चण्डीगढ़

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चण्डीगढ़
Chandigarh
शहर और केन्द्र-शासित प्रदेश
Skyline of चण्डीगढ़ Chandigarh
Location of चण्डीगढ़ Chandigarh
देशभारत
जनसंख्या (2011)[1][2]
 • उचित शहर9,61,587
 • महानगर10,25,682
भाषा[3]
 • राजभाषाअंग्रेज़ी
 • अतिरिक्त राजभाषा
समय मण्डलआइएसटी (यूटीसी+5:30)
वेबसाइटwww.chandigarh.nic.in

चण्डीगढ़, (पंजाबी: ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ), भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है, जो दो भारतीय राज्यों, पंजाब और हरियाणा की राजधानी भी है। इसके नाम का अर्थ है चण्डी का किला। यह हिन्दू देवी दुर्गा के एक रूप चण्डिका या चण्डी के एक मंदिर के कारण पड़ा है। यह मंदिर आज भी शहर में स्थित है।[4] इसे सिटी ब्यूटीफुल भी कहा जाता है। चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र में मोहाली, पंचकुला और ज़ीरकपुर आते हैं, जिनकी २००१ की जनगणना के अनुसार जनसंख्या ११६५१११ (१ करोड़ १६ लाख) है। भारत की लोकसभा में प्रतिनिधित्व हेतु चण्डीगढ़ के लिए एक सीट आवण्टित है। वर्तमान सोलहवीं लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी की श्रीमति किरण खेर यहाँ से साँसद हैं।[5] चण्डीगढ मे सेक्टर १३ नाम से कोइ सेक्टर नही है क्योंकि चण्डीगढ शहर के शिल्पकार ली कार्बूजियर इस अंक को अशुभ मानते थे।

इस शहर का नामकरण दुर्गा के एक रूप ‘चंडिका’ के कारण हुआ है और चंडी का मंदिर आज भी इस शहर की धार्मिक पहचान है।[6] इस शहर के निर्माण में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भी निजी रुचि रही है, जिन्होंने नए राष्ट्र के आधुनिक प्रगतिशील दृष्टिकोण के रूप में चंडीगढ़ को देखते हुए इसे राष्ट्र के भविष्य में विश्वास का प्रतीक बताया था।[6]

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शहरी योजनाबद्धता और वास्तु-स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध यह शहर आधुनिक भारत का प्रथम योजनाबद्ध शहर है।[7] चंडीगढ़ के मुख्य वास्तुकार फ्रांसीसी वास्तुकार ली कार्बूजियर हैं, लेकिन शहर में पियरे जिएन्नरेट, मैथ्यु नोविकी एवं अल्बर्ट मेयर के बहुत से अद्भुत वास्तु नमूने देखे जा सकते हैं। शहर का भारत के समृद्ध राज्यों और संघ शसित प्रदेशों की सूची में अग्रणी नाम आता है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय ९९,२६२ रु (वर्तमान मूल्य अनुसार) एवं स्थिर मूल्य अनुसार ७०,३६१ (२००६-०७) रु है।[8]

इतिहास[संपादित करें]

शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक हिन्दू मंदिर

ब्रिटिश भारत के विभाजन उपरांत १९४७ में पंजाब राज्य को भारत और पाकिस्तान में दो भागों में बाँट दिया गया था। इसके साथ ही राज्य की पुरानी राजधानी लाहौर पाकिस्तान के भाग में चली गयी थी। अब भारतीय पंजाब को एक नयी राजधानी की आवश्यकता पड़ी। पूर्व स्थित शहरों को राजधानी बदलने में आने वाली बहुत सी कठिनाईयों के फलस्वरूप एक नये योजनाबद्ध राजधानी शहर की स्थापना का निश्चय किया गया तथा १९५२ में इस शहर की नींव रखी गई।[9]

उस समय में भारत में चल रही बहुत सी नवीन शहर योजनाओं में चंडीगढ़ को प्राथमिकता मिली जिसका मुख्य कारण एक तो नगर की स्थिति और दूसरा कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु तथा राज्यपाल सर सी पी एन ( चन्देश्वर प्रसाद नारायण सिंह )का निजी रुचि का होना था ।राष्ट्र के आधुनिक प्रगतिशील दृष्टिकोण के रूप में चंडीगढ़ को देखते हुए उन्होंने शहर को अतीत की परंपराओं से उन्मुक्त, राष्ट्र के भविष्य में विश्वास का प्रतीक बताया। शहर के बहुत से खाके व इमारतों की वास्तु रचना फ्रांस में जन्में स्विस वास्तुकार व नगर-नियोजक ली कार्बुज़िए ने १९५० के दशक में की थी। कार्बुज़िए भी असल में शहर के द्वितीय वास्तुकार थे, जिसका मूल मास्टर प्लान अमरीकी वास्तुकार-नियोजक अल्बर्ट मेयर ने तब बनाया था, जब वे पोलैंड में जन्मे वास्तुकार मैथ्यु नोविकी के संग कार्यरत थे। १९५० में नोविकी की असामयिक मृत्यु के चलते कार्बूजियर को परियोजना में स्थान मिला था।

१ नवंबर, १९६६ को पंजाब के हिन्दी-भाषी पूर्वी भाग को काटकर हरियाणा राज्य का गठन किया गया, जबकि पंजाबी-भाषी पश्चिमी भाग को वर्तमान पंजाब ही रहने दिया था। चंडीगढ़ शहर दोनों के बीच सीमा पर स्थित था, जिसे दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी के रूप में घोषित किया गया और साथ ही संघ शासित क्षेत्र भी घोषित किया गया था। १९५२ से १९६६ तक ये शहर मात्र पंजाब की राजधानी रहा था।[10] अगस्त १९८५ में तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच हुए समझौते के अनुसार, चंडीगढ़ को १९८६ में पंजाब में स्थानांतरित होना तय हुआ था। इसके साथ ही हरियाणा के लिए एक नयी राजधानी का सृजन भी होना था, किन्तु कुछ प्रशासनिक कारणों के चलते इस स्थानांतरण में विलंब हुआ। इस विलंब के मुख्य कारणों में दक्षिणी पंजाब के कुछ हिन्दी-भाषी गाँवों को हरियाणा और पश्चिम हरियाणा के पंजाबी-भाषी गाँवों को पंजाब को देने का विवाद था।

१५ जुलाई २००७ को चंडीगढ़ प्रथम भारतीय गैर-धूम्रपान क्षेत्र घोषित हुआ। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध है और चंडीगढ़ प्रशासन के नियमों के तहत दंडनीय अपराध है।[11] इसका बाद २ अक्टूबर २००८ को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म-दिवस पर शहर में पॉलीथीन की थैलियों के प्रयोग पर पूर्ण निषेध लागू हो गया।[12] नए चंडीगढ़, चंडीगढ़, [2] [3] के आसपास Mullanpur Garibdass के शहर के पास स्थित एक नए समाधान की पंजाब की पहली 'स्मार्ट शहर के रूप में"डिज़ाइन किया गया है। [4] [5]

पहला इको सिटी के पंजाब [संपादित करें] GMADA, ग्रेटर मोहाली क्षेत्र के स्थानीय योजना प्राधिकरण Mullanpur पहली पारिस्थितिकी & स्मार्ट सिटी पंजाब के रूप में घोषित किया था। [6] Mullanpur नए चंडीगढ़ का हिस्सा होगा। नए चंडीगढ़ के 32 गांवों से बना हो जाएगा। इस शहर का पहला चरण पहले से ही घोषित किया गया है और भूमि अधिग्रहण और प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कई पार्कों और पर्यटन स्थल की मेजबानी करेगा। शहर के मास्टर प्लान सिंगापुर स्थित कंपनी द्वारा Jurong अंतर्राष्ट्रीय तैयार है। यह शहर मुख्य रूप से आवासीय शहर उच्च रहने के साथ के रूप में होगा। यह शहर सूचना प्रौद्योगिकी और अस्पतालों की तरह nonpolluting उद्योगों की मेजबानी करेगा। कुछ सॉफ्टवेयर कंपनियों यहाँ देश पहले से ही खरीदा है।

प्रमुख खिलाड़ी GMADA, जो पहले से ही भूमि अधिग्रहण और प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दिया है, इसके अलावा कई निजी खिलाड़ी हैं।

डीएलएफ एक 1,000 एकड़ बस्ती ऊपर सेट करने के लिए योजना बना रहा है। कंपनी पहले चरण के लिए 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है; दूसरे चरण के लिए अधिग्रहण शीघ्र ही शुरू हो जाएगा। यूनिटेक समूह और Altus अंतरिक्ष बिल्डर्स भी आवासीय टाउनशिप विकसित कर रहे हैं। अन्य डेवलपर्स रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG), Ansals और Rahejas शामिल हैं।

चंडीगढ़ (स्थानीय उच्चारण: [tʃə̃ˈɖiːɡəɽʱ] (यह ध्वनि सुनने के) के बारे में) एक शहर और एक संघ भारत के राज्यक्षेत्र कि हरियाणा और पंजाब के भारतीय राज्यों की राजधानी के रूप में कार्य करता है है। एक केंद्र शासित प्रदेश, के रूप में शहर सीधे केंद्रीय सरकार द्वारा नियंत्रित होता है और या तो राज्य का हिस्सा नहीं है।

चंडीगढ़ पंजाब उत्तर, पश्चिम और दक्षिण के लिए, और हरियाणा राज्य के पूर्व करने के लिए राज्य द्वारा bordered है। चंडीगढ़ चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र या ग्रेटर चंडीगढ़, चंडीगढ़, और शहर के पंचकुला (हरियाणा) में भी शामिल है जो का एक हिस्सा और Kharar, Kurali, मोहाली, (पंजाब) में ज़िरकपुर का शहर माना जाता है। यह शिमला के दक्षिण पश्चिम के अमृतसर और सिर्फ 116 मी (72 मील) दक्षिण-पूर्व स्थित 260 किमी (162 मील) उत्तर न्यू दिल्ली, 229 मी (143 मील) है।

