मृदुला सिन्हा

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मृदुला सिन्हा
Mridula Sinha.jpg

गोवा की राज्यपाल
पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
26 अगस्त 2014
पूर्वा धिकारी ओम प्रकाश कोहली

जन्म 27 नवम्बर 1942 (1942-11-27) (आयु 77)
मुजफ्फरपुर, बिहार
जीवन संगी डॉ.राम कृपाल सिंह
निवास काबो राजभवन, डोना पाउला, गोवा[1]
धर्म हिंदू

हिन्दी साहित्य की जानी-पहचानी लेखिका श्रीमती मृदुला सिन्हा साहित्य के साथ सामाजिक और राजनैतिक जीवन में भी सक्रिय रहकर एक आंदोलनात्मक व रचनात्मक दृष्टि लिए तीनों क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करती रही हैं। उन्हीं के शब्दों में- ‘‘साहित्य, राजनीति और सामाजिक सरोकार एक ही व्यक्ति के जीवन में मिलता है। तीनों क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्ति का लक्ष्य समाज का उत्थान ही है। दरअसल राजनैतिक कार्यकर्ता सर्वप्रथम सामाजिक कार्यकर्ता होता है। वह साहित्यकार है तो और उत्तम।’’

संक्षिप्त जीवनी[संपादित करें]

मुजफ्फरपुर जिला (बिहार) के छपरा गांव में 27 नवंबर, 1942 को जन्मीं श्रीमती मृदुला सिन्हा ने अपनी प्रारंभिक छात्रावासीय शिक्षा बालिका विद्यापीठ, लखीसराय (बिहार) से प्राप्त की। उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर (द्वितीय श्रेणी) एवं शिक्षा में स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। विश्वविद्यालय की शिक्षा पूर्ण करने के बाद महिला काॅलेज, मोतिहारी (बिहार) में मनोविज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपना सार्वजनिक जीवन प्रारंभ किया। इसके कुछ समय बाद जनसंघ पार्टी के नेता माननीय नानाजी देशमुख के मार्गदर्शन में उन्होंने मुजफ्फरपुर में एक आदर्श विद्यालय भारतीय शिशु मंदिर की स्थापना की। संस्थापक प्रधानाचार्य के रूप में उन्होंने आठ वर्षों तक इस विद्यालय का संचालन किया।

अंग्रेजी भाषा के विद्वान एवं विश्वविद्यालय में व्याख्याता डाॅ0 रामकृपाल सिन्हा से उनका विवाह हुआ। डाॅ0 सिन्हा राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के पद को सुशोभित किया। विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक पद से सेवानिवृत्त डाॅ0 सिन्हा भारत के शासक दल भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय के प्रभारी रहे हैं।

साहित्यिक उपलब्धियाँ

विद्यार्थी जीवन से ही संवेदनशील मृदुला सिन्हा की साहित्यिक गतिविधियों तथा सृजनात्मक लेखन के प्रति रुचि विकसित हो गई। उन्होंने लघु कथाएं, कहानियां, उपन्यास, चिंतनपरक, संस्मरण और ललित निबंधों की रचना की। भारतीय समाज की बदलती हुई परिस्थितियों में आम आदमी, विशेषतया महिलाओं की सामाजिक, राजनैतिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याएं और संदर्भ उनके रचनात्मक लेखन के मुख्य सरोकार हैं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण अंचल की मिट्टी की सौंधी महक विद्यमान है। श्रीमती सिन्हा की गणना हिंदी की प्रथम कतार की लेखिकाओं में होती है।

लोकसाहित्य

अपने सृजनात्मक लेखन के द्वारा उन्होंने लोक जीवन, लोक कलाओं, लोक गीतों और लोक कथाओं को नई ऊर्जा और गति प्रदान की है। इनकी सार्थकता तथा प्रभावशीलता को प्रस्तावित करते हुए इन्हें निरंतर गतिशील बनाए रखने का आग्रह किया है। उनके ही शब्दों में - “मैं लोकगीतों, लोकोक्तियों और कहावतों में ही सोचती हूं। मानव मन, उसकी विशेषताओं, हास-परिहास, संस्कार और व्यथा समझने के लिए लोक साहित्य के पन्ने ही पलटती हूं।”

मिथकीय स्त्री पात्रों का औपन्यासिक वर्णन

महिलाओं के बीच कार्य करते हुए इन्होंने महिलाओं और विशेषकर युवतियों को उनका गौरवमय इतिहास स्मरण दिलाते हुए मिथकों से विशेष नारी पात्रों की कथाएं आत्मकथ्य शैली में लिखा है। सीता, सावित्री, मंदोदरी अब अहल्या और तारा की आत्मकथाएँ लिखी हैं। आत्मकथाओं के लोकप्रिय होने और कई भारतीय भाषाओं एवं आंग्लभाषा में अनुदित हुई।

