नेपाल में पर्यटन

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नेपाल में सबसे बड़ा उद्योग पर्यटन है, जो उसकी विदेशी मुद्रा एवं आय का भी सबसे बड़ा स्रोत है। विश्व की 10 सबसे ऊंचे पर्वतों में से 8 नेपाल में होने के कारण यह पर्वतारोहियों, रॉक पर्वतारोहियों तथा रोमांच की तलाश करने वाले लोगों के लिए नेपाल एक जीवंत गंतव्य है। नेपाल की हिंदू और बौद्ध विरासत तथा वहां का ठंडा मौसम भी उसका सशक्त अकर्षण हैं।पर्यटन, मनोरंजन, अवकाश या व्यापार के प्रयोजनों के लिए की जाने वाली यात्रा है।

प्रमुख पर्यटन गतिविधियां

एक सिंहावलोकन

नेपाल, विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट शिखर के लिए सुप्रसिद्ध है तथा साहसिक पर्यटन के लिए एक प्रसिद्ध गंतव्य है। विश्व विरासत लुम्बिनी (गौतम बुद्ध का जन्म स्थान) भी नेपाल में स्थित है। प्राकृतिक सुरम्य परिदृश्य और जैव विविधता, ऊंचे हिमालय पर्वत, अतुलनीय सांस्कृतिक विरासत और अन्य अनेक विशिष्टताओं ने नेपाल को एक सुनिश्चित छवि के साथ, दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक सुविख्यात गंतव्य बना दिया है (एनटीबी). इन गुणों ने नेपाल को पर्यटन उद्योग के विकास के लिए उच्च क्षमताएं प्रदान करते हुए, उसे एक अद्वितीय स्थान बना दिया है। अब तक, आर्थिक विकास के नजरिए से पर्यटन उद्योग के विकास की गति को आशाजनक नहीं माना जा सकता है। भले ही, यह क्षेत्र असीमित संभावनाओं के साथ विदेशी मुद्रा प्राप्तियों में बहुत बड़े हिस्से का योगदान दे रहा है। नई सरकार की नीतियों ने पर्यटन के वास्तविक मूल्य और देश में आर्थिक विकास तथा समग्र पर्यटन विकास में योगदान देने की उसकी भूमिका पर अधिकाधिक चिंताएं जताई हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यटन उद्योग को गरीबी उन्मूलन और सामाजिक समानता के लिए एक प्रमुख तत्व के रूप में माना जाता है। नेपाल के पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (एसओटीसीए) द्वारा नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) और संबंधित उद्योगों के सहयोग से नेपाल पर्यटन विजन 2020 जारी किया है, जिसमें 2020 तक बीस लाख पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है (स्रोतः आर्थिक सर्वेक्षण, 2009 वित्त मंत्रालय, नेपाल)


अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन (स्रोत: आर्थिक सर्वेक्षण, 2009)

नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या, उनकी वृद्धि की प्रवृत्ति और ठहरने की अवधि की लंबाई का विष्पलेषण करने पर ज्ञात होता है कि पर्यटकों की संख्या कैलेंडर वर्ष 2007 के दौरान 37.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 526,705 हो गई थी। कैलेंडर वर्ष 2008 में पर्यटकों की संख्या 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कुल 500,277 रही. 2006 में पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि 11.96 दिन थी, जो घट कर कैलेंडर वर्ष 2008 में 11.78 दिन रह गई। कैलेंडर वर्ष 2007 में पर्यटकों की संख्या 37.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 526,705 हो गई थी। कैलेंडर वर्ष 2008 में पर्यटकों की संख्या 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कुल 500,277 रही. 2006 में पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि 11.96 दिन थी, जो घट कर

कैलेंडर वर्ष 2008 में 11.78 दिन रह गई।कैलेंडर वर्ष 2008 में आए कुल पर्यटकों के 27.5 प्रतिशत पश्चिमी यूरोप से थे, 7.6 प्रतिशत उत्तरी अमेरिका से, 3.2 प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र से, 2.6 प्रतिशत पूर्वी यूरोप से, 1.5 प्रतिशत मध्य और दक्षिण अमेरिका से, 0.3 प्रतिशत अफ्रीका से और 1.4 प्रतिशत अन्य देशों से थे। कुल आगंतुकों के 55.9 प्रतिशत, 18.2 प्रतिशत भारतीय पर्यटकों सहित एशिया से थे। हालांकि उत्तरी अमेरिका, मध्य और दक्षिणी अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र से आने वाले पर्यटकों के हिस्से में पिछले वर्ष की

इसी अवधि की तुलना में गिरावट आई है, अफ्रीका और 

अन्य देशों से आने वाले पर्यटकों के आगमन में वृद्धि हुई है।

प्रमुख गतिविधियां (स्रोत: http://tourism.gov.np)

