गढ़वाली भाषा

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गढ़वाली भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है ।

गढ़वाली की बोलियाँ[संपादित करें]

चित्र:Kumaon Garhwal.jpg
Location of Garhwal in Uttarakhand.


गढ़वाली भाषा के अंतर्गत कई बोलियाँ प्रचलित हैं।

  • श्रीनगरिया, गढ़वाली का परिनिष्ठित रूप है।

साहित्य[संपादित करें]

गढ़वाली में साहित्य प्राय: नहीं के बराबर है, किंतु लोक- साहित्य प्रचुर मात्रा में है। इसके लिए देवनागरी लिपि का प्रयोग होता है।

व्याकरण[संपादित करें]

गढ़वाली का व्याकरण हिंदी से भिन्न है।

संज्ञा[संपादित करें]

कारक[संपादित करें]

विभक्ति नाम विभक्ति चिह्न
कर्ता -/ल
"'कर्म"'
करण न/से
संप्रदान खुण/कु
"'अपादान"' बटे/से
"'संबंध"' कु/का/क
"'अधिकरण"' म/फण/फर

लिंग[संपादित करें]

गढ़वाली भाषा मेँ दो ही लिंग हैँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग।

पुल्लिंग[संपादित करें]

पुल्लिंग प्रायः उकारांत होता है। जैसे डालु (पेड़), छ्वारु(छोरा), ढैबरु(नर भेढ़) आदि. जनैनी (पत्नी), जंवै (पति)

स्त्रीलिंग[संपादित करें]

स्त्रीलिंग प्रायः अकारांत इकारांत उकारांत होता है। जैसे- बिटल्हर(औरत), ल्होड़ी(लड़की), बो(भाभी) आदि

वचन[संपादित करें]

गढ़वाली मेँ दो ही वचन हैँ एकवचन और बहुवचन। वचन लिंग अनुसार बदलते हैँ।

स्त्रीलिंग और वचन[संपादित करें]

स्त्रीलिंग एकवचन प्रायः अकारांत इकारांत उकारांत और बहुवचन नासिक्य या इकारांत होता है

जैसे- कजाण(पत्नी)-कजणी ब्वारी(बहु)-ब्वारीँ


पुल्लिंग और वचन[संपादित करें]

पुल्लिंग एकवचन प्रायः उकारांत होता है और बहुवचन प्रायः ऽऽकारांत होता है। (ऽ प्रायः अ की तरह उच्चारित होता है और ऽऽ अ का दीर्घ उच्चारण है न कि आ। गढ़वाली मेँ अ का दीर्घ उच्चारण और आ दोनोँ भिन्न हैँ।) जैसे डालु (पेड़)-डालऽ


सर्वनाम[संपादित करें]

गढ़वाली मेँ सर्वनाम प्रायः हिंदी के समतुल्य भी हैँ और हिंदी के विपरित भी।

मी मैँ हम हम तुम स्यू यह(पु॰) स्यऽ ये(पु॰) स्या यह(स्त्री॰) वा वो(स्त्री॰) वो(पु॰)

शब्दकोष[संपादित करें]

गढ़वाली तथा कुमाँऊनी के लिए शब्दकोश पहाड़ी शब्दकोश नामक साइट पर उपलब्ध है।

यह भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]