दैनिक जागरण

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दैनिक जागरण
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प्रकार दैनिक समाचार पत्र
प्रारूप व्यापकपर्ण
वितरण ५,५७,४०,०००[1]

दैनिक जागरण उत्तर भारत का सर्वाधिक लोकप्रिय समाचारपत्र है। पिछले कई वर्षों से यह भारत में सर्वाधिक प्रसार वाला समाचार-पत्र बन गया है[तथ्य वांछित]। यह समाचारपत्र विश्व का सर्वाधिक पढ़ा जाने दैनिक है और वैन (विश्व समाचारपत्र संघ) ([1])द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई है। वर्ष २००८ में इस समाचारपत्र द्वारा यह प्रतिवेदित किया गया की यह भारत में समाचारों का सबसे विश्वसनीय स्रोत है - बीबीसी और रॉय्टर्स की नामावली के अनुसार।([2])

अनुक्रम

[संपादित करें] इतिहास

दैनिक जागरण एक हिन्दी दैनिक समाचारपत्र है। दैनिक जागरण, को १९४२ में आरंभ किया गया था, और इसका श्रेय आक्रामक स्वतंत्रता सेनानी श्री पूरनचन्द्र गुप्ता को जाता है। १९४२ का वर्ष भारतिइय स्वतंत्रता संग्राम का बहुत महत्वपूर्ण वर्ष था जब भारत में अंग्रेज़ों की दासता से मुक्त होने के लिए संघर्ष अपने चरम पर था। भारत छोड़ो आंदोलन इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। ऐसे निर्णायक मोड़ पर दैनिक जागरण को इसके संस्थापक स्वर्गीय पूरनचन्द्र गुप्ता द्वारा जारी किया गया 'एक ऐसे अवलोकन के साथ जो जन-समूह के मुक्त स्वर को प्रतिबिंबित कर सके'। प्रथम संस्करण १९४२ में झांसी में जारी किया गया और १९४७ में दैनिक जागरण मुख्यालय कानपुर ले जाया गया और इस प्रकार अपना दूसरा संस्करण जारी किया। स्वर्गीय पूरनचन्द्र गुप्ता कभी भी अपने समाचारपत्र साम्न्त बनने की अपनी इच्छाशक्ति से नहीं डगमगाए।

[संपादित करें] संस्करण

यह समाचारपत्र निम्नलिखित ३१ केन्द्रो से प्रकाशित होता है:

[संपादित करें] उपलब्धियाँ


[संपादित करें] अनुपूरक

दैनिक जागरण की सफलता का कारण इस पत्र का जनोन्मुखी होना है। किसी भी विषय पर संपूर्ण और निष्पक्ष जानकारी उपलब्ध कराने के पथ से यह कभी नहीं डिगा है। अपने प्रमुख दैनिक संस्करण के अतिरिक्त इसने वर्तमान के ज्वलंत मुद्दों और और अपने पाठकों के प्रश्नों को परितृप्त करने के लिए कई साप्ताहिक संस्करण भी आरंभ किए हैं। जैसे:

  • झंकार
  • यात्रा (रविवार)
  • संगिनी (शनिवार)
  • जोश (बुद्धवार)
  • नई राहें

यह पत्र निश्चित रूप से जनोन्‍मुखी है किन्‍तु केवल विज्ञापन के लिए. यह अपने कर्मचारियों को बहुत कम वेतन देने के लिए भी जाना जाता है. बनारस एडिशन में तो दो-तीन सौ रुपये पर प्रतिनिधि रखे गए हैं. इस अखबार को तुलसी सिंह राजपूत ने चुनावों के दौरान एक तरह से खरीद लिया था. पेड न्‍यूज के लिए भी यह अखबार जाना जाता है.

[संपादित करें] भगिनी उद्यम


[संपादित करें] संदर्भ

  1. आइ॰आर॰एस सर्वेक्षण

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

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