मैथिली
|
|
इस लेख में सन्दर्भ या सूत्र नहीं दिए गए हैं। कृपया विश्वसनीय सूत्रों के सन्दर्भ जोड़कर इस लेख में सुधार करें। बिना सूत्रों की सामग्री को हटाया जा सकता है। (सितंबर 2011) |
| भाषा का नाम | ||
|---|---|---|
| बोली जाती है | — | |
| क्षेत्र | — | |
| कुल बोलने वाले | — | |
| भाषा परिवार | —
|
|
| भाषा कूट | ||
| ISO 639-1 | None | |
| ISO 639-2 | – | |
| ISO 639-3 | – | |
| सूचना: इस पन्ने पर यूनीकोड में अ॰ध॰व॰ (आई पी ए) चिह्न हो सकते हैं। | ||
मैथिली मुख्य रूप से भारत में उत्तरी बिहार और नेपाल के तराई के ईलाक़ों मे बोली जानेवाली भाषा है। यह प्राचीन भाषा हिन्द आर्य परिवार की सदस्य है और भाषाई तौर पर हिन्दी, बांग्ला, असमिया, उड़िया और नेपाली से इसका काफी निकट का संबंध है । मैथिली की शब्दावली का प्रमुख श्रोत संस्कृत भाषा है जिसके शब्द "तत्सम" वा "तद्भव" रूप मे मैथिली मे प्रयुक्त होते हैं साथ ही मौलिक "देशज" व अन्य भाषाओं से आए कतिपय "विदेशज" शब्द भी शब्दावली को समृद्ध करते हैं ।
अनुक्रम |
लिपि [संपादित करें]
पहले इसे मिथिलाक्षर तथा कैथी लिपि में लिखा जाता था जो बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती थी पर कालान्तर में देवनागरी का प्रयोग होने लगा । मिथिलाक्षर को तिरहुता या वैदेही लिपी के नाम से भी जाना जाता है । यह असमिया , बाङ्गला व उड़िया लिपियों की जननी है । उड़िया लिपी बाद मे द्रविड़ भाषाओं के सम्पर्क के कारण परिवर्तित हुई ।
विकास [संपादित करें]
मैथिली का प्रथम प्रमाण रामायण मे मिलता है।यह त्रेता युग मे मिथलानरेश राजा जनक की राज्यभाषा थी।इस प्रकार यह इतिहास की प्राचीनतम भाषा मानी जाती है।प्राचीन मैथिली के विकास का शुरूआती दौर प्राकृत और अपभ्रंश के विकास से जोड़ा जाता है। लगभग७००इस्वी के आसपास इसमें रचनाएं की जाने लगी । विद्यापति मैथिली के आदिकवि तथा सर्वाधिक ज्ञात कवि हैं । विद्यापति ने मैथिली के अतिरिक्त संस्कृत तथा अवहट्ट में भी रचनाएं लिखीं । ये वह दो प्रमुख भाषाएं हैं जहाँ से मैथिली का विकास हुआ । भारत की लगभग 1.18% आबादी लगभग 4 से 5 करोड़ लोग मैथिली को मातृ-भाषा के रुप में प्रयोग करते हैं और इसके प्रयोगकर्ता भारत और नेपल् के विभिन्न हिस्सों सहित विश्व के कई देशों मे फैले हैं। मैथिली विश्व के समब्रिध, शलिन और मिठस पूर्ण भाशएमे एक मानि जति है।
साहित्य [संपादित करें]
वृहद लेख मैथिली साहित्य देखें
मैथिली साहित्य का अपना समृद्ध इतिहास रहा है और चौदहवीं तथा पंद्रहवीं शताब्दी के कवि विद्यापति को मैथिली साहित्य में सबसे ऊँचा दर्जा प्राप्त है। वर्तमान काल मे डा. हरिमोहन झा, बाबा,उग्रणारायन मिश्र 'कनक्', मैथिली भाषा के प्रमुख लेखक माने जाते हैं| मैथिली के गौरवर्पूण इतिहास मे पध के साथ साथ गध साहित्य का अनुपम योगदान है। यहाँ के ग्रामीणोँ मे गोनु झा के चतुराई की कहानियाँ अत्यन्त लोकप्रिय है।यहाँ की भुमि देवस्पर्श की धनी है।यहाँ की भुमि राम सिया के पावन विवाह की साक्षी बनी।यहाँ इस विवाह से संबंधित लोक गीत अति लोकप्रिय हैँ।
स्थिति [संपादित करें]
भारत की साहित्य अकादमी द्वारा मैथिली को साहित्यिक भाषा का दर्जा पंडित नेहरू के समय १९६५ से हासिल है। २२ दिसंबर २००३ को भारत सरकार द्वारा मैथिली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल किया गया है। और नेपल सरकार द्वारा मैथिली को नेपल की दुस्रे स्थन मे रखा गया है।
यह भी देखें [संपादित करें]
बाह्य सूत्र [संपादित करें]
- कतेक रास बात : मैथिली भाषा केँ वेबसाईट पर आनबाक एकटा उत्तम प्रयास
- मैथिली शब्दावली
मिथिला फेस :- मैथिली भाषाक प्रथम आ एक मात्र सोशल वेबसाइट
|
|||||||||||||||||||||||