किरात

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किरात रूप में अर्जुन शिवजी से धनुर्विद्या सीखते हुए - राजा रवि वर्मा (१८४८-१९०६) द्वारा बनाया चित्र

किरात, KAURAV प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में हिमालय के कुछ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत में बसने वाली कुछ जातियों का नाम था। यजुर्वेद (शुक्ल ३०.१६; कृष ३.४, १२, १) में और अथर्ववेद (१०.४,१४) में इनका सबसे प्राचीन ज़िक्र मिलता है। संभव है कि यह मंगोल या मंगोल-प्रभावित जन-समुदायों के लिए प्राचीन शब्द रहा हो।[1][2]

नाम का स्रोत[संपादित करें]

यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि "किरात" नाम कहा से उत्पन्न हुआ। संभव है कि यह दो अंशों को जोड़कर बना हो - किर (यानि 'सिंह') और ति (यानि 'लोग'), अर्थात 'सिंह की फ़ितरत वाले लोग'।[3] यह भी संभव है कि यह पूर्वी नेपाल की "किरांती" नामक तिब्बती जाती के नाम का एक और रूप हो।

वर्णन[संपादित करें]

प्राचीन ग्रंथों में इन्हें "सुनहरे" या "पीले" रंग का बुलाया गया है। इनका ज़िक्र अक्सर निषाद और पुलिंद जातियों के साथ किया जाता था, लेकिन निषादों का रंग सांवला या काला बताया गया है। "योग वशिष्ठ" ग्रन्थ में श्री रामचंद्र जंगल में किरातों द्वारा फैलाए गए जाल के बारे में बात कहते हैं, जिस से यह संकेत मिलता है कि प्राचीन युग में शायद किरातों को एक शिकार करने वाले समुदाय के रूप में देखा जाता हो।

ऐतिहासिक सूत्रों से कुछ सबूत मिलते हैं कि किरात शिव के उपासक थे।[4] महाभारत में वर्णन है कि शिवजी की किरातों के कुल-देवता होने की स्थित को देखते हुए अर्जुन ने कुछ समय के लिए किरात वेशभूषा और नाम अपना लिए थे ताकि वह शिवजी से तीरंदाज़ी और एनी युद्ध-कलाएँ सीख सके।[5]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Radhakumud Mukharji (2009), Hindu Shabhyata, Rajkamal Prakashan Pvt Ltd, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788126705030, http://books.google.com/books?id=vhUZrj975BAC, "... किरात (मंगोल) : द्रविड़ भाषाओं से भिन्न यह भाषाओं में किरात या ..." 
  2. Shiva Prasad Dabral, Uttarākhaṇḍ kā itihās, Volume 2, Vīr-Gāthā-Prakāshan, http://books.google.com/books?id=o0lXAAAAMAAJ, "... प्राचीन साहित्य में किरात-संस्कृति, किरात-भूमि ..." 
  3. Tanka Bahadur Subba, Politics of culture: a study of three Kirata communities in the eastern Himalayas, Orient Blackswan, 1999, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788125016939, http://books.google.com/books?id=8wPq9ay0CF8C, "... a Kirata scholar, Narad Muni Thulung ... To him, it is derived from two words: Kira meaning 'lion', and ti meaning 'people', or 'people with lion's nature' ... " 
  4. Dinesh Prasad Saklani, Ancient communities of the Himalaya, Indus Publishing, 1998, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788173870903, http://books.google.com/books?id=tK5y4iPArKQC, "... Shiva, generally considered a non-Aryan deity, secured a prominent place among the Kiratas. It can be roughly asserted that Shiva- worship might have begun among the Kiratas in the mountainous regions of the Himalayas in pre-Vedic times, before the advent of the Aryans ..." 
  5. Asiatic Society of Bengal, Proceedings of the Asiatic Society of Bengal, Asiatic Society, 1875, http://books.google.com/books?id=zhLgAAAAMAAJ, "... The great hero of the Mahabharata, Arjuna, adopted the name, nationality, and guise of a Kirata for a certain period, to learn archery, and the use - of other arms from S'iva, who was considered as the deity of the Kiratas ..."