कैकेयी

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कैकेयी

कैकेयी सामान्य अर्थ में 'केकय देश की राजकुमारी'। तदनुसार महाभारत में सार्वभौम की पत्नी, जयत्सेन की माता सुनंदा को कैकेयी कहा गया है। इसी प्रकार परीक्षित के पुत्र भीमसेन की पत्नी, प्रतिश्रवा की माता कुमारी को भी कैकेयी नाम दिया गया है।

किन्तु रूढ़ एवं अति प्रचलित रूप में ' कैकेयी ' केकेय देश के राजा अश्वपति और शुभलक्षणा की कन्या एवं कोसलनरेश दशरथ की कनिष्ठ किंतु अत्यंत प्रिय पत्नी का नाम है। इसके गर्भ से भरत का जन्म हुआ था। जब राजा दशरथ देवदानव युद्ध में देवताओं के सहायतार्थ गए थे तब कैकेयी भी उनके साथ गई थी। युद्ध में दशरथ के रथ का धुरा टूट गया उस समय कैकेयी ने धुरे में अपना हाथ लगाकर रथ को टूटने से बचाया और दशरथ युद्ध करते रहे। युद्ध समाप्त होने पर जब दशरथ की इस बात का पता लगा तो प्रसन्न होकर कैकेयी को दो वर माँगने के लिए कहा। कैकेयी ने उसे यथासमय माँगने के लिये रख छोड़ा। जब राम को युवराज बनाने की चर्चा उठी तब मंथरा नाम की दासी के बहकावे मे आकर कैकेयी ने दशरथ से अपने उन दो वरों के रूप में राम के लिये १४ वर्ष का वनवास और भरत के लिये राज्य की माँग की। कैकेयी के वरदान मांगने से श्री राम की टली,क्योंकि वह जानती थी कि राजा दशरथ की मृत्यु पुत्र विलाप में होगी और उसके सिर्फ दो ही तरीके है यक तो राम जी की मृत्यु या उनका वनवास। तदनुसार राम वन को गए पर भरत ने राज्य ग्रहण करना स्वीकार नहीं किया, माता की भर्त्सना की और राम को लौटा लाने के लिये वन गए। उस समय कैकेयी भी उनके साथ गई।

एक अनुश्रुति यह भी है कि केकयनरेश ने दशरथ के साथ कैकेयी का विवाह करते समय दशरथ से वचन लिया था कि उनका दौहित्र, कैकेयी का पुत्र राज्य का अधिकारी होगा।