बांग्लादेश

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बांग्लादेश गणतन्त्र
গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশ
गॉनोप्रोजातोन्त्री बाङ्लादेश्
बांग्लादेश का ध्वज बांग्लादेश का कुल चिह्न
ध्वज कुल चिह्न
राष्ट्र-गान: आमार शोनार बांग्ला
मेरा स्वर्ण बंगाल
बांग्लादेशकी स्थिति
राजधानी
(और सबसे बडा़ शहर)
ढाका
23°42′ N 90°22′ E
राजभाषा(एँ) बांग्ला (बंगाली)
सरकार संसदीय गणतंत्र
 - प्रधानमंत्री शेख हसीना
 - राष्ट्रपति जिलुर रहमान
 - अध्यक्ष अब्दुल हामिद
स्वतंत्रता पाकिस्तान से 
 - घोषणा २६ मार्च १९७१ 
 - विजय दिवस १६ दिसंबर १९७१ 
क्षेत्रफल
 - कुल १४४,००० किमी² (९४वाँ)
५५,६२२ मील²
 - जल(%) ७.०
जनसंख्या
 - २००६ अनुमान १४७,३६५,३५२ (सातवां)
 - २००१ जनगणना १२९,२४७,२३३1
 - जन घनत्व ९९८.६/किमी² (सातवां)
२,६३९/मील²
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (पीपीपी) २००८ अनुमान
 - कुल $२२४,८८९ बिलियन (३१वां)
 - प्रति व्यक्ति $१३८९ (१४१ वां)
मानव विकास सूचकांक  (२००४) Green Arrow Up Darker.svg ०.५३० (मध्यम) (१३७वां)
मुद्रा टाका (बीडीटी)
समय मंडल बीडीटी (यूटीसी +६)
 - ग्रीष्म (DST) मनाया नहीं जाता (यूटीसी +६)
इंटरनेट टीएलडी .बीडी
दूरभाष कोड +८८० - उपकूट

बांग्लादेश गणतन्त्र (बांग्ला: গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশ गॉनोप्रोजातोन्त्री बाङ्लादेश्) दक्षिण जंबूद्वीप का एक राष्ट्र है। देश की उत्तर, पूर्व और पश्चिम सीमाएँ भारत और दक्षिणपूर्व सीमा म्यान्मार देशों से मिलती है; दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है। बांग्लादेश और भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल एक बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल हैं, जिसका ऐतिहासिक नाम “বঙ্গ” बॉङ्गो या “বাংলা” बांग्ला है। इसकी सीमारेखा उस समय निर्धारित हुई जब 1947 में भारत के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का पूर्वी भाग घोषित किया गया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान के मध्य लगभग 1600 किमी (1000 माइल)। की भौगोलिक दूरी थी। पाकिस्तान के दोनो भागों की जनता का धर्म (इस्लाम) एक था, पर उनके बीच जाति और भाषागत काफ़ी दूरियाँ थीं। पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय के विरुद्ध 1971 में भारत के सहयोग से एक रक्तरंजित युद्ध के बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश का उदभव हुआ। स्वाधीनता के बाद बांग्लादेश के कुछ प्रारंभिक वर्ष राजनैतिक अस्थिरता से परिपूर्ण थे, देश मे 13 राष्ट्रशासक बदले गए और 4 सैन्य बगावतें हुई। विश्व के सबसे जनबहुल देशों में बांग्लादेश का स्थान आठवां है। किन्तु क्षेत्रफल की दृष्टि से बांग्लादेश विश्व में 93वाँ है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक है। मुसलमान- सघन जनसंख्या वाले देशों में बांग्लादेश का स्थान 4था है, जबकि बांग्लादेश के मुसलमानों की संख्या भारत के अल्पसंख्यक मुसलमानों की संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है, और चक्रवात भी बहुत सामान्य हैं। बांग्लादेश दक्षिण एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था, सार्क और बिम्सटेक का प्रतिष्ठित सदस्य है। यहओआइसी और डी-8 का भी सदस्य है।