चंडीगढ़ आजादी के बाद भारत में प्रारंभिक नियोजित शहरों में से एक था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी वास्तुकला और शहरी डिजाइन के लिए जाना जाता है। [8] Le Corbusier, जो बदल से पहले की योजना बनाई गई स्विस-फ़्रांसीसी आर्किटेक्ट पोलिश वास्तुकार Maciej Nowicki और अमेरिकी नियोजक अल्बर्ट मेयर द्वारा द्वारा शहर का मास्टर प्लान तैयार किया गया था। अधिकांश सरकारी इमारतों और शहर में आवास चंडीगढ़ राजधानी परियोजना Le Corbusier, जेन आकर्षित और मैक्सवेल तलना द्वारा नेतृत्व टीम द्वारा डिजाइन किए गए थे। 2015 में बीबीसी द्वारा प्रकाशित लेख चंडीगढ़ वास्तुकला, सांस्कृतिक विकास और आधुनिकीकरण के मामले में दुनिया के आदर्श शहरों में से एक के रूप में नाम। [9] [10]

चंडीगढ़ के कैपिटल परिसर यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत सम्मेलन के 40 वें सत्र में विश्व विरासत के रूप में की घोषणा की जुलाई 2016 में इस्तांबुल में आयोजित किया गया था। यूनेस्को शिलालेख "Le Corbusier आधुनिक आंदोलन करने के लिए एक उत्कृष्ट योगदान के वास्तु काम" के तहत था। कैपिटल परिसर इमारतें स्मारकों खुले हाथ के साथ साथ, शहीद स्मारक, गुणोत्तर हिल और टॉवर की छाया पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, पंजाब और हरियाणा सचिवालय और पंजाब और हरियाणा विधानसभा शामिल हैं।

शहर देश में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय में से एक है। [11] शहर एक राष्ट्रीय सरकार अध्ययन पर आधारित सबसे साफ भारत में से एक होने की सूचना दी थी। [12] [13] संघ शासित क्षेत्र भी मानव विकास सूचकांक के अनुसार भारतीय राज्यों की राजधानियां की सूची प्रमुख हैं। [14] २०१५, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, द्वारा एक सर्वेक्षण में चंडीगढ़ खुशी सूचकांक पर भारत में सबसे खुशी का शहर के रूप में रैंक। [15] [16] मेट्रोपोलिटन चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला की सामूहिक रूप से 2 लाख से अधिक की जनसंख् या के साथ मिलाकर एक त्रि-शहर, रूपों। [17]

सामग्री [छुपाने के] 1 व्युत्पत्ति 2 इतिहास 2.1 प्रारंभिक इतिहास 2.2 आधुनिक इतिहास 3 भूगोल और पारिस्थितिकीय 3.1 स्थान 3.2 जलवायु 3.3 पारिस्थितिकी तंत्र 4 जनांकिक 4.1 जनसंख्या 4.2 भाषा 4.3 धर्म 5 अर्थव्यवस्था 5.1 रोजगार 6 राजनीति ब्याज के 7 स्थानों 7.1 सुखना झील 7.2 रॉक गार्डन 7.3 रोज गार्डन 7.4 तोता पक्षी अभयारण्य चंडीगढ़ 7.5 अवकाश घाटी 7.6 अन्य स्थलों 8 शिक्षा 9 परिवहन 9.1 रोड 9.2 हवा 9.3 रेल 10 मनोरंजन 10.1 खेल 10.2 गार्डन चंडीगढ़ से 11 उल्लेखनीय लोग 12 गैलरी 13 यह भी देखें 14 नोट्स 15 संदर्भ 16 आगे पठन 17 बाह्य लिंक व्युत्पत्ति [संपादित करें] नाम चंडीगढ़ चण्डी और गढ़ का एक सूटकेस है। चण्डी हिंदू देवी चण्डी, योद्धा देवी पार्वती का अवतार और गढ़ का मतलब है घर के लिए संदर्भित करता है। [18] नाम चंडी मंदिर, एक प्राचीन मंदिर हिंदू देवी चण्डी, पंचकुला जिले में शहर के पास करने के लिए समर्पित से ली गई है। [19]

"सिटी सुंदर" के लोगो कि उत्तरी अमेरिकी शहरी 1890 और 1900s के दौरान योजना में एक लोकप्रिय दर्शन था शहर सुंदर आंदोलन से निकला है। वास्तुकार अल्बर्ट मेयर, चंडीगढ़, के प्रारंभिक योजनाकार शहर सुंदर अवधारणाओं की अमेरिकी अस्वीकृति का कहना था और घोषणा की "हम एक सुंदर शहर बनाने के लिए चाहते हैं" [20] वाक्यांश पर आधिकारिक प्रकाशनों में एक लोगो के रूप में 1970 के दशक में इस्तेमाल किया गया था, और अब है कैसे शहर ही का वर्णन करता है। [21] [22]

इतिहास [संपादित करें] प्रारंभिक इतिहास [संपादित करें] शहर के एक पूर्व ऐतिहासिक अतीत है। झील की उपस्थिति के कारण, क्षेत्र जीवाश्म अवशेष निशान जलीय पौधों और पशुओं, और उभयचर जीवन, जो कि पर्यावरण द्वारा समर्थित थे की एक विशाल विविधता के साथ है। यह पंजाब क्षेत्र का एक हिस्सा था के रूप में, यह कई नदियाँ कहाँ शुरू हुआ प्राचीन और आदिम मनुष्य के बसने के पास था। तो, लगभग 8000 साल पहले, क्षेत्र भी एक घर हड़प्पावासियों के लिए किया जा करने के लिए जाना जाता था। [23]

आधुनिक इतिहास [संपादित करें]

1909 में ब्रिटिश पंजाब प्रांत का एक नक्शा। विभाजन के दौरान भारत रेडक्लिफ रेखा पर, पश्चिमी पंजाब, पाकिस्तान में लाहौर, पंजाब प्रांत की राजधानी गिर गया। आवश्यकता है तो, भारत में पूर्वी पंजाब के लिए एक नई राजधानी चंडीगढ़ के विकास के लिए नेतृत्व किया। चंडीगढ़ ड्रीम सिटी के भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू था। भारत विभाजन के बाद 1947 में, पंजाब के पूर्व ब्रिटिश प्रांत (ज्यादातर सिखों के बीच) विभाजित था भारत में पूर्वी पंजाब और पाकिस्तान में (अधिकतर मुस्लिम) पश्चिम पंजाब। [24] भारतीय पंजाब लाहौर, जो विभाजन के दौरान पाकिस्तान का हिस्सा बन गया की जगह एक नई राजधानी की आवश्यकता है।

भूगोल तथा जलवायु[संपादित करें]

सुखना झील

चंडीगढ़ हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तराई में भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। शहर का क्षेत्रफ़ल लगभग ४४ वर्ग मील (११४ कि॰मी॰²) है। इसकी सीमाएं पूर्व में हरियाणा, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में पंजाब (भारत) से लगती हैं। शहर के सही सही भूगोलीय निर्देशांक 30°44′N 76°47′E / 30.74°N 76.79°E / 30.74; 76.79 हैं।[13] यहाँ समुद्र-सतह से औसत ऊंचाई ३२१ मी.(१०५३ फीट) है।

चंडीगढ़
जलवायु सारणी (व्याख्या)
माजूजुसिदि
 
 
33
 
20
6
 
 
39
 
23
8
 
 
30
 
28
13
 
 
9
 
35
19
 
 
28
 
38
23
 
 
145
 
39
25
 
 
280
 
34
24
 
 
308
 
33
23
 
 
133
 
33
22
 
 
22
 
32
17
 
 
9
 
27
11
 
 
22
 
22
7
औसत अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान (°से.)
कुल वर्षा (मि.मी)
स्रोत: World Weather Information Service

शहर के समीपस्थ जिलों में हरियाणा के अंबाला और पंचकुला तथा पंजाब के मोहाली, पटियाला और रोपड़ जिले हैं। इसके उत्तरी भाग से हिमाचल प्रदेश की सीमाएं अधिक दूर नहीं हैं। शहर की जलवायु उप-उष्णकटिबन्धीय महाद्वीपीय मानसून प्रकार की है; जिसमें ऊष्म ग्रीष्म काल, कुछ शीतल शीतकाल, अविश्वसनीय वर्षा और तापमान में बड़े अंतर (-१ °से. सेo ४१.२ °से.) का अनुमान रहता है। शीतकाल में दिसम्बर व जनवरी के माह में कभी-कभार कोहरा हो सकता है। औसत वार्षिक वर्षा १११०.७ मि.मी होती है। शहर को कई बार पश्चिम से लौटते मानसून की शीतकालीन वर्षा का अनुभव भी मिलता है।

औसत तापमान

  • वसंत: वसंत ऋतु (मध्य-फरवरी से मध्य मार्च और फिर मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर तक) में मौसम सुहावना रहता है। अधिकतम तापमान १६° सेंटीग्रेड से २५° सेंटीग्रेड और न्यूनतम तापमान ९° सेंटीग्रेड से १८° सेंटीग्रेड के बीच रहता है।
  • पतझड़: ऑटम में (मध्य मार्च-अप्रैल), तापमान अधिकतम ३६° सेंटीग्रेड तक पहुंच सकता है। इस समय न्यूनतम तापमान १६° से २७° तक रहता है। वैसे न्यूनतम अंकित तापमान १३°से. है।
  • ग्रीष्म: ग्रीष्म-काल में (मध्य मई से मध्य जून) तापमान ४६.५° सेंटीग्रेड (कदाचित) तक जा सकता है। सामान्यतः तापमान ३५° सेंटीग्रेड से ४०° सेंटीग्रेड के बीच रहता है।
  • वर्षा: मानसून के दौरान (मध्य जून से मध्य सितंबर), शहर को मध्यम से भारी वर्षा मिलती है, जो कभी कभार भारी से अत्यधिक भारी भी हो सकती है (प्रायः अगस्त या सितंबर)। सामान्यतः आर्द्र मानसून वायु दक्षिण-पश्चिम/ दक्षिण-पूर्व से बहती है। शहर को भारी वर्षा दक्षिण वायु से मिलती है, किन्तु मानसून की वर्षा उत्तर-पश्चिम उआ उत्तर-पूर्व दिशा से आती है। मानसून काल में चंडीगढ़ में हुई एकदिवसीय अधिकतम वर्षा १९५.५ मि.मी अंकित है।
  • शीतकाल: यहाँ जाड़े (नवंबर से मध्य मार्च) अच्छे ठंडे होते हैं और ये कई बार बहुत ठंडे भी हो सकते हैं। शीतकालीन औसत तापमान (अधिकतम) ७° सेंटीग्रेड से १५° सेंटीग्रेड एवं (न्यून) -२° सेंटीग्रेड से ५° सेंटीग्रेड तक हो सकता है। इस समय वर्षाएं कम ही होती हैं, किन्तु २-३ दिवसीय वर्षा संभव है, जो ओले और आंधी के संग पश्चिम से आ सकती है।

