उत्तराखण्ड

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उत्तराखंड

भारत के मानचित्र पर उत्तराखंड

भारत के प्रान्त
राजधानी देहरादून
सबसे बड़ा शहर देहरादून
जनसंख्या ८,४८०,०००
 - घनत्व /किमी²
क्षेत्रफल ५३,४८३ किमी² 
 - जिले १३
राजभाषा(एँ) हिंदी
प्रतिष्ठा ९ नवंबर २०००
 - राज्यपाल बनवारी लाल जोशी
 - मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी
 - विधानसभा एक सभा
आइएसओ संक्षेप [[आइएसओ 3166-2|]]

उत्तराखण्ड या उत्तराखंड भारत के उत्तर में स्थित एक राज्य है। २००० और २००६ के बीच यह उत्तरांचल के रूप में जाना जाता था, ९ नवंबर २००० को उत्तराखंड भारत गणराज्य के २७ वें राज्य के रूप मे अस्तित्व मे आया। राज्य का निर्माण कई वर्ष के आन्दोलन के पश्चात हुआ। इस प्रान्त में वैदिक संस्कृति के कुछ सबसे महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं।

उत्तराखंड की सीमाऐं उत्तर मे तिब्बत और पूर्व मे नेपाल से मिलती हैं तथा पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण मे उत्तर प्रदेश(अपने गठन से पहले यानि कि सन २००० से पहले यह उत्तर प्रदेश का एक हिस्सा था) इसके पडो़सी हैं। पारंपरिक हिंदू ग्रंथों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखंड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत मे उत्तराखंड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है।

जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान मे रखते हुये उत्तराखंड के नाम आधिकारिक तौर पर उत्तरांचल से बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। देहरादून उत्तराखंड की अंतिम राजधानी होने के साथ इस क्षेत्र में सबसे बड़ा शहर है। गैरसन नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते युये भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थायी राजधानी बनी हुई है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है।

राज्य सरकार ने हाल मे हस्तशिल्प और हथकरघा को बढा़वा देने के लिये कुछ पहल की हैं साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए आकर्षण कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य मे कुछ विवादास्पद बडी़ बांध परियोजनाओं भी हैं जिनकी पूरे देश में अक्सर आलोचना की जाती है, जैसे कि भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बांध परियोजना। यह परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गयी थी और अब ये अपने निर्माण के अन्तिम चरण मे है। उत्तराखंड चिपको आंदोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है।

अनुक्रम

[संपादित करें] इतिहास

स्कन्द पुराण में हिमालय को पॉच भौगोलिक क्षेत्रों में विभक्त किया गया है:-

खण्डाः पत्र्च हिमालयस्य कथिताः नैपालकूमाँचंलौ । केदारोऽथ जालन्धरोऽथ रूचिर काश्मीर संज्ञोऽन्तिमः ।।

अर्थात हिमालय क्षेत्र में नेपाल ,कुर्मांचल , केदारखण्ड़ (गढवाल), जालन्धर ( हिमाचल प्रदेश ) और सुरम्य काश्मीर पॉच खण्ड है। पौराणिक ग्रन्थों में कुर्मांचल क्षेत्र मानसखण्ड के नाम से प्रसिद्व था। पौराणिक ग्रन्थों में उत्तरीय हिमालय में सिद्ध गन्धर्व, यक्ष, किन्नर जातियों की सृष्टि और इस सृष्टि का राजा कुबेर बताया गया हैं। कुबेर की राजधानी अलकापुरी ( बदीनाथ से ऊपर) बताई जाती है।पुराणों के अनुसार राजा कुबेर के राज्य में आश्रम में ऋषि -मुनि तप व साधना करते थे।

