जनकपुर

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राम-जानकी मंदिर जनकपुर

जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां सीता माता का बचपन बीता था। ये नगर प्राचीन काल में मिथिला की राजधानी माना जाता है।यहाँ पर प्रसिद्ध राजा जनक थे । जो सीता माता के पिता थे । कहा जाता है कि सीता का जन्म मिट्टी के घड़े से सीतामढ़ी में हुआ था । यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है ।[1]

वर्तमान स्थिति[संपादित करें]

जनकपुर संप्रति नेपाल के जनकपुर अञ्चल और धनुषा जिला मे स्थित है ।

भाषा-बोली[संपादित करें]

यहाँ की प्रमुख भाषा मैथिली, हिन्दी और नेपाली है ।

इतिहास[संपादित करें]

प्राचीन काल में यह विदेह राज्य की राजधानी थी । विदेह राज्य के संस्थापक मिथि के वंश में महाराज सिरध्वज जनक 22 वें जनक थे , और अयोध्यापति राजा दशरथ के समकालीन थे । दशरथि राम की अर्द्धांगनी सीता मिथिलेश जनक सिरध्वज की पुत्री थी । रामायण-महाभारतआदि प्राचीन ग्रन्थों में राजा जनक की राजधानी का नाम मिथिला बताया गया है, जनकपुर नहीं । बताया जाता है कि महाकवि विद्यापति के ग्रंथ "भू-परिक्रमा" में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि जनकपुर से सात कोस दक्षिण महाराज जनक का राजमहल था । [2] यथा : जनकपुरादक्षिणान्शे सप्तकोश-व्यतिक्रमें। महाग्रामे गहश्च जनकस्य वै।।

अर्थात वर्तमान जनकपुर से सात कोस दक्षिण पोखरौनी,बैंगरा आदि ग्राम पड़ते हैं, जिनको विदेहों की मिथिलापुरी होने का श्रेय जनता नहीं देती है । आजकल बाल्मीकीय रामायण के वर्णनानुसार अहिल्या स्थान से प्राक उत्तर दिशा में स्थित मिथिला नागरी का स्थापन्न ग्राम लोग जनकपुर ही मानते हैं । जनकपुर के चारों ओर विश्वामित्र, गौतम, वाल्मीकि और याज्ञवल्क्य के आश्रम थे, जो अब भी किसी न किसी रूप में विद्यमान हैं।

मिथिला नगरी के स्थान में जनकपुर की ख्याति कैसे बढ़ी और उसे राजा जनक की राजधानी लोग कैसे समझने लगे, इसके संवन्ध में एक अनुश्रुति प्रचलित है । कहा जाता है कि पवित्र जनक वंश का कराल जनक के समय में नैतिक अद्य:पतन हो गया । कौटिल्य ने प्रसंगवश अपनेअर्थशास्त्र[3] में लिखा है कि कराल जनक ने कामान्ध होकर ब्राह्मण कन्या का अभिगमन किया । इसी कारण वह वनधु-बंधवों के साथ मारा गया । अश्वघोष ने भी अपने ग्रंथ बुद्ध चरित्र में इसकी पुष्टि की है । कराल जनक के बढ़ के पश्चात जनक वंश में जो लोग बच गए , वे निकटवारती तराई के जंगलों में जा छुपे । जहां वे लोग छिपे थे, वह स्थान जनक के वंशजों के रहने के कारण जनकपुर कहलाने लगा । [4]

सीता स्वयंबर कथा[संपादित करें]

जनकपुर में स्वयंबर के दौरान भगवान राम के द्वारा शिव धनुष तोड़ने से संबंधित रवी वर्मा की पेंटिंग

रामायण कथा के अनुसार जनक राजाओं में सबसे प्रसिद्ध सीरध्वज जनक हुए. यह बहुत ही विद्वान एवं धार्मिक विचारों वाले थे. शिव के प्रति इनकी अगाध श्रद्धा थी. इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने इन्हें अपना धनुष प्रदान किया था. यह धनुष अत्यंत भारी था.जनक की पुत्री सीता धर्मपरायण थी वह नियमित रूप से पूजा स्थल की साफ-सफाई स्वयं करती थी. एक दिन की बात है जनक जी जब पूजा करने आए तो उन्होंने देखा कि शिव का धनुष एक हाथ में लिये हुए सीता पूजा स्थल की सफाई कर रही हैं. इस दृश्य को देखकर जनक जी आश्चर्य चकित रह गये कि इस अत्यंत भारी धनुष को एक सुकुमारी ने कैसे उठा लिया. इसी समय जनक जी ने तय कर लिया कि सीता का पति वही होगा जो शिव के द्वारा दिये गये इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा. भगवान राम ने इसी धनुष को तोड़कर सीता संग विवाह किया था.