पादप और जंतु[संपादित करें]

वन में संभर
कैसिया फिस्टुला चंडीगढ़ में

अधिकांश चंडीगढ़ बरगद और यूकेलिप्टस के बगीचों से भरा हुआ है। अशोक, कैसिया, शहतूत व अन्य वृक्ष भी यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं। शहर को घेरे हुए बड़ा वन्य-क्षेत्र है जिसमें अनेक जंतु व पादप प्रजातियां फलती-फूलती हैं। हिरण, सांभर, कुत्ता हरिण, तोते, कढ़फोड़वे एवं मोर संरक्षित वनों में निवास करते हैं। सुखना झील में बत्तखों और गीज़ प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करते हैं, जो जापान और साईबेरिया क्षेत्रों से उड़कर जाड़ों में यहाँ आते हैं व झील की शोभा बढ़ाते हैं। शहर में एक शुक अभयारण्य भी है, जिसमें पक्षियों कि अनेक प्रजातियां देखने को मिलती हैं।

प्रशासन[संपादित करें]

चंडीगढ़ प्रशासन संविधान की धारा २३९ के तहत नियुक्त किये गए प्रशासक के अधीन कार्यरत है। शहर का प्रशासनिक नियंत्रण भारत सरकार के गृह मंत्रालय के पास है। वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक होते हैं। प्रशासक का सलाहकार एक अखिल भारतीय सेवाओं से नियुक्त अति-वरिष्ठ अधिकारी होता है। ये अधिकारी प्रशासक के बाद सर्वे-सर्वा होता है। इस अधिकारी का स्तर भारतीय प्रशासनिक सेवा में ए.जी.एम.यू कैडर का होता है।

चंडीगढ़ उच्च न्यायालय
  • उपायुक्त: भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी जो चंडीगढ़ के सामान्य प्रशासन की देखरेख करता है।
  • वन उपसंरक्षक: भारतीय वन सेवा का अधिकारी, जो वन्य प्रबंधन, पर्यावरण, वन्य-जीवन एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होता है।
  • वरिष्ठ अधीक्षक (पुलिस): भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी, जो शहर में विधि एवं न्याय व्यवस्था बनाये रखने एवं संबंधित विषयों के लिए उत्तरदायी होता है।

उपरोक्त तीन अधिकारी अखिल भारतीय सेवाओं के ए.जी.एम.यू, हरियाणा या पंजाब कैडर से होते हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

२००१ की भारत की जनगणना के अनुसार,[15] चंडीगढ़ की कुल जनसंख्या ९,००,६३५ है, जिसके अनुसार ७९०० व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी॰ का घनत्व होता है। इसमें पुरुषों का भाग कुल जनसंख्या का ५६% और स्त्रियों का ४४% है। शहर का लिंग अनुपात ७७७ स्त्रियां प्रति १००० पुरुष हैं, जो देश में न्यूनतम है। औसत साक्षरता दर ८१.९% है, जो राष्ट्रीय औसत साक्षरता दर ६४.८ से अधिक है। इसमें पुरुष दर ८६.१% एवं स्त्री साक्षरता दर ७६.५% है। यहाँ की १२% जनसंख्या छः वर्ष से नीचे की है। मुख्य धर्मों में हिन्दू (७८.६%), सिख (१६.१%), इस्लाम (३.९%) एवं ईसाई (०.८% हैं।[16]

चंडीगढ़ में रहने वाले हरियाणा व पंजाब के प्रवासी लोग भी बड़े प्रतिशत में हैं, जो यहाँ की व्यावसायिक रिक्तियों को भरने हेतु व धनोपार्जन में लगे हैं। ये लोग शहर के विभिन्न सरकारी विभागों व निजी व्यवसायों में कार्यरत हैं।

भाषाएं[संपादित करें]

हिन्दी एवं पंजाबी चंडीगढ़ की बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं, हालाँकि आजकल अंग्रेज़ी भी प्रचलित होती जा रही है। अधिकांश आबादी हिंदी (73%) बोलती है जबकि पंजाबी 23% बोली जाती है।[17] तमिल-भाषी लोग तीसरा सबसे बड़ा समूह बनाते हैं। शहर के लोगों का एक छोटा भाग उर्दु भी बोलता है।

== अर्थ-व्यवस्था == चंडीगढ़ सॉफ्टवेयर निर्यात वृद्धि उद्यमी विकास केंद्र (EDC) एक जगह है जो चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा राजीव गांधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क (RGCTP) में चंडीगढ़ से सॉफ्टवेयर निर्यात के निर्यात को बढ़ाने और युवा पेशेवरों को अपनी उद्यमशीलता स्थापित करने में सहायता करने के लिए प्रदान की गई है। शेल स्पेस या स्पेस एन प्ले फैसिलिटीज इन द स्टेट ऑफ़ द आर्ट एनवायरनमेंट फ्रेंडली और एक इंटेलिजेंट बिल्डिंग। इस परियोजना की कल्पना आईटी सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों के लिए एक पारगमन बिंदु के रूप में की गई है, जो पार्क में आने के लिए तैयार हैं, लेकिन अभी तक उनकी खुद की पूरी तरह से विकसित इमारत नहीं है, या उनके द्वारा निर्मित स्वीट प्लॉट का निर्माण अभी तक नहीं हुआ है। इसके पास आईटी विभाग के प्रशासनिक कार्यालय भी होंगे जो आसपास के क्षेत्रों में आईटी कंपनियों के लिए अधिक सुलभ और सुलभ होंगे। यह परियोजना आंशिक रूप से निर्यात अवसंरचना और संबद्ध गतिविधियों (ASIDE) योजना के लिए राज्यों को सहायता के माध्यम से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित की जाएगी, जो निर्यात से संबंधित परियोजनाओं के लिए है। EDC कला भवन का एक राज्य होगा जहां छोटे और मध्यम आकार की आईटी कंपनियां सॉफ्टवेयर विकास, आरएंडडी और अन्य उच्च मूल्य सेवाओं के लिए निर्मित स्थान पर कब्जा कर लेंगी, जो निर्यात उद्देश्यों के लिए होगा। यह केंद्र उन सभी युवा आईटी उद्यमियों के लिए ऊष्मायन सुविधाएं भी प्रदान करेगा, जिन्हें प्लग एन प्ले सुविधाएं दी जाएंगी। ईडीसी परियोजना, पीईसी, सेक्टर 12, चंडीगढ़ में स्थित एसपीआईसी इनक्यूबेशन सेंटर की तर्ज पर होगी जहां पहले से ही छोटी आईटी कंपनियां उपलब्ध कराई गई हैं। सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए एसटीपीआई द्वारा एक इंटरनेट बैंडविड्थ कनेक्टिविटी और पहले से ही एसपीआईसी केंद्र रु। में सॉफ्टवेयर निर्यात में योगदान दे रहा है। 5 करोड़ प्रति वर्ष। इस सेगमेंट में बहुत बड़ी संभावनाएं थीं और विकास में तेजी आ सकती है, बशर्ते इस केंद्र की स्थापना से ऐसी सुविधा का निर्माण हो, क्योंकि मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर था। यह अनुमान लगाया जाता है कि EDC परियोजना एक बड़ा सॉफ्टवेयर निर्यात केंद्र बन जाएगा, इसके अलावा युवा उद्यमियों के लिए रेडीमेड स्थान प्रदान करने के अलावा जिनके पास उज्ज्वल विचार हैं, लेकिन बुनियादी ढाँचा बनाने के लिए पूंजी नहीं है। राजीव गांधी चंडीगढ़ प्रौद्योगिकी पार्क में ईडीसी की स्थापना के साथ, शहर को निर्यात के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे के संचयी प्रभाव और रोजगार पर अर्थव्यवस्था में वृद्धि के निर्यात के प्रभाव और सभी समृद्धि पर लाभ होगा। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: परियोजना निदेशक -सीएम- निदेशक आईटी चंडीगढ़ प्रशासन। 5 वीं मंजिल, अतिरिक्त डीलक्स बिल्डिंग, 5th Floor, Additional Deluxe Building, Sector 9 - D, Chandigarh - 160 009 Tel : +91 172 2740641 Fax: +91 172 2740005 Email : dit-chdut AT nic.in शहर से सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं का निर्यात बढ़कर रु। राजीव गांधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क (RGCTP) के विकास के साथ अगले तीन वर्षों के भीतर 1000 करोड़।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने आज यहां कहा, "चूंकि आरजीसीटीपी का विकास पूरी तरह से हो रहा है और आने वाले वर्षों में प्रशासन की सभी बड़ी पहलें हो रही हैं, इसलिए अकेले चंडीगढ़ से सॉफ्टवेयर निर्यात 1000 करोड़ रुपये के पार पहुंचने की उम्मीद है।"

