कर्नाटक/आलेख

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
कर्नाटक
ಕರ್ನಾಟಕ
—  state  —
कर्नाटक के चित्र दक्षिणावर्त, ऊपर बायें:पश्चिमी घाट, हम्पी, वृंदावन उद्यान, होयसालेश्वर प्रतिमा, कन्नड़ खाना, जोग प्रपात, ललितामहल, महाराजा महल, गोमतेश्वर, कलमकारी, (बीच में) बादामी, विधान सौध और महिषासुर प्रतिमा
कर्नाटक के चित्र
दक्षिणावर्त, ऊपर बायें:पश्चिमी घाट, हम्पी, वृंदावन उद्यान, होयसालेश्वर प्रतिमा, कन्नड़ खाना, जोग प्रपात, ललितामहल, महाराजा महल, गोमतेश्वर, कलमकारी, (बीच में) बादामी, विधान सौध और महिषासुर प्रतिमा
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य कर्नाटक
ज़िला २९
' १ नवम्बर १९५६
राजधानी बंगलुरु
सबसे बड़ा नगर बंगलुरु
राज्यपाल हंसराज भारद्वाज
मुख्य मंत्री बी एस येदुरप्पा
विधान सभा (सीटें) द्विसदनीय (२२४ + ७५)
जनसंख्या
घनत्व
5,28,50,562[1] (९वां)
• 275.6/किमी2 (714/मील2)
आधिकारिक भाषा(एँ) कन्नड़
क्षेत्रफल 1,91,976 कि.मी² (74,122 वर्ग मील)[2]
ISO 3166-2 IN-KA
आधिकारिक जालस्थल: karunadu.gov.in/

निर्देशांक: 12°58′13″N 77°33′37″E / 12.970214°N 77.56029°E / 12.970214; 77.56029 कर्नाटक (कन्नड़: ಕರ್ನಾಟಕ,उच्चारण [kəɾˈnɑːʈəkɑː]), जिसे कर्णाटक भी कहते हैं, दक्षिण भारत का एक राज्य है। इस राज्य का सृजन १ नवंबर, १९५६ को राज्य पुनर्संगठन अधिनियम के अधीन किया गया था। मूलतः यह मैसूर राज्य कहलाता था और १९७३ में इसे पुनर्नामकरण कर कर्नाटक नाम मिला था। कर्नाटक की सीमाएं पश्चिम में अरब सागर, उत्तर पश्चिम में गोआ, उत्तर में महाराष्ट्र, पूर्व में आंध्र प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में तमिल नाडु एवं दक्षिण में केरल से लगती हैं। राज्य का कुल क्षेत्रफल ७४,१२२ वर्ग मील (१,९१,९७६ कि॰मी॰²) है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का ५.८३% है। यह राज्य आठवां सबसे बड़ा राज्य है और इसमें २९ जिले हैं। राज्य की आधिकारिक और सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है कन्नड़

हालांकि कर्नाटक शब्द के उद्गम के कई सन्दर्भ हैं, फिर भी उनमें से सर्वाधिक स्वीकार्य तथ्य है कि कर्नाटक शब्द का उद्गम कन्नड़ शब्द करु, अर्थात काली या ऊंची और नाडु अर्थात भूमि या प्रदेश या क्षेत्र से आया है, जिसके संयोजन करुनाडु का पूरा अर्थ हुआ काली भूमि या ऊंचा प्रदेश। काला शब्द यहां के बयालुसीम क्षेत्र की काली मिट्टी से आया है और ऊंचा यानि दक्खन के पठारी भूमि से आया है। ब्रिटिश राज में यहां के लिये कार्नेटिक शब्द प्रयोग किया गया है, जो कृष्णा नदी के दक्षिणी ओर की प्रायद्वीपीय भूमि के लिये प्रयोग किया गया है और कर्नाटक शब्द का अपभ्रंश है।[3]

