मरुस्थलीकरण

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चिली के नोर्टे चिको में बकरी पालन आम है, लेकिन यह गंभीर कटाव और मरुस्थलीकरण पैदा करता है। लिमारी नदी की ऊपरी छवि

मरुस्थलीकरण ज़मीन का क्षरण है, जो शुष्क और अर्द्ध-नम क्षेत्रों में विभिन्न कारकों की वजह से होता है: जिनमें विविध जलवायु और मानवीय गतिविधियां[1] भी शामिल है। मरुस्थलीकरण मुख्यतः मानव निर्मित गतिविधियों In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }} के परिणाम स्वरूप होता है: विशेष तौर पर ऐसा अधिक चराई, भूमिगत जल के अत्यधिक इस्तेमाल और मानवीय एवं औद्योगिक कार्यों In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }} के लिए नदियों के जल का रास्ता बदलने की वजह से है और यह सारी प्रक्रियाएं मूलतः अधिक आबादी In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }} की वजह से संचालित होती हैं।

मरुस्थलीकरण का सबसे गहरा प्रभाव है जैव विविधता और उत्पादक क्षमता में कमी, उदाहरण के लिए संक्रमण से झाड़ियों से भरे ज़मीनों के गैर देशीय चरागाह In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }} में तब्दील होना. उदाहरण के लिए, दक्षिणी कैलिफोर्निया के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में, कई तटीय वृक्षों और झाड़-झंखाड़ों वाले पारितंत्रों की जगह नियमित अंतराल पर आग की वापसी से गैर देशीय, आक्रामक घास भर गयी हैं। इसकी वजह से वार्षिक घास की ऐसी श्रृंखला पैदा हो सकती है जो कभी मूल पारितंत्र में पाये जाने वाले जानवरों को सहारा नहीं दे सकतीIn this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}. मेडागास्कर की केंद्रीय उच्चभूमि के पठार In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }} में, स्वदेशी लोगों द्वारा काटने और जलाने की कृषि पद्धति की वजह से पूरे देश का 10% हिस्सा मरुस्थलीकरण में तब्दील हो गया हैIn this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}.

कारण[संपादित करें]

नौआकशॉट, मॉरिटानिया की राजधानी में रेत का टीला.

मरुस्थलीकरण कई कारकों द्वारा प्रेरित है, मुख्य रूप से मानव द्वारा की जाने वाली वनों की कटाई के कारण, जिसकी शुरुआत होलोसिन (तकरीबन 10,000 साल पहले) युग में हुई थी और जो आज भी तेज रफ्तार से जारी है। मरुस्थलीकरण के प्राथमिक कारणों में अधिक चराई, अधिक खेती, आग में वृद्धि, पानी को घेरे में बन्द करना, वनों की कटाई, भूजल का अत्यधिक इस्तेमाल, मिट्टी में अधिक लवणता का बढ़ जाना और वैश्विक जलवायु परिवर्तन शामिल हैं[2].

रेगिस्तान को आसपास के इलाके के पहाड़ों से घिरे कम शुष्क क्षेत्रों एवं अन्य विषम भू-स्वरूपों, जो शैल प्रदेशों जो मौलिक संरचनात्मक भिन्नताओं को प्रतिबिंबित करते हैं, से अलग किया जा सकता है। अन्य क्षेत्रों में रेगिस्तान सूखे से अधिक आर्द्र वातावरण के एक क्रमिक संक्रमण द्वारा रेगिस्तान के किनारे का निर्माण कर रेगिस्तान की सीमा को निर्धारित करना अधिक कठिन बना देते हैं। इन संक्रमण क्षेत्रों में नाजुक, संवदेनशील संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र हो सकता है रेगिस्तान के किनारे अक्सर सूक्ष्म जलवायु की पच्चीकारी होते हैं। लकड़ी के छोटे टुकड़े वनस्पति को सहारा देते हैं जो गर्म हवाओं से गर्मी ले लेते हैं और प्रबल हवाओं से जमीन की सुरक्षा करते हैं। वर्षा के बाद वनस्पति युक्त क्षेत्र आस-पास के वातावरण की तुलना में अधिक ठंडे होते हैं।

इन सीमांत क्षेत्रों में गतिविधि केंद्र पारिस्थितिकी तंत्र पर सहनशीलता की सीमा से परे तनाव उत्पन्न कर सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप भूमि का क्षय होने लगता है। अपने खुरों के प्रहार से पशु मिट्टी के निचले स्तर को ठोस बनाकर अच्छी सामग्री के अनुपात में वृद्धि करते हैं और मिट्टी के अंतःस्त्रवण की दर को कम कर पानी और हवा द्वारा क्षरण को प्रोत्साहित करते हैं। चराई और लकड़ियों का संग्रह पौधों को कम या समाप्त कर देता है, जो मिट्टी को बांधकर क्षरण को रोकने के लिए आवश्यक है। यह सब कुछ एक खानाबदोश संस्कृति के बजाय एक क्षेत्र में बसने की प्रवृत्ति के कारण होता है।

