औली
| औली | |
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
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| राज्य | उत्तराखंड |
| जिला | चमोली |
औली उत्तराखण्ड का एक भाग है। यह 5-7 किमी. में फैला छोटा-सा स्की रिसोर्ट है। इस रिसोर्ट को 9,500-10,500 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। यहां बर्फ से ढकी चोटियां बहुत ही सुन्दर दिखाई देती हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 23,000 फीट है। यहां पर देवदार के वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं। इनकी महक यहां की ठंडी और ताजी हवाओं में महसूस की जा सकती है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] प्राकृतिक छटा
औली में प्रकृति ने अपने सौन्दर्य को खुल कर बिखेरा है। बर्फ से ढकी चोटियों और ढलानों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। यहां पर कपास जैसी मुलायम बर्फ पड़ती है और पर्यटक खासकर बच्चे इस बर्फ में खूब खेलते हैं। स्थानीय लोग जोशीमठ और औली के बीच केबल कार स्थापित करना चाहते हैं। जिससे आने-जाने में सुविधा हो और समय की भी बचत हो। इस केबल कार को बलतु और देवदार के जंगलो के ऊपर से बनाया जाएगा। यात्रा करते समय आपको गहरी ढ़लानों और ऊंची चढाई चढ़नी पड़तीं है। यहां पर सबसे गहरी ढलान 1,640 फुट पर और सबसे ऊंची चढा़ई 2,620 फुट पर है। पैदल यात्रा के अलावा यहां पर चेयर लिफ्ट का विकल्प भी है।
[संपादित करें] आकर्षण
जिंदादिल लोगों के लिए औली बहुत ही आदर्श स्थान है। यहां पर बर्फ गाडी़ और स्लेज आदि की व्यवस्था नहीं है। यहां पर केवल स्किंग और केवल स्किंग की जा सकती है। इसके अलावा यहां पर अनेक सुन्दर दृश्यों का आनंद भी लिया जा सकता है। नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यहां से 41 किमी. दूर है। इसके अलावा बर्फ गिरना और रात में खुले आकाश को देखना मन को प्रसन्न कर देता है। शहर की भागती-दौड़ती जिंदगी से दूर औली एक बहुत ही बेहतरीन पर्यटक स्थल है।
[संपादित करें] स्कीइंग प्रशिक्षण
यहां पर स्की करना सिखाया जाता है। गढ़वाल मण्डल विकास निगम ने यहां स्की सिखाने की व्यवस्था की है। मण्डल द्वारा 7 दिन के लिए नॉन-सर्टिफिकेट और 14 दिन के लिए सर्टिफिकेट ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग हर वर्ष जनवरी-मार्च में दी जाती है। मण्डल के अलावा निजी संस्थान भी ट्रेनिंग देते हैं। यह पर्यटक के ऊपर निर्भर करता है कि वह कौन-सा विकल्प चुनता है। स्की सीखते समय सामान और ट्रेनिंग के लिए 500 रू. देने पडते हैं। इस फीस में पर्यटको के लिए रहने, खाने, स्की सीखने के लिए आवश्यक सामान आदि आवश्यक सुविधाएं दी जाती हैं।
इसके अलावा यहां पर कई डीलक्स रिसोर्ट भी हैं। यहां पर भी ठहरने का अच्छा इंतजाम है। पर्यटक अपनी इच्छानुसार कहीं पर भी रूक सकते हैं। बच्चों के लिए भी औली बहुत ही आदर्श जगह है। यहां पर पडी बर्फ किसी खिलौने से कम नहीं है। इस बर्फ से बच्चे बर्फ के पुतले और महल बनाते हैं और बहुत खुश होते हैं।
- शुल्क
स्की करने के लिए व्यस्कों से 475 रू. और बच्चों से 250 रू. शुल्क लिया जाता है। स्की सीखाने के लिए 125-175 रू., दस्तानों के लिए 175 रू., और चश्मे के लिए 100 रू. शुल्क लिया जाता है। 7 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से 4,710 रू. और विदेशी पर्यटकों से 5,890 रू. शुल्क लिया जाता है। 14 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से 9,440 रू. और विदेशी पर्यटकों से 11,800 रू. शुल्क लिया जाता है।
