नेपाल

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संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल
नेपाल का ध्वज नेपाल का कुल चिन्ह
ध्वज कुल चिन्ह
राष्ट्रवाक्य: जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी  (संस्कृत)
"मां एवं मातृभूमि स्वर्ग से भी महान् होती हैं"
राष्ट्रगान: सयौं थुंगा फूल का
नेपाल की स्थिति
राजधानी
(और सबसे बड़ा शहर)
काठमांडू
27°42′ N 85°19′ E
राजभाषा(एँ) नेपाली[1]
सरकार संयुक्त सरकार
 - राष्ट्रपति डा॰ रामबरण यादव
 - प्रधानमंत्री सुशील कोइराला[2]
एकीकरण २१ दिसंबर १७६८ 
 - गणराज्य २८ दिसंबर २००७ 
क्षेत्रफल
 - कुल १४७,१८१ किमी² (९३वां)
५६,८२७ मील²
 - जल(%) २.८
जनसंख्या
 - जुलाई २००७ अनुमान २८,९०१,७९० (४० वां)
 - २००२ जनगणना २३,१५१,४२३
 - जन घनत्व १८४/किमी² (५६वां)
४७७/मील²
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (पीपीपी) २००६ अनुमान
 - कुल $४८.१८ बिलियन (८७ वां)
 - प्रति व्यक्ति $१,५०० (१६४ वां)
मानव विकास सूचकांक  (२००७) Green Arrow Up Darker.svg ०.५३४ (मध्यम) (१४२ वां)
मुद्रा रुपया (एनपीआर)
समय मंडल नेपाली प्राईम टाईम (यूटीसी +५:४५)
 - ग्रीष्म (DST) - (यूटीसी +५:४५)
इंटरनेट टीएलडी .एनपी
दूरभाष कोड +९७७

नेपाल, (आधिकारिक रूप में संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल[3]) ([neˈpaːl] ) एक दक्षिण एशियाई भूपरिवेष्ठित हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के ८१ प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी। यह प्रतिशत भारत में हिन्दुओं प्रतिशत से अधिक है। अतः नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे अधिक हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है।

एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्ण फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित है। संसार का सबसे ऊँची १४ हिमश्रृंखलाओं में से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सगरमाथा (एवरेस्ट, नेपाल और चीन की सीमा पर) भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बड़ा नगर काठमांडू है। काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगञ्ज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगञ्ज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है।

आज का नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का अंशमात्र है । अंग्रेज़ों के साथ हुई सन्धियों में नेपाल को उस समय (१८१४) के दो तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े जो आज भी भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल के अंश हैं । बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतात्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए। अंतः २००८ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से यह आन्दोलन समाप्त हुआ। लेकिन सेना अध्यक्ष के निष्कासन को लेकर राष्ट्रपति से हुए मतभेद और टीवी पर सेना में माओवादियों की नियुक्ति को लेकर वीडिओ फुटेज के प्रसारण के बाद सरकार से सहयोगी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद प्रचण्ड को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने से पहले सन् २००६ में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था।

फरवरी 2014 से वरिष्ठ नेता सुशील कोइराला प्रधानमंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं।[4]


नाम[संपादित करें]

'नेपाल' शब्द की व्युत्पत्ति के संबंध में विद्वानों की विभिन्न धारणाएँ हैं। "नेपाल" शब्द की उत्त्पत्ति के बारे मे ठोस प्रमाण कुछ नही है, लेकिन एक प्रसिद्ध विश्वास अनुसार यह शब्द ने ऋषि तथा पाल (गुफा) मिलकर बना है। माना जाता है कि एक समय नेपाल की राजधानी काठमांडू ने ऋषि का तपस्या स्थल था। 'ने' मुनि द्वारा पालित होने के कारण इस भुखंड का नाम नेपाल पड़ा, ऐसा कहा जाता है।

तिब्बती भाषा में 'ने' का अर्थ मध्य और 'पा' का अर्थ देश होता है। तिब्बती लोग 'नेपाल' को 'नेपा' ही कहते है। 'नेपाल' और 'नेवार' शब्द की समानता के आधार पर डॉ. ग्रियर्सन और यंग ने एक ही मूल शब्द से दोनों की व्युत्पत्ति होने का अनुमान किया है। टर्नर ने नेपाल, नेवार, अथवा नेवार, नेपाल दोनों स्थिति को स्वीकार किया है। 'नेपाल' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में किया है। उस काल में बिहार में जो मागधी भाषा प्रचलित थी उसमें 'र' का उच्चारण नहीं होता था। सम्राट् अशोक के शिलालेखों में 'राजा' के स्थार पर 'लाजा' शब्द व्यवहार हुआ है। अत: नेपार, नेबार, नेवार इस प्रकार विकास हुआ होगा।

इतिहास[संपादित करें]

हिमालय क्षेत्र मे मनुष्यों का आगमन लगभग ९,००० वर्ष पहले होने के तथ्य की पुष्टि काठमांडू उपत्यका में पाये गये नव पाषाण औजारों से होती है। सम्भवतः तिब्बती-बर्माई मूल के लोग नेपाल मे २,५०० वर्ष पहले आ चुके थे।[5]

