पृथ्वी का अपना चुंबकिय क्षेत्र है जो कि बाह्य केन्द्रक के विद्युत प्रवाह से निर्मित होता है। सौर वायू, पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र और उपरी वातावरण मीलकर औरोरा बनाते है। इन सभी कारको मे आयी अनियमितताओ से पृथ्वी के चुंबकिय ध्रुव गतिमान रहते है, कभी कभी विपरित भी हो जाते है। पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र और सौर वायू मीलकर वान एण्डरसन विकिरण पट्टा बनाते है, जो की प्लाज्मा से बनी हुयी डोनट आकार के छल्लो की जोड़ी है जो पृथ्वी के चारो की वलयाकार मे है। बाह्य पट्टा १९००० किमी से ४१००० किमी तक है जबकि अतः पट्टा १३००० किमी से ७६०० किमी तक है।


इतिहास

वैज्ञानिक ग्रह के भूतकाल की जानकारी के बारे में विस्तृत सूचना को एकत्र करने में सफल रहे हैं। सौर मंडल में पृथ्वी और अन्य ग्रह ने ४.५४ बिलियन वर्ष[23] पहले सौर निहारिका (solar nebula) का गठन किया, जो एक डिस्क के आकार का धूल और गैस का गोला था, जो सूर्य के निर्माण से शेष बचा था। प्रारंभ में पिघला हुआ (molten), जब पानी वातावरण में इकट्ठा हो गया तब पृथ्वी की बाहरी परत एक ठोस परत के निर्माण के लिए ठंडी हो गई। तुरंत बाद चंद्रमा का निर्माण हुआ, संभवतः पृथ्वी के १०% द्रव्यमान के साथ[32] पृथ्वी के तिरछे प्रहार के प्रभाव के साथ मंगल के आकार की वस्तु के परिणामस्वरूप (कभी ठिया (Theia) कहा गया)[33] इस वस्तु का कुछ द्रव्यमान पृथ्वी के साथ मिल गया होगा और एक हिस्सा अन्तरिक्ष में प्रवेश कर गया होगा, पर कक्षा में चंद्रमा के निर्माण के लिए पर्याप्त सामग्री भेजा गया होगा

अधिक गैस और ज्वालामुखी की क्रिया ने आदिम वातावरण को उत्पन्न किया। संघनितजल वाष्प (water vapor), क्षुद्रग्रह और बड़े आद्य ग्रह, धूमकेतु और नेप्चून के पार से निष्पादित संवर्धित बर्फ और तरल पानी से महासागर उत्पन्न हुआ (produced the oceans).[31] माना जाता है कि उच्च ऊर्जा रसायन विज्ञान ने करीब ४ अरब साल पहले स्वयं नकल अणु का उत्पादन किया और आधे अरब साल बाद पिछले आम जीवन के सभी पूर्वज (last common ancestor of all life) अस्तित्व में थे।[34]

प्रकाश संश्लेषण के विकास ने सूर्य की उर्जा का प्रत्यक्ष जीवन में उपयोग करने की अनुमति दी, परिणामतः ऑक्सीजन वातावरण में संचित हुआ और ओजोन (ऊपरी वायुमंडल में आणविक ऑक्सीजन [o] का एक प्रकार) की एक परत के रूप में परिणत हुआ .बड़ी कोशिकाओ के साथ छोटी कोशिकाओं के समावेश के परिणामस्वरुप युकार्योतेस (development of complex cells) कहे जाने वाले जटिल कोशिकाओं का विकास में हुआ.[35] कोलोनियों के अंतर्गत सच्चे बहु कोशिकीय जीवो के रूप में वर्धमान विशेषीकृत होता है ओजोन परत (ozone layer) द्वारा हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण से सहायता प्राप्त जीवन पृथ्वी पर संघनित हुआ[36]