प्रसारण

श्रीमती सिन्हा रेडियो, दूरदर्शन तथा निजी क्षेत्र के टेलीविजन चैनलों द्वारा राजनैतिक मुद्दों तथा महिलाओं और बच्चों पर आयोजित विचार-विमर्श में  1977 से ही नियमित रूप से भाग लेती रही हैं। समय-समय पर उनके लेख-निबंध तथा विचारपूर्ण साक्षात्कार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रमों के लिए बहुआयामी आलेख भी लिखे हैं। विभिन्न विधाओं में 64 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित (1978 से लेकर अब तक) हो चुकी हंै। विभिन्न विधाओं में 10 पुस्तकें प्रकाशानाधीन हैं।

चलचित्रों का निर्माण और प्रसारण

इनके द्वारा लिखी गई राजमाता विजयाराजे सिंधिया की आत्मकथा ‘‘राजपथ से लोकपथ पर’’ पर आधारित हिन्दी फिचर फिल्म ‘‘एक थी रानी ऐसी भी’’ का निर्माण किया गया है। इस फिल्म के गीत भी इन्हीं की रचना है। इन्होंने पटकथा भी लिखी है। ’राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम’ ने वृद्धों की समस्याओं पर आधारित उनकी एक कहानी पर फीचर फिल्म ’दत्तक’ का निर्माण किया है। श्रीमती सिन्हा ने केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड के दो आडियो सीडी- ’चेतना’ तथा ’पहचान’ के लिए गीत तथा आलेख लिखे हैं। उन्होंने तीन पीढ़ियों के एक छत के नीचे रहने का संदेश देने वाली बोर्ड की टेली फिल्म ’खेल खेल में’ की गीतमय पटकथा भी लिखी है। इनके उपन्यास ’ज्यों मेहँदी को रंग’ पर इसी नाम से बना धारावाहिक अनेकों बार दर्शाया गया है। इनका कहना है -‘‘संग चले जब तीन पीढ़ियाँ, चढ़े विकास की सभी सीढ़ियाँ।’’

स्वभाव और विषेष गुण

श्रीमती सिन्हा बचपन से ही संवेदनशील हैं। समाज के उपेक्षित एवं वंचित वर्गों के प्रति उनमें सहानुभूति ही नहीं, उनके लिए कुछ करने का जोश भी है। वे विभिन्न मंचों से इन वर्गों के हितों तथा परिवार से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं। वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्त्री और पुरुष की व्यावहारिक समानता की सशक्त पैरोकार हैं। इनके प्रमुख उपन्यास ‘घरवास’ और ‘ज्यों मेंहदी को रंग’ दोनों में नायिकाएँ ही प्रमुख हैं।

वे महिलाओं की समस्याओं को महिलाओं तक सीमित नहीं मान कर उन्हें पूरे समाज की समस्याओं के रूप में देखती और समझती हैं। इसलिए वे इन समस्याओं के समाधान के लिए पूरे समाज को पहल करने का आह्वान करती हैं। वे अर्द्धनारीश्वर में निहित परस्पर पूरकता की धारणा को समाज में स्त्री और पुरुष की समानता के प्रतीक के रूप में अपनाने की आग्रही हैं। श्रीमती सिन्हा स्त्री-पुरुष को एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी की बजाय पूरक के रूप में मानती हैं। वे नारी को पुरुष की तुलना में विकास के अधिक अवसर और अधिक सम्मान दिलाने की पक्षधर हैं। उनकी मान्यता है कि पारिवारिक और सामाजिक विकास में नारी की भूमिका पुरुष की तुलना में अधिक होने के कारण वह विशेष है। इसलिए वह बार-बार नारी को विशेष अवसर देकर, पुरुष से आगे ले जाने का आग्रह करती हैं।

इनके साहित्य के लिए इन्हें कई साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित किया गया हैं। बिहार विश्वविद्यालय ने वर्ष 2015 में इन्हें डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है।

