सामग्री पर जाएँ

कैकेयी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
कैकेयी

माता कैकेई , केकेय देश के राजा अश्वपति और शुभलक्षणा की कन्या एवं कोसलनरेश दशरथ की कनिष्ठ किंतु अत्यंत प्रिय पत्नी थी। इनके गर्भ से भरत जी का जन्म हुआ था। जब राजा दशरथ देवदानव युद्ध में देवताओं के सहायतार्थ गए थे तब मत कैकेई भी उनके साथ गई थीं। युद्ध में दशरथ जी के रथ का धुरा टूट गया उस समय माता कैकेई ने धुरे में अपना हाथ की उंगली लगाकर रथ को टूटने से बचाया और दशरथ जी युद्ध करते रहे। युद्ध समाप्त होने पर जब दशरथ जाई को इस बात का पता लगा, तो प्रसन्न होकर माता कैकेई को दो वर माँगने के लिए कहा। माता कैकेयी ने उसे यथासमय माँगने के लिए रख छोड़ा। जब भगवान राम को युवराज बनाने की चर्चा उठी तब मंथरा नाम की दासी के बहकावे मे आकर माता कैकेई ने दशरथ से अपने उन दो वरों के रूप में रामजी के लिए १४ वर्ष का वनवास और भरतजी के लिए राज्य की माँग की। रामजी वन को गए पर भरतजी ने राज्य ग्रहण करना स्वीकार नहीं किया, माता की भर्त्सना की और राम को लौटा लाने के लिए वन गए। उस समय माता कैकेई भी उनके साथ गई।