अंग्रेज इतिहास कारों के अनुसार हुण, सकास, नाग खश आदि जातियां भी हिमालय क्षेत्र में निवास करती थी। किन्तु पौराणिक ग्रन्थों में केदार खण्ड व मानस खण्ड के नाम से इस क्षेत्र का व्यापक उल्लेख है। इस क्षेत्र को देव-भूमि व तपोभूमि माना गया है। मानस खण्ड का कुर्मांचल व कुमाऊं नाम चन्द राजाओं के शासन काल में प्रचलित हुआ।कुर्मांचल पर चन्द राजाओं का शासन कत्यूरियों के बाद प्रारम्भ होकर सन 1790 तक रहा। सन 1790 में नेपाल की गोरखा सेना ने कुमाऊं पर आक्रमण कर कुमाऊ राज्य को अपने आधीन कर दिया। गोरखाओं का कुमाऊं पर सन 1790 से 1815 तक शासन रहा। सन 1815 में अंग्रजो से अन्तिम बार परास्त होने के उपरान्त गोरखा सेना नेपाल वापिस चली गई किन्तु अंग्रजों ने कुमाऊं का शासन चन्द राजाओं को न देकर कुमाऊं को ईस्ट इण्ड़िया कम्पनी के अधीन कर किया। इस प्रकार कुमाऊं पर अंग्रेजो का शासन 1815 से प्रारम्भ हुआ।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार केदार खण्ड कई गढों( किले ) में विभक्त था। इन गढों के अलग राजा थे और राजाओं का अपने-अपने आधिपत्य वाले क्षेत्र पर साम्राज्य था। इतिहासकारों के अनुसार पंवार वंश के राजा ने इन गढो को अपने अधीनकर एकीकृत गढवाल राज्य की स्थापना की और श्रीनगर को अपनी राजधानी बनाया। केदार खण्ड का गढवाल नाम तभी प्रचलित हुआ। सन 1803 में नेपाल की गोरखा सेना ने गढवाल राज्य पर आक्रमण कर गढवाल राज्य को अपने अधीन कर लिया ।महाराजा गढवाल ने नेपाल की गोरखा सेना के अधिपत्य से राज्य को मुक्त कराने के लिए अंग्रजो से सहायता मांगी । अग्रेज सेना ने नेपाल की गोरखा सेना को देहरादून के समीप सन 1815 में अन्तिम रूप से परास्त कर दिया । किन्तु गढवाल के तत्कालीन महाराजा द्वारा युद्ध व्यय की निर्धारित धनराशि का भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त करने के कारण अंग्रजो ने सम्पूर्ण गढवाल राज्य गढवाल को न सौप कर अलकनन्दा मन्दाकिनी के पूर्व का भाग ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन में शामिल कर गढवाल के महाराजा को केवल टिहरी जिले ( वर्तमान उत्तरकाशी सहित ) का भू-भाग वापिस किया।गढवाल के तत्कालीन महाराजा सुदर्शन शाह ने 28 दिसम्बर 1815 को टिहरी नाम के स्थान पर जो भागीरथी और मिलंगना के संगम पर छोटा सा गॉव था, अपनी राजधानी स्थापित की। कुछ वर्षों के उपरान्त उनके उत्तराधिकारी महाराजा नरेन्द्र शाह ने ओड़ाथली नामक स्थान पर नरेन्द्र नगर नाम से दूसरी राजधानी स्थापित की । सन1815 से देहरादून व पौडी गढवाल ( वर्तमान चमोली जिलो व रूद्र प्रयाग जिले की अगस्तमुनि व ऊखीमठ विकास खण्ड सहित) अंग्रेजो के अधीन व टिहरी गढवाल महाराजा टिहरी के अधीन हुआ।

भारतीय गणतंन्त्र में टिहरी राज्य का विलय अगस्त 1949 में हुआ और टिहरी को तत्कालीन संयुक्तप्रान्त का एक जिला घोषित किया गया। भारत व चीन युद्व की पृष्ठ भूमि में सीमान्त क्षेत्रों के विकास की दृष्टि से सन 1960 में तीन सीमान्त जिले उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ का गठन किया गया ।

एक नये राज्य के रुप में उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन के फलस्वरुप (THE UP REORGANISATION ACT, 2000) उत्तरांचल की स्थापना दि० 9 नवम्बर 2000 को हुई।

सन 1969 तक देहरादून को छोडकर उत्तराखण्ड के सभी जिले कुमाऊं कमिश्नरी के अधीन थे। सन 1969 में गढवाल कमिश्नरी की स्थापना की गई जिसका मुख्यालय पौडी बनाया गया । सन 1975 में देहरादून जिले को जो मेरठ कमिश्नरी में शामिल था, गढवाल मण्डल में शामिल करने के उपरान्त गढवाल मण्डल में जिलों की संख्या पॉच हो गयी थी जबकि कुमाऊं मण्डल में नैनीताल , अल्मोडा , पिथौरागढ , तीन जिले शामिल थे। सन 1994 में उधमसिह नगर और सन 1997 में रूद्रप्रयाग , चम्पावत व बागेश्वर जिलों का गठन होने पर उत्तराखण्ड राज्य गठन से पूर्व गढवाल और कुमाऊ मण्डलों में क्रमश छः छः जिले शामिल थे। उत्तराखण्ड राज्य में हरिद्वार जनपद के सम्मिलित किये जाने पर राज्य के गठन उपरान्त गढवाल मण्ढल में सात और कुमाऊं मण्डल में छः जिले शामिल हैं। दिनांक 01 जनवरी 2007 से राज्य का नाम उत्तरांचल से बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया है। राज्‍य का स्‍थापना दिवस 9 नवम्‍बर को मनाया जाता है।