प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास देखें तो कर्नाटक क्षेत्र कई बड़े शक्तिशाली साम्राज्यों का क्षेत्र रहा है। इन याज्यों के दरबारों के विचारक, दार्शनिक और भाट व कवियों के सामाजिक, साहित्यिक व धार्मिक संरक्षण में आज का कर्नाटक उपजा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दोनों ही रूपों, कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी संगीत को इस राज्य का महत्त्वपूर्ण योगदान मिला है। आधुनिक युग के कन्नड़ लेखकों को सर्वाधिक ज्ञानपीठ सम्मान मिले हैं। राज्य की राजधानी बंगलुरु शहर है, जो भारत में हो रही त्वरित आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी का अग्रणी योगदानकर्त्ता है।

भूगोल[संपादित करें]

जोग प्रपात भारत में सबसे ऊंचा जल प्रपात है। यहां शरावती नदी ऊंचाई से नीचे गिरती है।

कर्नाटक राज्य में तीन प्रधान मंडल हैं: तटीय क्षेत्र करावली, पहाड़ी क्षेत्र मालेनाडु जिसमें पश्चिमी घाट आते हैं, तथा तीसरा बयालुसीमी क्षेत्र जहां दक्खिन पठार का क्षेत्र है। राज्य का अधिकांश क्षेत्र बयालुसीमी में आता है और इसका उत्तरी क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा शुष्क क्षेत्र है।[4] कर्नाटक का सबसे ऊंचा स्थल चिकमंगलूर जिला का मुल्लयनगिरि पर्वत है। यहां की समुद्र सतह से ऊंचाई 1,929 मीटर (6,329 फीट) है। कर्नाटक की महत्त्वपूर्ण नदियों में कावेरी, तुंगभद्रा नदी, कृष्णा नदी, मलयप्रभा नदी और शरावती नदी हैं।

यहां की मिट्टी की कृषि हेतु योग्यता के अनुसार यहां की मृदा को छः प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: लाल, लैटेरिटिक, काली, ऍल्युवियो-कोल्युविलय एवं तटीय रेतीली मिट्टी। राज्य में चार प्रमुख ऋतुएं आती हैं। जनवरी और फ़रवरी में शीत ऋतु, उसके बाद मार्च-मई तक ग्रीष्म ऋतु, जिसके बाद जून से सितंबर तक मॉनसून वर्षा ऋतु और अंततः अक्टूबर से दिसम्बर पर्यन्त मॉनसूनोत्तर काल। मौसम विज्ञान के आधार पर कर्नाटक तीन क्षेत्रों में बांटा जा सकता है: तटीय, उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक क्षेत्र। इनमें से तटीय क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा होती है, जिसका लगभग 3,638.5 मि॰मी॰ (143 इंच) प्रतिवर्ष है, जो राज्य के वार्षिक औसत 1,139 मि॰मी॰ (45 इंच) से कहीं अधिक है। शिमोगा जिला में अगुम्बे भारत में दूसरा सर्वाधिक वार्षिक औसत वर्षा पाने वाला स्थल है।[5] द्वारा किया गया है। यहां का सर्वाधिक अंकित तापमान ४५.६ ° से. (११४ °फ़ै.) रायचूर में तथा न्यूनतम तापमान 2.8 °से. (37 °फ़ै) बीदर में है।

कर्नाटक का लगभग 38,724 कि॰मी2 (14,951 वर्ग मील) (राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का २०%) वनों से आच्छादित है। ये वन संरक्षित, सुरक्षित, खुले, ग्रामीण और निजी वनों में वर्गीकृत किये जा सकते हैं। यहां के वनाच्छादित क्षेत्र भारत के औसत वनीय क्षेत्र २३% से कुछ ही कम हैं और राष्ट्रीय वन नीति द्वारा निर्धारित ३३% से कहीं कम हैं।[6]

उप-मंडल[संपादित करें]

