म्यान्मार

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Myanmar long form.png
प्यी-डौँग-जू म्यान-मा नैंग-न्गान-डॉ

म्यान्मार संघ
ध्वज कुल चिह्न
राष्ट्रवाक्य: -
राष्ट्रगान: काबा मा क्येई
राजधानी नाएप्यीडॉ
19°45′N 96°12′E / 19.75°N 96.2°E / 19.75; 96.2
सबसे बड़ा नगर यांगून
राजभाषा(एँ) बर्मी
वासीनाम बर्मीस
सरकार सैनिक शासन
 -  राज्य शांति व विकास पारिषद का अध्यक्ष थान श्वे
 -  प्रधानमंत्री थीन सीन
स्थापना
 -  संयुक्त राजशाही से स्वतंत्रता ४ जनवरी १९४८ 
क्षेत्रफल
 -  कुल ६,७६,५७८ वर्ग किलोमीटर (४०वाँ)
२,६१,२२७ वर्ग मील
 -  जल (%) ३.०६
जनसंख्या
 -  जुलाई २००५ प्राक्कलन ५०,५१९,०००² (२४वॉ)
 -  जुलाई २००९ (अनुमान) जनगणना ४,८१,३७,७४१
सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी) २००५ प्राक्कलन
 -  कुल $९३.७७ बिलियन (५९वाँ)
 -  प्रति व्यक्ति $१,६९१ (१५०वाँ)
मानव विकास सूचकांक (२०१३) Straight Line Steady.svg ०.५२४[1]
निम्न · 150वाँ
मुद्रा क्याट (K) (mmK)
समय मण्डल MMT (यू॰टी॰सी॰+६:३०)
 -  ग्रीष्मकालीन (दि॰ब॰स॰) not observed (यू॰टी॰सी॰+६)
दूरभाष कूट ९५ - उपकूट
इंटरनेट टीएलडी .बीडी
कुछ सरकारें यांगून को देश की राजधानी के रूप में मान्यता देती हैं।
इस देश के अनुमान में एड्स से मरने वाले लोगों की संख्या को भी ध्यान में रखा गया है, जिससे जीवन प्रत्याशा में कमी, बाल मृत्यु दर में वृद्धि, जनसंख्या वृद्धिदर में कमी और आबादी की आयु और लिंग में परिवर्तन के वितरण में परिवर्तन नजर आता है।

ब्रह्मदेश एशिया का एक देश है। इसका आधुनिक अंग्रेजी नाम म्यांमार है। इसका पुराना अंग्रेज़ी नाम बर्मा था जो यहाँ के सर्वाधिक मात्रा में आबाद नस्ल बर्मी के नाम पर रखा गया था। इसके उत्तर में चीन, पश्चिम में भारत, बांग्लादेश एवंम् हिन्द महासागर तथा दक्षिण एवंम पूर्व की दिशा में इंडोनेशिया देश स्थित हैं। यह भारत एवम चीन के बीच एक रोधक राज्य का भी काम करता है। इसकी राजधानी नाएप्यीडॉ और सबसे बड़ा शहर देश की पूर्व राजधानी यांगून है, जिसका पूर्व नाम रंगून था।

नामकरण[संपादित करें]

बर्मी भाषा में, ब्रह्मदेश को म्यनमाह (ြမန်မာ) या फ़िर बामा (ဗမာ) नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश राज के बाद इस देश को अंग्रेजी में बर्मा कहा जाने लगा। सन् १९८९ मे देश की सैनिक सरकार ने पुराने अंग्रेजी नामों को बदल कर पारंपरिक बर्मी नाम कर दिया। इस तरह ब्रह्मदेश को म्यान्मार और पूर्व राजधानी और सबसे बड़े रंगून को यांगून नाम दिया गया।

भूगोल[संपादित करें]

ब्रह्मदेश दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश है, जिसका कुल क्षेत्रफ़ल ६,७८,५०० वर्ग किलोमीटर है। ब्रह्मदेश विश्व का चॉलीसवां सबसे बड़ा देश है। ब्रह्मदेश की उत्तर पश्चि्मी सीमाएं भारत के मिज़ोरम, नागालॅण्ड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और बांग्लादेश के चिटगॉव प्रांत को मिलती है। उत्तर मे देश की सबसे लंबी सीमा तिब्ब्त और चीन के उनान प्रांत के साथ है। ब्रह्मदेश के दक्षिण-पूर्व मे ब्रह्मदेश लाओस ओर थाईलैंड देश है। ब्रह्मदेश की तट रेखा (१,९३० किलोमिटर) देश के कुल सीमा का एक तिहाई है। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर देश के दक्षिण पश्चि्म और दक्षिण में क्रमशः पड़ते है। उत्तर में हेंगडुआन शान पर्वत चीन के साथ सीमा बनाते है।

ब्रह्मदेश में तीन पर्वत शृंखलाएं है जो कि हिमालय से शुरु होकर उत्तर से दक्षिण दिशा मे फ़ैली हुई है। इनका नाम है रखिने योमा, बागो योमा और शान पठार। यह श्रृंखला ब्रह्मदेश को तीन नदी तंत्र मे बांटती है। इनका नाम है ऎयारवाडी, सालवीन और सीतांगऎयारवाडी ब्रह्मदेश कि सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई २,१७० किलोमीटर है। मरतबन की खाड़ी मे गिरने से पहले यह नदी ब्रह्मदेश के सबसे उपजाऊ भुमि से हो कर गुजरती है। ब्रह्मदेश की अधिकतर जनसंख्या इसी नदी की घाटी मे निवास करती है जो कि रखिने योमा और शान पठार के बीच स्थित है।

