दैलेख जिला

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दैलेख
—  जिला  —
दैलेख की नेपाल में स्थिति
राष्ट्र Flag of Nepal.svg नेपाल
क्षेत्र मध्य-पश्चिमांचल
अंचल भेरी अंचल
क्षेत्र
 • कुल [
आबादी (2001)
 • कुल 2,25,201
 • घनत्व <
समय मण्डल NPT (यूटीसी +5:45)
Main language(s) नेपाली

दैलेख नेपाल के भेरी अंचल का एक जिला है। दैलेख नेपाल का मध्य पश्चिमांचल विकास क्षेत्र व भेरी अंचलका एक जिला है। यह एक विकट पहाडी जिलोंकी श्रेणी मे लिया जाता है। यह जिला । यहांकी सबसे उंची चोटी "महाबुलेक" है। यहां का सबसे कम उचाईंवाला स्थान "तल्लो डुंगेश्वर" नामक स्थान है। यह जिलेका सिमाना पूर्वमें भेरी अंचलका जाजरकोट जिला पश्चिममें सेती अंचलका अछाम जिला दक्षिणमें भेरी अंचलका सुर्खेत जिला उत्तरमें कर्णाली अंचलका कालिकोट जिलाके साथ जुडा हुआ है। इस जिले की भौगोलीक बनावटको मुख्यतया तिन हिस्सों में बांटा गया है।

  1. नदी तटिय क्षेत्र तथा मैदानी क्षेत्र
  2. मध्य पहाडी तथा महाभारत पर्वत श्रृंखला क्षेत्र
  3. उच्च पहाडी तथा हिमाली क्षेत्र

इतिहास[संपादित करें]

दैलेख जिला

यह जिला पहले "दुल्लु" व "बिलासपुर" दो राज्यों मे विभाजित था। बाद में शाह वंशीय नेपाली राजकुमार बहादुर शाह ने ईस जिले का नेपाल के भूभाग में समावेश किया था। इस स्थान का नाम "दैलेख" कैसे पड़ा इस सम्बन्ध में कई कहानियां प्रचलित हैं। प्राचीन काल में यह स्थान महर्षि दधीचि की तपोभूमि था इस आधार पर इसे "दधिलेख" कहा गया, बाद में इसका नाम बदलकर दैलेख कर दिया गया। प्राचीन काल में यह स्थान देवताओं का निवास स्थान था इसलिए इसे देवलोक कहा जाता था बाद में यह अपभ्रंशित होकर दैलेख में परिवर्तित हो गया। यहां पर तमाम दही दूध मिलता है इसलिए इसे दैलेख कहा गया। इस जिले का नाम जिला मुख्यालय दैलेख के नाम पर रखा गया है।

संस्कृती[संपादित करें]

दैलेख जिले में बिभिन्न जातीयों तथा बिभिन्न धर्मावलम्बीयों का बसोवास है। फीर भी यहां पर हिन्दू धर्मावलम्बीयों की बिशेष बाहुल्यता है। यहां पर हिन्दूओं के सभी त्योहार मनाये जाते हें। जैसे:- दशैं, तिहार, माघी, होरी, नयां बर्ष, रक्षावंधन, हरितालीका आदी सभी त्यौहारों को हिन्दू धर्मावलम्बी के अलावा अन्य धर्म के लोग भी मनाते हुए देखा जाता है। यह जिला बहु जाती बहु भाषी हुने के बावजुद भी यहां हिन्दू संस्कृती को ही ज्यादा मान्यता दिया जाता है। हिन्दू त्यौहारों के दिनों में सरकारी छुट्टीयां पडती हें और जगह जगह पर मेले वगहरा लगते हें।

पर्यटन[संपादित करें]

दैलेख जिल्ला एक बिकट पहाडी जिला जरुर है पर यह जिला पर्यटकों के लिए अती रमणीय स्थान है। यहां पुराने जमाने के बने देवल, किले, दरगाह आदी जिले के हर स्थानों पर देखाई देते हैं। जैसे:-

  1. जिला मुख्यालय नयां बजार स्थित प्रशिद्ध कोत गढी एक पुराना किला है।
  2. भुर्ती गांव व रावतकोट स्थित पञ्च देवलों को पाण्डवोंने बनाया हुए निसानी कहा जाता है।
  3. यहां "पञ्चकोशी" नामक एक तिर्थ स्थल है जहां पर पांच अलग अलग जगह पर मन्दिर हैं जिसे पञ्चकोशी कहा जाता है। "पादुका", "नाभीस्थान", "श्रीस्थान", "कोटिला", "धुलेश्वर" पञ्चकोशी तिर्थ के मुख्य स्थान हैं। यिन स्थानों पर कोही न कोही दैविक गति विधियां जरुर देखा जाता है। किस ही स्थानों पर पानी में आग की ज्योती जलती हुई देखा जाता है तो किस ही स्थान पर जमिन से धुल निकलता देखा जाता है। कहा जाता है महाभारत काल में युधिष्ठीर का मुकावला नागरुप के राजा नहुष के साथ पञ्चकोशी स्थान पर हुआ था। राजा युधिष्ठीर ने नाग रुपी नहुक को ज्ञान दिया तब नहुक मुक्ती को प्राप्त हुए नाग रुपी नहुष का शिर श्रीस्थान पर पाउ पादुका पर नाभ नाभिस्थान पर कक्ष कोटिला पर था इस हि तरह धुलेश्वर पर धुल गिरा था। [1]

यिस के साथ ही दैलेख जिला में कई पर्यटकिय स्थल हें जो पर्यटकों का मन चुरा सकते हें

दैलेख जिला प्रशासनिक विभाजन[संपादित करें]

दैलेख जिला को 55 गा. वि. स. (गाउं विकाश समिती/ ग्राम पञ्चायत), 1 नगर पालिका, 2 सांसदीय क्षेत्र और 11 ब्लॉकों में विभाजीत किया गया है। दैलेख जिला के गा. वि. स./नगरपालिका के नाम सुची:-

  • नगरपालिका
  1. नारायण नगरपालिका
  • गा.वि.स.

संदर्भ[संपादित करें]

  1. जन कहानियां

देखें[संपादित करें]