दैलेख जिला
| दैलेख की नेपाल में स्थिति | |
| राष्ट्र | |
|---|---|
| क्षेत्र | मध्य-पश्चिमांचल |
| अंचल | भेरी अंचल |
| क्षेत्रफल | |
| - कुल | 1,502 km² (579.9 sq mi) |
| जनसंख्या (2001) | |
| - कुल | 2,25,201 |
| - घनत्व | 149.9/km2 (388.3/sq mi) |
दैलेख नेपाल के भेरी अंचल का एक जिला है। दैलेख नेपाल का मध्य पश्चिमांचल विकास क्षेत्र व भेरी अंचलका एक जिला है। यह एक विकट पहाडी जिलोंकी श्रेणी मे लिया जाता है। यह जिला । यहांकी सबसे उंची चोटी "महाबुलेक" है। यहां का सबसे कम उचाईंवाला स्थान "तल्लो डुंगेश्वर" नामक स्थान है। यह जिलेका सिमाना पूर्वमें भेरी अंचलका जाजरकोट जिला पश्चिममें सेती अंचलका अछाम जिला दक्षिणमें भेरी अंचलका सुर्खेत जिला उत्तरमें कर्णाली अंचलका कालिकोट जिलाके साथ जुडा हुआ है। इस जिले की भौगोलीक बनावटको मुख्यतया तिन हिस्सों में बांटा गया है।
- नदी तटिय क्षेत्र तथा मैदानी क्षेत्र
- मध्य पहाडी तथा महाभारत पर्वत श्रृंखला क्षेत्र
- उच्च पहाडी तथा हिमाली क्षेत्र
अनुक्रम |
[संपादित करें] इतिहास
यह जिला पहले "दुल्लु" व "बिलासपुर"दो राज्योंमे विभाजित था। बाद में शाह वंशिय नेपाली राजकुमार बहादुर शाह ने ईस जिलेको नेपालके भु-भाग में समावेश किया था। यह स्थानका नाम "दैलेख" कैसे हुआ ईस सम्बन्ध में निम्न कहानियां पाईगई है। प्राचिन काल में महर्षि दधिचीका यह स्थान तपोभुमी था इस आधार पर ईसे "दधिलेख" कहा गया था बाद में ईसका नाम बदलकर दैलेख कर दिया गया। प्राचिन काल में यह स्थान देवताओंका वास स्थान था तसर्थ ईसे देवलोक कहा जाता था बाद में यह अपभंशित होकर दैलेख में परिवर्तन होगया। यहां पर तमाम दही दुध मिलता है तसर्थ ईसे दैलेख कहा गया। ध्यान रहे ईस जिलेका नाम जिला मुख्यालय दैलेख के नाम से रखा है।
[संपादित करें] संस्कृती
दैलेख जिले में बिभिन्न जातीयों तथा बिभिन्न धर्मावलम्बीयों का बसोवास है। फीर भी यहां पर हिन्दू धर्मावलम्बीयों की बिशेष बाहुल्यता है। यहां पर हिन्दूओं के सभी त्योहार मनाये जाते हें। जैसे:- दशैं, तिहार, माघी, होरी, नयां बर्ष, रक्षावंधन, हरितालीका आदी सभी त्यौहारों को हिन्दू धर्मावलम्बी के अलावा अन्य धर्म के लोग भी मनाते हुए देखा जाता है। यह जिला बहु जाती बहु भाषी हुने के बावजुद भी यहां हिन्दू संस्कृती को ही ज्यादा मान्यता दिया जाता है। हिन्दू त्यौहारों के दिनों में सरकारी छुट्टीयां पडती हें और जगह जगह पर मेले वगहरा लगते हें।
[संपादित करें] पर्यटन
दैलेख जिल्ला एक बिकट पहाडी जिला जरुर है पर यह जिला पर्यटकों के लिए अती रमणीय स्थान है। यहां पुराने जमाने के बने देवल, किले, दरगाह आदी जिले के हर स्थानों पर देखाई देते हैं। जैसे:-
- जिला मुख्यालय नयां बजार स्थित प्रशिद्ध कोत गढी एक पुराना किला है।
- भुर्ती गांव व रावतकोट स्थित पञ्च देवलों को पाण्डवोंने बनाया हुए निसानी कहा जाता है।
- यहां "पञ्चकोशी" नामक एक तिर्थ स्थल है जहां पर पांच अलग अलग जगह पर मन्दिर हैं जिसे पञ्चकोशी कहा जाता है। "पादुका", "नाभीस्थान", "श्रीस्थान", "कोटिला", "धुलेश्वर" पञ्चकोशी तिर्थ के मुख्य स्थान हैं। यिन स्थानों पर कोही न कोही दैविक गति विधियां जरुर देखा जाता है। किस ही स्थानों पर पानी में आग की ज्योती जलती हुई देखा जाता है तो किस ही स्थान पर जमिन से धुल निकलता देखा जाता है। कहा जाता है महाभारत काल में युधिष्ठीर का मुकावला नागरुप के राजा नहुष के साथ पञ्चकोशी स्थान पर हुआ था। राजा युधिष्ठीर ने नाग रुपी नहुक को ज्ञान दिया तब नहुक मुक्ती को प्राप्त हुए नाग रुपी नहुष का शिर श्रीस्थान पर पाउ पादुका पर नाभ नाभिस्थान पर कक्ष कोटिला पर था इस हि तरह धुलेश्वर पर धुल गिरा था। [1]
यिस के साथ ही दैलेख जिला में कई पर्यटकिय स्थल हें जो पर्यटकों का मन चुरा सकते हें
[संपादित करें] दैलेख जिला प्रशासनिक विभाजन
दैलेख जिला को 55 गा. वि. स. (गाउं विकाश समिती/ ग्राम पञ्चायत), 1 नगर पालिका, 2 सांसदीय क्षेत्र और 11 ब्लॉकों में विभाजीत किया गया है। दैलेख जिला के गा. वि. स./नगरपालिका के नाम सुची:-
- नगरपालिका
- गा.वि.स.
- अवल पराजुल
- कट्टी
- काल भैरव
- कासिकांध
- कालिका
- कुसापानी
- खडीगैरा
- खड्कावाडा
- गमौडी
- गोगनपानी
- गौरी
- चामुण्डा
- चौरठा
- छिउडी पुसाकोट
- जगनाथ
- जम्बुकांध
- डांडा पराजुल
- तिलेपाटा
- तोली
- तोलीजैसी
- दुल्लु
- द्वारी
- नाउले कटवाल
- नेपा
- नौमुले
- पगनाथ
- पादुका
- पिलाडी
- पिपलकोट
- बराह
- बडलम्जी
- बडखोला
- बडा भैरव
- बालुवाटार
- बाहाकोट
- बांसी
- बिन्ध्यबासीनी
- बेलपाटा
- भैरी कालिकाथुम
- भवानी
- मालिका
- मेहतोली
- राकम कर्णाली
- रावतकोट
- रानीवन
- रुम
- लकान्द्र
- लयाटी बिन्द्रासैनी
- लाकुरी
- लालिकांडा
- विसाला
- सल्लेरी
- सात्तला
- सिंगौडी
- सिंहासैन
- सेरी
[संपादित करें] संदर्भ
- ↑ जन कहानियां
[संपादित करें] देखें
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