१५०० ईसा पूर्व के आसपास इन्डो-आर्यन जातियों ने काठमांडू उपत्यका में प्रवेश किया । करीब १००० ईसा पूर्व में छोटे-छोटे राज्य और राज्यसंगठन बनें । सिद्धार्थ गौतम (ईसापूर्व ५६३–४८३) शाक्य वंश के राजकुमार थे, उनके जन्म नेपाल की लुम्बिनी में हुआ था, जिन्होंने अपना राजकाज त्याग कर तपस्वी का जीवन निर्वाह किया और वह बुद्ध बन गए।

२५० ईसा पूर्व तक इस क्षेत्र मे उत्तर भारत के मौर्य साम्राज्य का प्रभाव पडा और बाद में ४थी शताब्दी मे गुप्तवंश के अधीन में कठपुतली राज्य हो गया। इस क्षेत्र मे ५वी शताब्दी के उत्तरार्ध मे आकर वैशाली के लिच्छवियो के राज्य की स्थापना हुई । ८वी शताव्दी के उत्तरार्ध मे लिच्छवि वंश का अस्त हो गया और सन् ८७९ से नेवार (नेपाल की एक जाति) युग का उदय हुआ, फिर भी इन लोगों का नियन्त्रण देशभर मे कितना बना था, इसका आकलन कर पाना मुश्किल है। ११वी शताब्दी के उत्तरार्ध मे दक्षिण भारत से आए चालुक्य साम्राज्य का प्रभाव नेपाल के दक्षिणी भूभाग मे दिखा । चालुक्यों के प्रभाव मे आकर उस समय राजाओ ने बौद्धधर्म को छोडकर हिन्दू धर्म का समर्थन किया और नेपाल मे धार्मिक परिवर्तन होने लगा।

पाटन का हिन्दू मन्दिर, तीन प्राचीन राज्य मध्येका एककी राजधानी
१९२० की नेपाली राजशाही

१३वीं शताब्दी के पूर्वार्ध मे संस्कृत शब्द मल्ल का थर वाले वंश का उदय होने लगा। २०० वर्ष में इन राजाओं ने शक्ति एकजुट की। १४वीं शताब्दी के उत्तरार्ध मे देश का बहुत ज्यादा भाग एकीकृत राज्य के अधीन में आ गया। लेकिन यह एकीकरण कम समय तक ही टिक सका: १४८२ में यह राज्य तीन भाग मे विभाजित हो गया - कान्तिपुर, ललितपुर, और भक्तपुर – जिसके बीचमे शताव्दियौं तक मेल नही हो सका।

१७६५मे, गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह ने नेपाल के छोटे छोटे बाइसे व चोबिसे राज्यके उपर चढ़ाई करते हुए एकीकृत किया, बहुत ज्यादा रक्तरंजित लड़ाइयों के पश्चात् उन्होने ३ वर्ष बाद कान्तीपुर, पाटन व भादगाँउ के राजाओं को हराया और अपने राज्य का नाम गोरखा से नेपाल मे परिवर्तित किया। तथापि उन्हे कान्तिपुर विजय मे कोई युद्ध नही करना पड़ा। वास्तव में, उस समय इन्द्रजात्रा पर्व मे कान्तिपुर की सभी जनता फसल के देवता भगवान इन्द्र की पूजा और महोत्सव (जात्रा) मना रहे थे, जब पृथ्वी नारायण शाह ने अपनी सेना लेकर धावा बोला और सिंहासन कब्जा कर लिया। इस घटना को आधुनिक नेपाल का जन्म भी कहते है।

तिब्बत से हिमाली (हिमालयी) मार्ग के नियन्त्रण के लिए हुआ विवाद और उसके पश्चात युद्ध में तिब्बत की सहायता के लिए चीन के आने के बाद नेपाल पीछे हट गया। नेपाल की सीमा के नजदीक का छोटे-छोटे राज्यों को हड़पने के कारण से शुरु हुआ विवाद ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ दुश्मनी का कारण बना । इसी वजह से १८१४–१६ रक्तरंजित एंग्लो-नेपाल युद्ध हो गया, जिसमे नेपाल को अपनी दो तिहाई भूभाग से हाथ धोना पड़ा लेकिन अपनी सार्वभौमसत्ता और स्वतन्त्रता को कायम रखा। दक्षिण एशियाई मुल्कों में " यही एक खण्ड है जो कभी भी किसी बाहरी सामन्त (उपनिवेशों) के अधीन में नही आया'। विलायत से लड़ने में पश्चिम मे सतलुज से पुर्व में तीस्ता नदी तक फैला हुआ विशाल नेपाल सुगौली सन्धि के बाद पश्चिम में महाकाली और मेची नदियों के बीच सिमट गया लेकिन अपनी स्वाधीनता को बचाए रखने में नेपाल सफल रहा, बाद मे अंग्रेजो ने १८२२ मे मेची नदी व राप्ती नदी के बीच की तराई का हिस्सा नेपाल को वापस किया उसी तरह १८६० मे राणा प्रधानमन्त्री जंगबहादुर से खुश होकर अंग्रेजों ने राप्तीनदी से महाकाली नदी के बीच का तराई का थोड़ा और हिस्सा नेपाल को लौटाया । लेकिन सुगौली सन्धी के बाद नेपाल ने जमीन का बहुत बडा हिस्सा गँवा दिया, यह क्षेत्र अभी उत्तराखंड राज्य और हिमाचल प्रदेश और पंजाब पहाडी राज्य मे सम्मिलित है। पूर्व मे दार्जिलिंग और उसके आसपास का नेपाली मूल के लोगों का भूमि (जो अब पश्चिम बंगाल मे है) भी ब्रिटिश इन्डिया के अधीन मे हो गया तथा नेपाल का सिक्किम पर प्रभाव और शक्ति भी नेपाल को त्यागने पड़े।