चंडीगढ़ की सॉफ्टवेयर कंपनियां इस वित्तीय वर्ष में तेजी से बढ़ेंगी


एक नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) ने अपने वार्षिक शिखर सम्मेलन में पूरे देश में सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए अच्छी खबरें भेजीं। चंडीगढ़ में भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियां वित्तीय वर्ष से मार्च 2019 तक सॉफ्टवेयर सेवाओं के बढ़ते निर्यात का श्रेय 7-9 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि देखेंगी। सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात में अधिक वृद्धि देखी जाएगी क्योंकि उद्योग देश के आईटी क्षेत्र के साथ-साथ अन्य उद्योगों की मांग में बढ़ रहा है जो इन्फो-टेक सेवाएं चाहते हैं। जिसे घोंघा विकास वर्ष कहा जा रहा है, पिछले साल इस क्षेत्र की वास्तविकता थी। यह सर्वर रखरखाव से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मैनेजमेंट की विस्तृत अनुमानित पारी का परिणाम है। चंडीगढ़ में, उद्योग में अपने नौसिखिए के कारण, सॉफ्टवेयर कंपनियों का विकास तेजी से देखा जाता है। पिछले वर्ष के स्लग कार्यों के बाद, तेज को बहुत अधिक उत्साह की आवश्यकता है, यहां तक ​​कि भविष्यवाणी भी। ऐसा इसलिए हो सकता है कि अर्थव्यवस्था के समग्र मंदी के कारण बाद के आधे हिस्से में आर्थिक नीतियों को श्रेय दिया जाता है, न कि कई ओलों को। फिर भी, ये नीतियां कई व्यवसायों के लिए एक सकारात्मक परिणाम दिखाना शुरू कर रही हैं जो आईटी सेवाओं की मांग कर रहे हैं। खैर, क्या यह हमारे लिए बहुत अच्छी खबर नहीं है? आप जानते हैं, सॉफ्टवेयर विकास भी 2017 का सबसे पसंदीदा काम है और इस पर सबसे अधिक भुगतान किया जाता है। इसका मतलब है कि, अधिक व्यवसाय ऑनलाइन होंगे, और अधिक सॉफ्टवेयर कंपनियों को चंडीगढ़ में बुलाया जाएगा। क्या आप जानना चाहते हैं कि चंडीगढ़ में सॉफ्टवेयर कंपनियां क्यों गुस्से में हैं? यहाँ क्यों है: 1. सॉफ्टवेयर विश्व खा रहा है- यह प्रसिद्ध मार्क एंथनी बोली जो आज के डिजिटल युग में सच है। अब-एक दिन, हर चीज के लिए एक आवेदन है - क्या यह एक सवारी बुक करना, नौकरी ढूंढना, शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन करना या अधिक है। यह वही है जो दुनिया को आज चाहिए, और ऐसी सॉफ्टवेयर कंपनियां हैं जो यह सब शानदार ढंग से पेश करती हैं। चंडीगढ़ में ही सॉफ्टवेयर कंपनियां उन सेवाओं के पैकेज में काम करती हैं, जो न केवल विकास तक सीमित हैं, बल्कि रखरखाव और वितरण तक जाती हैं। यह राष्ट्र का डिजिटलीकरण है कि आईटी क्षेत्र का शाब्दिक रूप से आनन्द हो रहा है। 2. तकनीकीता हर किसी के लिए चाय नहीं है- दुनिया तकनीकी नवाचारों पर आगे बढ़ रही है जो आगे आते रहते हैं। लेकिन, सभी के लिए इन नवाचारों को डिकोड करना और बहुस्तरीय उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग करना संभव नहीं है। एक कुशल सॉफ्टवेयर डेवलपर तकनीकी प्रगति से लाभ की कुंजी है। इस क्षेत्र में एक पेशे के रूप में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। हालांकि सर्वश्रेष्ठ डिजाइनरों को ढूंढना सुनिश्चित करें जो आपके व्यवसाय के विचार को एक सफल उत्पाद में बदल सकते हैं। 3. इंटरनेट की तेजी- वायरलेस सेवाओं के साथ तेज़ और उच्च बैंडविड्थ नेटवर्क हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 24 बिलियन से अधिक आईटी डिवाइस लगाए जाएंगे और यही कारण है कि सॉफ्टवेयर कंपनियों की बढ़ती मांग के लिए पर्याप्त है। भारत, आईटी क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा देश, चंडीगढ़ में सॉफ्टवेयर कंपनियों की मांग की विस्फोटक वृद्धि का अनुभव करेगा। 4. जीत के लिए डेटा सेंटर- तेजी से उभरती टेक्नोलॉजी की दुनिया में, डेटा सेंटर डार्क हॉर्स हैं। वे डेटा एनालिटिक्स, डेटा इंजीनियरिंग और डेटा साइंस सहित एक प्रमुख विकास क्षेत्र हैं। क्यों? क्योंकि इंटरनेट या ऑफलाइन पर जो कुछ भी हो रहा है, वह डेटा है और हर कंपनी को शोधकर्ताओं, एनालिटिक्स, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की आवश्यकता होती है, जो दिन के समय टेराबाइट्स और पेटाबाइट्स के माध्यम से झारना कर सकते हैं। यह सब उपभोक्ता संबंधी सेवाओं और उत्पादों को बढ़ाने के लिए। 5. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य है- जहां आज डेटा सेंटर और वायरलेस नेटवर्क सत्तारूढ़ हैं, निकट भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैठेगा। यह पारंपरिक स्वचालन समाधानों के विपरीत काम करता है क्योंकि यह श्रम और पूंजी वृद्धि के साथ बुद्धिमान स्वचालन शक्ति प्रदान करता है। चंडीगढ़ में सॉफ्टवेयर कंपनियां एक भेदी विकास देख रही हैं, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में योगदान देगा। चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र से सॉफ्टवेयर निर्यात, जिसमें चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली शामिल हैं, ने पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले चालू वित्त वर्ष (2008-09) के पहले छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में मामूली वृद्धि दर्ज की है। आंकड़ों के अनुसार, 2008-09 के पहले छह महीनों में सॉफ्टवेयर निर्यात 322.35 करोड़ रुपये था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 321.47 करोड़ रुपये था।

उद्यमियों का विचार है कि सटीक तस्वीर चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में उभरेगी और अमेरिका में मौजूदा आर्थिक संकट के कारण प्रभाव की किसी भी संभावना से इंकार करेगी। यह ध्यान देने योग्य है कि सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई), मोहाली, ने चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र से 2008-09 में सॉफ्टवेयर और सेवाओं के निर्यात के कुल मूल्य में 32 प्रतिशत की और वृद्धि का अनुमान लगाया है। 2008-09 में, संयुक्त सॉफ्टवेयर निर्यात को 1,100 करोड़ रुपये, एसटीपीआई इकाइयों से 900 करोड़ रुपये और एसईजेड से 200 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है। बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए, एसटीपीआई मोहाली के संयुक्त निदेशक और केंद्र प्रमुख, अजय पी। श्रीवास्तव ने कहा: “फिलहाल, हम यह नहीं कह सकते हैं कि मौजूदा मंदी के कारण चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र से सॉफ्टवेयर निर्यात प्रभावित है। मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में सटीक तस्वीर स्पष्ट होगी क्योंकि अधिकांश कंपनियां उस अवधि में चालान कर रही हैं। ” मोबेरा सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक पुनीत वात्सायन कहते हैं, "वर्तमान में चल रही मंदी ने हमारे व्यवसाय को प्रभावित नहीं किया है, लेकिन हम यह नहीं कह सकते हैं कि निकट भविष्य में क्या होगा।" श्रीवास्तव के अनुसार, 2007-08 में, क्षेत्र में सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग ने मजबूत वृद्धि देखी थी और 2006-07 के दौरान 560.76 करोड़ रुपये के मुकाबले कुल मूल्य 822.27 रुपये तक पहुंच गया था। कीमती विदेशी मुद्रा अर्जित करने के अलावा, इस क्षेत्र के सॉफ्टवेयर उद्योग ने लगभग 10,000 पेशेवरों को प्रत्यक्ष रोजगार भी दिया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र ने कई नई स्टार्ट-अप कंपनियों को आकर्षित किया है और कई आईटी / आईटीईएस इकाइयों की संख्या 2002-03 में 145 से बढ़कर 2007-08 में 253 हो गई है। 2008-09 के अंत तक यह आंकड़ा 300 के पार जाने की उम्मीद है। एसटीपीआई का अनुमान है कि 2009-10 तक कुल निर्यात में 1,500 करोड़ रुपये का निर्यात करने वाली 25 नई इकाइयाँ बाजार में आएँगी। श्रीवास्तव ने कहा कि इस क्षेत्र में विकास बड़े पैमाने पर छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) की वृद्धि से हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में एसटीपीआई, मोहाली के साथ पंजीकृत 13 नए लघु और मध्यम आईटी उद्यमों, वियना आईटी सॉल्यूशंस (पी) लिमिटेड, ऑप्टिमाइज़ेशन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज, ओपीके ई सर्विसेज प्राइवेट। लिमिटेड, इंटेक्स इन्फोकॉम सॉल्यूशंस प्रा। लि।, स्टार्टअप फार्म (I) प्रा। लिमिटेड, एगिलिस्ट कंसल्टिंग प्रा। लिमिटेड, नेटस्मार्टज़ इन्फोटेक प्रा। लिमिटेड आदि STPI एक्सपोर्ट सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स को 32% चंदनगढ़ क्षेत्र से प्राप्त करना है अर्चित द्वारा पोस्ट | गुरुवार, 11 सितंबर, 2008 | सॉफ्टवेयर


स्वर्णलीन कौर द फाइनेंशियल एक्सप्रेस सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) ने वित्तीय वर्ष 2008-09 के दौरान चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला और पड़ोसी क्षेत्रों से 32% की दर से सॉफ्टवेयर और सेवाओं के निर्यात का अनुमान लगाया है। मोहाली स्थित एसटीपीआई के अनुसार, इस क्षेत्र में इसकी इकाइयों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में 1,000 करोड़ रुपये का निर्यात होगा। पिछले वित्त वर्ष में एसटीपीआई इकाइयों का निर्यात 682.67 करोड़ रुपये था, जबकि एसईजेड इकाइयों ने 139.60 करोड़ रुपये का निर्यात किया और कुल 822.27 करोड़ रुपये का निर्यात किया। एसईपीआई के संयुक्त निदेशक और केंद्र के प्रमुख, अजय पी श्रीवास्तव ने एफई से बात करते हुए कहा, “इस क्षेत्र में विकास बड़े पैमाने पर छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) की वृद्धि से हुआ है। यह वित्तीय वर्ष, ओपीके ई सर्विसेज प्राइवेट सहित छह नए छोटे और मध्यम आईटी उद्यम। लिमिटेड, इंटक इन्फोकॉम प्रा। लि।, स्टार्टअप फार्म (I) प्रा। लिमिटेड, एगिलिस्ट कंसल्टिंग प्रा। लिमिटेड, नेटस्मार्टज़ इन्फोटेक (आई) प्रा। लिमिटेड और AAA बेनेफिट्स सर्विसेज बैंडवागन में शामिल हो गए हैं। एसएमई क्षेत्र 32% की वृद्धि हासिल करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा। ” 2007-08 में, चंडीगढ़ की आईटी इकाइयों ने 35,792.68 लाख रुपये का निर्यात किया, आईटीईएस ने 2156.22 लाख रुपये का योगदान दिया, जबकि एसईजेड ने 13,960.00 लाख रुपये का निर्यात किया, जो कुल 51,908.9 लाख रुपये तक पहुंच गया। पंजाब में स्थित आईटी इकाइयों ने 9564.1 लाख रुपये का योगदान दिया, जबकि आईटीईएस इकाइयों ने 19,400.02 लाख रुपये के निर्यात का रिकॉर्ड बनाया, जो कुल 28964.12 लाख रुपये है। हरियाणा में, पंचकुला में कुल निर्यात 8227 लाख रुपये दर्ज किया गया। एसटीपीआई केंद्र सरकार के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त समाज है और सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। एसटीपीआई मोहाली के साथ 250 से अधिक इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 135 इकाइयां सक्रिय रूप से निर्यात में योगदान करती हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र में आईटी क्षेत्र में 10,000 पेशेवरों की जनशक्ति है।