प्रमुख पर्यटन स्थल[संपादित करें]

नौलखा मंदिर : जनकपुर में राम-जानकी के कई मंदिर हैं। इनमें सबसे भव्य मंदिर का निर्माण भारत के टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु कुमारी ने करवाया। पुत्र प्राप्ति की कामना से महारानी वृषभानु कुमारी ने अयोध्या में 'कनक भवन मंदिर' का निर्माण करवाया परंतु पुत्र प्राप्त न होने पर गुरु की आज्ञा से पुत्र प्राप्ति के लिए जनकपुरी में १८९६ ई. में जानकी मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर निर्माण प्रारंभ के १ वर्ष के अंदर ही वृषभानु कुमारी को पुत्र प्राप्त हुआ। जानकी मंदिर के निर्माण हेतु नौ लाख रुपए का संकल्प किया गया था। फलस्वरूप उसे 'नौलखा मंदिर' भी कहते हैं। परंतु इसके निर्माण में १८ लाख रुपया खर्च हुआ। जानकी मंदिर के निर्माण काल में ही वृषभानु कुमारी के निधनोपरांत उनकी बहन नरेंद्र कुमारी ने मंदिर का निर्माण कार्य पूरा करवाया। बाद में वृषभानुकुमारी के पति ने नरेंद्र कुमारी से विवाह कर लिया। जानकी मंदिर का निर्माण १२ वर्षों में हुआ लेकिन इसमें मूर्ति स्थापना १८१४ में ही कर दी गई और पूजा प्रारंभ हो गई। जानकी मंदिर को दान में बहुत-सी भूमि दी गई है जो इसकी आमदनी का प्रमुख स्रोत है। जानकी मंदिर परिसर के भीतर प्रमुख मंदिर के पीछे जानकी मंदिर उत्तर की ओर 'अखंड कीर्तन भवन' है जिसमें १९६१ ई. से लगातार सीताराम नाम का कीर्तन हो रहा है। जानकी मंदिर के बाहरी परिसर में लक्ष्णण मंदिर है जिसका निर्माण जानकी मंदिर के निर्माण से पहले बताया जाता है। परिसर के भीतर ही राम जानकी विवाह मंडप है। मंडप के खंभों और दूसरी जगहों को मिलाकर कुल १०८ प्रतिमाएँ हैं।

विवाह मंडप(धनुषा) : इस मंडप में विवाह पंचमी के दिन पूरी रीति-रिवाज से राम-जानकी का विवाह किया जाता है। जनकपुरी से १४ किलोमीटर 'उत्तर धनुषा' नामक स्थान है। बताया जाता है कि रामचंद्र जी ने इसी जगह पर धनुष तोड़ा था। पत्थर के टुकड़े को अवशेष कहा जाता है। पूरे वर्षभर ख़ासकर 'विवाह पंचमी' के अवसर पर तीर्थयात्रियों का तांता लगा रहता है। नेपाल के मूल निवासियों के साथ ही अपने देश के बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान तथा महाराष्ट्र राज्य के अनगिनत श्रद्धालु नज़र आते हैं। जनकपुर में कई अन्य मंदिर और तालाब हैं। प्रत्येक तालाब के साथ अलग-अलग कहानियाँ हैं। 'विहार कुंड' नाम के तालाब के पास ३०-४० मंदिर हैं। यहाँ एक संस्कृत विद्यालय तथा विश्वविद्यालय भी है। विद्यालय में छात्रों को रहने तथा भोजन की निःशुल्क व्यवस्था है। यह विद्यालय 'ज्ञानकूप' के नाम से जाना जाता है।

यातायात और संचार सुविधाएं[संपादित करें]

नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 किलोमीटर दक्षिण पूरब में बसा है। यहाँ नेपाल का राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है । बिहार के दरभंगा, मधुबनी एवं सीतामढ़ी जिला से इस स्थान पर सड़क मार्ग से पहुंचना आसान है। बिहार की राजधानी पटना से इसका सीतामढ़ी होते हुये सीधा सड़क संपर्क है । पटना से इसकी दूरी 140 की मी है ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. [मिथिला का इतिहास,लेखक: डॉ राम प्रकाश शर्मा, प्रकाशक: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा, पृष्ट संख्या : 481]
  2. [भू परिक्रमा, लेखक : विद्यापति, पृष्ठ संख्या : 44]
  3. [अर्थशास्त्र, लेखक : कौटिल्य,अध्याय : 6, प्रकरण : 3]
  4. [आर्यावर्त, हिन्दी दैनिक, पटना संस्करण,रविवार,25.8.68, पृष्ठ संख्या : 9]]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]