अनुक्रम

[संपादित करें] इतिहास

बांग्लादेश में सभ्यता का इतिहास काफी पुराना रहा है। आज के भारत का अंधिकांश पूर्वी क्षेत्र कभी बंगाल के नाम से जाना जाता था। बौद्ध ग्रंथो के अनुसार इस क्षेत्र में आधुनिक सभ्यता की शुरुआत ७०० इसवी इसा पू. में आरंभ हुआ माना जाता है। यहाँ की प्रारंभिक सभ्यता पर बौद्ध और हिन्दू धर्म का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है। उत्तरी बांग्लादेश में स्थापत्य के ऐसे हजारों अवशेष अभी भी मौज़ूद हैं जिन्हें मंदिर या मठ कहा जा सकता है।

बंगाल का इस्लामीकरण मुगल साम्राज्य के व्यापारियों द्वारा १३ वीं शताब्दी में शुरु हुआ और १६ वीं शताब्दी तक बंगाल एशिया के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र के रुप में उभरा। युरोप के व्यापारियों का आगमन इस क्षेत्र में १५ वीं शताब्दी में हुआ और अंततः १६वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उनका प्रभाव बढना शुरु हुआ। १८ वीं शताब्दी आते आते इस क्षेत्र का नियंत्रण पूरी तरह उनके हाथों में आ गया जो धीरे धीरे पूरे भारत में फैल गया। जब स्वाधीनता आंदोलन के फलस्वरुप १९४७ में भारत स्वतंत्र हुआ तब राजनैतिक कारणों से भारत को हिन्दू बहुल भारत और मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में विभाजित करना पड़ा।

भारत का विभाजन होने के फलस्वरुप बंगाल भी दो हिस्सों में बँट गया। इसका हिन्दु बहुल इलाका भारत के साथ रहा और पश्चिम बंगाल के नाम से जाना गया तथा मुस्लिम बहुल इलाका पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना जो पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना गया। जमींदारी प्रथा ने इस क्षेत्र को बुरी तरह झकझोर रखा था जिसके खिलाफ १९५० में एक बड़ा आंदोलन शुरु हुआ और १९५२ के बांग्ला भाषा आंदोलन के साथ जुड़कर यह बांग्लादेशी गणतंत्र की दिशा में एक बड़ा आंदोलन बन गया। इस आंदोलन के फलस्वरुप बांग्ला भाषियों को उनका भाषाई अधिकार मिला। १९५५ में पाकिस्तान सरकार ने पूर्वी बंगाल का नाम बदलकर पूर्वी पाकिस्तान कर दिया। पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान की उपेक्षा और दमन की शुरुआत यहीं से हो गई। और तनाव स्त्तर का दशक आते आते अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया। पाकिस्तानी शासक याहया खाँ द्वारा लोकप्रिय अवामी लीग और उनके नेताओं को प्रताड़ित किया जाने लगा, जिसके फलस्वरुप बंगबंधु शेख मुजीवु्ररहमान की अगुआई में बांग्लादेशा का स्वाधीनता आंदोलन शुरु हुआ। बांग्लादेश में खून की नदियाँ बही, लाखों बंगाली मारे गये तथा १९७१ के खूनी संघर्ष में दस लाख से ज्यादा बांग्लादेशी शरणार्थी को पड़ोसी देश भारत में शरण लेनी पड़ी। भारत इस समस्या से जूझने में उस समय काफी परेशानियों का सामना कर रहा था और भारत को बांग्लादेशियों के अनुरोध पर इस सम्स्या में हस्तक्षेप करना पड़ा जिसके फलस्वरुप १९७१ का भारत पाकिस्तान युद्ध शुरु हुआ. बांग्लादेश में मुक्ति वाहिनी सेना का गठन हुआ जिसके ज्यादातर सदस्य बांग्लादेश का बौद्धिक वर्ग और छात्र समुदाय था, इन्होंने भारतीय सेना की मदद गुप्तचर सूचनायें देकर तथा गुरिल्ला युद्ध पद्धति से की। पाकिस्तानी सेना ने अंतत: १६ दिसंबर १९७१ को भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, लगभग ९३००० युद्ध बंदी बनाये गये जिन्हें भारत में विभिन्न कैम्पों मे रखा गया ताकि वे बांग्लादेशी क्रोध के शिकार न बनें। बांग्लादेश एक आज़ाद मुल्क बना और मुजीबुर्र रहमान इसके प्रथम प्रधानमंत्री बने।