पिछले 51 वर्षों से एक प्रमुख आईटी गंतव्य शहर   चंडीगढ़, भारत के पहले प्रधान मंत्री के सपनों का शहर, श्री। जवाहर लाल नेहरू, प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार ले कोर्बुसियर द्वारा योजना बनाई गई थी। शिवालिकों की तलहटी में स्थित, यह शहर भारत में 20 वीं शताब्दी में शहरी नियोजन और आधुनिक वास्तुकला में सर्वोत्तम प्रयोगों के लिए जाना जाता है। 01.11.1966 को शहर का पुनर्गठन, इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में किया गया। सॉफ्टवेयर उद्योग 1960 तक भारत में कुछ भी नहीं था। 1972 में, सरकार। भारत ने एक सॉफ्टवेयर निर्यात योजना तैयार की। हम कह सकते हैं कि 1972 भारत में सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए एक स्थापना वर्ष था, और 1991 के बाद इस उद्योग ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी तस्वीर में प्रवेश किया। उद्योग ने वर्ष 2000 के बाद मजबूत वृद्धि दर्ज की। पिछले 51 वर्षों में, चंडीगढ़ ने भौतिक बुनियादी ढाँचे और व्यावसायिक वातावरण के मामले में उत्कृष्ट प्रगति की है। एक उभरते हुए आर्थिक विकास केंद्र के रूप में, विशेष रूप से भारत के अन्य आईटी शहरों से आईटी हब के रूप में, चंडीगढ़ आईटीईएस कंपनियों के लिए एक पसंदीदा स्थान बन गया है। चंडीगढ़ बनाना, आईटी सक्षम सेवाओं के लिए एक प्रमुख केंद्र; एक पॉलिसी को सेक्टर और सिटी एडमिन उद्देश्यों की वृद्धि को सुविधाजनक बनाने और बढ़ाने के लिए बनाया गया है। सीआईआई द्वारा हाल ही के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2016 (वर्तमान मूल्य) में प्रति व्यक्ति आय 268,656 रुपये थी, जो देश में सबसे अधिक है और बड़ा हिस्सा आईटी और उनकी सेवाओं के बुनियादी ढांचे से आता है। संचार नेटवर्क, तकनीकी संस्थानों और अन्य राज्यों के साथ कनेक्टिविटी के उत्कृष्ट आधार के साथ, भारत के दूसरे हिस्से की तुलना में शहर की तुलना शिक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य, या जीवन प्रत्याशा से बेहतर है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में चंडीगढ़ (SPIC) में आईटी को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी की स्थापना की गई है। चंडीगढ़ प्रशासन चंडीगढ़ में आईटी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की कई योजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है। चंडीगढ़ देश के बढ़ते आईटी शहरों में से एक के रूप में उभर रहा है और कई M.N.Cs बैंगलोर से स्थानांतरित हो रहे हैं। सूचना के युग में नेतृत्व और उत्कृष्टता की स्थिति को पूरा करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए राज्य इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, प्रशासन द्वारा योजनाबद्ध कुछ प्रमुख आईटी पहलों ने उत्कृष्ट परिणाम दिखाए हैं। चंडीगढ़ एक आधुनिक शहर है और दुनिया में शहर को शामिल करने के लिए, विश्व मानक परियोजनाओं की भविष्यवाणी करना महत्वपूर्ण है जो न केवल शहर की आर्थिक रूपरेखा को समृद्ध करते हैं, बल्कि अपने मानव संसाधनों के लिए कई रोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं। उत्तर भारत, एक पूरे के रूप में दक्षिणी राज्यों से पिछड़ गया था। सिंधु उद्यमी, चंडीगढ़, पंचकुला और मोहाली क्षेत्र की उन्नति के लिए एक रोड मैप तैयार करते हैं। रोडमैप को ध्यान में रखते हुए, राजीव गांधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क (RGCTP) की एक दूरदर्शी परियोजना की परिकल्पना चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा की गई, जिसका उद्घाटन सितंबर 2005 में डॉ। मनमोहन सिंह, पूर्व पीएम इंडिया ने किया था। यहां राजीव गांधी चंडीगढ़ प्रौद्योगिकी पार्क (आरजीसीटीपी) की स्थापना क्षेत्र के आर्थिक परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। इसने न केवल कई सूचना प्रौद्योगिकी / सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (आईटी / आईटीईएस) कंपनियों को आकर्षित किया है, बल्कि आस-पास के शहरों जैसे पंजाब में मोहाली और हरियाणा में पंचकुला में आईटी गतिविधियों का विस्तार करने में भी मदद की है।

इसने शहर के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है और अर्थव्यवस्था के विकास को सुविधाजनक बनाकर, विशेषकर सेवा क्षेत्र में। RGCTP को इस उन्नत मानव पूंजी को अपने यहां रोजगार के अवसर प्रदान करके बनाए रखने की योजना बनाई गई है। यहां RGCTP में, चंडीगढ़ प्रशासन और निजी क्षेत्र द्वारा 1500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। आरजीसीटीपी की स्थापना से, हम एक क्षेत्र से कुल निर्यात में जबरदस्त वृद्धि देख सकते हैं, जो 2005-06 में 414.97 करोड़ और 2014-16 में 2890.72 करोड़ थी, (डेटा स्रोत: सूचना प्रौद्योगिकी विभाग चंडीगढ़)। यूटी में तेजी से वृद्धि के कई कारण थे, जैसे कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) से व्यापार के लिए आसान औद्योगिक / आईटी आवास और जिसमें निवेश करने वाली कंपनियों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्राप्त होगी और एसईजेड की नीति के अनुसार लाभ प्राप्त करने में सक्षम होंगे भारत सरकार। भारतीय आईटी-बीपीएम उद्योग 2025 तक $ 350 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है (रिपोर्ट: नैसकॉम)। इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए DITC योजनाबद्ध पहल और दृष्टि विश्वसनीय है। शहर इस क्षेत्र में विकास के लिए एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है।युवा उद्यमी मोहाली के विकास की कहानी में नया अध्याय लिखते हैं एसटीपीआई, मोहाली में अतिरिक्त निदेशक अजय प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि स्टार्टअप शुरू करने के पीछे का विचार उन्हें अनुकूल उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना है और साथ ही उन्हें अपने नवाचार और सॉफ्टवेयर उत्पाद विकास को बढ़ावा देने में मदद करना है।औद्योगिक क्षेत्र, मोहाली में एसटीपीआई भवन में अपने उद्यम शुरू करने वाले नवप्रवर्तक। (करुण शर्मा / एचटी)  चंडीगढ़ और इसकी परिधि आईटी / आईटीईएस सेवाओं के लिए गर्म गंतव्य के रूप में उभर रहे हैं। इन्फोसिस, आईबीएम दक्ष, विरसा और आउटरबे जैसे आईटी दिग्गजों ने यहां देश के सबसे महंगे आईटी पार्क राजीव गांधी टेक्नोलॉजी पार्क (आरजीसीटीपी), और विप्रो, टेक महिंद्रा, ई-एसईएस, भारती टेलिवर्क, पाटनी कंप्यूटर्स जैसे कई अन्य कार्यों का संचालन शुरू किया है। , आदि ने शहर के लिए अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाया है।

चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला तीन वर्षों में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के संयुक्त वार्षिक सॉफ्टवेयर निर्यात की उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा, क्वार्क, डेल और आईडीएस इन्फोटेक मोहाली से चल रहे हैं।

चंडीगढ़ (मोहाली सहित) ने 270 करोड़ रुपये का आईटी निर्यात और पिछले वित्त वर्ष में 416 करोड़ रुपये का निर्यात कारोबार दर्ज किया।

प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पिछले साल 24 सितंबर को (चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा 2001 में कल्पना की गई), उद्घाटन के पहले चरण में 123 एकड़ क्षेत्र में पार्क का निर्माण शुरू हुआ।

इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को मुख्य एंकर कंपनी के रूप में 30 एकड़ का आवंटन किया गया था और उसने 525,000 वर्ग फुट के अत्याधुनिक परिसर का निर्माण किया है। इसके अलावा, पहले चरण में डीएलएफ लिमिटेड द्वारा विकसित तैयार निर्मित स्थान 12.5 एकड़ में फैला है और इसमें 650,000 वर्ग फुट के छह ब्लॉक शामिल हैं। आईबीएम दक्ष, आउटर बे और नेट सॉल्यूशन कंपनियों में से हैं।

1 से 2 एकड़ में निर्माण करने वाले 42 से बिल्डरों को साइट के लिए Amadeus, KMG Infotech, Microtek, Bebo Technologies, Synapse और Alchemist को आवंटित किया गया है। इन्फोसिस, आईबीएम दक्ष, विरसा और आउटरबे ने पहले चरण में परिचालन शुरू कर दिया है। इसके अलावा, सॉफ्टवेयर कंपनियों को बढ़ावा देने के रूप में, केंद्र द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में पार्क के पहले चरण को मंजूरी दी गई थी।