राज परिवार व भारदारो के बीच गुटबन्दी की वजह से युद्ध के बाद अस्थायित्व कायम हुआ। सन् १८४६ मे शासन कर रही रानी का सेनानायक जंगबहादुर राणा को पदच्युत करने के षडयन्त्र का खुलासा होने से कोतपर्व नाम का नरसंहार हुवा। हथियारधारी सेना व रानी के प्रति वफादार भाइ-भारदाररो के बीच मारकाट चलने से देश के सयौँ राजखलाक, भारदारलोग व दुसरे रजवाड़ों की हत्या हुई। जंगबहादुर की जीत के बाद राणा खानदान उन्होने सुरुकिया व राणा शासन लागु किया। राजा को नाममात्र में सीमित किया व प्रधानमन्त्री पद को शक्तिशाली वंशानुगत किया गया। राणाशासक पूर्णनिष्ठाके साथ ब्रिटिश के पक्ष मे रहते थे व ब्रिटिश शासक को १८५७ की सेपोई रेबेल्योन (प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम), व बाद मे दोनो विश्व युद्धसहयोग किया था। सन १९२३ मे संयुक्त राजशाही व नेपाल बीच आधिकारिक रुप मे मित्रता के समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमे नेपल की स्वतन्त्रता को संयुक्त राजशाही ने स्वीकार किया । दक्षिण एशियाई मुल्कों में पहला, नेपाली राजदूतावास ब्रिटेन की राजधानी लंदन मे खुल गया ।

१९४० दशक के उत्तरार्ध मे लोकतन्त्र-समर्थित आन्दोलनोंं का उदय होने लगा व राजनैतिक पार्टियां राणा शासनके विरुद्ध हो गईं। उसी समय चीन ने १९५० में तिब्बत पर कब्जा कर लिया जिसकी वजहसे बढ़ती हुई सैनिक गतिविधियों को टालने के लिए भारत नेपाल की स्थायित्व पर चाख बनाने लगा । फलस्वरुप राजा त्रिभुवन को भारत ने समर्थन किया १९५१ में सत्ता लेने में सहयोग किया, नई सरकार का निर्माण हो गया, जिसमें ज्यादा आन्दोलनकारी नेपाली कांग्रेस पार्टी के लोगो की सहभागिता थी। राजा व सरकार के बीच वर्षों की शक्ति खींचातानी के पश्चात्, १९५९मे राजा महेन्द्र ने लोकतान्त्रिक अभ्यास अन्त किया व "निर्दलीय" पञ्चायत व्यवस्था लागू करके राज किया। सन् १९८९के "जनआन्दोलन"ने राजतन्त्र को सांवैधानिक सुधार करने व बहुदलीय संसद बनाने का वातावरण बन गया सन १९९०मा कृष्णप्रसाद भट्टराई अन्तरिम सरकारके प्रधानमन्त्री बन गए, नये संविधान का निर्माण हुआ राजा बीरेन्द्र ने १९९० मे नेपाल के इतिहास में दूसरा प्रजातन्त्रिक बहुदलीय संविधान जारी किया [6] व अन्तरिम सरकार ने संसद के लिए प्रजातान्त्रिक चुनाव करवाए । नेपाली कांग्रेस ने राष्ट्र के दूसरे प्रजातन्त्रिक चुनाव मे बहुमत प्राप्त किया व गिरिजाप्रसाद कोइराला प्रधानमन्त्री बने।

इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में नेपाल में माओवादियों का आन्दोलन तेज होता गया । मधेशियों के मुद्दे पर भी आन्दोलन हुए । अन्त में सन् 2008 में राजा ज्ञानेन्द्र ने प्रजातांत्रिक चुनाव करवाए जिसमें माओवादियों को बहुमत मिला और प्रचण्ड नेपाल के प्रधानमंत्री बने और मधेशी नेता रामबरन यादव ने राष्ट्रपति का कार्यभार सम्हाला ।

भूगोल[संपादित करें]

नेपाल का भौगोलिक नक्शा
सुक्खा हिमाली पृष्ठभूमि

मानचित्र पर नेपाल का आकार एक तिरछे सामानान्तर चतुर्भुज का है। नेपाल की कुल लम्बाई करीब 800 किलोमीटर और चौड़ाई 200 किलोमीटर है। नेपाल का कुल क्षेत्रफल 147181 वर्ग किलोमीटर है। नेपाल भौगोलिक रूप से तीन भागों में विभाजित है – पर्वतीय क्षेत्र, शिवालिक क्षेत्र , और तराई क्षेत्र। साथ में भित्री मधेस कहलाने वाले उपत्यकाओं का एक समूह पहाड़ी क्षेत्र के महाभारत पर्वत श्रृंखला व चुरीया श्रृंखला के बीच स्थित है। यह क्षेत्र पहाड़ व तराई के बीच मे स्थित है हिमाली पहाड़ी व तराई क्षेत्र पूर्व-पश्चिम दिशा मे देशभर में फैले हुए है और यिनी क्षेत्र को नेपाल की प्रमुख नदियों ने जगह जगह पर विभाजन किया है।

भारत के साथ जुड़ा हुआ तराई फांट भारतीय-गंगा के मैदान का उत्तरी भाग है। इस भाग की सिंचाई तथा भरण-पोषण मे तीन नदियों का मुख्य योगदान है: कोशी, गण्डकी (भारत मे गण्डक नदी), और कर्णाली नदी। इस भूभाग की जलवायु उष्ण और संतृप्त (आर्द्र) है ।

