तमिल भाषा
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| जिन देशों में प्रचलित है | भारत, श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया और अन्य देशों में तमिल अप्रवासियों द्वारा। | |
| कुल बोलनेवाले | ६.८ करोड़ (मातृभाषा)
७.७ करोड़ (कुल) |
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| विज्ञान वर्गीकरण |
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| राजभाषा | तमिल नाडु (भारत), श्रीलंका, सिंगापुर | |
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| आइएसओ 639-1: | ta | |
| आइएसओ 639-2: | (B) tam | (T) SIL=TAM |
तमिल (தமிழ) (भाषा तथा साहित्य) द्राविड़ भाषा परिवार की प्राचीनतम भाषा मानी जाती है। इसकी उत्पत्ति के सम्बंध में अभी तक यह निर्णय नहीं हो सका है कि किस समय इस भाषा का प्रारम्भ हुआ। विश्व के विद्वानों ने संस्कृत, ग्रीक, लैटिन आदि भाषाओं के समान तमिल को भी अति प्राचीन तथा सम्पन्न भाषा माना है। अन्य भाषाओं की अपेक्षा तमिल भाषा की विशेषता यह है कि यह अति प्राचीन भाषा होकर भी लगभग २५०० वर्षों से अविरत रूप से आज तक जीवन के सभी क्षेत्रों में व्यवहृत है। तमिल भाषा में उपलब्ध ग्रंथों के आधार पर यह निर्विवाद निर्णय हो चुका है कि तमिल भाषा ईसा से कई सौ वर्ष पहले ही सुसंकृत और सुव्यवस्थित हो गई थी।
मुख्य रूप से यह भारत के दक्षिणी राज्य तमिल नाडू, श्री लंका के तमिल बहुल उत्तरी भागों, सिंगापुर और मलेशिया के भारतीय मूल के तमिलों द्वारा बोली जाती है। भारत, श्रीलंका, और सिंगापुर में इसकी स्थिति एक आधिकारिक भाषा के रूप में है। इसके अतिरिक्त यह मलेशिया, मॉरिशस, वियतनाम, रियूनियन इस्त्यादि में भी पर्याप्त संख्या में बोली जाती है। लगभग ७ करोड़ लोग तमिल भाषा का प्रयोग मातृ-भाषा के रूप में करते हैं। यह भारत के तमिल नाडु राज्य की प्रशासनिक भाषा है, और यह पहली ऐसी भाषा है जिसे २००४ में भारत सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया।
तमिल द्रविड़ भाषा परिवार और भारत की सबसे प्राचीन भाषाओं में गिनी जाती है। इस भाषा का इतिहास कम से कम ३००० वर्ष पुराना माना जाता है। प्राचीन तमिल से लेकर आधुनिक तमिल में उत्कृष्ट साहित्य की रचना हुयी है। तमिल साहित्य कम से कम पिछ्ले दो हज़ार वर्षों से अस्तित्व में है। जो सबसे आरंभिक शिलालेख पाए गए है वे तीसरी शताब्दी ईसापूर्व के आसपास के हैं। तमिल साहित्य का आरंभिक काल, संगम साहित्य, ३०० ईपू - ३०० ईस्वीं का है।
इस भाषा के नाम को "तमिल" या "तामिल" के रूप में हिन्दी भाषा-भाषी उच्चारण करते हैं। तमिल भाषा के साहित्य तथा निघण्टु में तमिल शब्द का प्रयोग 'मधुर' अर्थ में हुआ है। कुछ विद्वानों ने संस्कृत भाषा के द्राविड़ शब्द से तमिल शब्द की उत्पत्ति मानकर द्राविड़ > द्रविड़ > द्रमिड > द्रमिल > तमिल आदि रूप दिखाकर तमिल की उत्पत्ति सिद्ध की है, किन्तु तमिल के अधिकांश विद्वान इस विचार से सर्वथा असहमत हैं।
अनुक्रम |
[संपादित करें] गठन
तमिल में हिंदी तथा कुछ अन्य भारतीय भाषाओं के विपरीत लिंग-विभेद प्रमुख नहीं होता है ।
हिंदी वर्णमाला के कई अक्षरों के लिये तमिल में एक ही वर्ण का प्रयोग होता है, यथा -
क ख ग घ - க
च छ ज झ श - ச
ट ठ ड ढ - ட
त थ द ध - த
पर तमिल भाषा में कुछ और वर्ण होते हैं जिनका प्रयोग सामान्य हिंदी में नहीं होता है ।
[संपादित करें] लेखन प्रणाली
तमिल भाषा वट्ट एळत्तु लिपि में लिखी जाती है। अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में इसमें स्पष्टतः कम अक्षर हैं। देवनागरी लिपि की तुलना में (यह तुलना अधिकांश भारतीय भाषाओं पर लागू होती है) इसमें दीर्घ ए तथा दीर्घ ओ भी हैं। प्रत्येक वर्ग (कवर्ग, चवर्ग आदि) का केवल पहला और अंतिम अक्षर उपस्थित है, बीच के अक्षर नहीं हैं (अन्य द्रविड भाषाओं तेलुगु, कन्नड, मलयालम में ये अक्षर उपस्थित हैं)। र और ल के अधिक तीव्र रूप भी हैं। वहीं न का कोमलतर रूप भी है। श, ष एक ही अक्षर द्वारा निरूपित हैं। तमिल भाषा की एक विशिष्ट (प्रतिनिधि) ध्वनि ழ (देवनागरी समकक्ष- ऴ, नया जोडा गया) है, जो स्वयं तमिल शब्द में प्रयुक्त है (தமிழ் ध्वनिशः - तमिऴ्)। तमिल में वर्गों के बीच के अक्षरों की ध्वनियाँ भी प्रथम अक्षर से निरूपित की जाती हैं, परंतु यह प्रतिचित्रण (mapping) कुछ नियमों के अधीन है।
[संपादित करें] हिंदी-तमिल लिप्यंतरण
नीचे कुछ हिंदी अक्षरों के तमिल समानान्तर दिये गए हैं -
- अ - அ
- आ - ஆ
- इ -இ
- ई - ஈ
- उ - உ
- ऊ - ஊ
- ए - ஏ
- ऎ - ஐ
- ओ - ஓ
- औ -ஔ
- क - க
- ख -(க)
- ग - க
- घ - (க)
- ङ - ங
- च - ச
- छ - (ச)
- ज - ஜ
- झ - (ஜ)
- ञ - ஞ
- ट - ட
- ठ - (ட)
- ड - ட
- ढ - (ட)
- ण - ண
- त - த
- थ - (த)
- द - த
- ध - (த)
- न - ந, ன
- प - ப
- फ -(ப)
- ब - ப
- भ - (ப)
- म - ம
- य - ய
- र - ர, ற
- व - வ
- श - ச
- ष - ஷ
- स - ஸ
- ह - ஹ
[संपादित करें] अवतरित शब्द
अंग्रेजी का शब्द मॆंगो (यानि आम) तमिल भाषा से अवतरित है। यह बात हलांकि अप्रमाणित, पर बहुमान्य है कि हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त नारंगी तथा अंग्रेजी के शब्द ऒरेंज का मूल भी तमिल ही है।