[संपादित करें] बांग्लादेश के इतिहास की मुख्य घटनाएँ

1947 - भारत के विभाजन के बाद बंगाल से कटकर पूर्वी पाकिस्तान बना.

1949 - अवामी लीग की स्थापना हुई जिसका मक़सद पूर्वी पाकिस्तान को स्वायत्तता दिलाना था.

1970 - शेख मुजीब के नेतृत्व में अवामी लीग ने चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया, पाकिस्तान की सरकार ने इन परिणामों को मानने से इनकार कर दिया. पाकिस्तानी सरकार के इस निर्णय के बाद दंगे भड़क उठे.

1971 - शेख़ मुजीब और अवामी लीग ने 26 मार्च को स्वतंत्रता की घोषणा कर दी. नए देश का नाम रखा गया बांग्लादेश, लड़ाई की मार से बचने के लिए करीब एक करोड़ लोग भारत की सीमा में शरणार्थी बनकर आए.

1972 - शेख़ मुजीब प्रधानमंत्री बने. उन्होनें उद्योगों के राष्ट्रीयकरण का अभियान चलाया लेकिन ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली.

1974 - देश में भीषण बाढ़ से पूरी फ़सल तबाह 28,000 लोग की मौत. देश में आपात स्थिति, राजनैतिक गड़बड़ियों की शुरूआत.

1975 - शेख़ मुजीब बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने. अगस्त में हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद उनकी हत्या कर दी गई, देश में सैनिक शासन लागू हो गया.

1976 -सैनिक शासन ने ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगाया.

1977 - जनरल ज़िया-उर-रहमान राष्ट्रपति बने. इस्लाम को सांविधानिक मान्यता दी गई.

1979 - देश में चुनाव हुए और सैनिक शासन समाप्त हुआ. जनरल ज़िया-उर-रहमान की बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने बहुमत हासिल किया.

1981- जनरल ज़िया तख़्ता पलट की कोशिश में मारे गए. अब्दुस सत्तार राष्ट्रपति बने.

1982 - एक और तख्ता पलट के बाद जनरल एरशाद सत्ता में आए. संविधान और राजनैतिक दलों की वैधता समाप्त की गई.

1983 - सभी स्कूलों में अरबी और क़ुरान की पढ़ाई के जनरल एरशाद के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हुए. सीमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी गई. एरशाद राष्ट्रपति बने.

1986 - संसद और राष्ट्रपति के लिए चुनाव हुए, एरशाद विजयी रहे. सैनिक शासन हटा और संविधान को बहाल किया गया.

1987 - विपक्ष की हड़ताल के बाद देश में इमरजेंसी लगाई गई.

1988 - एक-तिहाई देश पानी में डूबा, लाखों लोग बेघर हुए.

1990 - भारी जन-विरोध के बाद एरशाद पद से हटे.

1991 - भ्रष्टाचार के आरोप में एरशाद जेल भेजे गए. जनरल ज़िया-उर-रहमान की विधवा ख़ालिदा ज़िया प्रधानमंत्री बनीं. संविधान में परिवर्तन करके राष्ट्रपति के अधिकार सीमित कर दिए गए. चक्रवाती तूफ़ान ने लगभग डेढ़ लाख लोगों की जान ली.

1996 -अवामी लीग सत्ता में लौटी, शेख़ हसीना प्रधानमंत्री बनीं. देश में हड़तालों का दौर शुरू हुआ.