रेत के टीले मानव बस्तियों पर अतिक्रमण कर सकते हैं। रेत के टीले कई अलग-अलग कारणों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं, इन सभी हवा द्वारा सहायता मिलती है। रेत के टीले के पूरी तरह खिसकने का एक तरीका यह हो सकता है कि रेत के कण जमीन पर इस तरह से उछल-कूद कर सकते हैं जैसे किसी तालाब की सतह पर फेंका गया पत्थर पानी पूरी की सतह पर उछलता है। जब ये उछलते हुए कण नीचे आते हैं तो वे अन्य कणों से टकराकर उनके अपने साथ उछलने का कारण बन सकते हैं। कुछ मजबूत हवाओं के साथ ये कण बीच हवा में टकरा कर चादर प्रवाह (शीट फ्लो) का कारण बनते हैं। एक बड़े धूल के तूफान में टीले इस तरह चादर प्रवाह के माध्यम से दसियों मीटर बढ़ सकते हैं। बर्फ की तरह, रेत स्खलन, टीलों की खड़ी ढलानों से हवा के विपरीत नीचे गिरती रेत भी टीलों को आगे बढ़ाता है।

अक्सर यह माना जाता है कि सूखा भी मरुस्थलीकरण का कारण बनता है, हालांकि ई.ओ विल्सन ने अपनी पुस्तक जीवन का भविष्य, में कहा है कि सूखा के योगदान कारक होने पर भी मूल कारण मानव द्वारा पर्यावरण के अत्यधिक दोहन से जुड़ा है।[2] शुष्क और अर्द्धशुष्क भूमि में सूखा आम हैं और बारिश के वापस आने पर अच्छी तरह से प्रबंधित भूमि का सूखे से पुनरुद्धार हो सकता है। तथापि, सूखे के दौरान भूमि का लगातार दुरुपयोग भूमि क्षरण को बढाता है। सीमान्त भूमि पर वर्द्धित जनसंख्या और पशुओं के दबाव ने मरुस्थलीकरण को त्वरित किया है। कुछ क्षेत्रों में, बंजारों के कम शुष्क क्षेत्रों में चले जाने ने भी स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित किया है और भूमि के क्षरण की दर में वृद्धि की है। बंजारे पारंपरिक रूप से रेगिस्तान से भागने की कोशिश करते हैं लेकिन उनके भूमि के उपयोग के तरीकों की वजह से वे रेगिस्तान को अपने साथ ला रहे हैं।

अपेक्षाकृत छोटे जलवायु परिवर्तन के परिणाम से वनस्पति के फैलाव में आकस्मिक परिवर्तन हो सकता है। 2006 में, वुड्स होल अनुसंधान केंद्र ने अमेज़न घाटी में लगातार दूसरे वर्ष सूखे की सूचना देते हुए और 2002 से चल रहे एक प्रयोग का हवाला देते हुए कहा है कि अपने मौजूदा स्वरूप में अमेज़न जंगल संभावित रूप से रेगिस्तान में बदलने के पहले केवल तीन साल तक ही लगातार सूखे का सामना कर सकता है।[3] ब्राजीलियन नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अमेंज़ोनियन रिसर्च के वैज्ञानिकों में तर्क दिया है कि इस सूखे की यह प्रतिक्रिया वर्षावन (रेनफारेस्ट) को "महत्वपूर्ण बिंदु" की दिशा में धकेल रही है। यह निष्कर्ष निकाला गया है कि पर्यावरण में सीओ2 (CO2) होने के विनाशकारी परिणामों के साथ जंगल वृक्ष रहित बड़े मैदान (सवाना) या रेगिस्तान परिवर्तित होने में के कगार पर जा रहा है,[4] वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (World Wide Fund for Nature) के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई दोनों के संयोजन से मृत पेड़ सूखने लगते हैं और जंगल की आग में ईंधन का काम करते हैं।[5]

कुछ शुष्क और अर्द्ध-शुष्क भूमि फसलों के अनुकूल होती हैं लेकिन अत्यधिक आबादी के बढ़ते दबाव से या वर्षा में कमी होने से जो पौधे होते हैं, वे भी गायब हो सकते हैं। मिट्टी हवा के संपर्क में आती है और मिट्टी के कण उड़कर कहीं और एकित्रत होते हैं। ऊपरी परत का क्षरण हो जाता है। छाया हटने के बाद वाष्पीकरण की दर बढ़ने से नमक सतह पर आ जाता है। इससे मिट्टी की लवणता बढ़ती है जो पौधे के विकास को रोकती है। पौधों में कमी आने से क्षेत्र में नमी कम हो जाती है जो मौसम के स्वरुप को बदलती है जिससे वर्षा कम हो सकती है।

पहले की उत्पादक जमीन में अपकर्ष आना एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें कई कारण शामिल हैं और यह विभिन्न मौसमों में अलग-अलग दरों में होती है। मरुस्थलीकरण सामान्य जलवायु प्रवृत्ति को सुखा की और बढ़ा सकता है या स्थानीय जलवायु में परिवर्तन आरंभ कर सकता है। मरुस्थलीकरण रैखिक या आसानी से बदले जाने वाली प्रवृत्ति में घटित नहीं होता है। रेगिस्तान अपनी सीमाओं पर अनियमित ढंग से धब्बे बनाकर बढ़ सकता है। प्राकृतिक रेगिस्तान से दूर के क्षेत्र खराब भूमि प्रबंधन के कारण जल्द ही बंजर भूमि, पत्थर या रेत में बदल सकते हैं। मरुस्थलीकरण का आस-पास उपस्थित रेगिस्तान से कोई सीधा संबंध नहीं है। दुर्भाग्य से, मरुस्थलीकरण से गुजर रहा कोई क्षेत्र जनता के ध्यान में तभी आता है जब वह उस प्रक्रिया से काफी हद तक गुजर चुका होता है। अक्सर पारिस्थितिकी तंत्र के पूर्व अवस्था या उसके अपकर्ष की दर की ओर संकेत करने के बहुत कम डाटा उपलब्ध होते हैं।