कर्नाटक के जिले

कर्नाटक राज्य में ३० जिले हैं —बागलकोट, बंगलुरु ग्रामीण, बंगलुरु शहरी, बेलगाम, बेल्लारी, बीदर, बीजापुर, चामराजनगर, चिकबल्लपुर,[7] चिकमंगलूर, चित्रदुर्ग, दक्षिण कन्नड़, दावणगिरि, धारवाड़, गडग, गुलबर्ग, हसन, हवेरी, कोडगु, कोलार, कोप्पल, मांड्या, मैसूर, रायचूर, रामनगर,[7] शिमोगा, तुमकुर, उडुपी, उत्तर कन्नड़ एवं यादगीर। प्रत्येक जिले का प्रशासन एक जिलाधीश या जिलायुक्त के अधीन होता है। ये जिले फिर उप-क्षेत्रों में बंटे हैं, जिनका प्रशासन उपजिलाधीश के अधीन है। उप-जिले ब्लॉक और पंचायतों तथा नगरपालिकाओं द्वारा देखे जाते हैं।

२००१ की जनगणना के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि जनसंख्यानुसार कर्नाटक के शहरों की सूची में सर्वोच्च छः नगरों में बंगलुरु, हुबली-धारवाड़, मैसूर, गुलबर्ग, बेलगाम एवं मंगलौर आते हैं। १० लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में मात्र बंगलुरु ही आता है। बंगलुरु शहरी, बेलगाम एवं गुलबर्ग सर्वाधिक जनसंख्या वाले जिले हैं। प्रत्येक में ३० लाख से अधिक जनसंख्या है। गडग, चामराजनगर एवं कोडगु जिलों की जनसंक्या १० लाख से कम है।[8]

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

२००१ की भारत की जनगणना के अनुसार, कर्नाटक की कुल जनसंख्या ५२,८५०,५६२ है, जिसमें से २६,८९८,९१८ (५०.८९%) पुरुष और २५,९५१,६४४ स्त्रियां (४३.११%) हैं। यानि प्रत्येक्क १००० पुरुष ९६४ स्त्रियां हैं। इसके अनुसार १९९१ की जनसंख्या में १७.२५% की वृद्धि हुई है। राज्य का जनसंख्या घनत्व २७५.६ प्रति वर्ग कि.मी है और ३३.९८% लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। यहां की साक्षरता दर ६६.६% है, जिसमें ७६.१% पुरुष और ५६.९% स्त्रियां साक्षर हैं।[1] यहां की कुल जनसंख्या का ८३% हिन्दू हैं और ११% मुस्लिम, ४% ईसाई, ०.७८% जैन, ०.७३% बौद्ध और शेष लोग अन्य धर्मावलंबी हैं।[10]

कर्नाटक की आधिकारिक भाषा कन्नड़ है और स्थानीय भाषा के रूप में ६४.७५% लोगों द्वारा बोली जाती है। १९९१ के अनुसार अन्य भाषायी अल्पसंख्यकों में उर्दु (९.७२%), तेलुगु (८.३४%), तमिल (५.४६%), मराठी (३.९५%), टुलु (३.३८%, हिन्दी (१.८७%), कोंकणी (१.७८%), मलयालम (१.६९%) और कोडव तक्क भाषी ०.२५% हैं।[11] राज्य की जन्म दर २.२% और मृत्यु दर ०.७२% है। इसके अलावा शिशु मृत्यु (मॉर्टैलिटी) दर ५.५% एवं मातृ मृत्यु दर ०.१९५% है। कुल प्रजनन (फर्टिलिटी) दर २.२ है।[12]

