प्राकृतिक संसाधन

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मर्कुएसस द्वीप में स्थित फतु-हिवा के वर्षावन एक अछूते प्राकृतिक संसाधन का उदाहरण है।

प्राकृतिक संसाधन वे संसाधन हैं जो मानव जाति के कार्यों के बिना मौजूद हैं। दूसरे शब्दों में वो प्राकृतिक पदार्थ, जो अपने अपक्षक्रित मूल प्राकृतिक रूप में मूल्यवान माने जाते हैं, उन्हें प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। इन सभी मूल्यवान संसाधनों के विशेषताओं में चुम्बकीय, गुरुत्वीय, विद्युतीय गुण या बल आदि शामिल हैं। पृथ्वी में सूर्य के प्रकाश, वायुमंडल, जल, थल (सभी खनिजों सहित) के साथ साथ सारे सब्जियों, फसल और पशुओं के जीवन से प्राकृतिक रूप से प्राप्त पदार्थ आदि प्राकृतिक संसाधनों के सूची में शामिल हैं। एक प्राकृतिक संसाधन का मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि कितना पदार्थ उपलब्ध है और उसकी माँग कितनी है।

प्रकार[संपादित करें]

प्राकृतिक संसाधनों को दो अलग अलग प्रकारों में बांटा गया है। यह प्रकार उन संसाधनों के दोबारा प्राप्त करने में लगने वाली प्रक्रिया, समय और आवश्यकताओं के अनुसार हैं। ऐसे सारे संसाधन जिसे मानव द्वारा दोबारा प्राप्त करने में हजारों-लाखों साल का समय लगता है या इतनी अधिक तापमान या दबाव की आवश्यकता होती है कि उसे पृथ्वी में मानव द्वारा पूर्ति असंभव है, आदि को अनवीकरणीय संसाधन की संज्ञा दी गई है और मानव द्वारा पुनः प्राप्त किए जाने लायक संसाधनों को नवीकरणीय संसाधन की श्रेणी में रखा गया है।

नवीकरणीय संसाधन[संपादित करें]

इनमें ऐसे प्राकृतिक संसाधन आते हैं, जिन्हें मानव द्वारा पुनः प्राप्त किया जा सकता है।

अनवीकरणीय संसाधन[संपादित करें]

पृथ्वी में ऐसे कई प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, जिन्हें प्राकृतिक रूप से बनने में हजारों-लाखों वर्षों का समय, अत्यधिक दवाब और तापमान लगा था। किसी मानव हेतु ऐसे संसाधनों के निर्माण हेतु हजारों वर्षों का समय दे पाना संभव नहीं है। इसके अलावा इसमें लगने वाला उच्च दवाब एवं उच्च तापमान उपलब्ध करा पाना भी संभव नहीं है। इस कारण ऐसे संसाधनों का मानव द्वारा पुनर्निर्माण संभव नहीं है। इस कारण ऐसे संसाधनों को अनवीकरणीय संसाधन कहते हैं। इनमें कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस आदि आते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]