ऋतु

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पारितंत्र के अनुसार छह ऋतुएँ
Illumination of the earth at each change of astronomical season
Fig. 1
This diagram shows how the tilt of the Earth's axis aligns with incoming sunlight around the winter solstice of the Northern Hemisphere. Regardless of the time of day (i.e. the Earth's rotation on its axis), the North Pole will be dark, and the South Pole will be illuminated; see also arctic winter. In addition to the density of incident light, the dissipation of light in the atmosphere is greater when it falls at a shallow angle.

ऋतु एक वर्ष से छोटा कालखंड है जिसमें मौसम की दशाएं एक खास प्रकार की होती हैं। यह कालखण्ड एक वर्ष को कई भागों में विभाजित करता है जिनके दौरान पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा के परिणामस्वरूप दिन की अवधि, तापमान, वर्षा, आर्द्रता इत्यादि मौसमी दशाएँ एक चक्रीय रूप में बदलती हैं। मौसम की दशाओं में वर्ष के दौरान इस चक्रीय बदलाव का प्रभाव पारितंत्र पर पड़ता है और इस प्रकार पारितंत्रीय ऋतुएँ निर्मित होती हैं यथा पश्चिम बंगाल में जुलाई से सितम्बर तक वर्षा ऋतु होती है, यानि पश्चिम बंगाल में जुलाई से अक्टूबर तक, वर्ष के अन्य कालखंडो की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। इसी प्रकार यदि कहा जाय कि तमिलनाडु में मार्च से जुलाई तक गृष्म ऋतु होती है, तो इसका अर्थ है कि तमिलनाडु में मार्च से जुलाई तक के महीने साल के अन्य समयों की अपेक्षा गर्म रहते हैं।

भारत में परंपरागत रूप से मुख्यतः छः ऋतुएं परिभाषित की गयी हैं।[1] -

ऋतु हिन्दू मास ग्रेगरियन मास
ग्रीष्म (Summer) ज्येष्ठ से आषाढ मई से जून
वर्षा (Rainy) श्रावन से भाद्रपद जुलाई से सितम्बर
शरद् (Autumn) आश्विन से कार्तिक अक्टूबर से नवम्बर
हेमन्त (pre-winter) मार्गशीर्ष से पौष दिसम्बर से 15 जनवरी
शिशिर (Winter) माघ से फाल्गुन 16 जनवरी से फरवरी
वसन्त (Spring) चैत्र से वैशाख मार्च से अप्रैल

ऋतु परिवर्तन का कारण[संपादित करें]

ऋतु परिवर्तन का कारण पृथ्वी द्वारा सूर्य के चारों ओर परिक्रमण और पृथ्वी का अक्षीय झुकाव है। पृथ्वी का डी घूर्णन अक्ष इसके परिक्रमा पथ से बनने वाले समतल पर लगभग 66.5 अंश का कोण बनता है जिसके कारण उत्तरी या दक्षिणी गोलार्धों में से कोई एक गोलार्द्ध सूर्य की ओर झुका होता है। यह झुकाव सूर्य के चारो ओर परिक्रमा के कारण वर्ष के अलग-अलग समय अलग-अलग होता है जिससे दिन-रात की अवधियों में घट-बढ़ का एक वार्षिक चक्र निर्मित होता है। यही ऋतु परिवर्तन का मूल कारण बनता है।


इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]