राजनैतिक जीवन

यूँ तो 1964 में अपने पति द्वारा राजनैतिक जिम्मेदारी (जनसंघ पार्टी के जिलाा अध्यक्ष) लेने के उपरांत श्रीमती सिन्हा कार्यकर्ताओं के साथ स्नेह संपादन करने लगीं। भारतीय जनसंघ पार्टी की दो सक्रिय महिला सदस्याओं ने उन्हें पार्टी का सदस्य (4 आने शुल्क में ) भी बना दिया था। 1977 में मृदुला सिन्हा मुजफ्फरपुर जिले के संसदीय क्षेत्र की महिला संयोजिका बनीं। 1980 में भारतीय जनता पार्टी बनने के बाद नई दिल्ली के लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के चुनाव में महिला संयोजिका बनीं। उस पद पर आसीन होकर इनकी सक्रियता एवं बहुआयामी व्यक्तित्व ने नेताओं के मन में इनकी पहचान बनाई। इसलिए 1980 में महिला मोर्चा के गठन के बाद राजमाता विजया राजे सिंधिया को संयोजिका और इन्हें सहसंयोजिका बनाया। संगठन का रूप और ढंाचा बदलने पर वे महिला मोर्चा की प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी। तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष (महिला मोर्चा), एक बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भा.ज.पा. बनीं। तबसे लेकर आजतक इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। केन्द्रिय स्तर पर विभिन्न पदों पर कार्यरत रहीं।

श्रीमती सिन्हा ने विभिन्न राजनीतिक पदों पर आसीन होकर दल के अंदर और समाज में अपनी विशेष पहचान बनाईं हैं। श्रीमती सिन्हा गोवा की राज्यपाल के पद पर पाँच वर्ष 2 महीने तक आसीन रहीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उन्हें स्वच्छता अभियान का अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया। वे अपने संवैधानिक पद को गरिमापूर्वक निभाती हुई समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर जीवन के अनेकानेक कार्यों को प्रोत्साहित करती रही हैं। सामाजिक समस्याओं का रचनात्मक निदान ढूँढ़ना ये बोलकर और लिखकर भी करती हैं। लेकिन संवैधानिक पद पर बैठकर भी शिक्षा, स्वच्छता के विकास के साथ अन्यान्य अभिनव कार्यक्रम किए।

प्रकाशित कृतियाँ[संपादित करें]

कहानी संग्रह

1. साक्षात्कार - कहानी संग्रह, प्रभात प्रकाशन

2. जैसे उड़ि जहाज को पंक्षी - कहानी संग्रह, प्रभात प्रकाशन

3. स्पर्श की तासीर - कहानी संग्रह, किताब घर प्रकाशन

4. एक दीए की दीवाली - कहानी संग्रह, प्रभात प्रकाशन  

5. ढ़ाई बीघा जमीन - कहानी संग्रह, प्रभात प्रकाशन

6. मृदुला सिन्हा की लोकप्रिय कहानियाँ - कहानी संग्रह, प्रभात प्रकाशन

7. अपना जीवन - कहानी संग्रह, यश प्रकाशन

8. अंतिम इच्छा - कहानी संग्रह, यश प्रकाशन

उपन्यास

9. ज्यों मेंहदी को रंग - उपन्यास (1981 विकलांग वर्ष), प्रभात प्रकाशन   

10. नई देवयानी - उपन्यास, प्रभात प्रकाशन   

11. घरवास - उपन्यास, प्रभात प्रकाशन   

12. अतिशय - उपन्यास, प्रभात प्रकाशन   

13. सीता पुनि बोली - उपन्यास, प्रभात प्रकाशन  

14. विजयिनी - उपन्यास, सामयिक प्रकाशन

15. परितप्त लंकेश्वरी - उपन्यास, प्रभात प्रकाशन

16. अहल्या उवाच - उपन्यास, प्रभात प्रकाशन

लेखों का संग्रह

17. मानवी के नाते - लेखों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन   

18. क. ख. ग. - ललित निबंध संग्रह, किताब घर प्रकाशन

19. यायावरी आंखों से - लेखों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन

20. विकास का विश्वास - ‘‘पाँचवाँ स्तँभ’’ पत्रिका के संपादकीयों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन

21. स्वच्छता संस्कार - लेखों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन

22. स्वच्छ भारत (अंग्रेजी) - लेखों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन

23. पत्नीं मनोरमा देहि - लेखों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन

24. दाम्पत्य की धूप-छाँह - आत्मकथात्मक लेखों का संग्रह, प्रभात प्रकाशन

25. मात्र देह नहीं है औरत - लेखों का संग्रह, सामयिक प्रकाशन

26. नारी: न कटपुतली, न उड़नपरी - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन

27. औरत अविकसित पुरुष नहीं - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन

28. चिंता और चिंतन के इन्द्रधनुषीय रंग - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन?

