सूर्यवंश

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सूर्यवंशी भगवान राम

सूर्यवंश/इक्ष्वाकुवंश/अर्कवंश/रघुवंश पुराणों के अनुसार प्राचीन भारतवर्ष के भगवान श्रीराम इसी कुल मे अवतरित हुए थे । ऐतिहासिक दृष्टि से सूर्यवंश, सत्य, चरित्र, वचनपालन, त्याग, तप व शौर्य का प्रतीक रहा है । भगवान सूर्य के परम तेजस्वी पुत्र वैवस्वत मनु से प्रारम्भ हुआ यह वंश सूर्यवंश कहलाता है । पुराणों वेदों ग्रंथो में भगवान सूर्य के पुत्र को 'अर्क तनय' नाम से सम्बोधित किया गया है । इन्हीं वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु से सूर्यवंश का विस्तार हुआ था । अतः सूर्यवंश को इक्ष्वाकुवंश भी कहा जाता है । अयोध्या के सूर्यवंश (इक्ष्वाकुवंश) में रघु नामक राजा हुये थे । उन्हीं सम्राट रघु का वंश रघुवंश या रघुकुल कहलाता है । इस प्रकार यह एकमात्र ऐसा क्षत्रिय वंश है जो सूर्यवंश, इक्ष्वाकुवंश,अर्कवंश व रघुवंश इन तीनों नामों से जाना जाता है ।

सूर्यवंशी राजाओं की सूची[संपादित करें]

विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु हुए जिनसे सूर्यवंश का आरम्भ हुआ।

  1. वैवस्वत मनु
  2. नभग
  3. नाभाग
  4. अम्बरीष
  5. विरुप
  6. पृषदश्व
  7. रथीतर
  8. इक्ष्वाकु
  9. कुक्षी / विकुक्षी
  10. काकुत्स्थ या पुरंजय
  11. अनना
  12. पृथ्वी
  13. विश्वगाशव
  14. अर्ध या चंद्र
  15. युवनाश्व प्रथम
  16. श्रावस्त
  17. वृहदश्रवा
  18. युवनाश्व द्वितीय
  19. मंधात्री
  20. पुरुकुत्स प्रथम
  21. कुवलाश्व
  22. द्रुधश्रवा
  23. प्रमोद
  24. हर्षव I
  25. निकुंभ
  26. संताश्व
  27. कृषस्व
  28. प्रसेनजित
  29. त्रसदस्यु
  30. सांभर
  31. अनारन्य II
  32. तृषाश्रव
  33. हर्षव II
  34. वसुमन
  35. त्रिदेव
  36. त्र्यारुन
  37. सत्यव्रत या त्रिशंकु
  38. हरिश्चंद्र
  39. रोहिताश्व
  40. हरिता
  41. चेंचू
  42. विजय
  43. रसक
  44. वर्णिक
  45. बहू या असित
  46. सगर
  47. अस्मानजसा या आसमांजा]
  48. अंशुमान
  49. दिलीप I
  50. भगीरथ
  51. श्रुत
  52. नभ
  53. अंबरीष
  54. सिंधु स्वीप
  55. प्रत्यूष
  56. श्रुतस्वरूप
  57. सर्वकाम
  58. सुदास
  59. मित्रशाह
  60. सर्ववाक्य II
  61. अन्नारायण तृतीय
  62. निघासन
  63. अनिमित्र (रघु का भाई)
  64. दुलिदुह
  65. दिलीप II
  66. रघु
  67. अजा
  68. दशरथ
  69. राम
  70. कुश
  71. महाराजा अथिती
  72. निषाद (स्थापित निषाद साम्राज्य)
  73. नाल II
  74. नभ
  75. पुंडरीका
  76. क्षेमधनव
  77. देविका
  78. अहिनगु
  79. रुरु
  80. परियात्रा
  81. साल
  82. डाल
  83. बाल
  84. उक्त
  85. सहस्रस्व
  86. पैरा II
  87. चंद्रावलोक
  88. तारापीड
  89. चंद्रगिरी
  90. भानुचंद्र
  91. श्रुतायु
  92. उलुक
  93. उन्नाव
  94. वज्रनाभ
  95. सांख्य
  96. व्यासत्सव
  97. विश्वसाह
  98. हिरण्यनाभ कौशल्या
  99. पैरा III (अतनारा)
  100. ब्रह्मिष्ठा
  101. पुतर
  102. पूसी
  103. अर्थसिद्धि
  104. ध्रुवसंधि
  105. सुदर्शन
  106. अग्निवर्ण
  107. सिघरागा
  108. मारू
  109. परसुत्रुता
  110. सुसंधी
  111. अमरसाना
  112. महास्वण
  113. सहसवान
  114. विसृत्त्वं
  115. विश्वम्भर
  116. विश्वश्रवा
  117. नागनजीत
  118. तक्षका
  119. बृहदबाला
  120. बृहदक्षय (या ब्रूद्रुणम)
  121. उरुक्रीय (या गुरुक्षेत्र)
  122. वत्सव्यूह
  123. प्रतियोविमा
  124. भानु
  125. दिवाकर (या दिवाक)
  126. वीर सहदेव
  127. बृहदश्व II
  128. भानुराठ (या भानुमान)
  129. प्रतिमाव
  130. सुप्रिक
  131. मरुदेव
  132. सूर्यक्षेत्र
  133. पुष्कर (या किन्नरा)
  134. अंतरीक्ष
  135. सुवर्णा (या सुताप)
  136. सुमित्रा (या अमितराजित)
  137. ब्रुहदराज (ओक्काका)
  138. बरही (ओक्कामुखा)
  139. कृतांजय (सिविसमंजया)
  140. रणजय्या (सिहसारा)
  141. संजय (महाकोशल या जयसेना)
  142. शाक्य (सिहानू)
  143. शुधोधन (कपिलवस्तु के शाक्य गणराज्य के शासक)
  144. सिद्धार्थ शाक्य (या गौतम बुद्ध, शुधोधन के पुत्र
  145. राहुल (गौतम बुद्ध के एकमात्र पुत्र)
  146. प्रसेनजित
  147. कुशद्रका (या कुंतल)
  148. रानाक (या कुलका)
  149. सूरत
  150. सुमित्र