[संपादित करें] जोशीमठ
जोशीमठ बहुत ही पवित्र स्थान है। यह माना जाता है कि महागुरू आदि शंकराचार्य ने यहीं पर ज्ञान प्राप्त किया था। यह मानना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि यहां पर बहुत ही विषम परिस्थितियां है। इसके अलावा यहां पर नरसिंह, गरूड मंदिर, आदि शंकराचार्य का मठ और अमर कल्प वृक्ष है। यह माना जाता है कि यह वृक्ष लगभग 2,500 वर्ष पुराना है। इसके अलावा तपोवन भी घुमा जा सकता है। यह जोशीमठ से 14 किमी. और औली से 32 किमी. दूर है। तपोवन पवित्र बद्रीनाथ यात्रा के रास्ते में पड़ता है। यहीं से बद्रीनाथ यात्रा की शुरूआत मानी जाती है। बद्रीनाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र चार धाम यात्रा में से एक मानी जाती है।
[संपादित करें] आसपास
दिल्ली से औली जाते समय रास्ते में रूद्रप्रयाग पडता है। यहां पर रात को रूका जा सकता है। रूद्रप्रयाग से औली पहुंचने के लिए साढे चार घंटे का समय लगता है। रूद्रप्रयाग में रात को ठहरने की अच्छी व्यवस्था है। जोशीनाथ रोड से केवल 3 किमी. दूर मोनल रिसोर्ट है। यह औली का सबसे अच्छा होटल है। इसमें बच्चों के खेलने के लिए मैदान और मचान बनें हुए हैं। इसके अलावा इसमें खाने के लिए एक रेस्तरां भी है।
इसके अलावा जी.एम.वी.एन. रूद्र कॉम्पलैक्स में भी रूका जा सकता है। यहां ठहरने और खाने की अच्छी व्यवस्था है। इसके अलावा यहां पर तीन कमरों में सोने की सामूहिक व्यवस्था भी है। यहां पर 20 बेड हैं और खाने के लिए रेस्तरां है।
[संपादित करें] घूमने के लिए तैयारियां
औली बहुत ही विषम परिस्थितियों वाला पर्यटक स्थल है। यहां घूमने के लिए पर्यटकों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि औली आने से पहले शारीरिक व्यायाम करें और रोज दौड लगाएं। औली में बहुत ठंड पडती है। यहां पर ठीक रहने और सर्दी से बचने के लिए उच्च गुणवत्ता के गर्म कपडे पहनना बहुत आवश्यक है। गर्म कपडों में कोट, जैकेट, दस्ताने, गर्म पैंट और जुराबें होनी बहुत आवश्यक है। इन सबके अलावा अच्छे जूते होना भी बहुत जरुरी है। घूमते समय सिर और कान पूरी और अच्छी तरह से ढ़के होने चाहिए। आंखो को बचाने के लिए चश्में का प्रयोग करना चाहिए। यह सामान जी.एम.वी.एन. के कार्यालय से किराए पर भी लिए जा सकते हैं। जैसे-जैसे आप पहाडों पर चढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे पराबैंगनी किरणों का प्रभाव बढता जाता है। यह किरणों आंखों के लिए बहुत हानिकारक होती है। इनसे बचाव बहुत जरूरी है। अत: यात्रा पर जाते समय विशेषकर बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले चश्मे का होना बहुत जरूरी है। वहां पर ठंड बहुत पडती है। अत्यअधिक ठंड के कारण त्वचा रूखी हो जाती है। त्वचा को रूखी होने से बचाने के लिए विशेषकर होंठो पर एस.पी.अफ बाम का प्रयोग करना चाहिए।
ठंड मे ज्यादा देर रहने से शरीर की नमी उड जाती है और निर्जलीकरण की समस्या आमतौर पर सामने आती है। इस समस्या से बचने के लिए खूब पानी पीना चाहिए और जूस का सेवन करना चाहिए। अपने साथ पानी की बोतल रखना लाभकारी है। शराब और कैफीन का प्रयोग न करें। बर्फ में हानिकारक कीटाणु होते हैं जो आपके स्वास्थ्य और शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अत: बर्फ को खाने का प्रयास न करें।
[संपादित करें] भ्रमण आवास