पर्वतारोहण

विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट शिखर सहित, 8,000 मीटर से ऊंची आठ चोटियों वाली 800 किमी तक फैली नेपाल हिमालय श्रृंखला विश्व में सबसे बड़ी है। जब से 1994 में इस देश ने अपनी चोटियों को पर्वतारोहियों के लिए खोला है, नेपाल हिमालय पर्वतारोहण गतिविधियों का एक विशाल रंगमंच बन गया है और सफलता एवं असफलता के नाटकों ने हजारों पुरुषों एवं महिलाओं को इस अंतिम चुनौती को पूरा करने की प्रेरणा दी है। नेपाल हिमालय अनेक लोगों के लिए एक आकर्षण रहा है, चाहे वे हो संत हों, दार्शनिक हों, शोधकर्ता हों या साहसी.

पदयात्रा नेपाल के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक संपदा के अपराजेय संयोजन को अनुभव करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका उनके मध्य पैदल चलना है। एक व्यक्ति पहले से बने पदचिह्नों पर चल सकता है या नई पगडंडियों पर. किसी भी मार्ग से जाएं यह आप के लिए एक जीवन भर का अनुभव होगा. बुरुंश के जंगलों के साथ-साथ, अलग-थलग बस्तियां और छोटे पहाड़ी गांव, पक्षी, पशु, मंदिर, मठ और लुभावने परिदृश्य, परंपरागत ग्रामीण जीवन की एक आकर्षक झलक प्रस्तुत करते विविध संस्कृतियों के मित्रवत लोगों से आपकी भेंट भी हो जाएगी.

पक्षी अवलोकन पक्षियों की 646 से अधिक प्रजातियों (विश्व की कुल प्रजातियों का लगभग 8%) के साथ नेपाल पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग है और उनमें से लगभग 500 प्रजातियां तो अकेले काठमांडू घाटी में ही पाई जाती हैं। काठमांडू में सर्वाधिक लोकप्रिय पक्षी अवलोकन स्थल हैं, फूलचौकी, गोदावरी, नागार्जुन, बागमती नदियां, राष्ट्रीय पार्क और संरक्षण क्षेत्रों सहित तौदाहा. अपनी दूरबीनें निकालें और एक फलदायक अनुभव के लिए प्रतीक्षा करें.

पर्वतीय उड़ान पृथ्वी पर सबसे ऊंचे पर्वतों का सामना करने के लिए पर्वतीय उड़ान पर जाने के अनुभव की बराबरी तो एक विस्मयकारी शांति ही कर सकती है। पर्वतीय उड़ानें एवरेस्ट शिखर, कंचनजंघा और तिब्बत के पठार के यथासंभव निकटतम दृश्य प्रस्तुत करती हैं। पर्वतीय उड़ानें यात्रियों के सभी वर्गों को पसंद आती हैं और नेपाल का एक लोकप्रिय पर्यटन आकर्षण बन गई हैं। जो समयाभाव या अन्य कारणों से पैदल यात्रा पर जाने में असमर्थ हैं, उनके लिए ये उड़ानें मात्र एक घंटे में हिमालय क्षेत्र का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

चट्टानारोहण वहां चट्टानों पर चढ़ने आए लोगों के लिए, काठमांडू, उनके अनुभव को जीवन भर का अनुभव बना देने वाली पत्थर की दीवारों की एक श्रृंखला प्रदान करता है। अब लंबे समय से, चट्टानारोहणके लिए सच में कुछ शानदार स्थान प्रदान करने वाले काठमांडू में चट्टानारोहण एक लोकप्रिय खेल बन गया है। नागार्जुन, बालाजू, शिवपुरी और बूढानील कांठा ऐसे कुछ स्थान हैं जहां पर आप इस खेल को आजमा सकते हैं।