मरुस्थलीकरण पर्यावरण और विकास दोनों की समस्या है। यह स्थानीय वातावरण और लोगों के जीने के तरीके को भी प्रभावित करता है। यह वैश्विक स्तर पर जैव विविधता और मौसमी परिवर्तन पर प्रभाव डालता है और जल संसाधनों पर भी. इलाके का अपकर्ष सीधे मानवीय गतिविधियों से जुड़ी है और शुष्क क्षेत्रों के सतत विकास में बहुत बड़ी बाधा और बुरे विकास के लिए एक बहुत बड़ा कारण है।[6]

मरुस्थलीकरण की रोकथाम जटिल और मुश्किल है और तब तक असंभव है जब तक भूमि प्रबंधन की उन प्रथाओं को नहीं बदला जाता जो बंजर होने का कारण बनती हैं। भूमि का अत्यधिक इस्तेमाल और जलवायु में विभिन्नता समान रूप से जिम्मेवार हो सकती है और इनका जिक्र फीडबैक में किया जा सकता है, जो सही शमन रणनीति चुनने में मुश्किल पैदा करते हैं। ऐतिहासिक मरुस्थलीकरण की जांच विशेष भूमिका निभाती हैं जो प्राकृतिक और मानवीय कारकों में अंतर करना आसान कर देता है। इस संदर्भ में, जॉर्डन में मरुस्थलीकरण के बारे में हाल के अनुसंधान मनुष्य की प्रमुख भूमिका पर सवाल उठती है। अगर ग्लोबल वार्मिंग जारी रहा तो यह संभव है कि पुनर्वनरोपण परियोजनाओं जैसे मौजूदा उपाय अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पायें.

वायुमंडलीय सीओ 2 (CO2) की कमी भी एक महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है।[7][8]

प्रागैतिहासिक उदाहरण[संपादित करें]

मरुस्थलीकरण एक ऐतिहासिक घटना है, दुनिया के विशालतम रेगिस्तान समय के लंबे अंतराल में प्राकृतिक प्रक्रिया के परस्पर प्रभाव से निर्मित हुए हैं। इन में से अधिकांश रेगिस्तान, इस समय के दौरान मानव गतिविधियों से अलग बढे और संकुचित हुए हैं। पॉलेओडेजर्टस (Paleodeserts) रेत के विशाल समुद्र हैं, जो अब वनस्पति की वजह से निष्क्रिय हो गए हैं, सहारा जैसे कुछ मूल रेगिस्तान वर्तमान हाशिये से आगे बढ़ रहे हैं। पश्चिमी एशिया में कई रेगिस्तान क्रीटेशस युग के उत्तरार्द्ध के दौरान प्रागैतिहासिक जातियों एवं उपजातियों की अधिक आबादी की वजह से बने हैं।In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}

दिनांकित जीवाश्म पराग इंगित करता है कि आज का सहारा रेगिस्तान उपजाऊ वृक्ष रहित बड़ा मैदान (सवाना)) और रेगिस्तान के बीच परिवर्तित हो रहा है। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि प्रागैतिहासिक रूप से रेगिस्तान के आगे बढ़ने और वापसी को वार्षिक वर्षा तय करती है, जबकि रेगिस्तान की बढ़ती मात्रा के उदाहरण की शुरुआत अत्यधिक चराई और वनों की कटाई जैसी मानव संचालित गतिविधियों की वजह से शुरू हुई।

वर्तमान और प्रागैतिहासिक मरुस्थलीकरण में एक मुख्य अंतर यह है कि प्रागैतिहासिक और भूगर्भिक समय के तराजू में बंजर जमीन की दर मानवीय प्रभाव के कारण बहुत अधिक है।In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}

ऐतिहासिक और वर्तमान मरुस्थलीकरण[संपादित करें]

2001 में उपग्रह से लिये गये एक चित्र में नीले रंग में प्रदर्शित वास्तविक झील, जिसका नाम लेक चैड है। 1960 के दशक से अब तक झील 95% सिकुड़ गई है।[9]

अधिक चराई और उस से कुछ कम पैमाने पर सूखे ने 1930 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में ग्रेट प्लेन्स के काफी हिस्सों को "डस्ट बाउल" में बदल दियाIn this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}. उस दौरान मैदानों की जनसंख्या के एक बड़े अंश ने अनुत्पादक भूमि से बचने के लिए अपने घरों को छोड़ दिया। बेहतर कृषि और जल प्रबंधन ने आपदा के प्रारंभिक विस्तार के पुनरावर्तन को रोका है, लेकिन वर्तमान में अल्प-विकसित देशों में मरुस्थलीकरण प्राथमिक घटना के साथ दसियों लाख लोगों को प्रभावित करता है।

मरुस्थलीकरण चीन के लोगों का गणराज्य के कई क्षेत्रों में व्यापक रूप से फेल हुआ है। आर्थिक कारणों की वजह से अधिक लोगों के वहां बसने से 1949 के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में वृद्धि हुई है। वहां पशुधन में वृद्धि हुई है जबकि चराई के लिए उपलब्ध भूमि की कमी हुई है। रिएसिअन और सिम्मेंटल जैसे यूरोपीय पशुओं, जिनमें चराई की अधिक तीव्रता होती है, के आयात ने मामलों को और बिगाड़ा है।In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}