स्वास्थ्य एवं आरोग्य के क्षेत्र (सुपर स्पेशियलिटी हैल्थ केयर) में कर्नाटक की निजी क्षेत्र की कंपनियां विश्व की सर्वश्रेष्ठ से तुलनीय हैं।[13] कर्नाटक में उत्तम जन स्वास्थ्य सेवाएं हैं, जिनके आंकड़े व स्थिति भारत के अन्य अधिकांश राज्यों की तुलना में श्रेष्ठ हैं। इसके बावजूद भी राज्य के कुछ अति पिछड़े इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है।[14] प्रशासनिक उद्देश्य हेतु, कर्नाटक को चार रेवेन्यु मंडलों, ४९ उप-मंडलों, २९ जिलों, १७५ तालुकों और ७४५ होब्लीज़/रेवेन्यु वृत्तों में बांटा गया है।[15] प्रत्येक जिला प्रशासन का अध्यक्ष जिला उपायुक्त होता है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस) से होता है और उसके अधीन कर्नाटक राज्य सेवाओं के अनेक अधिकारीगण होते हैं। राज्य के न्याय और कानून व्यवस्था का उत्तरदायित्व पुलिस उपायुक्त पर होता है। ये भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी होता है, जिसके अधीन कर्नाटक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारीगण कार्यरत होते हैं। भारतीय वन सेवा से वन उपसंरक्षक अधिकारी तैनात होता है, जो राज्य के वन विभाग की अध्यक्षता करता है। जिलों के सर्वांगीण विकास प्रत्येक जिले के विकास विभाग जैसे लोक सेवा विभाग, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पशु-पालन, आदि विभाग देखते हैं। राज्य की न्यायपालिका बंगलुरु में स्थित कर्नाटक उच्च न्यायालय (अट्टार कचेरी) और प्रत्येक जिले में जिले और सत्र न्यायालय तथा तालुक स्तर के निचले न्यायालय के अनुरक्षण में चलती है।

कर्नाटक की राजनीति में मुख्यतः तीन राजनैतिक पार्टियों: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल का ही वर्चस्व रहता है।[16] कर्नाटक के राजनीतिज्ञों ने भारत की संघीय सरकार में प्रधानमंत्री तथा उपराष्ट्रपति जैसे उच्च पदों की भी शोभा बढ़ायी है। वर्तमान संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए सरकार में भी तीन कैबिनेट स्तरीय मंत्री कर्नाटक से हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान क़ानून एवं न्याय मंत्रालयवीरप्पा मोइली हैं। राज्य के कासरगोड[17] और शोलापुर[18] जिलों पर तथा महाराष्ट्र के बेलगाम पर दावे के विवाद राज्यों के पुनर्संगठन काल से ही चले आ रहे हैं।[19]

कर्नाटक राज के आधिकारिक चिह्न में गंद बेरुंड बीच में बना है। इसके ऊपर घेरे हुए चार सिंह चारों दिशाओं में देख रहे हैं। इसे सारनाथ में अशोक स्तंभ से लिया गया है। इस चिह्न में दो शरभ हैं, जिनके हाथी के सिर और सिंह के धड़ हैं।

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

हाल के वर्षों में कर्नाटक की आर्थिक स्थिति (सकल राज्य उत्पाद)

कर्नाटक का वर्ष २००७-०८ सकल राज्य उत्पाद लगभग Indian Rupee symbol.svg २१५.२८२ हजार करोड़ ($ ५१.२५ बिलियन) रहा।[20] २००७-०८ में इसके सकल घरेलु उत्पाद में ७% की वृद्धी हुई थी।[21] भारत के राष्ट्रीय सकल घरेलु उत्पाद में वर्ष २००४-०५ में इस राज्य का योगदान ५.२% रहा था।[22] कर्नाटक पिछले कुछ दशकों में जीडीपी एवं प्रति व्यप्ति जीडीपी के पदों में तीव्रतम विकासशील राज्यों में रहा है। यह ५६.२% जीडीपी और ४३.९% प्रति व्यक्ति जीडीपी के साथ भारतीय राज्यों में छठे स्थान पर आता है।[23] सितंबर, २००६ तक इसे वित्तीय वर्ष २००६-०७ के लिये ७८.०९७ बिलियन ($ १.७२५५ बिलियन) का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ था, जिससे राज्य भारत के अन्य राज्यों में तीसरे स्थान पर था।[24] वर्ष २००४ के अंत तक, राज्य में अनुद्योग दर (बेरोजगार दर) ४.९४% थी, जो राष्ट्रीय अनुद्योग दर ५.९९% से कम थी।[25] वित्तीय वर्ष २००६-०७ में राज्य की मुद्रा स्फीर्ती दर ४.४% थी, जो राष्ट्रीय दर ४.७% से थोड़ी कम थी।[26] वर्ष २००४-०५ में राज्य का अनुमानित गरीबी अनुपात १७% रहा, जो राष्ट्रीय अनुपात २७.५% से कहीं नीचे है।[27]