1998 -बाढ़ ने पूरे देश में तबाही मचाई. 1975 के मुजीब हत्याकांड के लिए ज़िम्मेदार 15 पूर्व सैनिक अधिकारियों को मौत की सज़ा सुनाई गई.

2000 -स्वतंत्रता की लड़ाई के बारे में एक पाकिस्तानी राजनयिक के बयान पर विवाद हुआ, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में कटुता आई.

2001-आम चुनाव में शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग हार गई और धार्मिक दलों के समर्थन के साथ जातीय पार्टी सत्ता में आई और बेग़म ख़ालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं.

२००८ - भारी बहुमत के बाद शेख़ हसीना फिर से प्रधानमन्त्रि बनी

[संपादित करें] राजनीति

देश की राजनीति में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रधान होता है, जबकि प्रधानमंत्री देश का प्रशासनिक प्रमुख होता है। राष्ट्रपति को हर पाँच साल बाद चुना जाता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, प्रधानमंत्री ऐसे व्यक्ति को चुना जाता है जो उस समय संसद का सदस्य हो और राष्ट्रपति को विश्वास दिलाये कि उसे संसद में बहुमत का समर्थन हासिल है। प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों की कैबिनेट गठित करता है जिसके नियुक्ति की मंजूरी राष्ट्रपति देता है।

बांग्लादेश की संसद को जातीय संसद कहा जाता है जिसके 300 सदस्य प्रत्यक्ष मतदान द्वारा चुनकर आते हैं, और पाँच साल तक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। देश की सबसे बड़ी वैधानिक संस्था बांग्लादेशी सर्वोच्च न्यायालय जिसके प्रधान न्यायाधीश और अन्य न्यायधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

[संपादित करें] क्षेत्र

बांग्लादेश को छः उपक्षेत्रों में बांटा गया है जिनका नाम उन राज्यों की राजधानियों के नाम पर रखा गया है।

देखें: बांग्लादेश के शहर.

[संपादित करें] भूगोल

बांग्लादेश का अधिकतर हिस्सा समुद्र की सतह से बहुत कम ऊँचाई पर स्थित है। ज्यादातर हिस्सा भारतीय उपमहाद्वीप में नदियों के मुहाने पर स्थित है जो सुंदरवन के नाम से जाना जाता है। ये मुहाने गंगा (स्थानीय नाम पद्मा नदी), ब्रम्हपुत्र, यमुना और मेघना नदियों के हैं जो बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अवस्थित हैं जो ज्यादातर हिमालय से निकलती हैं। बांग्लादेश की मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है लेकिन बाढ और अकाल दोनों से काफी प्रभावित होती रहती है। पहाड़ी क्षेत्र सिर्फ़ चिटागांग जिले में स्थित हैं जिसकी सबसे ऊँची चोटी केओक्रादांग 1,230 मीटर ऊँची है जो सिलहट मंडल के दक्षिण पूर्व में स्थित है।

बांग्ला देश की जलवायु उष्णकटिबंधीय जलवायु है, यहाँ अक्तूबर से मार्चतक जाड़े का मौसम होता है। मार्च से जून तक उमस भरी गर्मी होती है और मार्च से जून तक मानसून के मौसम की बारिश होती है। बांग्लादेश को प्राय: हर साल चक्र्वातीय तूफान का सामन करना पड़ता है। मिट्टी का अपरदन और वनों की अंधाधुंध कटाई यहाँ की कुछ बड़ी समस्याएँ हैं। ढाका यहाँ का सबसे बड़ा शहर है, अन्य बड़े शहरों में चिटागांग, राजशाही, और खुलना हैं. चिटागांग के दक्षिण में स्थित काक्स बाजार विश्व के सबसे लंबी बीच में से एक है।

[संपादित करें] संस्कृति

[संपादित करें] राजनैतिक दल

[संपादित करें] विविध


[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ


अन्य भाषाएँ