नन्दा देवी पर्वत

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नन्दा देवी
ऊँचाई 7,816 मी (25,643 फ़ुट) २३वां
उदग्रता 3,139 मी (10,299 फ़ुट)[1]७४वां दर्जा
सूचीयन अल्ट्रा
स्थिति
नन्दा देवी is located in उत्तराखंड
नन्दा देवी
उत्तराखंड में स्थिति
स्थिति उत्तराखंड, भारत
शृंखला गढ़वाल हिमालय
निर्देशांक

30°32′26″N 79°58′15″E / 30.54056°N 79.97083°E / 30.54056; 79.97083Erioll world.svgनिर्देशांक: 30°32′26″N 79°58′15″E / 30.54056°N 79.97083°E / 30.54056; 79.97083

[1][2]
आरोहण
प्रथम आरोहण २९ अगस्त १९३६, द्वारा: नील ओडेल तथा बिल टिल्मैन[3][4]
सरलतम मार्ग साउथ रिज: तकनीकी पाषाण/हिम/बर्फ़ क्लाइम्ब
नन्दा देवी पूर्व
ऊँचाई 7,434 मी (24,390 फ़ुट)
उदग्रता 260 मी (850 फ़ुट)[5][6]
स्थिति
स्थिति पिथौरागढ़-चमोली,बागेश्वर उत्तराखंड, भारत
शृंखला कुमाऊं हिमालय
निर्देशांक
आरोहण
प्रथम आरोहण १९३९, जेबुजाक एवं जे क्लार्नेर[3]
सरलतम मार्ग दक्षिणी रिज, लावान गाद, बारास्ता लॉन्गस्टाफ कोल:तकनीकी पाषाण/हिम/बर्फ़ क्लाइम्ब

नन्दा देवी पर्वत भारत की दूसरी एवं विश्व की २३वीं सर्वोच्च चोटी है।[7] इससे ऊंची व देश में सर्वोच्च चोटी कंचनजंघा है। नन्दा देवी शिखर हिमालय पर्वत शृंखला में भारत के उत्तरांचल राज्य में पूर्व में गौरीगंगा तथा पश्चिम में ऋषिगंगा घाटियों के बीच स्थित है। इसकी ऊंचाई ७८१६ मीटर (२५,६४३ फीट) है। इस चोटी को उत्तरांचल राज्य में मुख्य देवी के रूप में पूजा जाता है।[8] इन्हें नन्दा देवी कहते हैं।[9] नन्दादेवी मैसिफ के दो छोर हैं। इनमें दूसरा छोर नन्दादेवी ईस्ट कहलाता है।[7] इन दोनों के मध्य दो किलोमीटर लम्बा रिज क्षेत्र है। इस शिखर पर प्रथम विजय अभियान में १९३६ में नोयल ऑडेल तथा बिल तिलमेन को सफलता मिली थी। पर्वतारोही के अनुसार नन्दादेवी शिखर के आसपास का क्षेत्र अत्यंत सुंदर है। यह शिखर २१००० फुट से ऊंची कई चोटियों के मध्य स्थित है। यह पूरा क्षेत्र नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जा चुका है। इस नेशनल पार्क को १९८८ में यूनेस्को द्वारा प्राकृतिक महत्व की विश्व धरोहर का सम्मान भी दिया जा चुका है।[7]

पर्वतारोहण

इस हिमशिखर के मार्ग में आने वाले पहाड़ काफी तिरछे हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण खड़ी चढ़ाई पर आगे बढ़ना एक दुष्कर कार्य है। यही कारण है कि इस शिखर पर जाने के इच्छुक पर्वतारोहियों को १९३४ तक इस शिखर पर जाने का सही मार्ग नहीं मिल पाया था। इसका मार्ग ब्रिटिश अन्वेषकों द्वारा खोजा गया था।