पार्क का दूसरा चरण 250 एकड़ में फैला है। इसमें से 125 एकड़ आईटी / आईटीईएस कंपनियों के लिए और शेष क्षेत्र एक टेक्नोलॉजी हैबिटेट के लिए है, जो 125 एकड़ में फैला है, जिसमें आवासीय फ्लैट, सर्विस अपार्टमेंट, सामुदायिक बुनियादी ढांचा, आदि शामिल हैं। दूसरे चरण में, विप्रो, एक लंगर कंपनी के रूप में। को 30 एकड़, भारती टेली-वेंचर्स को 5 एकड़, ई-सीस 6 एकड़ और टेक महिंद्रा को 10 एकड़ आवंटित किया गया है।

आईटी विभाग पहले ही एसईजेड अनुमोदन के लिए अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत कर चुका है और उम्मीद करता है कि इसे बहुत जल्द ही प्रदान किया जाएगा।

आईटी कंपनियों की अपार प्रतिक्रिया को देखते हुए, प्रशासन पार्क के तीसरे चरण के लिए भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में है, जो 250 एकड़ की अन्य भूमि में फैलेगी और उन्हें उम्मीद है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया 7- के भीतर पूरी हो जाएगी। 8 महीने। इसके अलावा, कोई भी इस तथ्य से अच्छी तरह से अवगत हो सकता है कि यह आईटी कंपनियों के लिए अगले गंतव्य के रूप में उभर रहा है क्योंकि पटनी कंप्यूटर और कई अन्य लोगों ने भूमि के अधिग्रहण से पहले ही तीसरे चरण में जगह के लिए आवेदन किया है।

अब तक मोहाली का संबंध है, क्वार्क, डेल और आईडीएस इन्फोटेक पहले ही अपने ऑपरेशन शुरू कर चुके हैं।

आईटी / आईटीईएस क्षेत्र को और गति देने के उद्देश्य से, यूटी प्रशासन अब विभिन्न खिलाड़ियों के लिए सही कारोबारी माहौल प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि यह ई-क्रांति शिखर सम्मेलन 2006 की मेजबानी के लिए तैयार है। विशेष रूप से, ई-क्रांति 2005 के बाद, राजीव गांधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क ने 400 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किया है।

बिजनेस स्टैंडर्ड, भारत के सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क से बात करते हुए, अतिरिक्त निदेशक, संजय त्यागी ने कहा, “हमने 1998-99 में निर्यात कारोबार के रूप में लगभग 7.7 करोड़ के साथ शुरुआत की थी, और 2005-06 में 416 करोड़ रुपये को छूते हुए एक बड़ी वृद्धि हासिल की। एक निर्यात कारोबार के रूप में और आगे हम अगले तीन वर्षों में सॉफ्टवेयर निर्यात के रूप में 1000 करोड़ रुपये को छूने के लिए आशान्वित हैं। ”

उन्होंने आगे कहा, "यह सम्मेलन क्षेत्र का निर्माण करने के लिए किया गया एक प्रयास है। यह शहर में दूसरा सम्मेलन होगा, जहां तीन राज्य सरकारें (पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़) एक साझा एजेंडा पर एक साथ खड़ी होंगी - व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में मूल्य पैदा करना आईटी-आईटीईएस / बीपीओ उद्योग और राष्ट्रीय ई-शासन पहल में साझा सेवाओं के महत्व के लिए। "

सम्मेलन का पहला दिन NASSCOM द्वारा आयोजित किया जाएगा और ध्यान उत्तरी राज्यों की क्षमता पर है, विशेष रूप से चंडीगढ़ कैपिटल रीजन (पंचकुला, बद्दी, मोहाली शामिल) में।

साझा सेवाओं पर दूसरे दिन के सत्र में परिसंपत्तियों के बंटवारे, सह-स्वामित्व बुनियादी ढांचे, सेवा मानकों को बनाए रखने और लागत-कुशलता से काम करना शामिल होगा। नैसकॉम ने कहा कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वर्ष के लिए सॉफ्टवेयर निर्यात मौजूदा वित्तीय वर्ष की तुलना में धीमी गति से बढ़ सकता है क्योंकि मुद्रा की अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक दबाव है। सॉफ्टवेयर लॉबी बॉडी ने मंगलवार को अनुमान लगाया कि 2015-16 के लिए सॉफ्टवेयर निर्यात 12-14% के बीच बढ़कर 110-112 बिलियन डॉलर हो जाएगा, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए 13-15% की वृद्धि का अनुमान है। नैसकॉम के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, 31 मार्च तक आईटी क्षेत्र के लिए कुल राजस्व 13% से $ 146 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है। घरेलू मोर्चे पर, नैसकॉम ने अगले वित्त वर्ष में 15-17% की वृद्धि को 55-57 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया। ई-कॉमर्स ग्रोथ के दम पर चालू वित्त वर्ष में भारतीय घरेलू बाजार 14% बढ़कर 48 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। ई-कॉमर्स, सरकार की पहल और उद्योगों द्वारा प्रौद्योगिकी अपनाने के कारण घरेलू विकास की उम्मीद है। नैसकॉम ने कहा कि 2014-15 में $ 26 बिलियन के सरकारी निवेश ने भी घरेलू राजस्व वृद्धि में मदद की।

लॉबी समूह 2020 तक अपने पूरे क्षेत्र में लगातार वृद्धि के बल पर अपने $ 300 बिलियन भारतीय आईटी क्षेत्र के राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के लिए आश्वस्त है।   विस्तार “जबकि मौजूदा विकास अनुमान मौजूदा मैक्रो ट्रेंड के पीछे हैं, हमारा मानना ​​है कि उद्योग में लंबे समय तक 13-15% वृद्धि बनाए रखने की क्षमता है। एंजल ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के एक विश्लेषक सरबजीत कौर नंगरा ने कहा कि अब तक के प्रबंधन की टिप्पणी सकारात्मक रही है कि यह क्षेत्र वित्त वर्ष 2015 के विकास के अनुमानों के अनुरूप वृद्धि को बढ़ा सकता है।

आईटी उद्योग भारत में सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का नियोक्ता बना हुआ है, 2014-15 में 230,000 कर्मचारियों को जोड़कर, उद्योग में नौकरियों की कुल संख्या को 3.5 मिलियन तक ले गया, जबकि सकल घरेलू उत्पाद का 9.5% हिस्सा है। आईटी उद्योग के पास कुल सेवाओं के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा 38% है। 2014-15 में $ 5.3 बिलियन से अधिक में 3,100 से अधिक प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप और उद्योग विलय और अधिग्रहण के साथ भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप हब भी है। पूर्वानुमान की घोषणा करते हुए मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन के मौके पर, नासकॉम के अध्यक्ष आर। चंद्रशेखर ने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में आसानी से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप हब बन सकता है, जो नए उद्यमों की तीव्र गति को देख रहा है। देश में।

अमेरिका में निर्यात, सबसे बड़ा बाजार, ऊपर-उद्योग औसत में वृद्धि हुई, एक आर्थिक पुनरुद्धार और उच्च प्रौद्योगिकी अपनाने के आधार पर। वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान यूरोप से मांग मजबूत रही लेकिन मुद्रा की चाल और आर्थिक चुनौतियों के कारण दूसरी छमाही के दौरान नरम हो गई। भारत की सॉफ्टवेयर सेवाओं का निर्यात पिछले कुछ वर्षों से बढ़ रहा है लेकिन देर से चिंता करने के कुछ कारण हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के निर्यात के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 2015-16 के दौरान व्यापार प्रक्रिया आउटसोर्सिंग कंपनियों में तेजी से वृद्धि हुई है।


वैश्विक निकाय और भारतीय आईटी कंपनियों की कमजोर कमाई के बीच उद्योग संगठन नैसकॉम ने पिछले महीने 2016-17 के लिए निर्यात आय के लिए अपने विकास के दृष्टिकोण को 10-12% से 8-10% तक घटा दिया। इसके अलावा, भारतीय आईटी उद्योग अभी भी अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर करता है, जो कुछ विविधीकरण के बावजूद, सॉफ्टवेयर निर्यात के साथ-साथ स्थानीय कंपनियों के विदेशी सहयोगियों द्वारा सॉफ्टवेयर व्यवसाय के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है। यहां भारत की सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात पर त्वरित नज़र है और सबसे अधिक राजस्व के लिए कौन से सेगमेंट और देश हैं 1 - पीगॉन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड - चंडीगढ़ एससीओ -866, एनएसी मणि माजरा, यू.टी. चंडीगढ़ 160,101। चंडीगढ़। चंडीगढ़। Piegon Media Pvt.Ltd चंडीगढ़ स्थित इंटरनेट मार्केटिंग कंसल्टेंट कंपनी है। यह आज चंडीगढ़ में सबसे तेजी से विस्तार करने वाला पेशेवर विशेषज्ञ है। कंपनी की पेशकश ...


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8 - ड्रिश इंफोटेक लिमिटेड - चंडीगढ़ एससीओ 104-106, सेक्टर 34-ए, चंडीगढ़, चंडीगढ़। चंडीगढ़। चंडीगढ़। चंडीगढ़ में बेस्ट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी, ड्रिश इंफोटेक लिमिटेड दुनिया भर में उद्योग क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए गुणवत्ता आईटी सेवाएं और समाधान प्रदान कर रहा है ...


9 - ब्रिजिंग हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज - चंडीगढ़ एससीओ 169-170, दूसरी मंजिल, सेक्टर 8-सी, चंडीगढ़। चंडीगढ़। चंडीगढ़। ब्रिजिंग हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड एक अमेरिकन मल्टीनेशनल हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी है जिसका मुख्यालय ऑरेंज काउंटी, कैलिफ़ोर्निया में है, जो विकास, निर्माण, समर्थन करता है ...


