ब्राह्मी लिपि

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
कान्हेरी गुफा की एक शिला पर ब्राह्मी लेख

ब्राह्मी एक प्राचीन लिपि है जिससे कई एशियाई लिपियों का विकास हुआ है। देवनागरी सहित अन्य दक्षिण एशियाई, दक्षिण-पूर्व एशियाई, तिब्बती तथा कुछ लोगों के अनुसार कोरियाई लिपि का विकास भी इसी से हुआ था। अभी तक माना जाता था कि चौथी से तीसरी सदी ईसा पूर्व में इसका विकास मौर्यों ने किया था पर भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के ताज़ा उत्खनन से पता चला है कि तमिलनाडु और श्रीलंका में यह ६ठी सदी ईसा पूर्व से ही विद्यमान थी।

परिचय[संपादित करें]

कई विद्वानों का मत है कि यह लिपि प्राचीन सरस्वती लिपि (सिन्धु लिपि) से निकली, अतः यह पूर्ववर्ती रूप में भारत में पहले से प्रयोग में थी। सरस्वती लिपि के प्रचलन से हट जाने के बाद संस्कृत लिखने के लिये ब्रह्मी लिपि प्रचलन मे आई। ब्रह्मी लिपि में संस्कृत मे ज़्यादा कुछ ऐसा नहीं लिखा गया जो समय की मार झेल सके। प्राकृत/पाली भाषा मे लिखे गये मौर्य सम्राट अशोक के बौद्ध उपदेश आज भी सुरक्षित है। इसी लिये शायद यह भ्रम उपन्न हुआ कि इस का विकास मौर्यों ने किया।

यह लिपि उसी प्रकार बाँई ओर से दाहिनी ओर को लिखी जाती थी जैसे, उनसे निकली हुई आजकल की लिपियाँ । ललितविस्तर में लिपियों के जो नाम गिनाए गए हैं, उनमें 'ब्रह्मलिपि' का नाम भी मिला है । इस लिपि का सबसे पुराना रूप अशोक के शिलालेखों में ही मिला है । पाश्चात्य विद्वान् कहते है कि भारतवासियों ने अक्षर लिखना विदेशियों से सीखा ओर ब्राह्मीलिपि भी उसी प्रकार प्राचीन फिनीशियन लिपि से ली गई जिस प्रकार अरबी, यूनानी, रोमन आदि लिपियाँ । पर कई देशी विद्वानों ने सप्रमाण यह सिद्ध किया है कि ब्राह्मी लिपि का विकास भारत में स्वतंत्र रीति से हुआ ।

बोद्धों के प्राचीन ग्रंथ 'ललितविस्तर' में जो उन ६४ लिपियों के नाम गिनाए गए हैं जो बुद्ध को सिखाई गई, उनमें 'नागरी लिपि' नाम नहीं है, 'ब्राह्मी लिपि' नाम हैं । 'ललितविस्तर' का चीनी भाषा में अनुवाद ई० स० ३०८ में हुआ था । जैनों के 'पन्नवणा' सूत्र और 'समवायांग सूत्र' में १८ लिपियों के नाम दिए हैं जिनमें पहला नाम बंभी (ब्राह्मी) है । उन्हीं के भगवतीसूत्र का आरंभ 'नमो बंभीए लिबिए' (ब्राह्मी लिपि की नमैस्कार) से होता है ।

सबसे प्राचीन लिपि भारतवर्ष में अशोक की पाई जाती है जो सिंध नदी के पार के प्रदेशों (गाँधार आदि) को छोड़ भारतवर्ष में सर्वत्र बहुधा एक ही रूप की मिलती है। जिस लिपि में अशोक के लेख हैं वह प्राचीन आर्यो या ब्राह्मणों की निकाली हुई ब्राह्मी लिपि है । जैनों के 'प्रज्ञापनासूत्र' में लिखा है कि 'अर्धमागधी' भाषा जिस लिपि में प्रकाशित की जाती है वह ब्राह्मी लिपि है' । अर्धमागधी भाषा मथुरा और पाटलिपुत्र के बीच के प्रदेश की भाषा है जिससे हिंदी निकली है । अतः ब्राह्मी लिपि मध्य आर्यावर्त की लिपि है जिससे क्रमशः उस लिपि का विकास हुआ जो पीछे 'नागरी' कहलाई । मगध के राजा आदित्यसेन के समय (ईसा की सातवीं शताब्दी) के कुटिल मागधी अक्षरों में नागरी का वर्तमान रूप स्पष्ट दिखाई पड़ता है । ईसा की और नवीं और दसवीं शताब्दी से तो नागरी अपने पूर्ण रूप में लगती है । किस प्रकार अशोक के समय के अक्षरीं से नागरी अक्षर क्रमशः रूपांतरित होते होते बने हैं यह पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने 'प्राचीन लिपिमाला' पुस्तक में और एक नकशे के द्वारा स्पष्ट दिखा दिया है।

ब्राह्मी की संतति[संपादित करें]

ब्राह्मी का समय के साथ परिवर्तन

ब्राह्मी लिपि से उद्गम हुई कुछ लिपियां और उनकी आकृति एवं ध्वनि में समानताएं स्पष्टतया देखी जा सकती हैं। इनमें से कई लिपियाँ ईसा के समय के आसपास विकसित हुई थीं। इन में से कुछ इस प्रकार हैं-