पहाड़ी भूभाग मे १,००० लेकर ४,००० मीटर तक की ऊंचाई के पर्वत पड़ते हैं। इस क्षेत्र मे महाभारत लेख व शिवालिक श्रृंखला (चुरिया) नाम की दो मुख्य पहाड़ी शृंखलायें हैं। पहाड़ी क्षेत्र मे ही काठमांडू उपत्यका, पोखरा उपत्यका, सुर्खेत उपत्यका के साथ टार, बेसी, पाटन माडी कहे जाने वाले बहुत से उपत्यका पड़ते है, यह उपत्यका नेपाल की सबसे उर्वर भूमि है तथा काठमांडू उपत्यका नेपाल का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। पहाड़ी क्षेत्र की उपत्यका को छोड़ कर २,५०० मीटर (८,२०० फुट) की ऊंचाई पर जनघनत्व बहुत कम है।

हिमाली क्षेत्र मे संसार की सबसे ऊंची हिमशृंखलायें पड़ती हैं। इस क्षेत्र की उत्तर मे चीन की सीमा मे संसार का सर्वोच्च शिखर, ऐवरेस्ट (सगरमाथा) ८,८४८ मीटर (२९,०३५ फुट) अवस्थित है। संसार की 8000 मीटर से ऊँची 14 चोटियों मे से 8 नेपाल की हिमालयी क्षेत्र में पड़ती हैं। संसार का तीसरा सर्वोच्च शिखर कंचनजंघा, भी इसी हिमालयी क्षेत्र मे पड़ता है।

जलवायु[संपादित करें]

नेपाल मे पाँच मौसमी क्षेत्र है जो ऊंचाई के साथ कुछ मात्रा में मेल खाते हैं। उष्णकटिबन्धीय तथा उपोष्णकटिबन्धीय क्षेत्र १,२०० मीटर(३,९४० फि) से नीचे, शीतोष्णकटिबन्धीय क्षेत्र १,२०० लेकर २,४०० मीटर (३,९००–७,८७५ फि), ठण्डा क्षेत्र २,४०० से लेकर ३,६०० मीटर (७,८७५–११,८०० फि), उप-आर्कटिक क्षेत्र ३,६०० से लेकर ४,४०० मीटर (११,८००–१४,४०० फि), व आर्कटिक क्षेत्र ४,४०० मीटर(१४,४०० फिट)से ऊपर। नेपालमे पाँच ऋतुएं होती हैं: उष्म, मनसून, अटम, शिषिर व बसन्त। हिमालय मध्य एशिया से बहने वाली ठन्डी हवा को नेपाल के अन्दर जाने से रोकता है तथा मानसून की वायु का उत्तरी परिधिके रुप में पानी काम करताहै। नेपाल व बंगलादेशकी सीमा नहि जुडताहै फिरभी ये दोनों राष्ट्र २१ किलोमीटर (१३ मील) की एक सँकरी चिकेन्स् नेक (मुर्गे की गर्दन) कहे जाने वाले क्षेत्रसे अलग है । इस क्षेत्र को स्वतन्त्र-व्यापार क्षेत्र बनाने का प्रयास हो रहा है ।

संसार का सर्वोच्च शिखर सगरमाथा (एवरेस्ट) नेपाल व तिब्बती सीमा पर अवस्थित है। इस हिमालकी नेपालमे पडनेवाले दक्षिण-पूर्वी रिज(ridge) प्राविधिक रूपमे चढना सहज माना जाता है । जिसकी वजहसे हरेक वर्ष इस स्थान मे बहुत पर्यटक जाते है । अन्य चढे जाने वाले हिमशिखर मे अन्नपूर्णा (१,२,३,४) अन्नपूर्णा श्रृंखलामे पडता है।

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

हिमालयके तलेमे खेती

कृषि जनसङ्ख्या के ७६% रोजगार का स्रोत है और कुल ग्राह्यस्थ उत्पादनका ३९% योगदान करता है और सेवा क्षेत्र ३९% साथ में उद्योग २१% आय का स्रोत है है। देशकी उत्तरी दो-तिहाई भाग में पहाडी और हिमालयी भूभाग सडकें, पुल तथा अन्य संरचना निर्माण करने में कठिन और मँहगा बनाता है। सन् २००३ तक पिच -सडकों की कुल लम्बाई ८,५०० किमी से कुछ ज्यादा और दक्षिणमें रेल्वे-लाइनकी कुल लम्बाई ५९ किमी मात्र है। ४८ धावनमार्ग और उनमेसे १७ पिचहोनेसे हवाईमार्गकी स्थिति बहुत अच्छा है। यहाँ जादामे प्रति १२ व्यक्तिके लिए १ टेलिफोन सुविधा उपल्ब्ध है; तारजडित सेवा देशभर में है लेकिन शहरों और जिला मुख्यालयों में ज्यादा केन्द्रित है; सेवामें जनताकी पहुँच बढने और सस्ता होते जानेसे मोबाइल (या तार-रहित) सेवाकी स्थिति देशभर बहुत अच्छा है। सन् २००५ मे १,७५,००० इन्टरनेट जडाने (connections) थे, लेकिन "सङ्कटकाल" लागू होनेकेपश्चात् कुछ समय सेवा अवरूद्ध होगयी था। कुछ अन्योल बाद नेपालकी दुसरी बृहत जनआन्दोलनने राजाकी निरङ्कुश अधिकार समाप्त करनेके पश्चात सभी इन्टरनेट सेवाए बिना रोकटोक सुचारू होगएहैं।[7]