10 - उक्सोफटेक - चंडीगढ़ S.C.O 52, बेसमेंट केबिन नंबर 8, सेक्टर 9D, चंडीगढ़, 160009, धनास। चंडीगढ़। चंडीगढ़। UKsoftech के पास वेब डिज़ाइन और वेब विकास परीक्षण जैसी सभी सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला है। हम अनुभवी और वेब डिजाइन, कस्टम वेब विकास, Android मोबाइल और एसईओ आदि में विशेषज्ञता प्राप्त कर रहे हैं .. चंडीगढ़ राजधानी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली शामिल है) से सॉफ्टवेयर निर्यात 2010-11 में 1565.33 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता है। 2009-10 में क्षेत्र से कुल निर्यात 1196.58 करोड़ रुपये था।

2010-11 में कुल निर्यात में से 852.33 करोड़ रुपये का निर्यात इकाइयों द्वारा दर्ज किया गया था, जो सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के साथ पंजीकृत हैं, जबकि एसईजेड में इकाइयों का आंकड़ा 713 करोड़ रुपये के रूप में दर्ज किया गया। इस साल, 10 से अधिक नई सॉफ्टवेयर कंपनियों ने एसटीपीआई के साथ इस क्षेत्र से परिचालन शुरू किया।

इंफोसिस लिमिटेड, डेल इंटरनेशन सर्विसेज (पी) लिमिटेड, आईडीएस इन्फोटेक लिमिटेड, एनवीश सॉल्यूशंस (पी) लिमिटेड और एमर्सन डिजाइन इंजीनियरिंग सेंटर शीर्ष पांच कंपनियां हैं जिन्होंने निर्यात के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है।

इस क्षेत्र ने कई नए स्टार्टअप को आकर्षित किया है। इसके अलावा, आईटी / आईटीईएस इकाइयों की संख्या 2002-03 में 145 से बढ़कर 2010-11 में 242 हो गई। इसके अलावा, एसटीपीआई ने पहले कहा था कि इस क्षेत्र में विकास बड़े पैमाने पर छोटे और मध्यम उद्यमों के विकास से हुआ है।

"2010-11 में," एसटीपीआई के संयुक्त निदेशक और केंद्र प्रमुख (मोहाली) अजय पी। सिरवास्तव ने कहा कि इसके शुरू किए गए ऑपरेशन से पंजीकृत 10 नए छोटे और मध्यम आईटी उद्यमों से कम नहीं। उन्होंने IBM Daksh Business Process Services Ltd, Dot Technologies, Credentia Business Process (P) Ltd, Ovirtue INC, Communox Collasist (P) Ltd को शामिल किया, उन्होंने Business Standard को बताया।

इकाइयां एसटीपीआई के साथ पंजीकृत हैं और 2010-11 में निर्यात के मामले में शीर्ष तीन पदों पर काबिज हैं: इंफोसिस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (चंडीगढ़ से), डेल इंटरनेशनल सर्विसेज (आई) प्राइवेट लिमिटेड (पंजाब से) और आईडीएस इन्फोटेक लिमिटेड।

कुल मिलाकर, 2009-10 में, चंडीगढ़ क्षेत्र से सॉफ्टवेयर निर्यात 1196.58 करोड़ रुपये (एसईजेड से निर्यात सहित) के अनुरूप था। जबकि 2008-09 में एसटीपीआई इकाइयों से सॉफ्टवेयर निर्यात 731.85 करोड़ रुपये और एसईजेड से निर्यात 318.08 करोड़ रुपये था।

साथ ही, इसके साथ पंजीकृत आईटी कंपनियों की सुविधा के लिए, एसटीपीआई मोहाली (पंजाब) में 40 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक नया कार्यालय स्थापित कर रहा है। 1 लाख वर्ग फीट में फैले इस कार्यालय में प्रशासनिक कार्यालय के साथ-साथ डेटा और इन्क्यूबेशन के केंद्र होंगे। 60,000 वर्ग फीट में फैली प्रस्तावित सुविधा के दो साल में पूरा होने की संभावना है। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग का विकास! सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के दो मुख्य घटक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर हैं। सॉफ्टवेयर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में प्रमुख उद्योग के रूप में उभरा है। इस उद्योग ने 1970 के दशक में एक मामूली शुरुआत की और 1980 के दशक के मध्य तक, पूर्वानुमानकर्ताओं, विश्लेषकों और नीति नियोजकों ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग की क्षमता को समझना शुरू कर दिया। इस उद्योग ने 1990 के दशक में एक बड़ी सफलता हासिल की और अब यह भारत के महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक है। सॉफ्टवेयर उद्योग के तेजी से विकास का मुख्य कारण तकनीकी रूप से कुशल जनशक्ति का विशाल भंडार है जिसने भारत को सॉफ्टवेयर सुपर पावर में बदल दिया है। विज्ञापन:

1991 और 1996 के बीच लगभग 52 प्रतिशत की वार्षिक वार्षिक वृद्धि के साथ, भारतीय सॉफ्टवेयर क्षेत्र ने लगभग दोगुना तेजी से विस्तार किया है, जबकि दुनिया के प्रमुख अमेरिकी सॉफ्टवेयर उद्योग ने समान अवधि के दौरान, समान अवधि के दौरान किया है। अब देश में 500 से अधिक सॉफ्टवेयर फर्मों का एक महत्वपूर्ण द्रव्यमान है और इन कंपनियों के अलावा अतिरिक्त 1,000 स्टार्ट-अप कंपनियां हैं। आज, भारत एक ऐसा देश है जो लागत-प्रभावशीलता, महान गुणवत्ता, उच्च विश्वसनीयता, शीघ्र वितरण और सबसे बढ़कर, सॉफ्टवेयर उद्योग में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करता है। वर्ष 1995-96 भारतीय कंप्यूटर उद्योग के लिए एक बूम वर्ष था और भारत का सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग वास्तव में उस वर्ष में विस्फोट हो गया। वैश्विक बाजार में जारी प्रौद्योगिकी मंदी, मजबूत बुनियादी बातों और सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग के मूल मूल्य की स्थिति जैसी चुनौतियों के बावजूद देश में अन्य सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन हुआ। 2002-03 में इसका निर्यात 26.3 प्रतिशत बढ़ा, जो कि 46,100 करोड़ रुपये का राजस्व था। भारतीय सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग दुनिया भर में बहुत कम क्षेत्रों में से एक है जिसने दोहरे अंक की वृद्धि देखी है (छवि 27.11)। इसने 1997 में अपने कुल निर्यात का 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 2002-03 में 20.4 प्रतिशत हो गया। इससे चार मिलियन लोगों के लिए कुल रोजगार (समर्थन सेवाओं सहित) उत्पन्न होने की उम्मीद है, भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 7 प्रतिशत और वर्ष 2008 में भारत के विदेशी मुद्रा प्रवाह का 30 प्रतिशत।

सॉफ्टवेयर भारत में निर्यात का एक प्रमुख आइटम बन गया है। वर्ष 2004-05 में, भारत के सॉफ्टवेयर और सेवा निर्यात ने 34.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। 2004-05 में कुल सॉफ्टवेयर और सेवाओं का राजस्व 32 प्रतिशत बढ़कर $ 22 बिलियन और 2005-06 में 28.5 बिलियन डॉलर हो गया (देखें तालिका 27.21)। आईटी उद्योग की तालिका 27.21Progress ($ अरब में आंकड़ा): साल 2003-04 2004-05 2005-06 * आईटी सॉफ्टवेयर और सेवा निर्यात 9.2 12.0 15.2 ITE-BPO निर्यात करता है 3.6 5.2 7.3 घरेलू बाजार 3.9 4.8 6.0 संपूर्ण 16.7 22.0 28.5 नैसकॉम के अनुसार, उद्योग को निकट भविष्य में 30 से 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है। नैसकॉम के अनुसार, घरेलू बाजार में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई। नैस्कॉम द्वारा किए गए सर्वेक्षण के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि भारत में आउटसोर्सिंग का कुल मूल्य (2004- 05 में $ 17.2 बिलियन) दुनिया भर के कुल के 44 प्रतिशत के बराबर है। यह मानने का अच्छा कारण है कि वर्तमान मजबूत गति इस उद्योग के विस्तार को आगे बढ़ाएगी। भारतीय कंपनियों ने अब तक केवल दो सबसे बड़े आईटी सेवा बाजारों पर ध्यान केंद्रित किया है, जैसे कि, यू.एस.ए और यू.के. देश जैसे कनाडा, जापान, जर्मनी और फ्रांस भारी विकास क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। नीदरलैंड, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों में भी काफी संभावनाएं हैं। आईटी कंपनियां आक्रामक रूप से यूरोप, लैटिन अमेरिका और एशिया प्रशांत में अन्य बाजारों की खोज कर रही हैं। हार्डवेयर: विज्ञापन:

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग का हार्डवेयर खंड उत्पादन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मामले में सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में से एक है और यह नवाचार द्वारा विशेषता है। हाल के एक अध्ययन के अनुसार, 2010 तक, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग $ 1 ट्रिलियन का आंकड़ा पार कर जाएगा और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर उद्योग तब तक $ 73 बिलियन से अधिक हो सकता है। घटक खंड में 2010 तक $ 11 बिलियन तक पहुंचने की क्षमता है। यह 5 मिलियन से अधिक व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। 1991 में उदारीकरण के बाद, भारत आईटी, दूरसंचार और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की पहुंच के मामले में दुनिया के साथ तेजी से पकड़ बना रहा है। यह इन उत्पादों के लिए एक बड़ी मांग के साथ-साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए आधार प्रदान कर सकता है। "पर्सनल कंप्यूटर (पीसी), टीवी नहीं, 21 वीं सदी का प्रमुख सूचना उपकरण होगा," एक दशक पहले दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी इंटेल के सह-संस्थापक एंडी ग्रोव ने कहा। वह 20 वीं शताब्दी की बारी से पहले यू.एस. में सही साबित हुआ जब पहली बार पीसी ने टीवी को बाहर किया। ऐसा भारत में नहीं हुआ है, और हो सकता है कि एक और दशक तक न हो। समय बीतने के साथ टीवी की तुलना में पीसी भारत में अधिक लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। 2004 में निजी कंप्यूटरों (पीसी) की बिक्री में 20% की वृद्धि हुई

शिक्षा[संपादित करें]

चंडीगढ़ समस्त उत्तर भारत में एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में जाना जाता है। नज़दीकी राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर व उत्तराखण्ड आदि से भारी संख्या में विद्यार्थी यहाँ आते हैं।

यातायात[संपादित करें]

चंडीगढ़ की एक सड़क

पर्यटन[संपादित करें]