कम विकसित देशों में काटने व जलानेकी प्रवृति तथा जीविका के लिए खेती के अन्य तरीकों के बढ़ने की वजह से मानव की अत्यधिक जनसंख्या उष्णकटिबंधीय नम जंगलों और उष्णकटिबंधीय शुष्क जंगलों के विनाश की और अग्रसर है। आम तौर पर बड़े पैमाने पर कटाव, मृदा पोषक तत्वों की कमी और कभी-कभी पूर्ण मरुस्थलीकरण वनों की कटाई की एक उत्तरकथा है। मेडागास्कर के केंद्रीय अधित्यका पठारपर इसके चरम परिणाम का उदाहरण देखा जा सकता है, जहां देश की कुल भूमि का लगभग सात प्रतिशत बंजर, अनुपजाऊ जमीन बन गया है।In this fever the lower back spine is paining so much. We should take a half of papaya 's leaf for Improvement of body platelets. I found that it is so effective in this fever & also we should try fruits with fiber as papaya apple. We should take 250ml of cowmilk in start of this fever. Hopefully that everyone try this &take response as well. }}

अधिक चराई ने केंद्रीय न्यू मेक्सिको की रियो पूएर्को बेसिन को पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे अधिक क्षरित घाटी बना दिया है और नदी की तलछट सामग्री में उच्च वृद्धि हुई है।[10] अधिक चराई चिली, इथियोपिया,मोरक्को और अन्य देशों के कुछ हिस्सों में भी मरुस्थलीकरण में योगदान कर रही है। अधिक चराई दक्षिण अफ्रीका के वाटरबर्ग मसिफ जैसे कुछ क्षेत्रों में भी एक मुद्दा है, हालांकि लगभग 1980 के बाद से मूल निवासियों और खेल के पुनर्वास पर कठोरता से बल दिया जा रहा है।

सहेल मरुस्थलीकरण का एक और उदाहरण है। सहेल में मरुस्थलीकरण के मुख्य कारण के रूप में काटने और जलाने की खेती को वर्णित किया गया है जिसमें आंधियों द्वारा असुरक्षित ऊपरी मिट्टी को हटाने से मिट्टी का अपकर्ष होता है। वर्षा में कटौती भी स्थानीय सदाबहार वृक्षों के विनाश का एक कारण है।[11] सहारा 48 किलोमीटर प्रति वर्ष की दर से दक्षिण की ओर बढ़ रहा है।[12]

वर्तमान में घाना[13] और नाइजीरिया मरुस्थलीकरण का अनुभव कर रहे है, जिसमें से बाद वाले में मरुस्थलीकरण प्रति वर्ष जमीन का लगभग 1,355-वर्ग-मील (3,510 कि.मी.) हिस्सा अपना बना लेता है। मध्य एशियाई देश कजाखस्तान, किर्गिस्तान, मंगोलिया ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान भी प्रभावित हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तानकी भूमि 80% से अधिक ज़मीन भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण का शिकार हो सकती है[14] कज़ाकस्तान में 1980 के बाद से लगभग आधी से अधिक कृषि योग्य को त्याग दिया गया है। कहा गया था 2002 में रेत के तूफानों ने ईरान में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के 124 गांवों में दफन कर दिया और उन्हें छोड़ने के लिए वाध्य होना पड़ा. लैटिन अमेरिका में, मेक्सिको और ब्राजील मरुस्थलीकरण से प्रभावित हैं।[15]

मरुस्थलीकरण का मुकाबला[संपादित करें]

संयुक्त अरब अमिरात के एक राजमार्ग में इकटठा होने वाली रेत को घटाने के लिए रेत घेरने के अलावा पेड़ों को भी लगाया जा रहा है।
नॉर्थ सहारा, ट्यूनीशिया में एंटी-सैंड ढालें.

मरुस्थलीकरण को जैव विविधता के लिए एक प्रमुख खतरे के रूप में जाना जाता है। कुछ देशों ने इसके प्रभाव का मुकाबला करने और विशेष रूप से खतरे में पड़ी वनस्पति और पशुवर्ग के संरक्षण के लिए जैव विविधता कार्य योजना विकसित की है।[16][17]

मरुस्थलीकरण की दर को कम करने के लिए कई प्रकार के तरीकों को आजमाया गया है, तथापि, अधिकांश उपाय रेत की गति का उपचार करते हैं और भूमि के परिवर्तित होने के मूल कारणों जैसे अधिक चराई, अस्थायी कृषि और वनों की कटाई पर काम नहीं करते. मरुस्थलीकरण के खतरे के तहत विकासशील देशों में, बहुत से स्थानीय लोगों का जलाने और खाना पकाने के लिए पेड़ों का उपयोग करना हैं, जो भूमि क्षरण की समस्या को बढाता है और अक्सर उनकी गरीबी में भी वृद्धि करता है। स्थानीय आबादी ने आगे ईंधन की आपूर्ति हासिल करने के लिए बचे हुए जंगलों पर और अधिक दबाव बना देती है; जो मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को और बढाता है।

तकनीक दो पहलुओं पर ध्यान देती है: पानी का प्रावधान (जैसे, पानी के पाइपों या लम्बी दूरी तक कुओं और गहन ऊर्जा प्रणालियों को शामिल कर) और मिट्टी के अति उर्वरीकरण को निश्चित कर.

