कल्प
कल्प हिन्दू समय चक्र की बहुत लम्बी मापन इकाई है। कल्प शब्द का अति प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है। यह बौद्ध ग्रन्थों में भी मिलता है, हालांकि बहुत बाद के काल में, वह भी हिन्दू पाठ से लिया हुआ ही है। यहाँ यह उल्लेखनीय है, कि बुद्ध एक हिन्दू परिवार में जनमे हिन्दू ही थे।
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[संपादित करें] परिचय
सृष्टिक्रम और विकास की गणना के लिए कल्प हिन्दुओं का एक परम प्रसिद्ध मापदंड है। जैसे मानव की साधारण आयु सौ वर्ष है, वैसे ही सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की भी आयु सौ वर्ष मानी गई है, परंतु दोनों गणनाओं में बड़ा अन्तर है। ब्रह्मा का एक दिन 'कल्प' कहलाता है, उसके बाद प्रलय होता है। प्रलय ब्रह्मा की एक रात है जिसके पश्चात् फिर नई सृष्टि होती है।
चारों युगों के एक चक्कर को चतुर्युगी अथवा पर्याय कहते हैं। 1,000 चतुर्युगी अथवा पर्यायों का एक कल्प होता है। ब्रह्मा के एक मास में तीस कल्प होते हैं जिनके अलग-अलग नाम हैं, जैसे श्वेतवाराह कल्प, नीललोहित कल्प आदि। प्रत्येक कल्प के 14 भाग होते हैं और इन भागों को 'मन्वंतर' कहते हैं। प्रत्येक मन्वंतर का एक मनु होता है, इस प्रकार स्वायंभुव, स्वारोचिष् आदि 14 मनु हैं। प्रत्येक मन्वंतर के अलग-अलग सप्तर्षि, इद्रं तथा इंद्राणी आदि भी हुआ करते हैं। इस प्रकार ब्रह्मा के आज तक 50 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, 51वें वर्ष का प्रथम कल्प अर्थात् श्वेतवाराह कल्प प्रारंभ हुआ है। वर्तमान मनु का नाम 'वैवस्वत मनु' है और इनके 27 चतुर्युगी बीत चुके हैं, 28 वें चतुर्युगी के भी तीन युग समाप्त हो गए हैं, चौथे अर्थात् कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है।
युगों की अवधि इस प्रकार है - सत्युग 17,28,000 वर्ष; त्रेता 12,96,000 वर्ष; द्वापर 8,64,000 वर्ष और कलियुग 4,32,000 वर्ष। अतएव एक कल्प चार अरब बत्तीस करोड़ (4,32,00,000) वर्ष का हुआ।
[संपादित करें] विभाजन
प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों में मानव इतिहास को पाँच कल्पों में बाँटा गया है।[1]
- हमत् कल्प : १,०९,८०० वर्ष विक्रमीय पूर्व से आरम्भ होकर ८५,८०० वर्ष पूर्व तक
- हिरण्य गर्भ कल्प : ८५,८०० विक्रमीय पूर्व से ६१,८०० वर्ष पूर्व तक
- ब्राह्म कल्प : ६०,८०० विक्रमीय पूर्व से ३७,८०० वर्ष पूर्व तक
- पाद्म कल्प : ३७,८०० विक्रम पूर्व से १३,८०० वर्ष पूर्व तक और
- वराह कल्प : १३,८०० विक्रम पूर्व से आरम्भ होकर वर्तमान तक
अब तक वराह कल्प के स्वायम्भु मनु, स्वरोचिष मनु, उत्तम मनु, तमास मनु, रेवत-मनु चाक्षुष मनु तथा वैवस्वत मनु के मन्वन्तर बीत चुके हैं और अब वैवस्वत तथा सावर्णि मनु की अन्तर्दशा चल रही है। सावर्णि मनु का आविर्भाव विक्रमी सम्वत प्रारम्भ होने से ५,६३० वर्ष पूर्व हुआ था।[1]
[संपादित करें] विविध
गिनियस बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स ने कल्प को समय का सर्वाधिक लम्बा मापन घोषित किया है। [2][1]
[संपादित करें] सन्दर्भ
- ↑ 1.0 1.1 1.2 वैवस्वत मनु के इतिहास की रूपरेखा ।वेबदुनिया
- ↑ McWhirter, Norris (November 1980). गिनियस बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स 1981. New York: Sterling Publishing Co. Inc.. ISBN 0-8069-0196-9.
[संपादित करें] बाहरी कड़ियां
- कल्पों के नाम
- वैदिक काल गणना, ब्यौरेवार वर्णन: गुरुदेव द्वारा
- Vedic Time Travel, Elaborate depiction by Vinay Mangal
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