29. एक साहित्यिक तीर्थ से लौटकर - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन

30. या नारी सर्व भूतेषू... - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन

31. सामाजिक सरोकार - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन

32. रिफ्लेक्शन - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन (अंग्रेजी)

33. जीवन पाथेय - लेखों का संग्रह, आर्यन पब्लिकेशन

34. पुराण के बच्चे - आत्मकथ्य शैली में पुराण के बच्चों की दस कथाएं (चरित्र चित्रण)

प्रकाशन विभाग, भारत सरकार

35. राजपथ से लोकपथ पर - आत्मकथा - संपादन, प्रभात प्रकाशन  

36. महिला विकास: अवलोकन और आकलन - प्रकाशन संस्थान

37. बिहार: इन्द्रधनुषीय लोकरंग - राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली

38. बिहार की लोक कथाएं - भाग 1, प्रकाशन विभाग, भारत सरकार

39. बिहार की लोक कथाएं - भाग 2, प्रकाशन विभाग, भारत सरकार

40. आईने के सामने - ललित निबंध संग्रह, प्रभात प्रकाशन  

41. देखन में छोटन लगै - लघुकथाओं का संग्रह, प्रभात प्रकाशन  

42. स्मृतियाँ जो संगिनी बन गईं - स्मरण आलेख संग्रह - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली

43. बिटिया है विशेष - पत्र संग्रह, सामयिक प्रकाशन

44. मुझे कुछ कहना है - कविता संग्रह, यश प्रकाशन

45. मेरे साक्षात्कार - साक्षात्कार संग्रह, किताबघर प्रकाशन

46. खेल-खेल में - बाल कहानी संग्रह, राजस्थान पत्रिका प्रकाशन

47. दादी माँ की पाती - बाल कहानी संग्रह - प्रकाशन विभाग, भारत सरकार

अन्य भाषाओं में अनुदित

48. गंध सुगंध (मराठी), अनुवाद (ज्यों मेहदी को रंग)

49. मेंहदी नो रंग (गुजराती), अनुवाद (ज्यों मेहदी को रंग)

50. साॅबस दैट ब्लूम (अंग्रेजी), अनुवाद (ज्यों मेहदी को रंग)

51. फ्लेमस् आॅफ डिजायर अनुवाद (नई देवयानी) अंग्रेजी

52. नाइदर पपेट नाॅर बटरफ्लाई - साउथ एशिया बुक प्रकाशन, अंग्रेजी

53. इन्डियन उमन न्यू इमेजेज़ एण्ड एनसिऐंट फाउन्डेशन - लेखों का संग्रह, यश प्रकाशन, अंग्रेजी

54. ए होम एट लास्ट - अनुवाद, (उपन्यास, घरवास), प्रभात प्रकाशन

55. एट दैट वैरी मोमेंट - अनुवाद, ( मृदुला सिन्हा की लोकप्रिय कहानियाँ), प्रभात प्रकाशन, अंग्रेजी

56. राॅयल लाइफ टू पब्लिक लाइफ - अनुवाद, (आत्मकथा - संपादन, राजपथ से लोकपथ पर), प्रभात प्रकाशन

57. इसी बहाने - लेखों का संग्रह, केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड

58. रिफ्लेक्शन - अनुवाद, लेखों का संग्रह, केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड

59. परितप्त लंकेश्वरी (मलयालम अनुवाद)

60. परितप्त लंकेश्वरी (तमिल अनुवाद)

61. परितप्त लंकेश्वरी (कन्नड़ अनुवाद)

62. परितप्त लंकेश्वरी (तेलगू अनुवाद)

63. बिटिया है विशेष - पत्र संग्रह (मराठी अनुवाद)

64. सीता पुनि बोली - उपन्यास (मलयालम अनुवाद)

65. ढ़ाई बीघा जमीन - कहानी संग्रह, (मलयालम अनुवाद), टी.वी.एस प्रकाशन, केरल

नोट- सभी उपन्यास कई भाषाओं में प्रकाशित किये गए हंै। अनुदित होने के क्रम में।

पुरस्कार व सम्मान[संपादित करें]

मृदुला जी को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से साहित्य भूषण सम्मान व दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार के अतिरिक्त अन्य भी[2] कई सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। प्रशासकीय पद और अनुभव:

ऽ 2014-2019: राज्यपाल, गोवा

ऽ 2004: सदस्या, राजभाषा समिति गृह मंत्रालय

    : सदस्या, हिन्दी सलाहकार समिति, इस्पात मंत्रालय

ऽ 1998-2004: अध्यक्ष, केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड, नई दिल्ली