मिट्टी को ठीक करने का कार्य अक्सर आश्रय पट्टी, लकड़ियों के ढेर और वातरोधकों के प्रयोग के माध्यम से किया जाता है। वातरोधक झाड़ियों और पेड़ों से बनाये जाते हैं और मृदा क्षरण तथा वाष्प वाष्पोत्सर्जन कम करने के लिए उनका इस्तेमाल किया जाता है। 1980 के दशक के मध्य से अफ्रीका के सहेल क्षेत्र में विकास एजेंसियों द्वारा उन्हें व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया गया। अर्द्ध-शुष्क कृषि भूमि पर पेट्रोलियम या नैनो मिट्टी (क्ले) का छिड़काव[18] एक अन्य तरीका है। यह अक्सर ऐसे क्षेत्रों में (जैसे,ईरान) में किया जाता है जहां पेट्रोलियम या नैनो मिट्टी आसानी से और सस्ते में प्राप्य है। दोनों मामलों में, यह सामग्री अंकुरों के नमी नुकसान को रोकने और उन्हें उड़ा दिए जाने से रोकने के लिए उन पर एक परत बना देती है।

कुछ मिट्टियां (जैसे चिकनी मिटटी), पानी की कमी के कारण छिद्रपूर्ण होने के बदले ठोस बन जाती हैं (जैसे रेतीली मिट्टियों के मामले में) अभी भी ज़ाई (zaï) या जुताई जैसी कुछ तकनीकों का फसलों के रोपण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।[19]

मिट्टी को समृद्ध बनाना और उसकी उर्वरता की बहाली का कार्य अक्सर पौधों द्वारा किया जाता है। इनमें से फलीदार पौधे जो हवा से नाइट्रोजन निकालते और इसे मिट्टी में बांधते है और अनाज, जौ, सेम तथा खजूर जैसे भोजन फसलें/पेड़ सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

जब किसी पुनर्वृक्षारोपण क्षेत्र के पास आवास की सम्भावना दिखाई देती है, जैविक अपशिष्ट सामग्री (खाद जैसे पहाड़ी बादाम के खोल, बांस, मुर्गियों के मल) से पायरोलिसिस इकाई द्वारा बायोचार या टेरा प्रेता नोवा बनाया जा सकता है। उच्च-मांग युक्त फसलों के लिए रोपण स्थान को समृद्ध करने में इस पदार्थ का इस्तेमाल किया जा सकता है।[20]

अंत में, पेड़ों के आधार के चारों ओर पत्थर जमा करना और कृत्रिम नाली-खुदाई जैसे कुछ अन्य उपाय भी फसल के बचने की स्थानीय सफलता की वृद्धि में सहायक हो सकते हैं पत्थरों के ढेर सुबह की ओस को इकट्ठा करने और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करते हैं। कृत्रिम नालियां वर्षा के जल को रोकने और हवा से उडाए हुए बीजों को पकड़ने के लिए खोदी जाती हैं।[21][22]

सौर चूल्हे ऊर्जा की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेड़ों को काटने की समस्या का समाधान हो सकते हैं और पर्यावरण पर दबाव को कम करने के लिए खाना पकाने के लिए कुशल लकड़ी जलाने वाले स्टोवों की वकालत की गयी है, तथापि, ये तकनीकें आम तौर पर उन्हीं क्षेत्रों में अत्यधिक महंगी हैं जहां इनकी जरूरत है।

जबकि मरुस्थलीकरण को समाचार मीडिया द्वारा कुछ प्रचार प्राप्त हुआ है, ज्यादातर लोग उत्पादक भूमि के पर्यावरण क्षरण और रेगिस्तान के विस्तार की सीमा से अनजान हैं। 1988 में रिडले नेल्सन ने बताया है कि मरुस्थलीकरण अवनति की एक सूक्ष्म और जटिल प्रक्रिया है।

स्थानीय स्तर पर, व्यक्ति और सरकारें अस्थायी तौर पर मरुस्थलीकरण पर पहले ही रोक लगा सकते हैं। पूरे मध्य पूर्व और अमेरिका में रेत बाड़ का उसी प्रकार उपयोग किया जाता है जैसे उत्तर में बर्फ बाड़ का उपयोग किया जाता है। क्षेत्र में प्रत्येक एक वर्ग मीटर पर भूसे की जाली लगाना भी सतह की हवा के वेग को कम करेगा। जाली के भीतर लगाए गए पेड़ और झाडियां तब तक भूसे द्वारा संरक्षित रहती हैं जब तक वे जड़ न पकड ले. हालांकि, कुछ अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि इन पेड़ों का रोपण क्षेत्र में जल की आपूर्ति कम कर देता है।[23] जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए कुछ पानी उपलब्ध है, वहां टीलों के हवा की ओर वाले भाग में नीचे के एक तिहाई क्षेत्र में लगायी गयी झाडियां टीले को स्थिर करती हैं। यह वनस्पति टीलों के आधार के निकट हवा के वेग को कम करती है और अधिकतर रेत को खिसकने से बचाती है। उच्च वेग युक्त हवाएं इसे टीले के ऊपर पहुंचा कर सामान कर देती हैं और इन चपटी सतहों पर पेड़ लगाये जा सकते हैं।