राफ्टिंग/कयाकिंग/कैन्योनिंग देश की प्राकृतिक एवं जातीय-सांस्कृतिक विरासत के सामान्य भागों की खोज के लिए राफ्टिंग सर्वश्रेष्ठ तरीका है। नेपाल में अनगिनत नदियां हैं जो उत्कृष्ट राफ्टिंग या कनूइंग अनुभव प्रदान करती हैं। चारों ओर अति उदार दृश्यावली के साथ शांत हरे पानी पर बह सकते हैं या सरकारी अधिकृत एजेंसियों द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ नदी सहायकों की देखरेख में गर्जन करते हुए नदी की मुख्य धारा को चीर कर निकल सकते हैं। एक दिन या उससे अधिक राफ्टिंग को दिया जा सकता है। अब तक, सरकार ने 10 नदियों के खंडों को वाणिज्यिक राफ्टिंग के लिए खोला है। त्रिसूली नदी (3+ श्रेणी) नेपाल की सर्वाधिक लोकप्रिय रैफ्ट करने योग्य नदियों में से एक है। काली गंडकी (5-5+) में सुदूरवर्ती घाटियों और गहरी तंग घाटियों में घूमती नदी का अति तीव्र प्रवाह पांच दिन तक रहता है। भोट कोशी (4-5) में निरंतर 26 किमी तक झाग वाला पानी है और उग्र मरश्यांगी में निर्बाध झाग वाला पानी चार दिन तक रहता है। करनाली नदी (4-5) दुनिया के सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण नदी ढलानों में से कुछ प्रस्तुत करती है। सुन कोशी (4-5), 27 किमी लंबी, बड़ी और चुनौतीपूर्ण नदी है जिसे पूरा करने के लिए 8-10 दिन की आवश्यकता होती है। राफ्टिंग एजेंटों द्वारा साहसियों को विश्व स्तरीय सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। यहां एजेंसियां जीवन रक्षक जैकेट, तंबू लगाने तथा विश्व स्तरीय राफ्टिंग के लिए आवश्यक मानक सामग्री उपलब्ध करवाती हैं। यूरोप का एक बेहद लोकप्रिय खेल कैनोनिंग अब नेपाल में भी उपलब्ध है। कैनोनिंग आप को दुनिया के सबसे जबर्दस्त सुंदर, फिर भी अभी तक वर्जित स्थानों में से कुछ की खोज करने की स्वतंत्रता देता है।

गर्म हवा के गुब्बारे गर्म हवा के गुब्बारों की सैर पर्यटकों में बहुत लोकप्रिय है क्योंकि इससे उन्हें विशाल हिमालय पर्वतमाला की पृष्ठभूमि में काठमांडू घाटी का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। जिस दिन आकाश साफ हो, यह हिमालयी क्षेत्र को (6000 मीटर ऊपर से) देखने का एक शानदार तरीका है तथा घाटी के दृश्य भी उतने ही विस्मयकारी हैं।

बंजी कूद एक बंजी कूद के अंतिम रोमांच को अब नेपाल में ही, इस खेल के विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्थलों, जिन पर यह खेल गर्व कर सकता है, में से एक पर अनुभव किया जा सकता है। नेपाल का पहला बंजी कूद स्थल 160मी पर स्थित है। भोट कोशी नदी पर, इस अद्भुत स्थान का परिवेश आप को अंतिम उल्लास और उत्तेजना को अनुभव करने के लिए आमंत्रित कर रहा है। 160मी से कूद के लिए कर्मचारीयों की तैनाती और इसका संचालन, इस व्यवसाय के सर्वाघिक अनुभवी कूद प्रशिक्षकों द्वारा किया जाता है।

पैराग्लाइडिंग साहसिक कारनामों के शौकीनों के लिए नेपाल में पैराग्लाइडिंग एक अद्भुत और संतोषप्रद अनुभव हो सकता है। एक यात्रा आप को पृथ्वी पर सबसे अच्छे दृश्यों के ऊपर ले जाएगी, क्योंकि राजसी हिमालय के शानदार दृश्यों के साथ आप वायुमंडल को साझा करेंगे हिमालयी ग्रिफिन, गिद्धों, गरुड़ों और चीलों के साथ और तैर रहे होंगे गांवों, मठों, मंदिरों, झीलों और जंगलों के ऊपर से.

अल्ट्रालाइट विमान अल्ट्रालाइट विमान पोखरा से उड़ान भरता है और आपके लिए झीलों, पहाड़ों और गांवों के शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। एक नए दृष्टिकोण से जीवन को देखने का यह एक आदर्श तरीका है। मुख्यतः पहाड़ों और सुंदर झीलों की निकटता के कारण अल्ट्रालाइट विमानों के लिए पोखरा घाटी का चयन उपयुक्त ही है। जिन लोगों ने कभी कामना की थी कि वे भी बड़े होकर पक्षियों की तरह उड़ सकेंगे, उन के लिए यह हवाई यात्रा बहुत जरूरी है। एक दम ऊपर जाकर भले ही वह अकेला रह जाए, लेकिन यह जरूरी है। शीर्ष पर अकेलापन हो सकता है, लोकिन इतनी ऊंचाई से दिखाई देने वाले शानदार दृश्य निश्चित रूप से इसके लायक हैं। ये उड़ानें सितंबर से शुरू होकर जून तक पोखरा हवाईअड्डे से होती हैं। इन महीनों में ये उड़ानें सूर्योदय से प्रातः 11 बजे तक तथा सायं 3 बजे से सूर्यास्त तक रोजाना होती हैं।

