मणिपुर
| भारत के प्रान्त | |
| राजधानी | इंफाल |
| सबसे बड़ा शहर | इंफाल |
| जनसंख्या | २,३८८,६३४ (२००१) |
| - घनत्व | १०७ /किमी² |
| क्षेत्रफल | २२,३२७ किमी² |
| - जिले | ९ |
| राजभाषा(एँ) | मणिपुरी, बांग्ला, असमिया |
| प्रतिष्ठा | २१ जनवरी, १९७२ |
| - राज्यपाल | शिवेंद्र सिंह सिद्धू |
| - मुख्यमंत्री | ओकराम इबोबी सिंह |
| - विधानसभा | एक सभा |
| आइएसओ संक्षेप | IN-MN |
| www.manipur.nic.in | |
मणिपुर भारत का एक राज्य है। इसकी राजधानी है इंफाल। मणिपुर के पड़ोसी राज्य हैं: उत्तर में नागालैंड और दक्षिण में मिज़ोरम, पश्चिम में असम; और पूर्व में इसकी सीमा म्यांमार से मिलती है। इसका क्षेत्रफल 22,347 वर्ग कि.मी (8,628 वर्ग मील) है। यहां के मूल निवासी मेइती जनजाति के लोग हैं, जो यहां के घाटी क्षेत्र में रहते हैं। इनकी भाषा मेइतिलोन है, जिसे मणिपुरी भाषा भी कहते हैं। यह भाषा १९९२ में भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ी गई है, और इस प्रकार इसे एक राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त हो गया है। यहां के पर्वतीय क्षेत्रों में नागा व कुकी जनजाति के लोग रहते हैं। मणिपुरी को एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य माना जाता है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] परिचय
मणिपुर का शाब्दिक अर्थ ‘आभूषणों की भूमि’ है। भारत की स्वतंत्रता के पहले यह रियासत थी। आजादी के बाद यह भारत का एक केंद्रशासित राज्य बना। यहाँ की राजधानी इंफाल है। यह संपूर्ण भाग पहाड़ी है। जलवायु गरम एवं तर है तथा वार्षिक वर्षा का औसत 65 इंच है। यहाँ नागा तथा कूकी जाति की लगभग 60 जनजातियाँ निवास करती हैं। यहाँ के लोग संगीत तथा कला में बड़े प्रवीण होते हैं। यहाँ यद्यपि कई बोलियाँ बोली जाती हैं। पहाड़ी ढालों पर चाय तथा घाटियों में धान की उपजें प्रमुख हैं। यहीं से होकर एक सड़क बर्मा को जाती है।
इस राज्य में प्राकृतिक संसाधनों का प्रचुर भंडार है। यहां की प्राकृतिक छटा देखने योग्य है। यहां तरोताजा करने वाले जल-प्रपात है; रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे हैं, दुर्लभ वनस्पतियां व जीव-जंतु हैं, पवित्र जंगल हैं, हमेशा बहने वाली नदियां हैं, पर्वतों-पहाड़ियों पर बिखरी हरी विभा है और टेढ़े-मेढ़े गिरने वाले झरने हैं। लोकटक झील यहां की एक महत्वपूर्ण झील है। भौतिक आधार पर राज्य- को दो भागों में बांटा जा सकता है, पहाड़ियां व घाटियां। चारों ओर पहाड़ियां हैं और बीच में घाटी है। इस प्रकार प्रकृति की प्राचीन गौरव है। राज्य की कला व संस्कृरति समृद्ध है जो विश्व मानचित्र पर इसकी समृद्धि को दर्शाती है।
[संपादित करें] मणिपुर के लोग