कर्नाटक की लगभग ५६% जनसंख्या कृषि और संबंधित गतिविधियों में संलग्न है।[28] राज्य की कुल भूमि का ६४.६%, यानि १.२३१ करोड़ हेक्टेयर भूमि कृषि कार्यों में संलग्न है।[29] यहाँ के कुल रोपित क्षेत्र का २६.५% ही सिंचित क्षेत्र है। इसलिए यहाँ की अधिकांश खेती दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है।[29] यहाँ भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के अनेक बड़े उद्योग स्थापित किए गए हैं। जैसे हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, नेशनल एरोस्पेस लैबोरेटरीज़, भारत हैवी एलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज़, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड एवं हिन्दुस्तान मशीन टूल्स आदि जो बंगलुरु में ही स्थित हैं। यहाँ भारत के कई प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र स्थित हैं। जैसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, केन्द्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एवं केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थानमैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकैमिकल्स लिमिटेड, मंगलोर स्थित एक तेल शोधन केन्द्र है।

१९८० के दशक से कर्नाटक (विशेषकर बंगलुरु) सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेष उभरा है। वर्ष २००७ के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक से लगभग २००० आई.टी फर्म संचालित हो रही थीं। इनमें से कई के मुख्यालय भी राज्य में ही स्थित हैं, जिनमें दो सबसे बड़ी आई.टी कंपनियां इन्फोसिस और विप्रो हैं।[30] इन संस्थाओं से निर्यात रु. ५०,००० करोड़ (१२.५ बिलियन) से भी अधिक पहुंचा है, जो भारत के कुल सूचना प्रौद्योगिकी निर्यात का ३८% है।[30] देवनहल्ली के बाहरी ओर का नंदी हिल क्षेत्र में ५० वर्ग कि.मी भाग, आने वाले २२ बिलियन के ब्याल आईटी निवेश क्षेत्र की स्थली है। ये कर्नाटक की मूल संरचना इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है।[31] इन सब कारणों के चलते ही बंगलौर को भारत की सिलिकॉन घाटी कहा जाने लगा है।[32]

आर्थिक प्रगति में क्षेत्रवार योगदान

भारत में कर्नाटक जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अग्रणी है। यह भारत के सबसे बड़े जैव आधारित उद्योगों के समूह का केन्द्र भी है, जहां देश की ३२० जैवप्रौद्योगिकी संस्थाओं व कंपनियों में से १५८ स्थित हैं।[33] इसी राज्य से भारत के कुल पुष्प-उद्योग का ७५% योगदान है। पुष्प उद्योग तेजी से उभरता और फैलता उद्योग है, जिसमें विश्व भर में सजावटी पौधे और फूलों की आपूर्ति की जाती है।[34]

भारत के अग्रणी बैंकों में से सात, केनरा बैंक, सिंडिकेट बैंक, कार्पोरेशन बैंक, विजया बैंक, कर्नाटक बैंक, वैश्य बैंक और स्टेट बैंक ऑफ मैसूर का उद्गम इसी राज्य से हुआ था।[35] राज्य के तटीय जिलों उडुपी और दक्षिण कन्नड़ में प्रति ५०० व्यक्ति एक बैंक शाखा है। ये भारत का सर्वश्रेष्ठ बैंक वितरण है।[36] मार्च २००२ के अनुसार, कर्नाटक राज्य में विभिन्न बैंकों की ४७६७ शाखाएं हैं, जिनमें से प्रत्येक शाखा औसत ११,००० व्यक्तियों की सेवा करती है। ये आंकड़े राष्ट्रीय औसत १६,००० से काफी कम है।[37]

