लोकोक्ति
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बहुत अधिक प्रचलित और लोगों के मुँहचढ़े वाक्य लोकोक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। इन वाक्यों में जनता के अनुभव का निचोड़ या सार होता है। इनकी उत्पत्ति एवं रचनाकार ज्ञात नहीं होते।
लोकोक्तियाँ आम जनमानस द्वारा स्थानीय बोलियों में हर दिन की परिस्थितियों एवं संदर्भों से उपजे वैसे पद एवं वाक्य होते हैं जो किसी खास समूह, उम्र वर्ग या क्षेत्रीय दायरे में प्रयोग किया जाता है। इसमें स्थान विशेष के भूगोल, संस्कृति, भाषाओं का मिश्रण इत्यादि की झलक मिलती है। लोकोक्ति वाक्यांश न होकर स्वतंत्र वाक्य होती हँ ।
अनुक्रम |
कुछ उदाहरण [संपादित करें]
- असमंजस मे पडना-दुविधा मे पडना
- आँखो का तारा बनना-अधिक प्रिय बनना
- आसमान को छुना-अधिक प्रगति कर लेना
- किस्मत का मारा होना-भाग्यहीन होना
- गर्व से सीना फुल जाना-अभिमान होना
- गले लगाना-स्नेह दिखाना
- चैन की साँस लेना-निश्चिंत हो जाना
- जबान घिस जाना-कहते कहते थक जाना
- टस से मस न होना-निश्चय पर अटल रहना
- तहस नहस हो जाना-बर्बाद हो जाना
- ताज्जुब होना-आश्चर्य होना
- दिल बहलाना-मनोरंजन करना
वाक्य में प्रयोग [संपादित करें]
लोकोक्ति का वाक्य में ज्यों का त्यों उपयोग होता है। मुहावरे का उपयोग क्रिया के अनुसार बदल जाता है लेकिन लोकोक्ति का प्रयोग करते समय इसे बिना बदलाव के रखा जाता है। कभी-कभी काल के अनुसार परिवर्तन सम्भव है।
- अंधा पीसे कुत्ते खायें -
- प्रयोग: पालिका की किराये पर संचालित दुकानों में डीएम को अंधा पीसे कुत्ते खायें की हालत देखने को मिली।[1]
टिप्पणी [संपादित करें]
- ↑ "पालिका में रिकार्ड का रखरखाव बदहाल" (हिन्दी में). दैनिक जागरण समाचार पत्र. 18 दिसम्बर 2011. http://www.jagran.com/uttar-pradesh/jalaun-8646078.html.
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
- हिन्दी लोकोक्तियों का संग्रह
- हिंदी मुहावरे और लोकोक्ति कोश (गूगल पुस्तक ; डॉ बदरीनाथ कपूर)