पहाड़ी साइकिल सवारी काठमांडू घाटी की खोज का सबसे अच्छा तरीका पहाड़ी साइकिल पर घूमना है। नेपाल के विविधतापूर्ण इलाके एक पहाड़ी साइकल सवार के लिए साहसिक कारनामे का सपना सच होने जैसे हैं। इस शानदार देश, इसके परिदृश्य और जीवन विरासत की खोज के लिए पर्यावरण की दृष्टि से पहाड़ी साइकल सवारी बिलकुल सही तरीका है। प्रत्येक पहाड़ी साइकल सवार को उसकी निराधार कल्पना से भी परे, नेपाल में गंदी सड़कें और रास्ते मिलते हैं। पहाड़ी साइकल सवारी की सिफारिश की जा सकती है अगर आप नेपाल के शहरी केंद्रों, जैसे काठमांडू और पोखरा तथा इनके ग्रमीण क्षेत्र की खोज करना चाहते हैं। साहसिक लोग, विदेशी स्थानीय क्षेत्रों जैसे नामचे बाजार और पश्चिमी नेपाल के लिए विस्तारित यात्राओं की योजना बना सकते हैं। मैदानों से हो कर आप नेपाल की पूरी लंबाई नाप सकते हैं। नेपाल में और शहर के आसपास साइकिल किराए पर लेने की दुकानों पर एक दिन या अधिक समय के लिए पहाड़ी साइकलें किराये पर मिल जाती हैं।

जंगल सफारी नेपाल में, विशेष रूप से तराई क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय उद्यान दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन पार्कों की यात्रा में शामिल हैं, जानवरों के विविध प्रकार के पदचिह्नों, कनू के गड्ढों, जीप और हाथी की पीठ पर छुपा-छिपी खेलना. प्रत्येक हाथी सफारी करने वाले को एक या दो, एक सींग वाले राइनो दिखाई देना निश्चित है। राइनो के अलावा, जंगली सूअर, सांभर, स्लॉथ भालू, चितकबरा हिरण, चिकारा भी आमतौर पर दिखाई दे जाते हैं। एक रॉयल बंगाल टाइगर अपनी राजसी उपस्थिति से आप को आश्चर्यचकित कर सकता है।


धार्मिक स्थल (स्रोत: http://tourism.gov.np)

नेपाल में धर्म त्योहारों, दैनिक अनुष्ठानों, पारिवारिक समारोहों और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ जीवन के हर पहलू में व्याप्त है। हर कदम पर आप मंदिर और धार्मिक स्थल, जुलूस और भक्ति संगीत देख सकते हैं। हालांकि नेपाल दुनिया के एकमात्र हिंदू राष्ट्र के रूप में प्रसिद्ध है, यह हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और अन्य मतावलंबियों द्वारा सहिष्णुता और सद्भाव में परस्पर प्रेम से बुनी गई एक जटिल और सुंदर चित्र-यवनिका है।

पशुपतिनाथ मंदिर देश में ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक पूज्य भगवान विनाशक, शिव हैं। उन्हें एक पवित्र तपस्वी के रूप में पूजा जा सकता है, उनकी पत्नी पार्वती के साथ दिखाया गया है, जहां वे एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में डमरू धारण किए हुए हैं और अधिकतर तो लिंग-स्वरूप, उनकी उत्पादक शक्तियों का प्रतीक एक लंबोतरा पत्थर, में उनकी पूजा की जाती है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण लिंग काठमांडू के पश्चिम में पशुपतिनाथ के पवित्र मंदिर में स्थित है। आम तौर पर प्रत्येक शिव मंदिर के सामने शिव के वाहन, एक दिव्य बैल, नंदी की मूर्ति देखी जा सकती है। नेपाल में शिव का एक अन्य लोकप्रिय स्वरूप भयंकर भैरव हैं। भैरव के विभिन्न पहलू घाटी के त्योहारों में से कई में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