जजोबा वृक्षारोपण, जैसे कि वे जो यहां प्रदर्शित हैं, ने भारत के थार मरुस्थल में मरुस्थलीकरण के बढ़ते प्रभावों से लड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वातमय इलाकों में क्षरण और चलते टीलों को कम करने के लिए अक्सर मरुद्यानों और कृषि क्षेत्रों को ऊपर उल्लिखित तरीकों से पेड़ों की बाड़ लगाकर या घास की पट्टी द्वारा उन्हें संरक्षित किया जाता है। इसके अलावा, मरूद्यान जैसी छोटी परियोजनाओं में चराई पशुओं को खाद्य फसलों से दूर रखने के लिए अक्सर अपनी ज़मीन के टुकड़े पर कांटेदार झाड़ियां या अन्य बाधाओं को लगाकर उन्हें संरक्षित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, वे इस बाड़ के बाहर पानी उपलब्ध कराने के प्रावधान (जैसे, एक कुएं से,...) करते हैं वे मुख्यतः यात्रियों के जानवरों (जैसे ऊंट, ...) की सुविधा के लिए यह सेवा प्रदान करते हैं। घास की पट्टी के बीच से पार हो जाने वाली रेत को सम्बंधित पट्टी से 50 से 100 मीटर की दूरी पर वातरोधक के तौर पर लगाये गए पेड़ों की कतार में रोका जा सकता है। इस क्षेत्र को स्थिर करने के लिए मरूद्यान के अंदर भी बिखरे हुए पेड़ युक्त छोटे भूखंडों का प्रबंध किया जा सकता है। उत्तर-पूर्वी चीन में "रेतीली ज़मीन" - मानव गतिविधियों से बने रेगिस्तान को बचाने के लिए, बहुत बड़े पैमाने पर, एक "ग्रीन वाल ऑफ़ चाइना" बनाई गयी, जो अंततः 5,700 किलोमीटर से अधिक लंबाई में, लगभग चीन की विशाल दीवार की लम्बाई के बराबर फैलेगी,

एक अन्य तकनीक भी है, जो विवादास्पद है, इसमें भूमि के पुनर्वास के लिए पशुओं का उपयोग शामिल किया जाता है। यह इस तथ्य पर आधारित है कि विश्व के अधिकांश क्षेत्र जिनका गंभीर रूप से मरुस्थलीकरण हो चुका है, कभी घास के मैदान और इसी तरह के वातावरण (सहारा, संयुक्त राज्य अमेरिका के डस्ट बाउल सालों से प्रभावित क्षेत्र)[24] थे तथा कभी वहां के शाकाहारियों की बड़ी आबादी को समर्थित करते थे। पशुओं का उपयोग करके (जो एक वहन योग्य बाड़ के अन्दर एक निहित हों जिससे वे उस थान से इधर-उधर न भटकें) जिसमें घास और बीज विद्यमान हों, भूमि को प्रभावी ढंग से बहाल किया जा सकता है, यहां तक की सुरंगों के ढेर पार भी.[25] इसके अलावा, जो लोग पशुओं को रखते हैं और एक अर्द्ध घुमंतू जीवन शैली व्यतीत करते हैं (निश्चित घरों के बीच), जैसे खानाबदोश चरवाहे, उनकी इन क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण का सामना करने में उल्लेखनीय रूचि है।[26] उनके घरों के पास आश्रय पट्टी, वातरोधक, पेड़ों या नाइट्रोजन-को बाधने वाली फसलों को लगाने में इन लोगों का उपयोग करने से बहुत मदद मिलेगी.

सेनेगल से समन्वय के साथ, अफ्रीका ने अपनी निजी "ग्रीन वाल" परियोजना शुरू की है[27] . पेड़ों के लिए सेनेगल से जिबूती तक 15 किलोमीटर चौड़ी भूमि की पट्टी पर पेड़ लगाये जायेंगे. रेगिस्तान की प्रगति का मुकाबला करने के अतिरिक्त, इस परियोजना का उद्देश्य नई आर्थिक गतिविधियां उत्पन्न करना भी है, विशेष रूप से पेड़ अरबी गोंद के पेड़ों को धन्यवाद है।[28]

मौजूदा जल संसाधनों का कुशल उपयोग और नियंत्रण बंजर भूमि की गम्भीरता कम करने के लिए अन्य उपकरण हैं। भू-जल संसाधन पाने तथा शुष्क और अर्द्ध-शुष्क भूमि की सिंचाई के लिए अधिक प्रभावी तरीके विकसित करने के नए तरीके भी खोजे जा रहे हैं। रेगिस्तान के सुधार पर होने वाले अनुसंधान कमजोर मिट्टी के संरक्षण के लिए उचित फसल आवर्तन तलाश करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, यह समझने के लिए कि स्थानीय वातावरण में रेत को ज़माने वाले पौधों को कैसे अनुकूलित किया जा सकता है और अधिक चराई से कैसे निपटा जा सकता है हवाई मार्ग से वितरित पुनः-वनरोपण और कटाव नियंत्रण पद्धति रेगिस्तान स्थिरीकरण और पुनः नवीकरण युक्त ऊर्जा के संयोजन का एक प्रस्ताव है।[29]

वास्तुकला छात्र मग्नस लार्सन ने अपनी अफ्रीका, मध्य एशिया क्षेत्र पर आधारित अपनी परियोजना "ड्यून मरुस्थलीकरण विरोधी वास्तुकला, सोकोटो, नाइजीरिया" के लिए 2008 होल्सिम अवार्ड का प्रथम पुरस्कार "नेक्स्ट जेनरेशन" हासिल किया और अपनी एक डिज़ाइन जिसमें उसने एक रहने योग्य दीवार पर सूक्ष्म जीवों जैसे कि बैक्टीरिया बैसीलस पेसचुरी का प्रयोग किया जो बालू का घनीकरण करने का सामर्थ्य हो। [30] लार्सन ने यह डिज़ाइन टेड (TED) में भी प्रस्तुत की। [31]

शमन[संपादित करें]

