मोक्ष

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज
हिन्दू धर्म
के विषय में एक श्रेणी
इतिहास · देवता
सम्प्रदाय · आगम
विश्वास और दर्शनशास्त्र
पुनर्जन्म · मोक्ष
कर्म · पूजा · माया
दर्शन · धर्म
वेदान्त ·
योग · आयुर्वेद
युग · शाकाहार
भक्ति
ग्रन्थ
वेदसंहिता ·
ब्राह्मणग्रन्थ · आरण्यक
उपनिषद् · श्रीमद्भगवद्गीता
रामायण · महाभारत
सूत्र · पुराण
शिक्षापत्री · वचनामृत
सम्बन्धित विषय
दैवी धर्म ·
विश्व में हिन्दू धर्म
गुरु · मन्दिर देवस्थान
यज्ञ · मन्त्र
शब्दकोष · हिन्दू पर्व
विग्रह
पोर्टल: हिन्दू धर्म

मोक्ष हिन्दू धर्म के अनुसार, कर्म के बन्धन से मुक्ति पाने की स्थिति है। यह स्थिति मानव जीवन में ही प्राप्त हो सकती है।

[संपादित करें] हिन्दू धर्म में मोक्ष

इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति मुक्ति के लिए संघर्षरत रहता है । भूख से मुक्ति के लिए वह भोजन का प्रबन्ध करता है । सर्दी-गर्मी से मुक्ति के लिए वह मकान, वस्त्र आदि का प्रबन्ध करता है; तनाव से मुक्ति के लिए मनोरंजन के साधनों को खोजता है; रोग से मुक्ति के लिए औषधियों और शल्य-चिकित्सा का सहारा लेता है; अज्ञान से मुक्ति के लिए शिक्षा ग्रहण करता है, असुरक्षा से मुक्ति के लिए राजनीतिक व्यवस्था तथा निर्धनता से मुक्ति के लिए अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है । फिर भी उसका मन अनन्त इच्छाओं का जाल फैलाता है और उनसे उनकी पूर्ति न हो पाने पर दु:ख का अनुभव करता है । यही मन प्रिय जनों में राग उत्पन्न करता है और उनसे वियोग होने पर शोकाकुल हो जाता है । यह मन भविष्य की चिन्ताओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर वर्तमान के सुख को छीन लेता है । प्राणों का मोह मन में मृत्यु-भय उत्पन्न करता है । उन सबसे मुक्ति भौतिक पदार्थों या भौतिक सुख-सुविधा के साधनों से नहीं मिल सकती । अध्यात्म के माध्यम से ही दु:ख, शोक और मृत्यु-भय से मुक्ति मिल सकती है जिसे मोक्ष कहते हैं । मोक्ष का पहला मूलमंत्र है इच्छाओं की पूर्ति से परितृप्त होकर भौतिक सुखों के लिए इच्छाओं की निस्सारता को समझ कर इच्छाओं का त्याग करना-


यदा सर्वे प्रमुच्यन्ते कामाये स्य हृदिश्रिता: ॥

अथ मर्त्यो मृतो भवत्यत्र ब्रह्म समश्नुते ॥

(जब हृदय की समस्त इच्छाएँ समाप्त हो जाती हैं तब मर्त्य अमर हो जाता है और इस जीवन में ब्रह्म की प्राप्ति कर लेता है।)


यदा सर्वे प्रभिद्यन्ते हृदयस्येह ग्रन्थय: ॥

अथ मर्त्यो मृतो भवत्येतावद्धरनुशासनम् ॥

(जब हृदय की समस्त सांसारिक ग्रन्थियाँ अलग हो जाती हैं तो मर्त्य अमर हो जाता है । यहीं समस्त शिक्षा का अन्त होता है।)

     हिन्दू धर्म     
श्रुति: वेद · उपनिषद · श्रुति
स्मृति: इतिहास (रामायण, महाभारत, भगवद्गीता) · पुराण · सूत्र · आगम (तन्त्र, यन्त्र) · वेदान्त
विचार अवतार · आत्मा · ब्रह्मन् · धर्म · कर्म · मोक्ष · माया · इष्ट-देव · मूर्ति · पुनर्जन्म · संसार · तत्त्व · त्रिमूर्ति · कृतार्थ · गुरु
दर्शन: मान्यता · प्राचीन हिन्दू धर्म · सांख्य · न्याय · वैशेषिक · योग · मीमांसा · वेदान्त · तन्त्र · भक्ति
परम्परा: ज्योतिष · आयुर्वेद · आरती · भजन · दर्शन · दीक्षा · मन्त्र · पूजा · सत्संग · स्तोत्र · विवाह · यज्ञ
गुरु: शंकर · रामानुज · मध्वाचार्य · रामकृष्ण · शारदा देवी · विवेकानन्द · नारायण गुरु · अरविन्द · रामन् महर्षि · शिवानन्द · चिन्‍मयानन्‍द · सुब्रमुनियस्वामी · स्वामिनारायण · प्रभुपाद · लोकनाथ
विभाजन: वैष्णव · शैव · शक्ति · स्मृति · हिन्दू पुनरुत्थान
देवता: हिन्दू देवता नाम · हिन्दू कथा
युग: सत्य युग · त्रेता युग · द्वापर युग · कलि युग
वर्ण: ब्राह्मण · क्षत्रिय · वैश्य · शूद्र · वर्णाश्रम धर्म
वैयक्तिक औज़ार