विष्णु, जिनका प्राथमिक कर्तव्य दुनिया और सभी जीवित रूपों के संरक्षण को आश्वस्त करना है, माना जाता है कि पृथ्वी पर दस बार, हर बार एक अलग अवतार के रूप में आ चुके हैं। उन्हें अक्सर एक सूअर, कछुआ, नर-सिंह और मछली के रूप में लिए गए उनके चार पशु अवतारों के रूप में दर्शाया जाता है। समस्त दक्षिण एशिया में उन्हें अक्सर दो प्रसिद्ध मानव स्वरूपों में पूजा जाता है: महाकाव्य रामायण के नायक राजकुमार राम और चरवाहा भगवान कृष्ण. नेपाल में वह अक्सर अपने नारायण के सर्वव्यापी स्वरूप में पूजे जाते हैं और उनकी सबसे सुंदर छवियों में से कुछ में उन्हें अपनी सवारी नर-गरुड़ पर सवार दिखाया जाता है।मंदिर वास्तुकला की पैगोडा शैली के हैं।इन में पैगोडा शैली की सभी विशेषताएं पाई जाती हैं, जैसे घनाकार निर्माण, सुंदरता से नक्काशी की गई लकड़ी की छत, जिस पर वे टिके हुए हैं (टुंडल). दो स्तर वाली छतें तांबे की हैं जिन पर सोने की परत चढ़ी है। इसके चार मुख्य द्वार हैं, सभी पर चांदी की चढ़ी हुई हैं।इस मंदिर का शिखर सोने का है, (गजूर), जो धार्मिक विचार का प्रतीक है। पश्चिमी द्वार पर बड़े बैल या नंदी की मूर्ति है, इसे भी सोने से मंडित किया गया है। देवता काले पत्थर के हैं, ऊंचाई में लगभग 6 फुट और परिधि में भी इतना ही.

आद्यप्ररूपीय मां या महिला, देवी का नेपाल में विशेष महत्व है। वे कई स्वरूपों में पूजी जाती हैं: दुर्गा संरक्षक और दानव महिषा का मर्दन करने वाली, घाटी शासकों की संरक्षक देवी तालेजू के रूप में और कुमारी के रूप में और जीवित कुंवारी देवी. अन्य स्त्री देवियों में शामिल हैं, लक्ष्मी, धन की देवी और सरस्वती, ज्ञान और कला की देवी. एक और व्यापक रूप से सम्मानित भगवान हैं, हाथी के सिर वाले गणेश, बाधाओं का हरण करने वाले और अच्छे भाग्य के स्रोत. अन्य देवता जैसे लाल मछेन्द्रनाथ, अकेले नेपाल में ही विशिष्ट हैं और अद्वितीय स्थानीय त्योहारों के साथ पूजे जाते हैं।

स्वयंभूनाथ बौद्ध धर्म के निभन्न स्वरूप नेपाल में प्रचलित हैं, संभवतः एक हजार वर्ष पूर्व भारत से बाहर गए प्राचीन बौद्ध धर्म से संबंधित है स्थानीय नेवार लोगों का बौद्ध धर्म; शेरपा, तमांग और तिब्बती लोगों का बौद्ध धर्म और थेरावादीन का अपेक्षाकृत आधुनिक क्षिप्राक्रमण या दक्षिण बौद्ध धर्म.

केंद्रीय विश्वास तथा प्रथाएं इसके संस्थापक राजकुमार सिद्धार्थ गौतम के समय की हैं, जिनका जन्म लगभग 534 ईसा पूर्व में दक्षिणी तराई में लुम्बिनी में हुआ था। 29 वर्ष की आयु तक, अपने महल की दीवारों से बाहर की दुनिया की समस्याओं और पीड़ाओं से पूरी तरह अनजान, युवा राजकुमार ने अपने पिता के महल में एक संरक्षित जीवन जिया. एक दिन उन्होंने उन्हें महल से बाहर ले जाने के लिए अपने सारथी को मना लिया, जहां एक बूढ़े आदमी, एक बीमार आदमी, एक शव तथा एक तपस्वी को देख कर वे अन्यंत दुखी हुए. दुनिया के असली दुखों की अनुभूति ने राजकुमार को अपने वैभवशाली जीवन का परित्याग करने को प्रेरित किया और वे मानव पीड़ा को समाप्त करने के लिए ज्ञान की खोज में वनों में चले गए। गौतम ने कई वर्षों तक तपस्या की किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली. एक रात्रि को बोधगया के जंगल में एक पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया। इसके बाद से वे महात्मा बुद्ध, एक ज्ञानी कहलाए और उन्होंने ज्ञानोदय के लिए मध्यम मार्ग का उपदेश देते हुए उत्तरी भारत के चारों ओर तथा दक्षिणी नेपाल की यात्रा की. अस्सी वर्ष की उम्र में उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया।

लुम्बिनी लुम्बिनी, शाक्य राजकुमार और अंततः बुद्ध, एक प्रबुद्ध, सिद्धार्थ गौतम (गौतम बुद्ध) का जन्मस्थान, दुनिया के लाखों बौद्ध धर्म के सभी संप्रदायों के अनुयायियों के लिए एक तीर्थ स्थल है। भारतीय सम्राट अशोक के स्मारक स्तंभ से पहचाने जाने वाले इस जन्म स्थल को यूनेस्को ने एक विश्व विरासत स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया है।