[संपादित करें] कुछ आंकड़े

क्षेत्रफल-५३,८४३ वर्ग किलोमीटर

जनसंख्या- कुल ८४,८०,०००

पुरुष - ४३,१७,०००, स्त्री - ४१,६३,०००

अनुसूचित जनजाति - २,१९,००० अनुसूचित जाति - १२,३२,०००

ज़िलों की संख्या - १३

गाँवों की संख्या-१६,६०६ विद्युतिकृत गाँव १२,५१९

यातायात - सड़कें - १,७७२ किलोमीटर


कृषियोग्य भूमि- ७,८४,००० हेक्टेयर

जंगल- २३,९८९ वर्गकिलोमीटर

औसत वर्षा- १०७९ मिलीमीटर

प्रतिव्यक्ति आय- १२,००० रुपए

विधानसभा सीटें- ७०, लोकसभा की सीटें- ५, राज्यसभा की सीटें - ३

[संपादित करें] माननीय मुख्यमंत्री

भुवन चन्द्र खंडूडी जिन्हे मेजर जनरल (से0नि0) बी0सी0 खंडूडी (जन्म 01 अक्टूबर 1934) के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखण्ड राज्य की तीसरी विधानसभा के सदस्य हैं। वो राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप् में उत्तराखण्ड विधानसभा की धूमाकोट सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह 8 मार्च 2007 से उत्तराखंड राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री है और पूर्व में भारत की केन् श्री खंडूडी का जन्म 1934 में देहरादून (उत्तराखंड) मं हुआ तथा शिक्षा इलाहबाद विश्वविद्यालय, सैन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय (सी0एम0ई0) पूणे, इन्स्टिटूयूट ऑफ इंजिनियर्स, नई दिल्ली और रक्षा प्रबंध संस्थान सिकन्दराबाद में शिक्षा प्राप्त की।

उन्होने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना की कोर ऑफ इन्जिनीयर्स में सेवा की! भारतीय सेना में विशिष्ट सेवा के लिए उन्हे 1982 में राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मैडल प्रदान किया गया।

सेवानिवृत्ति के उपरान्त वे राजनीति में आए और 1991 तथा बाद के चुनावों में उत्तराखंड के गढवाल क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली सरकार के सडक, परिवहन एवं राजमार्ग मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रह चुके हैं। 2003 में उन्हे कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जिस पर वह मई 2004 में राष्ट्रीय बनाया गया, जिस पर वह मई 2004 मे राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन सरकार के सत्ता परिवर्तन तक रहे! वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता है। मंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रतिष्ठत विकास परियोजना को और तत्परता से दक्षता राष्ट्रीय राजमार्ग से लागू किया ।

[संपादित करें] जिले

[संपादित करें] उत्तराखंड की नदियाँ

इस प्रदेश की नदियाँ भारतीय संस्कृति में सर्वाधिक स्थान रखती हैं। उत्तरांचल अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। यहाँ की नदियाँ सिंचाई व जल विद्युत उत्पादन का प्रमुख संसाधन है। इन नदियों के किनारे अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक केन्द्र स्थापित हैं। हिन्दुओं की अत्यन्त पवित्र नदी गंगा का उद्गम स्थल मुख्य हिमालय की दक्षिण श्रेणियाँ हैं। गंगा का आरम्भ अलकनन्दा व भागीरथी नदियों से होता है। अलकनन्दा की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। गंगा नदी भागीरथी के रुप में गोमुख स्थान से २५ कि.मी. लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। भागीरथी व अलकनन्दा देव प्रयाग संगम करती है जिसके पश्चात वह गंगा के रुप में पहचानी जाती है। यमुना नदी का उद्गम क्षेत्र बन्दरपूँछ के पश्चिमी यमनोत्री हिमनद से है। इस नदी में होन्स, गिरी व आसन मुख्य सहायक हैं। राम गंगा का उद्गम स्थल तकलाकोट के उत्तर पश्चिम में माकचा चुंग हिमनद में मिल जाती है। सोंग नदी देहरादून के दक्षिण पूर्वी भाग में बहती हुई वीरभद्र के पास गंगा नदी में मिल जाती है।

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ



The Flag of India, adopted on July 22, 1947.
भारत के प्रान्त और संघ राज्यक्षेत्र
प्रान्त अरुणाचल प्रदेशअसमआंध्र प्रदेशउत्तराखण्डउत्तर प्रदेशउड़ीसाकर्नाटककेरलगुजरातगोआछत्तीसगढ़जम्मू और कश्मीरझारखंडतमिल नाडुत्रिपुरानागालैंडपंजाबपश्चिम बंगालबिहारमणिपुरमध्य प्रदेशमहाराष्ट्रमिज़ोरममेघालयराजस्थानसिक्किमहरियाणाहिमाचल प्रदेश
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