यहां तीन प्रमुख जनजातियां निवास करती हैं। घाटी में मीतई जनजाति रहती है तो नागा और कूकी-चिन जनजातियां पहाड़ियों पर रहती हैं। प्रत्येक जनजाति वर्ग की खास संस्कृति और रीति रिवाज हैं जो इनके नृत्य, संगीत व पारंपरिक प्रथाओं से दृष्टिगोचर होता है। मणिपुर के लोग कलाकार होते हैं साथ ही सृजनशील होते हैं जो उनके द्वारा तैयार खादी व दस्तकारी के उत्पादों में झलकती है, ये उत्पाद विश्वभर में अपनी डिज़ाइन, कौशल व उपयोगिता के लिए जाने जाते हैं। यहां नेपाल से आकर बसे नेपालियों की भी काफी संख्या है, जो मणिपुर के कई इलाकों में बसे हैं|
[संपादित करें] भौगोलिक स्थिति
भारत के पूर्वी सीमा पर स्थित यह राज्य 23.83 डिग्री उत्तार और 25.68 डिग्री उत्तरी अक्षांश व 94.78 डिग्री पूर्वी देशांतर के बीच पड़ता है। एक ओर तो पूर्व में म्यांमार है तो नागालैंड उत्तर-पश्चिम दिशा में हैं, तो मिज़ोरम दक्षिण में है। यह पूरे 22,327 किलोमीटर में फैला है।
मणिपुर की भौगोलिक स्थिति दर्शनीय है। उत्तरी तथा पूर्वी इलाकों में ऊंची पहाडियां है और मध्य भाग में मैदानी समतल है। यहां हर पहाड़ के बीच में कोई न कोई नदी बहती हैं। इम्फाल नदी यहां की प्रमुख नदी है।
[संपादित करें] अर्थव्यवस्था
कृषि व कृषि आधारित उद्योग अर्थव्यवस्था का आधार हैं. राज्य सूचना प्राद्योगिकी आधारित व्यवसायों के लिए एक उपयुक्त स्थान है. यहां उच्च शिक्षा की व्यवस्था है, यहां निवेश की अपार संभावनाएं हैं, खासकर कृषि व खाद्य प्रसंस्कथरण के क्षेत्र में. हथकरघा, दस्तकारी और पर्यटन के क्षेत्र में कई संभावनाएं है। इन क्षेत्रों में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई नीतियां तैयार की हैं साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के कई प्रोत्साहन देने की भी घोषणा की गयी है.
[संपादित करें] पर्यटन
अपनी विविध वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के कारण मणिपुर को 'भारत का आभूषण' व 'पूरब का स्विट्जरलैंड' आदि विविध नामों से संबोधित किया जाता है। लुभाने वाले प्राकृतिक दृश्यों, में विलक्षण फूल-पौधे, निर्मल वन, लहराती नदियां, पहाड़ियों पर छाई हरियाली शामिल है। इन सबके अलावा पर्यटकों के लिए कई आकर्षण हैं जो राज्य में पर्यटन के विकास के लिए उत्कृष्ठ अवसर प्रदान करता हैं। श्री गोविंद जी मंदिर, खारीम बंद बाजार (इमा कैथल) युद्ध कब्रिस्तान, शहीद मीनार, नुपी सान (महिलाओं का युद्ध) मेमोरियल कॉम्लेार क्सा, खोंघापत उद्यान, आईएनए मेमोरियल (मोइरांग), लोकटक झील, कीबुल लामजो राष्ट्रीय उद्यान, विष्णुपुर स्थित विष्णु मंदिर, सेंड्रा, मोरेह सिराय गांव, सिराय की पहाड़ियां, डूको घाटी, राजकीय अजायबघर, कैना पर्यटक निवास, खोंगजोम वार मेमोरियल आदि मणिपुर के कुछ महत्व पूर्ण पर्यटक स्थल है। मणिपुर देश के सुदूर उत्तरपूर्वी छोर पर स्थित है और, इसका अधिकांश पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां निवेश के कई अवसर हैं। यहां कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां निवेशकों को आकर्षित करने के लिए काफी संभावनाएं हैं। यहां के दर्शनीय स्थलों में इम्फाल, उख्रुल प्रसिद्ध हैं। इम्फाल में कांग्ला पार्क, गोविंद मन्दिर वहां के बाजार, टीकेन्द्रजित पार्क प्रसिद्ध हैं तो उख्रुल की पहाड़ियां प्रसिद्ध हैं। चुडाचांदपुर जिले में लोकतक झील प्रसिद्ध हैं।
