चना

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चना दाल
Chickpea
बाएं: बंगाल किस्म; दाएं: यूरोपियाइ किस्म
बाएं: बंगाल किस्म; दाएं: यूरोपियाइ किस्म
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
विभाग: मैग्नोलियोफाइटा
वर्ग: मैग्नोलियोप्सीडा
गण: Fabales
कुल: Fabaceae
उपकुल: Faboideae
प्रजाति: Cicer
जाति: C. arietinum
द्विपद नाम
Cicer arietinum
L.

चना और चने की दाल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य और सौंदर्य में लाभकारी होती है, बल्कि अनेक रोगों की चिकित्सा करने में भी सहायक होती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, केल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। रक्ताल्पता, कब्ज, डायबिटिज और पीलिया जैसे रोगों में चने का प्रयोग लाभकारी होता है। बालों और त्वचा की सौंदर्य वृद्धि के लिए चने के आटे का प्रयोग हितकारी होता है। चना एक प्रमुख फसल है |

काबुली चना[संपादित करें]

चित्र:Kabuli chana.jpg
काबुली चना

चने की ही एक किस्म को काबुली चना या प्रचलित भाषा में छोले भी कहा जाता है। ये हल्के बादामी रंग के काले चने से अपेक्षाकृत बड़े होते हैं। ये अफ्गानिस्तान, [[दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ़्रीका और चिली में पाए जाते रहे हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में अट्ठारहवीं सदी से लाए गए हैं, व प्रयोग हो रहे हैं।[1]

चना के उत्पादन के लिए भौगोलिक कारक[संपादित करें]

फूल और फल सहित चने का पौधा
A - चने का तना, शाखाएँ एवं पत्तियाँ;
B - चने की फली (तने के साथ लगी हुई);
C - चने का बीज या दाना
  • उत्पादक कटिबन्ध -
  • तापमान -
  • वर्षा -
  • मिट्टी -

चना के उत्पादन का विश्व वितरण[संपादित करें]

यह भी देखें[संपादित करें]

दाल[संपादित करें]

चित्र:Grain chana dal.jpg
चने की दाल व काला चना साबुत

चने को दल कर दोनो पत्रक अलग अलग होने पर चने की दाल मिलती है।

संदर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी सूत्र[संपादित करें]