नेपालकी भूपरिवेष्ठित स्थिति[8] , प्राविधिक कमजोरी और लम्बे द्वन्द ने अर्थतन्त्रको पूर्णरूपमे विकासशील होने नहीं दिया है। नेपाल भारत, जापान, संयुक्त राजशाही, अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, स्विट्जरलैंड और स्कैंडिनेवियन राष्ट्रों से वैदेशिक सहयोग पाता है। वित्तीय वर्ष २००५/०६में सरकार का बजट करीब १.१५३ अरब अमेरिकी डालर था, लेकिन कुल खर्च १.७८९ अरब हुआ था। १९९० दशक की बढती मुद्रा स्फीति दर घटकर २.९% पहुची है। कुछ वर्षों से नेपाली मुद्रा रूपैयाँ को भारतिय रूपैया के साथ का सटहीदर १.६ मा स्थिर रखा गया है। १९९० दशकमे खुली बनायीगयी मुद्रा बिनिमय दर निर्धारण नीतिके कारण बिदेशी मुद्राकी कालाबाजारी लगभग समाप्त हो चुकी है। एक दीर्घकालीन आर्थिक समझौते ने भारत के साथ अच्छे संबन्ध में मदद दी है। जनता बीचका सम्पत्ति वितरण अन्य विकसित और विकासोन्मुख देशोके तुलना में ही है: ऊपरवाले १०% गृहस्थीके साथ कुल राष्ट्रिय सम्पत्ति का ३९.१% पर नियन्त्रण है और निम्नतम १०% के साथ केवल २.६% ।

नेपालकी १ करोड जितनेका कार्यबलमे दक्ष कामदारका कमी है। ८१% कार्यबलको कृषि, १६% सेवा, और ३% उत्पादन/कला-आधारित उद्योग रोजगार प्रदान करताहै।

प्रशासनिक विभाजन[संपादित करें]

नेपाल १४ अञ्चल, ७५ जिलों और ५ विकास क्षेत्रों में विभाजित है। प्रत्येक जिला एक निश्चित जिला प्रमुख द्वारा निर्देशित है। जिला प्रमुख का काम जिले में विधान तथा शान्ति बहाल करना और सरकारी मंत्रालयों के काम-काजको सहायता करना है।

नेपाल के १४ अञ्चल:
Nepal zones hindi.png
1 मेची 8 लुम्बिनी
2 कोशी 9 धवलागिरी
3 सगरमाथा 10 राप्ती
4 जनकपुर 11 कर्णाली
5 बागमती 12 भेरी
6 नारायणी 13 सेती
7 गण्डकी 14 महाकाली

समाज तथा संस्कृति[संपादित करें]

नेपाल की संस्कृति तिब्बत एवं भारत से मिलती-जुलती है। यहाँ की वेषभूषा, भाषा तथा पकवान इत्यादि एक जैसे ही हैं। नेपाल का सामान्य खाना चने की दाल, भात, तरकारी, अचार है । इस प्रकार का खाना सुबह एवम् रात में दिन में दोनो जून खाया जाता है। खाने में चिवड़ा और चाय का भी चलन है । मांस-मछली तथा अंडा भी खाया जाता है । हिमालयी भाग में गेहूँ, मकई , कोदो, आलू आदि का खाना और तराई में गेहूँ की रोटी का प्रचलन है। कोदो के मादक पदार्थ तोङ्गबा, छ्याङ, रक्सी आदि का सेवन हिमालयी भाग में बहुत होता है । नेवार समुदाय अपने विशेष किस्म के नेवारी परिकारों का सेवन करते हैं।

नेपाली सामाजिक जीवन की मान्यता, विश्वास और संस्कृति हिंदू भावना में आधारित धार्मिक सहिष्णुता और जातिगत सहिष्णुता का आपस का अन्योन्याश्रित संबंध नेपाल की अपनी मौलिक संस्कृति है। यहाँ के पर्वों में वैष्णव, शैव, बौद्ध, शाक्त सभ धर्मों का प्रभाव एक दूसरे धर्मावलंबियों पर समान रूप से पड़ा है। किसी भी एक धार्मिक पर्व को धर्मावलंबियों पर समान रूप से पड़ा है। किसी भी एक धार्मिक पर्व को धर्मावलंबी विशेष का कह सकना और अलग कर पाना बहुत कठिन है। सभी धर्मावलंबी आपस में मिलकर उल्लासमय वातावरण में सभी पर्वों में भाग लेते हैं। नेपाल में छुआछुत का भेद न कट्टर रूप में है और न जन्मसंस्कार के आधार पर ही है। शक्तिपीठों में चांडाल और भंगी, चमार, देवपाल और पुजारी के रूप में प्रसिद्ध शक्ति पीठ गुह्येश्वरी देवी, शोभा भागवती के चांडाल तथा भंगी, चमार पुजारियों को प्रस्तुत किया जा सकता है।

उपासना की पद्धति और उपासना के प्रतीकों में भी समन्वय स्थापित किया गया है। मूर्तिपूजा और कर्म कांड के विरोध में उत्पन्न बौद्ध धर्म ने नेपाल में स्वयं मूर्तिपूजा और कर्मकांड अपनाया है। बौद्ध पशुपतिनाथ की पूजा आर्यावलोकितेश्वर के रूप में करते हैं और हिंदू मंजुश्री की पूजा सरस्वती के रूप में करते हैं। नेपाल की यह समन्वयात्मक संस्कृति लिच्छवि काल से अद्यावधि चली आ रही है।