  • १९३६ में ब्रिटिश-अमेरिकी अभियान को नन्दादेवी शिखर तक पहुंचने में सफलता मिली। इनमें नोयल ऑडेल तथा बिल तिलमेन शिखर को छूने वाले पहले व्यक्ति थे, जबकि नन्दादेवी ईस्ट पर पहली सफलता १९३९ में पोलेंड की टीम को मिली।
  • नन्दादेवी पर दूसरा सफल अभियान इसके ३० वर्ष बाद १९६४ में हुआ था। इस अभियान में एन. कुमार के नेतृत्व में भारतीय टीम शिखर तक पहुंचने में सफल हुई। इसके मार्ग में कई खतरनाक दर्रे और हिमनद आते हैं।
  • नन्दादेवी के दोनों शिखर एक ही अभियान में छूने का गौरव भारत-जापान के संयुक्त अभियान को १९७६ में मिला था।
  • १९८० में भारतीय सेना के जवानों का एक अभियान असफल रहा था।
  • १९८१ में पहली बार रेखा शर्मा, हर्षवंति बिष्ट तथा चंद्रप्रभा ऐतवाल नामक तीन महिलाओं वाली टीम ने भी सफलता पायी।

नन्दादेवी के दोनों ओर ग्लेशियर यानी हिमनद हैं। इन हिमनदों की बर्फ पिघलकर एक नदी का रूप ले लेती है।

सुवर्ण वर्णी नन्दा देवी शिखर, सूर्यास्त की किरणों से आच्छादित

पिंडारगंगा नाम की यह नदी आगे चलकर गंगा की सहायक नदी अलकनन्दा में मिलती है। उत्तराखंड के लोग नन्दादेवी को अपनी अधिष्ठात्री देवी मानते है। यहां की लोककथाओं में नन्दादेवी को हिमालय की पुत्री कहा जाता है।[7] नन्दादेवी शिखर के साये मे स्थित रूपकुंड तक प्रत्येक १२ वर्ष में कठिन नन्दादेवी राजजात यात्रा श्राद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है।[8][9] नन्दादेवी के दर्शन औली, बिनसर या कौसानी आदि पर्यटन स्थलों से भी हो जाते हैं। अविनाश शर्मा, शेरपा तेनजिंग और एडमंड हिलेरी नामक पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट को सबसे पहले विजय करने के अलावा हिमालय पर्वतमाला की कुछ और चोटियों पर विजय प्राप्त की थी। एक साक्षात्कार के दौरान शेरपा तेनजिंग कहा था कि एवरेस्ट की तुलना में नन्दादेवी शिखर पर चढ़ना ज्यादा कठिन है।

चित्र दीर्घा

संदर्भ

  1. अल्ट्रा-प्रोमिनेंट शिखर।peaklist.org
  2. हिमालयन सूचकांक से नन्दा देवी के निर्देशांक 30°22′12″N 79°58′12″E / 30.37°N 79.97°E / 30.37; 79.97 मिलते हैं।
  3. हरीश कपाड़िया। नन्दा देवी, इन वर्ल्ड माउंटेनियरिंग। ऑडरे साल्केड। बल्फिंच प्रेस। १९९८।ISBN 0-8212-2502-2। पृष्ठ:२५४-२५७
  4. ऍण्डी फ़ैनशॉ एवं स्टीफन वेनेबल्स। हिमालय ऑल्पाइन-स्टाइल्स। हॉडर एवं स्टोघ्टोन। १९९५।ISBN 0-340-64931-3
  5. करेक्टेड DEM फाइल्स फ़ॉर द हिमालय
  6. गढ़वाल-हिमालय-ओस्ट, 1:150,000 स्केल टोपोग्राफ़िक मैप, निर्मित:१९९२, द्वारा अर्नेस्ट ह्यूबर।भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्रों पर आधारित
  7. नन्दादेवी पीक। हिन्दुस्तान लाइव। १४ अक्टूबर २००९
  8. नन्दा देवी की आत्मा वापस घर लौट आई और...। नवभारत टाइम्स। हरेन्द्र सिंह रावत
  9. नन्दा देवी और रूप कुंड

इन्हें भी देखें

बाहरी सूत्र