लुम्बिनी में मुख्य आकर्षण 8 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ पवित्र बाग है, जिसमें ऐतिहासिक क्षेत्र के सभी खजाने रखे हैं। मायादेवी मंदिर तीर्थयात्रियों और पुरातत्वविदों के लिए समान रूप से एक मुख्य आकर्षण है। यहाँ हमें बुद्ध को जन्म देते हुए, उनकी माता मायादेवी की उत्कीर्ण मूर्ति मिलती है। मायादेवी मंदिर के पश्चिम में नेपाल का प्राचीनतम स्मारक, अशोक स्तंभ है। सम्राट अशोक 249 ईसा पूर्व में इस पवित्र स्थल की अपनी तीर्थयात्रा की स्मृति में यह स्तंभ बनवाया था। स्तंभ के दक्षिण में हमें दिखाई देता है पवित्र सरोवर, पुष्करणी, जहां रानी मायादेवी ने प्रभु बुद्ध को जन्म देने से पहले स्नान किया था।

अत्यंत निकट ही देखने योग्य अन्य स्थान हैं। यहां काठमांडू से भैरवा की हवाई यात्रा द्वारा पहुंचा जा सकता है। काठमांडू से यहां के बस या कार द्वारा लगभग आठ घंटे लगते हैं।

मुक्तिनाथ यह माना जाता है कि एक बार इस मंदिर में जाने से सभी प्रकार के कष्ट/शोक से राहत मिल जाती है (मुक्ति = निर्वाण, नाथ = भगवान). भगवान मुक्तिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर मुस्तांग जिले में, जोमसोम से 18 किमी उत्तर पूर्व में लगभग 3,749 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मुख्य मंदिर पैगोडा आकार में भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर है। इसके चारों ओर दीवार में बने 108 नाले हैं जिन से पवित्र पानी डाला जाता है। मंदिर के एक ऊंची पर्वत श्रृंखला पर स्थित है और साफ मौसम के दौरान लोग यहां आते हैं। काठमांडू से मुक्तिनाथ जाने के दो मार्ग हैं। या तो काठमांडू से पोखरा होते हुए जोमसोम के लिए एक सीधी उड़ान ली जाए और कागबेनी होते हुए 7-8 घंटे पैदल यात्रा की जाए या पेखरा से ही पूरे रास्ते पैदल यात्रा की जाए जिस में 7-8 दिन लगते हैं। यह माना जाता है कि भारत में चार धामों की तीर्थ यात्रा के बाद इस मंदिर की यात्रा करनी चाहिए. इस मंदिर को बौद्धों के साथ ही हिंदुओं द्वारा भी पवित्र माना गया है। निकट ही स्थित ज्वाला माई मंदिर में एक झरना है और भूमिगत प्राकृतिक गैस से एक अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित रहती है। जोमसोम अन्नपूर्णा क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र है। जोमसोम में विश्व स्तरीय आवास सुविधाएं हैं जहां से एक उल्लेखनीय प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया जा सकता है।

गोसाइंकुंड नेपाल के सर्वाधिक प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है गोसाईंकुंड झील जो 436 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। काठमांडू से 132 उत्तर पूर्व की ओर स्थित गोसाईंकुंड जाने का सबसे अच्छा मार्ग धुंचे होकर है। धुंचे एक वाहनों के चलने योग्य सड़क मार्ग द्वारा काठमांडू के साथ जुड़ा हुआ है। उत्तर और दक्षिण में ऊंचे पहाड़ों से घिरी झील भव्य और सुन्दर है। वहाँ नौ अन्य सुंदर प्रसिद्ध झीलें भी हैं जैसे, सरस्वती, भैरव, सौर्य, गणेश कुंड आदि.

देवघाट देवघाट काली गंडकी और त्रिसूली नदियों के संगम पर स्थित एक लोकप्रिय तीर्थ स्थान है। यह निकट ही चितवन राष्ट्रीय उद्यान के उत्तर में स्थित है। जनवरी में मकर सक्रांति त्योहार के दौरान, हिंदू श्रद्धालु यहां नदी में पवित्र डुबकी लगाने के लिए एकत्र होते हैं। देवघाट के आसपास बहुत से दुर्लभ और ऐतिहासिक स्थल हैं जो दिलचस्प सहायक यात्राएं प्रदान करते हैं: त्रिवेणी मंदिर और बाल्मीकि आश्रम जहां महान ऋषि बाल्मीकि विश्राम किया था, सोमेश्वर कालिका मंदिर और किला, पांडवनाग जहां एक बार महाभारत के मुख्य पात्र रहे थे तथा पाल्पा के पूर्व राजाओं द्वारा निर्मित कबिलासपुर किला.

