मुजफ्फरपुर
| मुजफ्फरपुर | |||||||||
| — नगर — | |||||||||
|
|
|||||||||
| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||||||
| देश | |||||||||
| राज्य | बिहार | ||||||||
| ज़िला | मुजफ्फरपुर जिला | ||||||||
| महापौर | श्रीमति वर्षा सिंह | ||||||||
| सांसद | जय नारायण निषाद एवं जार्ज फर्नांडिस | ||||||||
| जनसंख्या • घनत्व |
३७४३८३६ (२००१ के अनुसार [update]) • ९३१ |
||||||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
३१२२.६ कि.मी² • ६० मीटर |
||||||||
|
विभिन्न कोड
|
|||||||||
| आधिकारिक जालस्थल: muzaffarpur.nic.in | |||||||||
मुजफ्फरपुर बिहार प्रान्त के सबसे बड़े शहरों में से एक है। तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत यह एक जिला तथा मुख्यालय भी है। अपने सूती वस्त्र उद्योग तथा आम और लीची जैसे फलों के उम्दा उत्पादन के लिये यह जिला पूरे विश्व में जाना जाता है। उत्तर में पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी या सीतामढी, दक्षिण में वैशाली और सारण, पूर्व में समस्तीपुर और दरभंगा तथा पश्चिम में गोपालगंज से मुजफ्फरपुर जिला घिरा है। बज्जिका यहाँ की बोली और हिन्दी तथा उर्दू यहाँ की मुख्य भाषाएँ हैं।
अनुक्रम |
[संपादित करें] इतिहास
तिरहुत कहलाने वाले इस क्षेत्र का उल्लेख रामायण जैसे ग्रंथों में मिलता है परंतु इसका लिखित इतिहास वैशाली के उदभव के समय से उपलब्ध है। मिथिला के राजा जनक के समय तिरहुत प्रदेश मिथिला का अंग था। बाद में राजनैतिक शक्ति विदेह से वैशाली की ओर हस्तांतरित हुआ। तीसरी सदी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा विवरणों से यह पता चलता है कि यह क्षेत्र काफी समय तक महाराजा हर्षवर्धन के शासन में रहा। उनकी मृत्यु के बाद स्थानीय क्षत्रपों का कुछ समय शासन रहा तथा आठवीं सदी के बाद यहाँ बंगाल के पाल वंश के शासकों का शासन शुरु हुआ जो 1019 तक जारी रहा। तिरहुत पर लगभग 11 वीं सदी मे चेदि वंश का भी कुछ समय शासन रहा। सन 1211 से 1226 बीच गैसुद्दीन एवाज़ तिरहुत का पहला मुसलमान शासक बना। चम्पारण के सिमराँव वंश के शासक हरसिंह देव के समय 1323 ईस्वी में तुग़लक वंश के शासक गयासुद्दीन तुग़लक ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया लेकिन उसने सत्ता मिथिला के शासक कामेश्वर ठाकुर को सौंप दी। चौदहवीं सदी के अंत में तिरहुत समेत पूरे उत्तरी बिहार का नियंत्रण जौनपुर के राजाओं के हाथ में चला गया जो तबतक जारी रहा जबतक दिल्ली सल्तनत के सिकन्दर लोदी ने जौनपुर के शासकों को हराकर अपना शासन स्थापित नहीं किया। इसके बाद विभिन्न मुग़ल शासकों और बंगाल के नवाबों के प्रतिनिधि इस क्षेत्र का शासन चलाते रहे। पठान सरदार दाऊद खान को हराने के बाद मुगलों ने नए बिहार प्रांत का गठन किया जिसमें तिरहुत को शामिल कर लिया गया।
1764 में बक्सर की लडाई के बाद यह क्षेत्र सीधे तौर पर अंग्रेजी हुकूमत के अधीन हो गया। सन 1875 में प्रशासनिक सुविधा के लिये तिरहुत का गठन कर मुजफ्फरपुर जिला बनाया गया। मुजफ्फरपुर ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अत्यंत महत्वपूरण भूमिका निभाई है। महात्मा गाँधी की दो यात्राओं ने इस क्षेत्र के लोगों में स्वाधीनता के चाह की नयी जान फूँकी थी। खुदीराम बोस तथा जुब्बा साहनी जैसे अनेक क्रांतिकारियों की यह कर्मभूमि रही है। 1930 के नमक आन्दोलन से लेकर 1942 के भारत छोडो आन्दोलन के समय तक यहाँ के क्रांतिकारियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे।
मुजफ्फरपुर का वर्तमान नाम ब्रिटिस काल के राजस्व अधिकारी मुजफ्फर खान के नाम पर पड़ा है। 1972 तक मुजफ्फरपुर जिले में शिवहर, सीतामढी तथा वैशाली जिला शामिल था। मुजफ्फरपुर को इस्लामी और हिन्दू सभ्यताओं की मिलन स्थली के रूप में भी देखा जाता रहा है। दोनों सभ्यताओं के रंग यहाँ गहरे मिले हुये हैं और यही इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।
