उत्तरकाशी
| उत्तरकाशी | |
| — शहर — | |
|
|
|
|
|
|
| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
| देश | |
| राज्य | उत्तराखंड |
| ज़िला | उत्तरकाशी |
| नगर पालिका अध्यक्ष | |
| जनसंख्या • घनत्व |
2,39,709 (2001 के अनुसार [update]) |
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
. km² (0 sq mi) • 1,158 मीटर (3,799 फी॰) |
उत्तरकाशी ऋषिकेश से 155 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शहर है, जो उत्तरकाशी जिले का मुख्यालय है। यह शहर भागीरथी नदी के तट पर बसा हुआ है। उत्तरकाशी धार्मिक दृष्िट से भी महत्वपूर्ण शहर है। यहां भगवान विश्वनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। यह शहर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहां एक तरफ जहां पहाड़ों के बीच बहती नदियां दिखती हैं वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों पर घने जंगल भी दिखते हैं। यहां आप पहाड़ों पर चढ़ाई का लुफ्त भी उठा सकते हैं।
अनुक्रम |
पर्वतारोहण[संपादित करें]
उत्तरकाशी का एक अन्य आकर्षण पर्वतारोहण है। यहां आप पर्वतारोहण का मजा ले सकते हैं। हर-की-दून, दोदीतल, यमुनोत्री तथा गोमुख से पर्वतारोहण किया जा सकता है।
खानपान[संपादित करें]
उत्तरकाशी के अधिकांश रेस्टोरेंटों में शाकाहारी खाना मिलता है। कुछ होटलो में विशेष अनुरोध पर गढ़वाली भोजन बनाया जाता है। झंगुरा,मंडुआ तथा भट्ट यहां के प्रमुख भोजन है। इसके साथ-साथ रायता तथा रोटी भी यहां के लोग खाते हैं। सत्यम फूड यहां का सबसे बढि़या रेस्टोरेंट है।
स्थिति[संपादित करें]
- प्रमुख स्थानों से दूरी
- ऋषिकेश से 148 किलोमीटर उत्तर,
- दिल्ली से 372 किलोमीटर उत्तर दक्षिण में
प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]
विश्वनाथ मंदिर[संपादित करें]
प्राचीन विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर उत्तरकाशी के बस स्टैण्ड से 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना परशुराम जी द्वारा की गई थी तथा महारानी कांति ने 1857 ई.में इस मंदिर का मरम्मत करवाया। महारानी कांति सुदर्शन शाह की पत्नी थीं। इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है। उत्तरकाशी आने वाले पर्यटक इस मंदिर को देखने जरुर आते हैं।
शक्ित मंदिर[संपादित करें]
विश्वनाथ मंदिर के दायीं ओर शक्ित मंदिर है। इस मंदिर में 6 मीटर ऊंचा तथा 90 सेंटीमीटर परिधि वाला एक बड़ा त्रिशूल स्थापित है। इस त्रिशूल का ऊपरी भाग लोहे का तथा निचला भाग तांबे का है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी दुर्गा (शक्ित) ने इसी त्रिशूल से दानवों को मारा था। बाद में इन्हीं के नाम पर यहां इस मंदिर की स्थापना की गई।
मनीरी[संपादित करें]
यह स्थान उत्तरकाशी से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर एक डैम बनाया गया है। डैम होने के कारण यह स्थान पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। यह डैम भागीरथी नदी पर बना गया है। यहां बिजली उत्पादन किया जाता है।
गंगनी[संपादित करें]
यह स्थान मनीरी से गंगोत्री जाने के रास्ते पर स्थित है। यहां एक गर्म पानी का झरना है।
दोदीताल[संपादित करें]
यह ताल समुद्र तल से 3307 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ताल चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहां पर्यटकों की हमेशा भीड़ लगी रहती है। इस ताल में मछली मारने के लिए मंडल वन अधिकारी,उत्तरकाशी से अनुमति लेनी होती है।