नेपाल अनुग्रहपरायण देश है। वह किसी ने मैत्रीपूर्ण अनुग्रह को कभी भूल नहीं सकता। नेपाल का पराक्रम विश्वविख्यात है। नेपाल की सांस्कृतिक परंपरा को कायम रखने के लिए वि.सं. 2017 साल में संयुक्त राज्य अमरीका के काँग्रेस के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधन करते हुए श्री 5 महेंद्र ने स्पष्टरूप में निम्न उद्गार प्रकट किया था 'सैनिक कार्यों में लगने वाले खर्च संसार की गरीबी हटाने में व्यय हों'।

नेपाल एक छोटा स्वतंत्र राष्ट्र है, किंतु जाति के आधार पर नेपाल राज्य की मित्र राष्ट्र भारत के समान विभिन्न जातियों के रहने का एक अजायबघर जैसा है। उत्तरी भाग की ओर भोटिया, तामाङ्‌, लिंबू, शेरपा, महाभारत शृंखला में मगर, किरात, नेवार, गुरुङ्‌, सुनुवार, और भीतरी तराई क्षेत्र में घिमाल, थारू, मेचै, दनवार आदि जातियों की बहुलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है। ठाकुर, खस, जैसी, क्षत्री जातियों तथा ब्राह्मणों की सख्या नेपाल में यत्र-तत्र काफी है। यहाँ पर प्रवासी भारतीयों की संख्या भी पर्याप्त है।

शिक्षा[संपादित करें]

नेपालमे आधुनिक शिक्षा की शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंग बाहदुर राणा की विदेश यात्रा के बाद सन् 1854 में स्थापित दरबार हाईस्कूल (हाल रानीपोखरी किनारे अवस्थित भानु मा.बि। ) से हुई थी, इससे पहले नेपालमे कुछ धर्मशास्त्रीय दर्शन पर आधारित शिक्षा मात्र दी जाती थी । आधुनिक शिक्षा की शुरूवात 1854 में होते हुए भी यह आम नेपाली जनताके लिए सर्वसुलभ नहीं था । लेकिन देशके विभिन्न भागों में कुछ विद्यालय दरबार हाईस्कूलकी शुरूवात के बाद खुलना शुरू हुए । लेकिन नेपाल में पहला उच्च शिक्षा केन्द्र काठमान्डू में राहहुवा त्रिचन्द्र कैम्पस है । राणा प्रधानमन्त्री चन्द्र सम्सेर ने अपने साथ राजा त्रिभुवनका नाम जोडके इस कैंपसका नाम रखाथा । इस कैंपसकी स्थापना बाद नेपालमे उच्च शिक्षा अर्जन बहुत सहज होनगया लेकिन सन 1959 तक भी देश मे एकभी विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हो सकाथा राजनितिक परिवर्तन के पश्चात् राणा शासन मुक्त देशने अन्ततः 1959 मे त्रिभुवन विश्वविद्यालयकी स्थापना की । उसके बाद महेन्द्र संस्कृतके साथ अन्य विश्वविद्यालय खुलते गए । हाल ही में मात्र सरकारने ४ थप विश्वविद्यालय भी स्थापित करनेकी घोषणा की है । नेपालकी शिक्षा का सबसे मुख्य योजनाकार शिक्षामन्त्रालय है उसके अलावा शिक्षा विभाग, पाँच क्षेत्रीय शिक्षा निदेशालय, पचहतर जिल्ला शिक्षा कार्यालय, परीक्षा नियन्त्रण कार्यालय सानोठिमी, उच्चमाध्यामिक शिक्षा परिषद्,पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, विभिन्न विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियन्त्रण कार्यालय नेपालकी शिक्षाका विकास विस्तार तथा नियन्त्रणके क्षेत्र में कार्यरत हैं ।

नेपाल के विश्वविद्यालय[संपादित करें]

  1. त्रिभुवन विश्वविद्यालय
  2. महेन्द्र संस्कृत विश्वविद्यालय (हाल नेपाल संस्कृत बनायागाया है )
  3. काठमाडौं विश्वविद्यालय
  4. पुर्वान्चल विश्वविद्यालय
  5. पोखरा विश्वविद्यालय
  6. लुम्वीनी विश्वविद्यालय
  7. नेपाल कृषी तथा वन विश्वविद्यालय
  8. मध्यपस्चिमाञ्चल विश्वविद्यालय
  9. सुदुरपस्चीमाञ्चल विश्वविद्यालय
  10. खुल्ला विश्वविद्यालय

स्वास्थ्य[संपादित करें]

नेपाल मे बहुत पहिले से आयुर्वेद (प्राकृतिक चिकित्सा) पद्धती उपयोगमे था बैध और परंपरागत चिकित्सक गाँवघर और शहरो मे स्वास्थ्य सेवा पहुचाते थे । उनलोगो की औषधि के श्रोत नेपाल के हिमाल से तराइ तक मिलनेवाले जडीबुटी ही होते थे । आधुनिक चिकित्सा पद्धती की शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंगवाहादुर राणा की बेलायत यात्रा के बाद दरवार के अन्दर शुरू हुवा लेकिन नेपाल में आधुनिक चिकित्सा संस्था के रूप में राणा प्रधानमन्त्री वीर सम्सेर के काल मे काठामाण्डौ में सन १८८९ मे स्थापित वीर अस्पताल ही है । तत्पश्चात चन्द्र समसेर के काल मे स्थापित त्रिचन्द्र सैनिक अस्पताल है । हाल में नेपाल के हस्पताल सामन्यतया आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा तथा आधुनिक चिकीत्सा करके सरकारी सेवा विद्यमान हे ।