मणिपुर में प्रवेश करने वाले विदेशियों को, चाहे वे यहां जन्मे हों, प्रतिबंधित क्षेत्र पर्मिट लेना आवश्यक होता है। यह चारों मुख्य महानगरों में स्थित विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से मिलता है। यह पर्मिट मात्र दस दिन के लिए वैध होता है, व सैलानी यहां भ्रमण करने के लिए प्राधिकृत ट्रैवल एजेंट द्वारा वयवस्थित चार लोगों के समूहों में ही जा सकते हैं। साथ ही विदेशी सैलानी यहां वायुयान द्वारा ही आ सकते हैं और उन्हें राजधानी इंफाल के बाहर घूमने की आज्ञा नहीं है।
[संपादित करें] कृषि और खाद्य प्रसंस्करण
राज्य में कृषि के अनुकूल परिस्थितियां हैं। यहां की जलवायु और मिट्टी, कृषि व बागवानी वाली प्राय: सभी फसलें उगाने के लिए उपयुक्त है। राज्य में प्रचुर मात्रा में धान, गेहूं, मक्का, दलहन व तिलहन (जैसे तेल, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि) की खेती की जाती है. इसके अतिरिक्त विभिन्न फलों जैसे अनानास, नींबू, केला, नारंगी आदि और सब्जियां जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, टमाटर व मटर आदि का उत्पादन किया जाता है। इसके फलस्वरूप खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, कृषि, बागवानी, मछली पालन, मुर्गी पालन, पशु पालन और वनों के विविधीकरण तथा वाणिज्यीकरण में एक महत्व्पूर्ण भूमिका निभाता है। इस उद्योग के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इंफाल में 'खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण केंद्र और 'खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण हॉल' की स्थापना की है। इंफाल में एक खाद्य पार्क की भी स्थापना की जा रही है।
[संपादित करें] हथकरघा
हथकरघा उद्योग राज्य का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। यहां यह उद्योग अनादि काल से फल-फूल रहा है। राज्यथ में यह सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध् करा रहा है खासकर महिलाओं को। मणिपुर के प्रमुख हथकरघा उत्पाकद साड़ी, चादर, पर्दे, फैशनवाले कपड़े, स्काधर्फ व तकिए के कवर आदि है। अधिकांश जुलाहे जिन्हेंथ हुनर व महीन डिजाइनिंग के लिए जाना जाता है। वे वांग खाई बायोन कांपू, कोंगमान, खोंग मैन उल्लालऊ आदि से हैं जो उत्कृमष्टन सिल्कन आदि उत्पामदों के लिए प्रसिद्ध हैं। मणिपुरी कपड़े व शॉलों की राष्ट्रीगय व अंतरराष्ट्री य बाजारों में काफी मांग है। तीन सरकारी एजेंसियां हथकरघा उत्पाोदन का काम करती हैं ये हैं
- मणिपुर डेवलपमेंट सोसायटी (एमडीएस)
- मणिपुर हैंडलूम एंड हैडीक्राफ्ट डेवलपमेंट कॉपोरेशन (एमएचएचडीसी)
- मणिपुर स्टेट हैंडलूम वीवर्स को-ऑपरेटिव सोसायटी (एमएसएचडब्यूज सीएस)