देवनागरी, बांग्ला लिपि, उड़िया लिपि, गुजराती लिपि, गुरुमुखी, तमिल लिपि, मलयालम लिपि,सिंहल लिपि, कन्नड़ लिपि, तेलुगु लिपि, तिब्बती लिपि, रंजना, प्रचलित नेपाल, भुंजिमोल, कोरियाली, थाई, बर्मेली, लाओ, ख़मेर, जावानीज़, आदि।

ब्राह्मी से व्युत्पन्न कुछ लिपियों की तुलनात्मक तालिका[संपादित करें]

कुछ भारतीय लिपियों का तुलनात्मक चित्र यहां दिया गया है :

व्यंजन[संपादित करें]

NLAC आइपीए देव बांग्ला गुर गुज उडि तमि तेलु कन् मल सिंह तिब् थाइ बर् ख्मे लाओ
k k က
kh  
g ɡ    
gh ɡʱ    
ŋ
c c
ch  
j ɟ
jh ɟʱ   ​ඣ​    
ñ ɲ ဉ/ည
ʈ  
ṭh ʈʰ    
ɖ    
ḍh ɖʱ      
ɳ  
t
th t̺ʰ  
d  
dh d̺ʰ      
n n
n                        
p p
ph  
b b  
bh    
m m
y j
r r র/ৰ
r                  
l l
ɭ   ਲ਼        
ɻ                    
v ʋ  
ś ɕ ਸ਼  
ʂ    
s s  
h h

स्वर[संपादित करें]

NLAC IPA Devanāgarī Eastern Nagari Gurmukhī Gujarati Oriya Tamil Telugu Kannada Malayalam Sinhala Tibetan Burmese
a ə                 က
ā ɑː का কা ਕਾ કા କା கா కా ಕಾ കാ කා     အာ ကာ
æ                                       කැ        
ǣ                                       කෑ        
i i कि কি ਕਿ કિ କି கி కి ಕಿ കി කි ཨི ཀི ကိ
ī की কী ਕੀ કી କୀ கீ కీ ಕೀ കീ කී     ကီ
u u कु কু ਕੁ કુ କୁ கு కు ಕು കു කු ཨུ ཀུ ကု
ū कू কূ ਕੂ કૂ କୂ கூ కూ ಕೂ കൂ කූ     ကူ
e e कॆ                 கெ కె ಕೆ കെ කෙ     ကေ
ē के কে ਕੇ કે କେ கே కే ಕೇ കേ කේ ཨེ ཀེ အေး ကေး
ai ai कै কৈ ਕੈ કૈ କୈ கை కై ಕೈ കൈ කෛ        
o o कॊ                 கொ కొ ಕೊ കൊ කො     ကော
ō को কো ਕੋ કો କୋ கோ కో ಕೋ കോ කෝ ཨོ ཀོ    
au au कौ কৌ ਕੌ કૌ କୌ கௌ కౌ ಕೌ കൗ කෞ     ကော်
कृ কৃ     કૃ କୃ     కృ ಕೃ കൃ කෘ ကၖ
r̩ː कॄ কৄ     કૄ               කෲ     ကၗ
कॢ কৢ               కౄ   ക്ഌ (ඏ)[1]       ကၘ
l̩ː कॣ কৣ                   ക്ൡ (ඐ)       ကၙ

अंक[संपादित करें]

Number Devanagari Eastern Nagari Gurmukhi Gujarati Oriya Tamil Telugu Kannada Malayalam Tibetan Burmese
0
1
2
3
4
5
6
7
8
9

यूनिकोड[संपादित करें]

ब्राह्मी लिपि
Unicode.org chart (PDF)
  0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 A B C D E F
U+1100x 𑀀 𑀁 𑀂 𑀃 𑀄 𑀅 𑀆 𑀇 𑀈 𑀉 𑀊 𑀋 𑀌 𑀍 𑀎 𑀏
U+1101x 𑀐 𑀑 𑀒 𑀓 𑀔 𑀕 𑀖 𑀗 𑀘 𑀙 𑀚 𑀛 𑀜 𑀝 𑀞 𑀟
U+1102x 𑀠 𑀡 𑀢 𑀣 𑀤 𑀥 𑀦 𑀧 𑀨 𑀩 𑀪 𑀫 𑀬 𑀭 𑀮 𑀯
U+1103x 𑀰 𑀱 𑀲 𑀳 𑀴 𑀵 𑀶 𑀷 𑀸 𑀹 𑀺 𑀻 𑀼 𑀽 𑀾 𑀿
U+1104x 𑁀 𑁁 𑁂 𑁃 𑁄 𑁅 𑁆 𑁇 𑁈 𑁉 𑁊 𑁋 𑁌 𑁍
U+1105x 𑁒 𑁓 𑁔 𑁕 𑁖 𑁗 𑁘 𑁙 𑁚 𑁛 𑁜 𑁝 𑁞 𑁟
U+1106x 𑁠 𑁡 𑁢 𑁣 𑁤 𑁥 𑁦 𑁧 𑁨 𑁩 𑁪 𑁫 𑁬 𑁭 𑁮 𑁯
U+1107x
टिप्पणी
1.^ यूनिकोड संस्करण 6.1 के अनुसार

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Only ancient written Sinhala

वाह्य सूत्र[संपादित करें]

ब्राह्मी लिपि से जन्मी लिपियाँ

उत्तरी ब्राह्मी

दक्षिणी ब्राह्मी