ऽ 1996-1998: सदस्या, दिल्ली महिला आयोग, दिल्ली सरकार

ऽ 1998: सदस्या, रेलवे हिन्दी सलाहकार समिति, रेल मंत्रालय

राजनैतिक जिम्मेदारियाँ और अनुभव:

ऽ 1981-2014: सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी, भाजपा

ऽ 2012-2014: प्रभारी, राष्ट्रीय महिला मोर्चा, भाजपा

ऽ 2008-2010: प्रभारी, राष्ट्रीय महिला मोर्चा, भाजपा

ऽ 2006-2008: संयोजिका, एन.जी.ओ. प्रकोष्ठ, भाजपा

ऽ 1996-1998: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा

ऽ 1986-1996: अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला मोर्चा, भाजपा

ऽ 1980-1986: सहसंयोजिका, राष्ट्रीय महिला मोर्चा, भाजपा

ऽ 1980: चुनाव संयोजिका, नई दिल्ली संस्दीय क्षेत्र

ऽ 1977: चुनाव संयोजिका, मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र

ऽ 1975: समग्र क्रांति ओदोलन में सक्रिय भागीदारी

ऽ सदस्य, भाजपा अनुशासन समिति

सामाजिक जिम्मेदारियाँ:

ऽ अध्यक्ष, सूर्या संस्थान, नोएडा

ऽ अध्यक्ष, राजमाता विजया राजे सिंधिया स्मृति न्यास, दिल्ली

ऽ उपाध्यक्ष: अखिल भारतीय साहित्य परिष्द

ऽ संस्थापक और संपादिका: पाँचवाँ स्तंभ हिन्दी मासिक पत्रिका और द फिफ्थ पिलर अंग्रेजी त्रैमासिक पत्रिका

ऽ 500 से अधिक दूरदर्शन और आकाशवाणी के विभिन्न कार्यक्रमों में भगीदारी

साहित्यिक कृतियाँ:

ऽ विभिन्न विधाओं में 65 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित (1978 से लेकर अब तक)

ऽ उपन्यास: ज्यो मेहदी को रंग (विकालांगों की समस्या पर प्रथम उपन्यास, दूरदर्शन पर धारावाहिक का प्रसारण), घरवास, नई देवयानी, सीता पुनि बोली, अतिशय, विजयनी, आदि।

ऽ जीवनी: राजपथ से लोकपथ पर (श्रीमती राजमाता सिंधिया की जीवनी)

ऽ कहानी संग्रह: साक्षात्कार, एक दिए की दीवाली, स्पर्श की तासीर, अपना जीवन, आदि।

ऽ लेख संग्रह: आईने के सामने, मानवी के नाते, पुरान के बच्चे, बिहार की लोककथाएँ, मात्र देह नहीं है औरत, बिटिया है विशेष, नारी न कठपुतली  न उड़नपरी।

ऽ राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर स्तंभ लेखन

मेरे साहित्य पर आधारित लघु फिल्म तथा फीचर फिल्म:

ऽ दत्तक (एन.एफ.दि.सी)

ऽ उधार का सूरज (दूरदर्शन)

ऽ ज्यों मेंहदी को रंग (धारावाहिक, दूरदर्शन)

ऽ खेल खेल में (टेली फिल्म, दूरदर्शन)

ऽ एक थी रानी ऐसी भी (फिल्म)

साहित्यिक पुरस्कार एवं सम्मान:

ऽ साहित्य भूषण सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान

ऽ विश्व हिन्दी समिति, न्यूयाॅर्क, द्वारा सम्मानित (1999)

ऽ राष्ट्रीय शिखर सम्मान

ऽ पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान, उत्तर प्रदेशर हिन्दी संस्थान (2001)

ऽ कल्पतरू सम्मान, दिल्ली (1989)

ऽ ओजस्विनी शिखर सम्मान, भोपाल, मध्य प्रदेश

ऽ साहित्यश्री सम्मान, दिल्ली

ऽ मेरे साहित्य पर शोध कार्य के लिए अब तक कई शोधार्थियों ने पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त की

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं संगोष्ठी में सक्रिय भागीदारी:

ऽ जर्मनी, मनीला, न्यूयाॅर्क

ऽ विश्व हिन्दी सम्मेलन के लिए इंग्लैंड, सूरीनाम और दक्षिण अफ्रिका का प्रवास, माॅरिशस भ्रमण और लेखन।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 2 नवंबर 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 जुलाई 2017.
  2. सूर्या (स्मारिका -६) सम्पादक: डॉ॰ रामशरण गौड़ पृष्ठ १८

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]