देश का अधिकतम भाग कर्क रेखा और भूमध्य रेखा के बीच मे स्थित है। ब्रह्मदेश एशिया महाद्वीप के मानसून क्षेत्र मे स्थित है, सालाना यहॉ के तटिय क्षेत्रों में ५००० मिलीमीटर, डेल्टा भाग में लगभग २५०० मिलीमीटर और मध्य ब्रह्मदेश के शुष्क क्षेत्रों में १००० मिलीमीट वर्षा होती है।

धरातल[संपादित करें]

धरातल के आधार पर इसे चार भागों में बाँटा जा सकता है :

  • 1. उत्तरी तथा पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र - यह 6,000 से 20,000 फुट तक ऊँचा है। इसमें बंगाल की खाड़ी तथा आराकान योमा पर्वत के मध्य की आराकन पट्टी भी शामिल है।
  • 2. पूर्व का शान उच्च प्रदेश - यह लगभग 3,000 फुट तक ऊँचा एक पठार है जो दक्षिण में टेनैसरिम योमा तक फैला है।
  • 3. मध्य ब्रह्मदेश - यह देश का मुख्य कृषिप्रदेश है जो पूर्व में सैलवीन तथा पश्चिम में इरावदी तथा इसकी सहायक चिंद्विन आदि नदियों से घिरा है।
  • 4. दक्षिण में इरावदी तथा सितांग नदियों का डेल्टा प्रदेश - इरावदी तथा सितांग की निम्न घाटी काफी उपजाऊ है। डेल्टा प्रदेश लगभग 10,000 वर्ग मील में फैला है। यह विश्व के बड़े धान उत्पादक क्षेत्रों में से एक है तथा यहाँ कई प्रसिद्ध बंदरगाह भी स्थित हैं। इरावदी नदी मैदान के पश्चिमी भाग से बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

जलवायु[संपादित करें]

यहाँ की जलवायु उष्णकटिबंधीय है जिसमें तीन ऋतुएँ होती हैं : प्रथम, वर्षा ऋतु, जो मध्य मई से मध्य अक्टूबर तक रहती है; द्वितीय, ग्रीष्म ऋतु, जो अप्रैल-मई से अक्टूबर या नवंबर तक रहती है। तृतीय, जाड़े की ऋतु, जो दिसंबर से मार्च तक रहती है। मानसून के मौसम में ऊपरी ब्रह्मदेश में 200 इंच था दक्षिण में स्थित रंगून में 100 इंच तक वर्षा होती है। मध्य के शुष्क भाग में 25 से 35 इंच वर्षा होती है। निम्न ब्रह्मदेश का जाड़े का ताप 15.5 डिग्री सें. तथा गरमी का ताप 38 डिग्री सें. तक रहता है। मध्य ब्रह्मदेश में गरमी का ताप निम्न ब्रह्मदेश के जाड़े के ताप से अधिक तथा गरमी के ताप से कम हो जाता है।

राज्य और मण्डल[संपादित करें]

Burma en.png

ब्रह्मदेश को सात राज्य और सात मण्डल मे विभाजित किया गया है। जिस क्षेत्र मे बर्मी लोगों की जनसंख्या अधिक है उसे मण्डल कहा जाता है। राज्य वह मण्डल है, जो किसी विशेष जातीय अल्पसंख्यकों का घर हो।

मण्डल

राज्य

ब्रह्मदेश का इतिहास[संपादित करें]

  • जनवरी, 1948 - ब्रह्मदेश को आजादी मिली।
  • सितंबर, 1987 - मुद्रा के अवमूल्यन के चलते हजारों लोगों की बचत स्वाहा हो गई जिसके चलते सरकार विरोधी दंगे भड़के।
  • जुलाई, 1989 - सत्ताधारी जुंटा ने मार्शल ला की घोषणा की। नेशनल लीग फार डेमोक्रेसी की नेता आंग सान सू की घर में नजरबंद।
  • मई, 1990 - आम चुनावों में एनएलडी की भारी जीत। जुंटा ने चुनाव के नतीजों को मानने से इन्कार किया।
  • अक्टूबर, 1991 - सू की को नोबेल शांति पुरस्कार।
  • जुलाई, 1995 - सू की की नजरबंदी से रिहाई।
  • मई, 2003 - जुंटा व एनएलडी समर्थकों के बीच झड़प के बाद सू की को तथाकथित सुरक्षा के लिए फिर हिरासत में ले लिया गया।
  • सितंबर, 2007 - बौद्ध भिक्षुओं द्वारा सत्ता विरोधी प्रदर्शन।
  • अप्रैल, 2008 - सरकार ने प्रस्तावित संविधान छपवाया जिसके मुताबिक एक तिहाई संसदीय सीटें सेना के हिस्से जाएंगी। सू की के किसी भी प्रकार के पद ग्रहण करने पर प्रतिबंध
  • मई, 2009 - जान विलियम येता नामक अमेरिकी तैरकर सू की घर पहुंचा। सरकार ने सू की पर नजरबंदी के नियम तोड़ने का आरोप लगाया।

इकाई प्रणाली[संपादित करें]

ब्रह्मदेश विश्व के उन तीन देशो में शामिल है, जो अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली का उपयोग नहीं करते है।

यह भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]


  1. "2014 Human Development Report Summary". United Nations Development Programme. २०१४. pp. २१–२५. http://hdr.undp.org/sites/default/files/hdr14-summary-en.pdf. अभिगमन तिथि: २७ जुलाई २०१४.