[संपादित करें] भूगोल
[संपादित करें] राजनीतिक विभाजन
- अनुमंडलः पूर्वी अनुमंडल तथा पश्चिमी अनुमंडल
- प्रखंडः १६ औराई, बोचहाँ, गायघाट, कटरा, मीनापुर, मुरौल, मुसहरी, सकरा, काँटी, कुढनी, मोतीपुर, पारो, साहेबगंज, सरैया, बन्दरा, मरवां
- पंचायतों की संख्या: ३८७
- गाँवों की संख्या: १८११
[संपादित करें] मशहूर हस्तियाँ
- साहित्यकारः बाबू देवकी नंदन खत्री, दिनकर, रामबृक्ष बेनीपुरी, जानकी वल्लभ शास्त्री, अनामिका
- ल॑खक राय प्रभाकर प्रसाद (जन्म गान्व भरथआ, बाद म॑ पटना म॑ बस॑)
- स्वतंत्रता सेनानी: खुदीराम बोस, जुब्बा साहनी
- राजनेता: चंदेश्वर प्रसाद नारायण सिंह- नेपाल तथा जापान के राजदूत, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे
रामेश्वर प्रसाद सिन्हा- प्रसिद्ध राजनीति़ज्ञ तथा संविधान सभा के सदस्य, महेश प्रसाद सिन्हा, राम दयालु सिंह, जार्ज फर्नान्डिस तथा जयनारायण निषाद- राज्य सभा तथा लोकसभा के सदस्य
[संपादित करें] शिक्षण संस्थान
- बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय
- लंगट सिंह महाविद्यालय
- मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी
- एम डी डी एम कालेज
- बी बी कालेजिएट
- रामदयालु महाविद्यालय
- साधु शरण सिंह इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ एजुकेशन
[संपादित करें] दर्शनीय स्थल
- बसोकुंड: जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म वैशाली के निकट बसोकुंड में लिच्छवी कुल में हुआ था। यह स्थान जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है। यहाँ अहिंसा एवं प्राकृत शिक्षा संस्थान भी है।
- जुब्बा साहनी पार्क: भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान जुब्बा साहनी ने १६ अगस्त १९४२ को मीनापुर थाने के इंचार्ज लियो वालर को आग में जिंदा झोंक दिया था। बाद में पकड़े जाने पर उन्हें ११ मार्च १९४४ को फांसी दे दी गयी। [1] जिले के इस महान स्वतंत्रता सेनानी की याद में बनाया गया पार्क दर्शनीय है।
- बाबा गरीबनाथ मंदिर: मुजफ्फरपुर के इस शिव मंदिर को देवघर के समान आदर प्राप्त है। सावन के महीने में यहाँ शिवलिंग का जलाभिषेक करने वालों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
- देवी मंदिर:
- कोठिया मजार (कांटी)
- शिरूकहीं शरीफ(कांटी):
- शहीद खुदीराम स्मारक:
- मज़ार हज़रत दाता कम्मल शाह
- मज़ार हज़रत दाता मुज़फ़्फ़रशाह इन्ही के नाम से जिला का नाम है
[संपादित करें] आवागमन
- हवाई मार्ग
यहाँ का सबसे नजदीकी सामान्य हवाई अड्डा ८० किलोमीटर दूर पटना में स्थित है। एक अन्य हवाई अड्डा दरभंगा में स्थित है जो सैनिक उद्देश्यों के लिए बना है।
- रेल मार्ग
मुजफ्फरपुर भारतीय रेल के पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह शहर रेलमार्ग से भारत के महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से गोरखपुर और हाजीपुर या मोतिहारी होते हुए मुजफ्फरपुर पहुंचा जा सकता है। मुजफ्फरपुर उत्तर-पूर्व भारतीय राज्यों से भी ट्रेन माध्यम से जुड़ा हुआ है।
- सड़क मार्ग
मुजफ्फरपुर बिहार के अन्य शहरों से सड़क के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हाजीपुर से प्रारंभ होकर सोनबरसा (सीतामढी)जानेवाली राष्ट्रीय राजमार्ग ७७ मुजफ्फरपुर होकर जाती है। लखनऊ से बरौनी को जोडनेवाली राष्ट्रीय राजमार्ग २८ मुजफ्फरपुर से गुजरती है। इसके अलावे राष्ट्रीय राजमार्ग ५७ तथा १०२ एवं राजकीय राजमार्ग ४६ तथा ४८ भी यहाँ से गुजरती है। राजधानी पटना से मुजफ्फरपुर (78 कि.मी.) के लिए हाजीपुर होकर नियमित बस सेवाएं हैं। पड़ोसी जिलों के लिए भी मुजफ्फरपुर से अच्छी बस सेवा उपलब्ध है।
- जलमार्ग
जिले के पश्चिमी सीमा से गुजरनेवाली गंडक नदी नौका गम्य है लेकिन मानसून के दिनों में यह परिवहन योग्य नहीं रहती।
[संपादित करें] यह भी देखें
[संपादित करें] संदर्भ सूची
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
|
|||||||||||||||||||||||||||||