[संपादित करें] हस्तशिल्प
देश की विभिन्न हस्तशिल्प कलाओं में राज्य के हस्तशिल्प उद्योग का अनूठा स्थान है। इसके अंतर्गत बेंत व बांस के बने उत्पादों के साथ-साथ मिट्टी के बर्तन बनाने की संस्कृति भी शामिल है। मणिपुर में मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रथा काफी पुरानी है और यह उद्यम मुख्यत: एंड्रो, सिकमाई, चैरन, थोगजाओ, नुंगवी व सेनापति जिले में किया जाता है। चूंकि बांस व बेंत काफी मात्रा में उपलब्ध है, टोकरी बुनना यहां के लोगों का लोकप्रिय व्यवसाय बन गया है। इसके अतिरिक्ति मछली मारने के उपकरण भी बेंत व बांस के बनाए जाते हैं। घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन सभी उत्पादों की काफी मांग है।
[संपादित करें] सूचना प्रौद्योगिकी
राज्य में आईटी उद्योग की प्रचुर संभावना को देखते हुए मणिपुर सरकार इलेक्ट्रॉ निकी और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को विकास के एक महत्वौपूर्ण क्षेत्र के रूप में उच्चह प्राथमिकता देती है। राज्यर में सक्रिय जन शक्ति और गुणवत्तापूर्ण कार्य बल हैं जो ऐसे उद्योगों के लिए अनुकूल हैं। राज्यं में इलेक्ट्रॉ निकी और सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योगों के विकास के लिए और खाली पदों को भरने के लिए मणिपुर इंडस्ट्रियल कॉपोरेशन का गठन किया गया है। ऐसे आईटी क्षेत्र जहां निवेश के अवसर हैं इस प्रकार हैं -
- आईटी पार्क स्थािपित करने से, आईटी आधारित सर्विस सेंटर व सूचना कियोस्कं स्थारपित करने में
- वायस, डाटा व वीडियो प्रसारण और प्रचार के लिए मणिपुर, स्टे ट वाइड एरिया नेटवर्क (एमएएनएनटी) के बैकबोन नेटवर्क की स्थािपना की गई है
- नागरिकों को मल्टीा फंक्शहन इलेक्ट्रॉ निक स्मा र्ट कार्ड उपलब्धर कराना
- स्कूिल व कॉलेजों में आईटी साक्षरता कार्यक्रम
- आईटी के जरिए दूरस्थॉ शिक्षा को राज्या में बढ़ावा देने के लिए आईटी साक्षरता कार्यक्रम
[संपादित करें] जिले
- इन्हें भी देखें: मणिपुर के जिले
मणिपुर में 9 जिले हैं - • इम्फाल पूर्व जिला • *इम्फाल पश्चिम जिला • उखरुल जिला • चन्डेल जिलाचुराचांदपुर जिला • तमेंगलॉन्ग जिला • थौबल जिला • बिष्णुपुर जिला • सेनापति जिला •
[संपादित करें] वाह्य सूत्र
- मणिपुर की म्हार जनजाति के बारे में सूचना जालस्थल
- मणिपुर पेज: मणिपुरी गीत संगीत का जालस्थल
- ई-पाओ! मणिपुरियों का संपूर्ण ई-मंच
- मणिपुर सरकार का आधिकारिक जालस्थल
- युनाइटेड मणिपुर रिसर्चर्स आर्गेनाइजेशन, दिल्ली
- मणिपुर - गहनों का देश
- कांग्ला आनलाइन
- मणिपुर के नक्शे
- मणिपुर ऑनलाइन
- मणिपुर के थोकचोम
- मणिपुर फ्रीडम: आइरोन शर्मीला चानु की भू हड़ताल
- मणिपुर का इतिहास
- मणिपुर - संस्कृति एवं विरासत
- द सांगाई एक्सप्रेस - मणिपुर से प्रकाशित अंग्रेजी समाचारपत्र का जालस्थल
- सांस्कृतिक संवाद में जुटी भाषाएँ: हिंदी - मणिपुरी
- श्री गोविंदा जी मंदिर