औली में रूकने के लिए क्ल्फि टॉप रिसोर्ट सबसे अच्छा स्थान है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल, कमेत, माना पर्वत, दूनागिरी, बैठातोली और नीलकंठ का बहुत ही सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। इसमें 46 कमरें हैं। यह स्की क्षेत्र की ढलान पर टावर न. 8 के नीचे स्थित है। यहां पर खाने-पीने की अच्छी सुविधा है। यह चारों तरफ से बर्फ से घिरा हुआ है। जोशीनाथ से जी.एम.वी.एन. तक केबल कार की अच्छी सुविधा है। अगर कार से यात्रा करनी हो तो कार को बहुत ही सावधानीपूर्वक चलाना चाहिए। इसके अलावा केबल कार भी अच्छा विकल्प है। स्की के शौकीन लोगों के लिए औली स्वर्ग है। जो पर्यटक स्की नहीं करना चाहते और जल्दी थक जाते हैं वह औली की सुन्दरता का आनंद ले सकते हैं। समय व्यतीत करने के लिए उन्हें अपने साथ कुछ रोचक किताबें लानी चाहिए।
यहां एक रिसोर्ट भी है जो स्किंग के अलावा रॉक क्लाइम्बिंग, फॉरस्ट कैम्पिंग और घोडे की सवारी आदि के लिए व्यवस्था करता है। इन सबके लिए ज्यादा पैसे चुकाने पडते है। इसके अलावा इसमें एक रेस्तरां और कैफे भी है। जो पर्यटक ज्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते औली में उनके लिए जी.एम.वी.एन. स्किंग और टूरिस्ट रिसोर्ट सबसे बेहतर विकल्प है। यह 9,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां ठहरने का सबसे बडा़ फायदा यह है कि यहां से बर्फ की सुन्दर चोटियों का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है। यह मुख्य सड़क मार्ग के बिल्कुल पास है। इस रिसोर्ट में लकडी की बनी 16 झोपडियां, सोने के लिए 3 सराय जिसमें 42 बेड हैं, स्की कराने की व्यवस्था, वातानुकूलित और गर्म पानी की सुविधा है। यहां भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस का स्की स्कूल है। पर्यटकों को इसमें प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसके अलावा यहां पर जंगलों में भी घूमा जा सकता है। इन जंगलों में खूबसूरत बलतु और कॉनीफर के वृक्ष पाए जाते हैं।
औली में जब बर्फ पडती है तो बहुत पर्यटक आते हैं। पर्यटकों की बढी संख्या के फलस्वरूप सभी होटल भर जाते हैं। इस स्थिति में पर्यटक जोशीमठ में रूक सकते हैं। जोशीमठ में कई अच्छे होटल है।
[संपादित करें] खाना पीना
औली नंदा देवी के बहुत पास है। यहां पर अस्थायी ढाबों और कूडा़ बिखेरने पर प्रतिबंध है। यहां पर मांसाहारी खाना केवल एक ही होटल मे मिलता है और वह होटल ऊंची चोटी पर हैं। यहां पर कोई शराब खाना भी नहीं है। जिन पर्यटकों को शराब पीने की आदत है उन्हें अपनी बोतल खुद लानी पडती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यह एक तीर्थस्थल भी है और ऐसी जगहों पर शराब का सेवन तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
[संपादित करें] जिला: चमोली
लोकेशन: यह नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के पास गढवाल के ऊपरी क्षेत्र में लगभग 9,500 से 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। दूरी: यह षिकेश से उत्तर पूर्व में 268 किमी. और दिल्ली से उत्तर पूर्व में 492 किमी. की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से सडक मार्ग द्वारा औली पहुंचने के लिए 15 घंटो का समय लगता है।
[संपादित करें] पर्यटन समय
औली जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम जनवरी-मार्च का है। इस समय यहां पर बर्फ पडती है। यह समय स्की करने के लिए बिल्कुल आदर्श है।
[संपादित करें] चित्र दीर्घा
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