सेना तथा सुरक्षा अंग[संपादित करें]

नेपालमे नेपाली सेना,नेपाली सैनिक विमान सेवा,नेपाल ससस्त्र प्रहरी बल,नेपाल प्रहरी,नेपाल ससस्त्र वनरक्षक तथा राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग नेपाल लगायत सस्सत्र, तथा गुप्तचर सुरक्षा निकाय रहेहै ।

पर्यटन[संपादित करें]

भारत के उत्तर में बसा नेपाल रंगों से भरपूर एक खूबसूरत देश है। यहां वह सब कुछ है जिसकी तमन्ना एक आम सैलानी को होती है। देवताओं का घर कहे जाने वाले नेपाल विविधाताओं से पूर्ण है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां एक ओर यहां बर्फ से ढ़कीं पहाड़ियां हैं, वहीं दूसरी ओर तीर्थस्थान है। रोमांचक खेलों के शौकीन यहां रिवर राफ्टिंग, रॉक क्लाइमिंग, जंगल सफारी और स्कीइंग का भी मजा ले सकते हैं।

लुम्बिनी[संपादित करें]

लुंबिनी महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली है। यह बिहार की उत्तरी सीमा के निकट वर्तमान नेपाल में स्थित है। युनेस्को तथा विश्व के सभी बौद्ध सम्प्रदाय (महायान, बज्रयान, थेरवाद आदि) के अनुसार यह स्थान नेपाल के कपिलबस्तु में है जहाँ पर युनेस्को का आधिकारिक स्मारक लगायत सभी बुद्ध धर्म के सम्प्रयायौं ने अपने संस्कृति अनुसार के मन्दिर, गुम्बा, बिहार आदि निर्माण किया है। इस स्थान पर सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तम्भ में ब्राह्मी लिपिकृत प्राकृत भाषा में बुद्ध का जन्म स्थान होनेका वर्णन कियाहुआ शिलापत्र अवस्थित है

जनकपुर[संपादित करें]

जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां सीता माता का बचपन बीता था। ये नगर प्राचीन काल में मिथिला की राजधानी माना जाता है।यहाँ पर प्रसिद्ध राजा जनक थे । जो सीता माता के पिता थे । कहा जाता है कि सीता का जन्म मिट्टी के घड़े से हुआ था । यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है ।

मुक्तिनाथ[संपादित करें]

मुक्तिनाथ वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है। शालिग्राम दरअसल एक पवित्र पत्‍थर होता है जिसको हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। यह मुख्‍य रूप से नेपाल की ओर प्रवाहित होने वाली काली गण्‍डकी नदी में पाया जाता है। जिस क्षेत्र में मुक्तिनाथ स्थित हैं उसको मुक्तिक्षेत्र' के नाम से जाना जाता हैं। हिंदू धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार यह वह क्षेत्र है, जहां लोगों को मुक्ति या मोक्ष प्राप्‍त होता है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी मुश्किल है। फिर भी हिंदू धर्मावलंबी बड़ी संख्‍या में यहां तीर्थाटन के लिए आते हैं। यात्रा के दौरान हिमालय पर्वत के एक बड़े हिस्‍से को लांघना होता है। यह हिंदू धर्म के दूरस्‍थ तीर्थस्‍थानों में से एक है।

ककानी[संपादित करें]

काठमांडु शहर से 29 किमी. उत्तर-पश्चिम में छुट्टियां बिताने की खूबसूरत जगह ककानी स्थित है। यहां से हिमालय का खूबसूरत नजारा देखते ही बनता है। ककानी से गणोश हिमल, गौरीशंकर 7134 मी., चौबा भामर 6109 मी., मनस्लु 8163 मी., हिमालचुली 7893 मी., अन्नपूर्णा 8091 मी. समेत अनेक पर्वत चोटियों को करीब से देखा जा सकता है।

गोसरई कुंड[संपादित करें]

समुद्र तल से 4360 मी. की ऊंचाई पर स्थित गोसरई कुंड झील नेपाल के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। काठमांडु से 132 किमी. दूर धुंचे से गोसरई कुंड पहुंचना सबसे सही विकल्प है। उत्तर में पहाड़ और दक्षिण में विशाल झील इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यहां और भी नौ प्रसिद्ध झीलें हैं। जैसे सरस्वती भरव, सौर्य और गणोश कुंड आदि।

धुलीखेल[संपादित करें]

यह प्राचीन नगर काठमांडु से 30 किमी. पूर्व अर्निको राजमार्ग काठमांडु-कोदारी राजमार्ग के एक ओर बसा है। यहां से पूर्व में कयरेलुंग और पश्चिम में हिमालचुली श्रृंखलाओं के खूबसूरत दृश्यों का आनंद उठाया जा सकता है।

पशुपतिनाथ मंदिर[संपादित करें]

भगवान पशुपतिनाथ का यह खूबसूरत मंदिर काठमांडु से करीब 5 किमी. उत्तर-पूर्व में स्थित है। भागमती नदी के किनारे इस मंदिर के साथ और भी मंदिर बने हुए हैं। पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में माना जाता है कि यह नेपाल में हिंदुओं का सबसे प्रमुख और पवित्र तीर्थस्थल है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। गोल्फ कोर्स और हवाई अड्डे के पास बने इस मंदिर को भगवान का निवास स्थान माना जाता है।

