पुराण
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पुराण
ये ग्रन्थ वैदिक काल के काफ़ी बाद हैं, जो स्मृति विभाग में आते हैं। पुराणों में सृष्टि के आरम्भ से अन्त तक का विवरण किया गया है। पुराणों को मनुष्य के भूत भविष्य, वर्तमान का दर्पण कहा जा सकता है। इस दर्पण में मनुष्य अपने प्रत्येक युग का चेहरा देख सकता है। इस दर्पण में अपने अतीत को देखकर वह अपना वर्तमान संवार सकता है और भविष्य को उज्जवल बना सकता है। अतीत में जो हुआ, वर्तमान में जो हो रहा है और भविष्य में जो होगा, यही कहते हैं पुराण।[१] इनमें हिन्दू देवी-देवताओं का और पौराणिक मिथकों का बहुत अच्छा वर्णन है । 18 विख्यात पुराण हैं :
अनुक्रम |
[संपादित करें] विष्णु पुराण
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- विष्णु-
- भागवत-
- नारदेय-
- गरुड़-
- पद्म-
- वाराह-
[संपादित करें] ब्रह्मा पुराण
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- ब्रह्म-
- ब्रह्माण्ड-
- ब्रह्म वैवर्त-
- मार्कंडेय- (यह महत्वपूर्ण पुराण शाक्त पंथ के लिये खास है क्योंकि इसमें देवी महात्मय है)
- भविष्य-
- वामन-
[संपादित करें] शिव पुराण
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- वायु-
- लिंग-
- स्कंद-
- अग्नि-
- मत्सय-
- कूर्म-
[संपादित करें] संदर्भ
- ↑ क्या कहते हैं पुराण (पीएचपी)। साहित्य संग्रह। अभिगमन तिथि: 9 मार्च, 2008।
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