रॉकगार्डन

पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ भारत के सबसे खूबसूरत और नियोजित शहरों में एक है। इस केन्द्र शासित प्रदेश को प्रसिद्ध फ़्रांसीसी वास्तुकार ली कोर्बूजियर ने अभिकल्पित किया था। इस शहर का नाम एक दूसरे के निकट स्थित चंडी मंदिर और गढ़ किले के कारण पड़ा जिसे चंडीगढ़ के नाम से जाना जाता है। शहर में बड़ी संख्या में पार्क हैं जिनमें लेसर वैली, राजेन्द्र पार्क, बॉटोनिकल गार्डन, स्मृति उपवन, तोपियारी उपवन, टेरस्ड गार्डन और शांति कुंज प्रमुख हैं। चंडीगढ़ में ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी, प्राचीन कला केन्द्र और कल्चरल कॉम्प्लेक्स को भी देखा जा सकता है।

कैपिटल कॉम्प्लैक्स[संपादित करें]

यहाँ हरियाणा और पंजाब के अनेक प्रशासनिक भवन हैं। विधानसभा, उच्च न्यायालय और सचिवालय आदि इमारतें यहाँ देखी जा सकती हैं। यह कॉम्प्लेक्स समकालीन वास्तुशिल्प का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहाँ का ओपन हैंड स्मारक कला का उत्तम नमूना है।

21 जून 2016 को द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रमुख आयोजन करने के लिए इसी स्थान को चुना गया। यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ३०,००० प्रतिभागियों के साथ योग किया।[18] [19]

कैपिटल कॉम्प्लेक्स को २०१६ में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

रॉक गार्डन[संपादित करें]

चंडीगढ़ आने वाले पर्यटक रॉक गार्डन आना नहीं भूलते। इस गार्डन का निर्माण नेकचंद ने किया था। इसे बनवाने में औद्योगिक और शहरी कचरे का इस्तेमाल किया गया है। पर्यटक यहाँ की मूर्तियों, मंदिरों, महलों आदि को देखकर अचरज में पड़ जातें हैं। हर साल इस गार्डन को देखने हजारों पर्यटक आते हैं। गार्डन में झरनों और जलकुंड के अलावा ओपन एयर थियेटर भी देखा जा सकता, जहाँ अनेक प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियां होती रहती हैं।

रोज़ गार्डन[संपादित करें]

जाकिर हुसैन रोज़ गार्डन के नाम से विख्यात यह गार्डन एशिया का सबसे बड़ा रोज़ गार्डन है। यहाँ गुलाब की 1600 से भी अधिक किस्में देखी जा सकती हैं। गार्डन को बहुत खूबसूरती से डिजाइन किया गया है। अनेक प्रकार के रंगीन फव्वारे इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं। हर साल यहाँ गुलाब पर्व आयोजित होता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों का यहाँ आना होता है।

सुखना झील[संपादित करें]

यह मानव निर्मित झील 3 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इसका निर्माण 1958 में किया गया था। अनेक प्रवासी पक्षियों को यहाँ देखा जा सकता है। झील में बोटिंग का आनंद लेते समय दूर-दूर फैले पहाड़ियों के सुंदर नजारों के साथ-साथ सूर्यास्त के नजारे भी यहाँ से बड़े मनमोहक दिखाई देते हैं।

संग्रहालय[संपादित करें]

चंडीगढ़ में अनेक संग्रहालय हैं। यहाँ के सरकारी संग्रहालय और कला दीर्घा में गांधार शैली की अनेक मूर्तियों का संग्रह देखा जा सकता है। यह मूर्तियां बौद्ध काल से संबंधित हैं। संग्रहालय में अनेक लघु चित्रों और प्रागैतिहासिक कालीन जीवाश्म को भी रखा गया है। अन्तर्राष्ट्रीय डॉल्स म्युजियम में दुनिया भर की गुडियाओं और कठपुतियों को रखा गया है।

सुखना वन्यजीव अभयारण्य[संपादित करें]

लगभग 2600 हेक्टेयर में फैले इस अभयारण्य में बड़ी संख्या में वन्यजीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं। मूलरूप से यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में बंदर, खरगोश, गिलहरी, साही, सांभर, भेड़िए, जंगली शूकर, जंगली बिल्ली आदि शामिल हैं। इसके अलावा सरीसृपों की अनेक प्रजातियों भी यहाँ देखी जा सकती हैं। अभयारण्य में पक्षियों की विविध प्रजातियों को भी देखा जा सकता है।

राजनीति[संपादित करें]

भारत की लोकसभा में चण्डीगढ़ के लिए एक सीट आवंटित है। वर्तमान सोलहवीं लोकसभा में यहाँ का प्रतिनिधित्व श्रीमती किरण खेर कर रही हैं जो कि भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं। इससे पहले कांग्रेस के श्री पवन बंसल यहाँ से साँसद थे जो कि एक समय में भारत के रेल मंत्री भी बने।

पंजाब के राज्यपाल ही चण्डीगढ़ के प्रशासक होते हैं। वर्तमान में चण्डीगढ़ के प्रशासक श्री वी पी सिंह बदनौर हैं।

हरियाणा तथा पंजाब की संयुक्त राजधानी होने के कारण राजनीतिक रूप से दोनों ही प्रदेशों के नेता इस शहर पर अपना-अपना दावा जताते रहते हैं।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

चंडीगढ़ एयरपोर्ट सिटी सेंटर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर, दिल्ली मार्ग पर है। देश के प्रमुख शहरों से यहाँ के लिए नियमित उड़ानें हैं।

रेल मार्ग

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन सिटी सेंटर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है। यह रेलवे स्टेशन शहर को देश के अन्य हिस्सों से रेलमार्ग द्वारा जोड़ता है। दिल्ली से यहाँ के लिए प्रतिदिन ट्रेने हैं।

सड़क मार्ग

राष्ट्रीय राजमार्ग 21 और 22 चंडीगढ़ को देश के अन्य हिस्सों से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ते हैं। दिल्ली, जयपुर, ग्वालियर, जम्मू, शिमला, कुल्लू, कसौली, मनाली, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, हरिद्वार, देहरादून, हल्द्वानी आदि शहरों से यहाँ के लिए नियमित बस सेवाएं हैं।

खेलकूद के स्थान[संपादित करें]

प्रमुख उद्यान[संपादित करें]

  • रोज गार्डन, सेक्टर 16
  • बोगनवेलिया गार्डन, सेक्टर 3
  • जापानी उद्यान, सेक्टर 16
  • टोपियरी गार्डन, सेक्टर 35
  • फ्रैगरेंस गार्डन, सेक्टर 36
  • लीजर वैली, सेक्टर 10
  • म्यूजिकल फाउंटेन पार्क, सेक्टर 33
  • सुखना लेक उद्यान, सेक्टर 6
  • कैक्टस गार्डन पंचकुला
  • राक गार्डन चंडीगढ़, सेक्टर 1
  • राजेन्द्र उद्यान, सेक्टर 1
  • सिल्वी पार्क, फेज 10 मोहाली
  • बोटैनिकल गार्डन, खुड्डा लाहोरा

चंडीगढ़ से प्रकाशित प्रमुख (दैनिक) समाचारपत्र[संपादित करें]

अंग्रेजी[संपादित करें]

  1. द ट्रिब्यून-पंजाब के सबसे पुराने अखबारों में से एक।
  2. द इंडियन एक्सप्रेस
  3. हिन्दुस्तान टाईम्स
  4. द टाईम्स ऑफ इंडिया, द इकानामिक टाईम्स, द बिजनेस टाईम्स
  5. द पायनियर
  6. बिजनेस लाईन

हिन्दी[संपादित करें]

  1. दैनिक हिन्दुस्तान
  2. पंजाब केसरी
  3. दैनिक जागरण
  4. दैनिक भास्कर
  5. अमर उजाला
  6. दैनिक ट्रिब्यून : द ट्रिब्यून का हिंदी संस्करण
  7. इलेक्ट्रानिक टुडे

पंजाबी[संपादित करें]

  1. पंजाबी ट्रिब्यून
  2. देशसेवक सीपीआई से संबद्ध समाचारपत्र
  3. रोजाना स्पोक्समैन
  4. जगबाणी

प्रमुख नागरिक[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "List of Most populated cities of India". www.census2011.co.in. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  2. "List of states with Population, Sex Ratio and Literacy Census 2011". www.census2011.co.in. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  3. "Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013)" (PDF). Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India. अभिगमन तिथि 23 अप्रैल 2017.
  4. "Official Website of Chandigarh Administration". chandigarh.gov.in. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  5. "भारतीय चुनाव आयोग की अधिसूचना, नई दिल्ली" (PDF). अभिगमन तिथि 28 मार्च 2019.
  6. चंडीगढ़ पर हिमाचल का भी बनता है हक नवोदय टाइम्स
  7. भारत का व्यवसाय पोर्टल, (अंग्रेज़ी)
  8. "Chandigarh registers highest per capita income in country". 17 सित॰ 2008. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019 – वाया www.thehindu.com. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  9. http://chandigarh.nic.in/knowchd_general.htm
  10. "Official Website of Chandigarh Administration". chandigarh.gov.in. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  11. "Smoke out smoking violations - Times of India". The Times of India. अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  12. http://chandigarh.nic.in/WriteReadData%5Cnotification%5Cnot_env684_300708.pdf
  13. "फॉलिंग रेन जीनोमिक्स, इंक - चंडीगढ़". अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  14. "Census population" (PDF). Census of India. http://sampark.chd.nic.in. अभिगमन तिथि 2008-06-04. |publisher= में बाहरी कड़ी (मदद)
  15. "भारत की जनगणना २००१: २००१ की जनगणना के आँकड़े, महानगर, नगर और ग्राम सहित (अनंतिम)". भारतीय जनगणना आयोग. अभिगमन तिथि 2007-09-03.
  16. "भारतीय जनगणना" (PDF). अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  17. "After mother tongue, city more proficient in English". अभिगमन तिथि 1 मार्च 2019.
  18. "प्रधानमंत्री ने चंडीगढ़ में अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया, कैपिटल कॉम्‍प्‍लेक्‍स में सामूहिक योग प्रदर्शन में भाग लिया". पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार. 21 जून 2016. अभिगमन तिथि 22 जून 2016.
  19. "योग जीरो बजट में हेल्थ इंश्योरेंस देता है : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी". एनडीटीवी खबर. अभिगमन तिथि 22 जून 2016.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]