दायरा बुग्याल[संपादित करें]
यह बुग्याल समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से हिमालय का बहुत ही सुंदर नजारा दिखता है। यहां एक छोटी सी झील भी है।
सत ताल[संपादित करें]
सत ताल का अर्थ है सात झीलें। यह धाराली से 2 किलोमीटर ऊपर हरसिल के पास स्थित है। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।
केदार ताल[संपादित करें]
यह ताल समुद्र तल से 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। थाल्यासागर चोटी का इसमें स्पष्ट प्रतिबिंब नजर आता है। केदार ताल जाने के रास्ते में कोई सुविधा नहीं मिलती है। इसलिए यहां पूरी तैयारी के साथ जाना चाहिए।
नचिकेता ताल[संपादित करें]
इस ताल के चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। ताल के तट पर एक छोटा सा मंदिर भी है। कहा जाता है कि नचिकेता जो संत उदाक के पुत्र थे उन्होने ही इस ताल का निर्माण किया था। इसी कारण इस ताल का नाम नचिकेता ताल पड़ा। इस ताल के पास ठहरने और खाने की कोई सुविधा नहीं है।
गोमुख[संपादित करें]
गोमुख हिमनदी ही भागीरथी (गंगा) नदी के जल का स्रोत है। यह हिंदुओं के लिए बहुत ही पवित्र स्थान है। यहां आने वाला प्रत्येक यात्री को यहां जरुर स्नान करना चाहिए है। यह गंगोत्री से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से 14 किलोमीटर दूर भोजबासा में एक पर्यटक बंगला है जहां पर्यटकों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था होती है।
नंदन-वन-तपोवन[संपादित करें]
यह स्थान गंगोत्री हिमनद से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से आसपास की पहाड़ी का बहुत सुंदर नजारा दिखता है।
सेममुखेम नागराज[संपादित करें]
सेममुखेम नागराज एक प्रसिद्द नागतीर्थ है जो कि श्रद्धालुओं में सेम नागराजा के नाम से प्रसिद्ध है। प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त इस स्थान पर नागराज का सिद्ध मन्दिर है।
नेहरु पर्वतारोही संस्थान[संपादित करें]
इस संस्थान की स्थापना 1965 ई.में हुई। इस संस्थान में पर्वतारोहण सिखाया जाता है। यहां एक हिमालयन संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में पर्वतारोहण से संबंधित पुस्तकें, फिल्म्ा तथा स्लाइडस रखे हुए हैं। यहां एक दुकान भी हैं। इसमें पर्वतारोहण से संबंधित सामान मिलता हैं। लोकेशन: टहरी झील के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 108 पर। वेबसाइट: nimindia.org समय: सुबह 10बजे से शाम 5 बजे तक। मंगलवार बंद। शुल्क: वयस्क के लिए 5 रु.तथा बच्चों के लिए 2 रु.।
भ्रमण समय[संपादित करें]
मार्च से अप्रैल तथा जुलाई से अक्टूबर से यहां जाने का सबसे उत्तम समय है।
भ्रमण साधन[संपादित करें]
- हवाई मार्ग
यहां सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून में जौली ग्रांट है। यहां दिल्ली से एयर डक्कन की प्रतिदिन दो उड़ाने जाती है।
- रेल मार्ग
देहरादून यहां का सबसे नजदीकी रेल स्टेशन है। दिल्ली, मुंबई तथा जयपुर से यहां के लिए सीधी रेल सेवा है।
- सड़क मार्ग
उत्तरकाशी सड़क मार्ग द्वारा देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हूआ है। दिल्ली के कश्मीरी गेट से उत्तरकाशी के लिए बस खुलती हैं। इसके अलावा देहरादून से भी उत्तरकाशी के लिए सीधी बस सेवा है। ऋषिकेश से भी यहां के लिए बसें खुलती है।