भारत के ३५०० करोड़ के रेशम उद्योग से अधिकांश भाग कर्नाटक राज्य में आधारित है, विशेषकर उत्तरी बंगलौर क्षेत्रों जैसे मुद्दनहल्ली, कनिवेनारायणपुरा एवं दोड्डबल्लपुर, जहां शहर का ७० करोड़ रेशम उद्योग का अंश स्थित है। यहां की बंगलौर सिल्क और मैसूर सिल्क विश्वप्रसिद्ध हैं।[38][39]

यातायात[संपादित करें]

किंगफिशर एयरलाइंस बंगलुरु में आधारित विमानसेवा है।

कर्नाटक में वायु यातायात देश के अन्य भागों की तरह ही बढ़ता हुआ किंतु कहीं उन्नत है। कर्नाटक राज्य में बंगलुरु, मंगलौर, हुबली, बेलगाम, हम्पी एवं बेल्लारी विमानक्षेत्र में विमानक्षेत्र हैं, जिनमें बंगलुरु एवं मंगलौर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र हैं। मैसूर, गुलबर्ग, बीजापुर, हस्सन एवं शिमोगा में भी २००७ से प्रचालन कुछ हद तक आरंभ हुआ है।[40] यहां चालू प्रधान वायुसेवाओं में किंगफिशर एयरलाइंस एवं एयर डेक्कन हैं, जो बंगलुरु में आधारित हैं।

कर्नाटक का रेल यातायात जाल लगभग 3,089 किलोमीटर (1,919 मील) लंबा है। २००३ में हुबली में मुख्यालय सहित दक्षिण पश्चिमी रेलवे के सृजन से पूर्व राज्य दक्षिणी एवं पश्चिमी रेलवे मंडलों में आता था। अब राज्य के कई भाग दक्षिण पश्चिमी मंडल में आते हैं, व शेष भाग दक्षिण रेलवे मंडल में आते हैं। तटीय कर्नाटक के भाग कोंकण रेलवे नेटवर्क के अंतर्गत आता है, जिसे भारत में इस शताब्दी की सबसे बड़ी रेलवे परियोजना के रूप में देखा गया है।[41] बंगलुरु अन्तर्राज्यीय शहरों से रेल यातायात द्वारा भली-भांति जुड़ा हुआ है। राज्य के अन्य शहर अपेक्षाकृत कम जुड़े हैं।[42][43]

कर्नाटक में ११ जहाजपत्तन हैं, जिनमें मंगलौर पोर्ट सबसे नया है, जो अन्य दस की अपेक्षा सबसे बड़ा और आधुनिक है।[44] मंगलौर का नया पत्तन भारत के नौंवे प्रधान पत्तन के रूप में ४ मई, १९७४ को राष्ट्र को सौंपा गया था। इस पत्तन में वित्तीय वर्ष २००६-०७ में ३ करोड़ २०.४ लाख टन का निर्यात एवं १४१.२ लाख टन का आयात व्यापार हुआ था। इस वित्तीय वर्ष में यहां कुल १०१५ जलपोतों की आवाजाही हुई, जिसमें १८ क्यूज़ पोत थे। राज्य में अन्तर्राज्यीय जलमार्ग उल्लेखनीय स्तर के विकसित नहीं हैं।[45]

कर्नाटक के राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों की कुल लंबाइयां क्रमशः 3,973 किलोमीटर (2,469 मील) एवं 9,829 किलोमीटर (6,107 मील) हैं। कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (के.एस.आर.टी.सी) राज्य का सरकारी लोक यातायात एवं परिवहन निगम है, जिसके द्वारा प्रतिदिन लगभग २२ लाख यात्रियों को परिवहन सुलभ होता है। निगम में २५,००० कर्मचारी सेवारत हैं।[46] १९९० के दशक के अंतिम दौर में निगम को तीन निगमों में विभाजित किया गया था, बंगलौर मेट्रोपॉलिटन ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन, नॉर्थ-वेस्ट कर्नाटक ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन एवं नॉर्थ-ईस्ट कर्नाटक ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन। इनके मुख्यालय क्रमशः बंगलौर, हुबली एवं गुलबर्ग में स्थित हैं।[46]