रॉयल चितवन राष्ट्रीय उद्यान[संपादित करें]

रॉयल चितवन राष्ट्रीय उद्यान देश की प्राकृतिक संपदा का खजाना है। 932 वर्ग किमी. में फैला यह उद्यान दक्षिण- मध्य नेपाल में स्थित है। 1973 में इसे नेपाल के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा हासिल हुआ। इसकी अद्भुत पारिस्थितिकी को देखते हुए यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्‍व धरोहर का दर्जा दिया।

चंगुनारायण मंदिर[संपादित करें]

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह काठमांडु घाटी का सबसे पुराना विष्णु मंदिर है। मूल रूप से इस मंदिर का निर्माण चौथी शताब्दी के आस-पास हुआ था। वर्तमान पैगोडा शैली में बना यह मंदिर 1702 में पुन: बनाया गया जब आग के कारण यह नष्ट हो गया था। यह मंदिर घाटी के पूर्वी ओर पहाड़ की चोटी पर भक्तपुर से चार किमी. उत्तर में खूबसूरत और शांतिपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह मंदिर यूनेस्को विश्‍व धरोहर सूची का हिस्सा है।

भक्तपुर दरबार स्क्वैयर[संपादित करें]

भक्तपुर के दरबार स्क्वैयर का निर्माण 16वीं और 17वीं शताब्दी में हुआ था। इसके अंदर एक शाही महल दरबार और पारंपरिक नेवाड़, पैगोडा शैली में बने बहुत सारे मंदिर हैं। स्वर्ण द्वार, जो दरबार स्क्वैयर का प्रवेश द्वार है, काफी आकर्षक है। इसे देखकर अंदर की खूबसूरती का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह जगह भी युनेस्को की विश्‍व धरोहर का हिस्सा है।

यूनेस्को की आठ सांस्कृतिक विश्‍व धरोहरों में से एक काठमांडु दरबार प्राचीन मंदिरों, महलों और गलियों का समूह है। यह राजधानी की सामाजिक, धार्मिक और शहरी जिंदगी का मुख्य केंद्र है।

स्वर्ण द्वार[संपादित करें]

खूबसूरती की मिसाल स्वर्ण द्वार नेपाल की शान है। बेशकीमती पत्थरों से सजे इस दरवाजे का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। शाही अंदाज में बने इस द्वार के ऊपर देवी काली और गरुड़ की प्रतिमाएं लगी हैं। यह माना जाता है कि स्वर्ण द्वार स्वर्ग की दो अप्सराएं हैं। इसका वास्तुशिल्प और सुंदरता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

बोधनाथ स्तूप[संपादित करें]

काठमांडु घाटी के मध्य में स्थित बोधनाथ स्तूप तिब्बती संस्कृति का केंद्र है। 1959 में चीन के हमले के बाद यहां बड़ी संख्या में तिब्बतियों ने शरण ली और यह स्थान तिब्बती बौद्धधर्म का प्रमुख केंद्र बन गया। बोधनाथ नेपाल का सबसे बड़ा स्तूप है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी के आस-पास हुआ था, जब मुगलों ने आक्रमण किया।

संदर्भ[संपादित करें]

इस स्तूप को नेपाली में बौद्ध नाम से पुकारा जाता है । इसकी प्रारम्भिक ऐतिहासिक सामग्री इसकी ही नीचे डबा हुवा अनुमानित है। लिच्छवि राजाओं मानदेव द्वारा निर्मित और शिवदेव द्वारा विस्तारित माना जाता है। हालान्की इसकी वर्तमान स्वरूप की निर्माण की तिथि भी अज्ञात ही है । इसकी गर्भ-बेदी की दीवार पर स्थापित छोटे-छोटे प्रस्तर मूर्तियां और ऊपर की छत्रावली संस्कृत बौद्ध-धर्म का प्रतीक माना जाता है। संस्कृत बौद्ध वांग्मय का तिब्बती भा

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. अंतरिम संविधान के अनुसार नेपाली एकमात्र राजभाषा है (अनुच्छेद ५, पैरा २), नेपाल मे बोली जानेवाली अन्य भाषा नेपाल की राष्ट्रीय भाषायें हैं। (अनुच्छेद ५, पैरा १) [1]
  2. http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Prime_Ministers_of_Nepal
  3. नेपाल का अन्तरिम संविधान २०६३
  4. "कोइराला ने संभाली नेपाल की कमान". नवभारत टाईम्स. 10 फरवरी 2014. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/world/asian-countries/Sushil-Koirala-Nepals-next-prime-minister/articleshow/30173316.cms. अभिगमन तिथि: 11फरवरी 2014. 
  5. "A Country Study: Nepal". Federal Research Division, Library of Congress. http://memory.loc.gov/frd/cs/nptoc.html. अभिगमन तिथि: September 23 2005. 
  6. "Timeline: Nepal". BBC News. http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/country_profiles/1166516.stm. अभिगमन तिथि: 2005. 
  7. "Nepal". CIA World Factbook. https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/np.html. अभिगमन तिथि: २००५. 
  8. "Nepal: Economy". MSN Encarta. p. 3. http://encarta.msn.com/encyclopedia_761562648_3/Nepal.html. अभिगमन तिथि: September 23 2005. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

समाचार[संपादित करें]