राजा सुमित्र सूर्यवंश के अंतिम शासक थे, (इनके बेटे का नाम कूर्म था) इनके वंसज अवधिये नाम से बिहार में है। जिन्हें 362 ईसा पूर्व में मगध के सम्राट महापद्म नंद ने हराया था। हालांकि, वह मारे नहीं गए थे और वर्तमान बिहार स्थित रोहतास भाग गयेे थे। [1][2][3]

स्रोत[संपादित करें]

सूर्य वंश की 11 शाखायें:-[संपादित करें]

१. गहलोत/सिसोदिया २. राठौड ३. बडगूजर/सिकरवार ४. कछवाह ५. दिक्खित ६. गौर ७. गहरवार ८. डोगरा ९.बल्ला १०.वैस ११.महरौड़

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Valmiki Ramayana, Volume 3.
  2. Misra, V.S. (2007). Ancient Indian Dynasties, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, ISBN 81-7276-413-8, pp.283-8, 384
  3. History Of Ancient India ISBN 81-269-0616-2 vol II [1]
  4. पर्गिटर, एफ॰ई॰ (1922.). Ancient Indian Historical Tradition [प्राचीन भारतीय एतिहासिक परम्परा] (अंग्रेज़ी में). ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस. पपृ॰ 90–91. |year= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  5. भगवना, सत्य साई बाबा (2002). Ramakatha Rasavahini [रामकथा रसवाहिनी] (अंग्रेज़ी में). प्रसंती निलयम: श्री सत्य साइ बुक्स एण्ड पब्लिकेशन्स ट्रस्ट. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7208-132-4.
  6. वाल्मीकि, अर्शिया सत्तर द्वारा अनूदित (1996). The Ramayana [द रामायण] (अंग्रेज़ी में). नई दिल्ली: पेंगुइन बुक्स. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-14-029866-5.