संस्कृति[संपादित करें]

एक कलाकार, यक्षगण रूप में।

कर्नाटक राज्य में विभिन्न बहुभाषायी और धार्मिक जाति-प्रजातियां बसी हुई हैं। इनके लंबे इतिहास ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहर में अमूल्य योगदान दिया है। कन्नड़िगों के अलावा, यहां तुलुव, कोडव और कोंकणी जातियां, भी बसी हुई हैं। यहां अनेक अल्पसंख्यक जैसे तिब्बती बौद्ध तथा अनेक जनजातियाँ जैसे सोलिग, येरवा, टोडा और सिद्धि समुदाय हैं जो राज्य में भिन्न रंग घोलते हैं। कर्नाटक की परंपरागत लोक कलाओं में संगीत, नृत्य, नाटक, घुमक्कड़ कथावाचक आदि आते हैं। मालनाड और तटीय क्षेत्र के यक्षगण, शास्त्रीय नृत्य-नाटिकाएं राज्य की प्रधान रंगमंच शैलियों में से एक हैं। यहां की रंगमंच परंपरा अनेक सक्रिय संगठनों जैसे निनासम, रंगशंकर, रंगायन एवं प्रभात कलाविदरु के प्रयासों से जीवंत है। इन संगठनों की आधारशिला यहां गुब्बी वीरन्ना, टी फी कैलाशम, बी वी करंथ, के वी सुबन्ना, प्रसन्ना और कई अन्य द्वारा रखी गयी थी।[47] वीरागेस, कमसेल, कोलाट और डोलुकुनिता यहां की प्रचलित नृत्य शैलियां हैं। मैसूर शैली के भरतनाट्य यहां जत्ती तयम्मा जैसे पारंगतों के प्रयासों से आज शिखर पर पहुंचा है और इस कारण ही कर्नाटक, विशेषकर बंगलौर भरतनाट्य के लिये प्रधान केन्द्रों में गिना जाता है।[48]

कर्नाटक का विश्वस्तरीय शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट स्थान है, जहां संगीत की[49] कर्नाटक (कार्नेटिक) और हिन्दुस्तानी शैलियां स्थान पाती हैं। राज्य में दोनों ही शैलियों के पारंगत कलाकार हुए हैं। वैसे कर्नाटक संगीत में कर्नाटक नाम कर्नाटक राज्य विशेष का ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत को दिया गया है।१६वीं शताब्दी के हरिदास आंदोलन कर्नाटक संगीत के विकास में अभिन्न योगदान दिया है। सम्मानित हरिदासों में से एक, पुरंदर दास को कर्नाटक संगीत पितामह की उपाधि दी गयी है।[50] कर्नाटक संगीत के कई प्रसिद्ध कलाकार जैसे गंगूबाई हंगल, मल्लिकार्जुन मंसूर, भीमसेन जोशी, बसवराज राजगुरु, सवाई गंधर्व और कई अन्य कर्नाटक राज्य से हैं और इनमें से कुछ को कालिदास सम्मान, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी भारत सरकार ने सम्मानित किया हुआ है।

गमक कर्नाटक संगीत पर आधारित एक अन्य भारतीय शास्त्रीय संगीत शास्त्रीय संगीत शैली है, जिसका प्रचलन कर्नाटक राज्य में है। कन्नड़ भगवती शैली आधुनिक कविगणों के भावात्मक रस से प्रेरित प्रसिद्ध संगीत शैली है। मैसूर चित्रकला शैली ने अनेक श्रेष्ठ चित्रकार दिये हैं, जिनमें से सुंदरैया, तंजावुर कोंडव्य, बी.वेंकटप्पा और केशवैय्या हैं। राजा रवि वर्मा के बनाये धार्मिक चित्र पूरे भारत और विश्व में आज भी पूजा अर्चना हेतु प्रयोग होते हैं।[51] मैसूर चित्रकला की शिक्षा हेतु चित्रकला परिषत नामक संगठन यहां विशेष रूप से कार्यरत है।