बिना किसी शुष्क भूमि की शुरुआत के समुद्र के ऊपर सतह की कुल मात्रा लगातार बढ़ रही है पिछले दो अरब सालों के दौरान, उदहारण के लिए, महादेशों का कुल परिमाण दोगुनी हो गई।[37] सैकड़ों लाखों साल से अधिक समय से स्वयं को लगातार दुबारा आकार दिया, जिससे महादेश बने और टूटे .महादेश पूरे सतह से कभी कभी एक वृहत महादेश (supercontinent) के संयोजन के निर्माण के लिए विस्थापित हुए.लगभग ७५० करोड़ साल पहले म्या (mya)), सबसे पहले जन जाने वाला शीर्ष महादेश, रोडिनिया (Rodinia) अलग से प्रकट होने लगा .महादेश बाद में ६०० – ५४० ;म्या पनोसिया{ (Pannotia) के निर्माण के लिए दुबारा एकीकृत हुए, तब अंततः पन्गेया (Pangaea) १८० म्या[38] अलग से प्रकट हुआ

१९६० के बाद से यह मन गया की ७५० और ५८० लाख साल के बीच में गंभीर ग्लासिअल क्रिया नियोप्रोतेरोजोइक (Neoproterozoic) के दौरान अधिकांश सतह को एक बर्फ की चादर में ढक लिया इस परिकल्पना को पृथ्वी हिमगोला (Snowball Earth) कहा गया और यह विशेष रुचि का है क्योंकि जब बहु कोशिकीय जीवन प्रारूप प्रसारित हुआ तब यह कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) से पहले हुआ .[39]

कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) के करीब ५३५ म्या के बाद पाँच व्यापक विनाश हुए हैं (mass extinctions)[40] विनाश की अन्तिम घटना ६५ म्या में हुआ जब एक उल्का के टक्कर ने संभवतः (गैर पक्षी) डायनासोर और अन्य बड़े सरीसृप के विनाश को प्रेरित किया, पर स्तनपायी जैसे छोटे जानवरों को प्रसारित किया जो तब छुछुंदर से मिलते थे। पिछले ६५ लाख साल पहले से, स्तनपायियों का जीवन विविधता पूर्ण है और कई लाख साल पहले एक अफ्रीकी बन्दर के समान जानवर ने सीधा खड़ा होने की योग्यता प्राप्त की[41] यह यंत्र का उपयोग किया और संचार साधन को प्रेरित किया जिसने एक वृहत मस्तिष्क के लिए आवश्यक पोषण और उत्तेजना प्रदान किया। कृषि के विकास ने और तब सभ्यता ने, मानव को छोटे काल अवधी में पृथ्वी को प्रभावित करने की अनुमति दी,[42] जो प्रकृति और अन्य जीवों को प्रभावित किया।

हिम युग (ice age) का वर्तमान स्वरूप करीब ४० लाख साल पहले प्रारम्भ हुआ, तब करीब ३ लाख साल बाद अभिनूतन (Pleistocene) तीव्र हुआ ध्रुवीय क्षेत्र तबसे हिमाच्छादन और गलन के क्रमिक चक्र को प्रत्येक ४० - १००,००० सालों में दुहराया है। अन्तिम हिम युग की समाप्ति लगभग १०,००० साल पहले हुई[43]

संदर्भ

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  2. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; IERS नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
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  4. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; Allen294 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
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  11. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; Pidwirny_2006_8 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
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  14. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; NIST2008 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
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  20. नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन (5 दिसम्बर 2014). "वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की प्रवृत्ति". http://www.esrl.noaa.gov/gmd/ccgg/trends/#mlo. 
  21. ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी), प्रथम संस्करण "terra, n." ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ऑक्सफोर्ड), 1911.
  22. ध्यान दें कि अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (International Astronomical Union) सम्मेलन के द्वारा " टेरा " शब्द पृथ्वी ग्रह की अपेक्षा व्यापक भूमि के नामकरण के लिए किया जाता है सीएफ़
  23. }} -->
  24. सौर दिवसों की संख्या नक्षत्र दिवसों (sidereal day) की संख्या से एक कम है क्योंकि सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षीय गति के परिणामस्वरुप उसका परिक्रमण काल एक दिन बढ़ जाता है।
  25. अहरेंस, वैश्विक पृथ्वी भौतिकी : भौतिक स्थिरता की एक पुस्तिका, पी.८ .
  26. वार्ड और ब्रोवन्ली (२००२)
  27. }} -->
  28. }} -->

बाहरी कड़ियाँ

  वा  
सौर मण्डल
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