अर्जुन
मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
यह लेख महाभारत के पात्र के बारे में है। अन्य प्रयोग हेतु, अर्जुन (बहुविकल्पी) देखें।
महाभारत के मुख्य पात्र हैं। महाराज पाण्डु एवं रानी कुन्ती के वह तीसरे पुत्र थे।
अनुक्रम |
[संपादित करें] जन्म
जब पाण्डु संतान उत्पन्न करने में असफल रहे तो कुंती ने उनको एक वरदान के बारे में याद दिलाया। कुंती को कुंआरेपन में महर्षि दुर्वासा ने एक वरदान दिया था जिसमें कुंती किसी भी देवता का आवाहन कर सकती थी और उन देवताओं से संतान प्राप्त कर सकती थी। पाण्डु एवं कुंती ने इस वरदान का प्रयोग किया एवं धर्मराज, वायु एवं इंद्र देवता का आवाहन किया । अर्जुन तीसरे पुत्र थे जो देवताओं के राजा इंद्र से हुए।
[संपादित करें] व्यक्तित्व
अर्जुन सबसे अच्छा तीरंदाज और द्रोणाचार्य का प्रमुख शिष्य था। जीवन में अनेक अवसर पर उसने इसका परिचय दिया। इसीने द्रौपदी को स्वयंवर मे जीता था। कुरूक्षेत्र युद्ध मे यह प्रमुख योद्धा था।
[संपादित करें] संदर्भ
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
|
||||||||||||||||
|
||||||||