मनाकामना 3900 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर स्थल, गणेश मानसलू और अन्नपूर्णा समूह के अति सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है। आसपास के गांव हालांकि 20वीं सदी के नेपाली बार रॉक और द्वित्तीय विश्व युद्ध की परिणति का एक मिश्रण है। मनाकामना भगवती मंदिर में पूजा करने के लिए हर दिन सैकड़ों लोग यात्रा करते हैं। जुलाई के अंत में या अगस्त के आरंभ में, नाग पंचमी के लिए, मनाने वाले श्रद्धालु पूरे मंदिर को फूल और पत्तियों से सजाते हैं। मनाकामना की यात्रा पर जाना एक बहुत ही नेपाली बात करना है और यदि आप एक बकरे की बलि नहीं भी देते हैं तब भी आपको ऐसा अनुभव होगा मानो आपको समाज में दीक्षा प्राप्त हो गई है।

पथिभरा (1763 मी) मेची राजमार्ग पर कुटिडंडा और हासपोखरी के ऊपर स्थित पथिभरा को छोटी पथिभरा कहा जाता है, क्योंकि तापलेजुंग में उन्हें पथिभरा की छोटी बहन के रूप में माना जाता है। इस हरे जंगल से आच्छादित पहाड़ी से मैदानी इलाकों, महाभारत श्रेणी और कंचनजंगा पर्वत के दर्शन किए जा सकते हैं। परिवहन सुविधाओं के बहुतायत से इस जगह ग्लाइडिंग के लिए प्रचुर मात्रा में व्यवहार्यता है। प्रतिदिन हजारों लोग देवी पथिभरा को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

जलेश्वर महादेव यह ऐतिहासिक जलेश्वर, जनकपुर क्षेत्र के मुख्यालय जलेस्वर शहर में स्थित है। जलेश्वर महादेव नेपाल के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है और हिंदू महाकाव्य, पदम पुराण में इसका उल्लेख किया गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक जगदीश नामक साधु जलेश्वर के एकांत जंगल में आया और उसने एक स्वप्न देखा जिसमें उसे उसी स्थान पर खुदाई करने का आदेश दिया गया था। स्वप्न के अनुसार उसने खुदाई शुरू की और जल्दी ही उसे जलेश्वर महादेव की एक प्रतिमा मिली. तब उसने कुछ सोने से, जो वह एक सुनुखादागढ़ नामक स्थान से लाया था, एक मंदिर का निर्माण किया।

जलेश्वर महादेव मंदिर के ठीक सामने दो पावन सरोवर हैं, जिन्हें वरुणसर और क्षीरसर कहा जाता है। रामनवमी तथा विवाह पंचमी उत्सवों के दौरान हजारों तीर्थयात्री इन सरोवरों पर एकत्र होते हैं।

डोलखा भीमसेन डोलखा टाउनशिप के ऊपरी भाग में भीमेश्वर का मंदिर स्थित है, जो डोलखा भीमसेन के नाम से अधिक लोकप्रिय है। डोलखा के लोग भीमेश्वर को अपने सर्वोच्च प्रभु के रूप में हैं। बिना छत के इस मंदिर में एक शिव लिंग है, जिसके नीचे एक पवित्र सरोवर है। इस मंदिर में बाल चतुर्दशी, राम नवमी, चैत्र अष्टमी और भीम एकादशी जैसे अवसरों पर इस मंदिर में मेले लगते हैं। दशईं त्योहार के दौरान, यहां बकरों की बलि दी जाती है।

भीमेश्वर मंदिर से लगभग 200 मीटर पर त्रिपुरसुंदरी का मंदिर है जहां चैत्र अष्टमी तथा दशईं के त्योहारों के दौरान श्रद्धालु एकत्र होते हैं। इस मंदिर में केवल इस मंदिर के पुजारी को ही मंदिर में रखी प्रतिमा के दर्शन करने की अनुमति है।

स्वर्गद्वारी प्यूथान (राप्ती क्षेत्र) जिले के पश्चिमी भाग में हिंदू तीर्थस्थल, स्वर्गद्वारी स्थित है। स्वर्गद्वारी प्यूथान के जिला मुख्यालय खालंगा बाजार के दक्षिण में लगभग 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बैसाख पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा के त्योहार पर नेपाल और भारत के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने आते हैं।

मुख्य ट्रेकिंग क्षेत्र (http://www.nepalhiking.com/destinations/nepal/activities/trekking-in-nepal)