पुनर्वनरोपण मरुस्थलीकरण के एक मूल कारण का हल हो सकता है, उन लक्षणों का इलाज नहीं है। पर्यावरण संगठन[32] वहां काम कर रहे हैं जहां वनों की कटाई और मरुस्थलीकरण की वजह से अत्यंत गरीबी फैल रही है। वहां वे मुख्य रूप से वनों की कटाई के खतरों के बारे में स्थानीय आबादी को शिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं और कभी-कभी उन्हें अंकुरण के काम में लगा देते हैं जिन्हें वे बरसात के मौसम के दौरान गंभीर वनोन्मूलक क्षेत्रों में स्थानांतरित कर देते हैं।

मिट्टी के बहाव और रेत के कटाव को रोकने में रेत के बाड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

हाल ही में हुए विकास में सीवाटर ग्रीनहाउस और सीवाटर फॉरेस्ट शामिल है। यह प्रस्ताव तटीय रेगिस्तानों में इन उपकरणों को बनाकर वहां पेय जल तैयार करने और खाद्यान्न उगाने के लिए पारित किया गया है[33] ठीक इसी तरीके से डेज़र्ट रोज़ अवधारणा भी तैयार की गयी है।[34] चूंकि बड़ी मात्रा में अंतर्देशीय समुद्री जल की पम्पिंग की सापेक्ष लागत कम है अतः इन तरीकों की व्यापक प्रयोज्यता हैं।[35]

एक अन्य संबंधित अवधारणा एडीआरईसीएस (ADRECS) है - एक प्रणाली जो अक्षय ऊर्जा उत्पादन और और युग्मित वनरोपण तकनीक के साथ मिलकर तेजी से मिट्टी के स्थिरीकरण के लिए काम कर सकती है।[36]

मरुस्थलीकरण और गरीबी[संपादित करें]

अनगिनत लेखकों ने मरुस्थलीकरण और गरीबी के बीच की मजबूत कड़ी को रेखांकित किया है। शुष्क क्षेत्रों की आबादी में गरीब लोगों का अनुपात अधिक है, विशेषकर, ग्रामीण आबादी के बीच में. यह स्थिति उत्पादकता में कमी और अभी तक रहने की स्थिति में अस्थिरता, संसाधनों और अवसरों के उपयोग में कठिनाई का सामना करने की वजह से भूमि क्षरण को और बढ़ावा देती है।[37]

कई अविकसित देशों में अत्यधिक चराई, भूमि क्षरण और भूमिगत जल के अधिक इस्तेमाल की वजह से विश्व के कम उत्पादक क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या का दबाव बढ़ने से हाशिये पर स्थित शुष्क भूमियों का इस्तेमाल खेती के लिए किया जाने लगा। निर्णय-कर्ता शुष्क क्षेत्रों और कम क्षमता वाले इलाकों में निवेश करने में काफी विरोध जाहिर कर रहे हैं। निवेश का अभाव इन क्षेत्रों को हाशिये पर पहुँचाने में योगदान कर्ता है। जब कृषि प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियां, बाजारों में पहुंच और बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति के साथ ही उत्पादन तकनीकों के ख़राब अनुकूलन और एक और अल्पपोषित, अल्प-शिक्षित जनसंख्या से मिल जाती हैं तब ऐसे अधिकांश क्षेत्र विकास की सीमा से बाहर रह जाते हैं।[6]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • रेगिस्तान की हरियाली
  • शुष्क भूमि सूचना नेटवर्क
  • एरिडीफिकेशन
  • जंगलों की कटाई
  • पर्यावरण इंजीनियरिंग
  • ग्लोबल वॉर्मिंग
  • ओसीफिकेशन
  • मरुस्थलीकरण का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ सम्मेलन
  • जल संकट