1. एवरेस्ट क्षेत्र - विश्व की आत्मा

यह अपूर्व आकर्षक गंतव्य सबसे उत्कृष्ट और उपयुक्त नेपाल की प्रसिद्ध सांस्कृतिक विविधता तथा पृथ्वी के उच्चतम बिंदु एवरेस्ट शिखर (29035 फुट/8848 मी) सहित पर्वतीय परिदृश्य के पूर्ण दर्शन का परिचायक है। एवरेस्ट क्षेत्र में छुट्टियों को इस प्रकार नियोजित किया गया है कि एक ही समय में - बर्फ से ढके हिमालय के दर्शन और कुछ सुंदर शेरपा गांवों से गुजरते नाटकीय और सुंदर मार्ग पर प्रेरणादायक यात्रा करने और निश्चित रूप से आपको पुराने कलात्मक बौद्ध मठों को देखने का असीम लाभ प्रदान करते हैं, इससे अधिक और क्या होगा कि आप को, मीरा शिखर (21247 फुट/6476 मी), द्वीप शिखर (20285 फुट/6183मी), पोकल्डे शिखर (19049 फुट/5806मी) तथा बहुत से और आकर्षक शिखरों पर पहुंचने के दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं।

2. अन्नपूर्णा क्षेत्र- एक जीवनकाल में एक बार यात्रा! दुनिया भर में प्रसिद्ध नेपाल का लंबी पैदल यात्रा स्थल कोई और नहीं, अन्नपूर्णा क्षेत्र ही है जिसमें शामिल हैं मध्य नेपाल के उत्तर की ओर पड़ने वाले तीन बड़े लंबी पदयात्रा मार्ग: जोमसोम, अन्नपूर्णा अभयारण्य और स्वयं अन्नपूर्णा हिमल का एक परिपथ. विविध भूभाग और इस क्षेत्र की संस्कृतियों की विविधता इस क्षेत्र को नेपाल का सबसे लोकप्रिय लंबी पदयात्रा क्षेत्र बनाती है। सनसनीखेज पहाड़ दृश्यों से आप निश्चित रूप से पुरस्कृत होते हैं, शिखर हैं धौलागिरी (8167मी), अन्नपूर्णा (8091मी), मनासलू (8156मी), लामजुंग हिमल (6983मी), माचापुछरे (6993मी), टुकुचे शिखर (6920मी), नीलगिरी (6940मी) और पारंपरिक संस्कृति का जटिल वर्गीकरण. अन्नपूर्णा और धौलागिरी के बीच से गुजरने वाली कालीगंडकी दुनिया की सबसे गहरी तंग घाटी है। सांस्कृतिक विविधताएं हिंदु समुदाय से बौद्ध, आर्यों से मंगोल, प्रसिद्ध गोरखा सैनिक, किले, गांव, घाटियां, सर्वाधिक वर्षा क्षेत्र से नेपाल के वर्षाहीन क्षेत्र-सभी एक दूसरे से चरम विरोधाभासों के साथ प्रत्येक दिन की पदयात्रा को एक भिन्न अनुभव बनाते हैं। हाल ही में मॉडर्न मैच्योरिटी (यूएसए) द्वारा आयोजित एक सर्वेक्षण के अनुसार, इस क्षेत्र को दुनिया का सबसे शानदार ट्रेल्स ट्रैकिंग क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। "झीलों का शहर" पोखरा आपकी अन्नपूर्णा क्षेत्र में लंबी पदयात्रा का या तो प्रारंभिक बिंदु होगा या समाप्ति बिंदु. महान विशाल हिमालय पर्वतमाला की गोद में लेटा हुआ, स्वाभाविक रूप से समृद्ध और सुरम्य पोखरा शहर3000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गंतव्यों में से एक, पोखरा काठमांडू घाटी के केवल 200 किमी पश्चिम में स्थित है। यहां दोनों वायु और सड़क, दोनों मार्गों से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

3. लैंगटैंग क्षेत्र - आश्चर्यजनक प्रकृति की खोज के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थल!

काठमांडू के उत्तर में तिब्बती सीमा पर महान हिमालयी श्रृंखला के बीच में स्थित, यह एक और सर्वाधिक असाधारण लंबी पदयात्रा स्थल है, जहां पहुंचना आसान है। इस क्षेत्र में भरपूर प्राकृतिक और सांस्कृतिक मिश्रण मिलता है जिनमें, अनेक वनस्पतियां, हिमालयी लाल पांडा सहित लुप्तप्राय जानवरों की प्रजातियों में पीका, कस्तूरी मृग, हिमालयी काला भालू, आम लंगूर आदि हैं। इस स्थल की, ब्रह्मांड के हर कोने से पर्यटकों के बीच आकर्षक अवकाश गंतव्य के रूप में पहचान की गई है। शेरपा और तमांग लोगों के बहुत से सुंदर गांवों के साथ, काठमांडू के उत्तर में स्थित हेलाम्बू, लंबी पदयात्रा के लिए विशाल क्षमता प्रदान करता है। आसन्न कई अन्य हिमनद झीलों के साथ, गोसाईकुंडा एक सर्वाधिक प्रसिद्ध हिमनद झील है।

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