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. निक मिडेलटन और डेविड थॉमस, वर्ल्ड एटलस ऑफ़ डिसर्टिफिकेशन : द्वितीय संस्करण, 1997
  2. इ. ओ. विल्सन, द फ्यूचर ऑफ़ लाइफ, 2001
  3. एमेज़न रेनफॉरेस्ट 'कुड बिकम अ डेज़र्ट' ... इज ऑन द ब्रिंक ऑफ़ बीइंग टर्न्ड इनटू डेज़र्ट. द इंडीपेंडेंट, 23 जुलाई 2006. 9 जनवरी 2010 को पुनःप्राप्त.
  4. डाइंग फौरेस्ट: वन इयर टू सेव द एमेज़न ... कुड टिप द होल वास्ट फॉरेस्ट इनटू अ साइकल ऑफ़ डिस्ट्रक्शन. द इंडीपेंडेंट, 23 जुलाई 2006. 9 जनवरी 2010 को पुनःप्राप्त.
  5. क्लाइमेट 'टिपिंग पॉइंट' नियर ... अनलीश डिवास्टेटिंग इन्वाइरन्मेन्टल, सोशल एंड इकोनॉमिक चेंजेस. प्रकृति के लिए वर्ल्ड वाइड फंड, 23 नवम्बर 2009. 9 जनवरी 2010 को पुनःप्राप्त.
  6. कॉर्नेट ए., 2002.पर्यावरण और विकास के लिए मरुस्थलीकरण और उसके संबंध: एक समस्या जो हम सभी को प्रभावित करता है। इन: Ministère des Affaires étrangères/adpf, जोहानसबर्ग. सतत विकास पर विश्व सम्मेलन. 2002. क्या दांव पर है? बहस पर वैज्ञानिकों का योगदान: 91-125..
  7. http://cat.inist.fr/?aModele=afficheN&cpsidt=1092496
  8. "Greenhouse gas soaked up by forests expanding into deserts". The Independent (London). 2003-05-12. http://www.independent.co.uk/environment/greenhouse-gas-soaked-up-by-forests-expanding-into-deserts-590417.html. अभिगमन तिथि: 2010-05-01. 
  9. श्रिंकिंग अफ्रीकन लेक ऑफर्स लेसन ऑन फाइनाइट रिसोर्सेस
  10. "डिसर्टिफिकेशन", संयुक्त राज्य अमेरिका भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (1997)
  11. "डिसर्टिफिकेशन - अ थ्रेट टू द साहेल". अगस्त 1994
  12. अफ्रीका में भूख फैल रहा है
  13. "घाना: थ्रेट्स ऑफ़ डिसर्टिफिकेशन मस्ट बी टेकेन सीरियसली", पब्लिक अजेंडा (allAfrica.com), 21 मई 2007.
  14. अफगानिस्तान: इन्वाइरन्मेन्टल क्राइसिस लूम्स एस कनफ्लिक्ट गोज़ ऑन
  15. लेस्टर आर. ब्राउन, "द अर्थ इज श्रिंगकिंग: एड्वांसिंग देज़र्ट्स एंड राइसिंग सीज़ स्क्विज़िंग सिवीलाइजेशन", अर्थ पॉलिसी इंस्टीट्युट, 15 नवम्बर 2006.
  16. एंड्रयू एस. गुडी द्वारा मरुस्थल उद्धार के लिए तकनीक
  17. मरुस्थल उद्धार के लिए परियोजना
  18. नैनो क्ले
  19. एरिड सैंडी सोयेल्स बिकमिंग कॉन्सोलीडेटेड: जाई-सिस्टम
  20. एनजीसी (NGC) हमारा अच्छा पृथ्वी
  21. कीटा आईडी (ID) प्रोजेक्ट डिचेस
  22. मरुस्थलीकरण के खिलाफ नाली बनाना
  23. पेड़ उग कर रेगिस्तान बना सकते हैं - पृथ्वी - 29 जुलाई 2005 - न्यू साइंटिस्ट
  24. http://managingwholes.com/desertification.htm
  25. http://www.ecoresults.org/success_tiptons.html
  26. नोमैदिक पैटर लिस्ट्स एंड रिफॉरेसट्रेशन
  27. अफ्रीका में नवीकरणीय ऊर्जा पर इंटरनेशनल कॉन्फेरेन्स का आईआईएसडी (IISD) आरएस (RS) सारांश - 16-18 अप्रैल 2008 - डाकर, सेनेगाल
  28. एफएओ (FAO)
  29. [ADRECS - Aerially Delivered Reforestation and Erosion Control
  30. होलसिम अवार्ड्स 2008 अफ्रीका मिडिल ईस्ट "न्यू जेनेरेशन" प्रथम पुरस्कार: द्युन एंटी-डिसर्टिफिकेशन आर्किटेक्ट, सोकोटो, नाइजीरिया, होलसिम अवार्ड्स. 20 फ़रवरी 2010 को पुनःप्राप्त.
  31. मैग्नस लार्सन: द्युन वास्तुकार, TED.com. 20 फ़रवरी 2010 को पुनःप्राप्त.
  32. उदाहरण के लिए, एडेन रिफॉरेसट्रेशन प्रोजेक्ट्स.
  33. द सहारा प्रोजेक्ट मीठे पानी खाद्य और ऊर्जा के नया स्रोत
  34. डेज़र्ट रोज़ - क्लैवर्टन ग्रुप एनर्जी कॉन्फेरेन्स, बाथ अक्टूबर 2008
  35. http://www.claverton-energy.com/pipe-headloss-power-calculator-calculate-how-much-energy-to-pump-seawater-to-the-middle-of-the-sahara-or-gobi-desert-for-desalination-in-the-seawater-greenhouse-answer-not-a-lot.html क्लैवर्टन एनेर्जी ग्रुप आर्टिकल
  36. http://www.claverton-energy.com/?dl_id=138
  37. डोबी, पीएच. (Ph) 2001. "पॉवर्टी एंड द ड्राईलैंड्स," इन ग्लोबल ड्राईलैंड्स इंपेर्टिव, चैलेन्ज पेपर, यूएनडीपी (Undp), नैरोबी (केन्या) 16 पृष्ठ.

ग्रंथ सूची[संपादित करें]

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  • बेंजामिंसन, टौर ए. और गंवोर बर्ज (2000). टिम्बकटू: माइटर, मेनेसके, मिल्जो (miljø). ओस्लो: स्पार्टेकस फॉरलैग
  • लकी, बर्न्हर्ड (2007): डेमाईस ऑफ़ द डेकापोलिस. मिट्टी विकास, भूमि उपयोग और जलवायु के अतीत और वर्तमान बंजर में संदर्भ. [1] पर ऑनलाइन
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  • गीस्ट, हेल्मुट (2005) द कॉसेस एंड प्रोग्रेशन ऑफ़ डिसर्टिफिकेशन, एबिंगडन: एश्गेट
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  • होल्ट्ज़, युव: इम्प्लीमेंटिंग द युनाइटेड नेशन कन्वेंशन टू कॉम्बैट डिसर्टिफिकेशन फ्रॉम अ पार्लियेमेंट्री पॉइंट ऑफ़ व्यू - क्रिटिकल असेसमेंट एंड चैलेंजेस अहेड, बौन 2007, इन: http://www.unccd.int/cop/cop8/docs/parl-disc.pdf

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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