कर्नाटक में महिलाओं की परंपरागत भूषा साड़ी है। कोडगु की महिलाएं एक विशेष प्रकार से साड़ी पहनती हैं, जो शेष कर्नाटक से कुछ भिन्न है।[52] राज्य के पुरुषों का परंपरागत पहनावा धोती है, जिसे यहां पाँचे कहते हैं। वैसे शहरी क्षेत्रों में लोग प्रायः कमीज-पतलून तथा सलवार-कमीज पहना करते हैं। राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में विशेष शैली की पगड़ी पहनी जाती है, जिसे मैसूरी पेटा कहते हैं और उत्तरी क्षेत्रों में राजस्थानी शैली जैसी पगड़ी पहनी जाती है और पगड़ी या पटगा कहलाती है।

चावल (कन्नड़: ಅಕ್ಕಿ) और रागी राज्य के प्रधान खाद्य में आते हैं और जोलड रोट्टी, सोरघम उत्तरी कर्नाटक के प्रधान खाद्य हैं। इनके अलावा तटीय क्षेत्रों एवं कोडगु में अपनी विशिष्ट खाद्य शैली होती है। बिसे बेले भात, जोलड रोट्टी, रागी बड़ा, उपमा, मसाला दोसा और मद्दूर वड़ा कर्नाटक के कुछ प्रसिद्ध खाद्य पदार्थ हैं। मिष्ठान्न में मैसूर पाक, बेलगावी कुंड, गोकक करदंतु और धारवाड़ पेड़ा मशहूर हैं।

धर्म[संपादित करें]

श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर (९८२-९८३) की एकाश्म-प्रतिमा, आज जैन धर्मावलंबियों के सर्वप्रिय तीर्थों में से एक है।

आदि शंकराचार्य ने शृंगेरी को भारत पर्यन्त चार पीठों में से दक्षिण पीठ हेतु चुना था। विशिष्ट अद्वैत के अग्रणी व्याख्याता रामानुजाचार्य ने मेलकोट में कई वर्ष व्यतीत किये थे। वे कर्नाटक में १०९८ में आये थे और यहां ११२२ तक वास किया। इन्होंने अपना प्रथम वास तोंडानूर में किया और फिर मेलकोट पहुंचे, जहां इन्होंने चेल्लुवनारायण मंदिर और एक सुव्यवस्थित मठ की स्थापना की। इन्हें होयसाल वंश के राजा विष्णुवर्धन का संरक्षण मिला था।[53] १२वीं शताब्दी में जातिवाद और अन्य सामाजिक कुप्रथाओं के विरोध स्वरूप उत्तरी कर्नाटक में वीरशैवधर्म का उदय हुआ। इन आन्दोलन में अग्रणी व्यक्तित्वों में बसव, अक्का महादेवी और अलाम प्रभु थे, जिन्होंने अनुभव मंडप की स्थापना की जहां शक्ति विशिष्टाद्वैत का उदय हुआ। यही आगे चलकर लिंगायत मत का आधार बना जिसके आज कई लाख अनुयायी हैं।[54] कर्नाटक के सांस्कृतिक और धार्मिक ढांचे में जैन साहित्य और दर्शन का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।

इस्लाम का आरंभिक उदय भारत के पश्चिमी छोर पर १०वीं शताब्दी के लगभग हुआ था। इस धर्म को कर्नाटक में बहमनी साम्राज्य और बीजापुर सल्तनत का संरक्षण मिला।[55] कर्नाटक में ईसाई धर्म १६वीं शताब्दी में पुर्तगालियों और १५४५ में सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर के आगमन के साथ फैला।[56] राज्य के गुलबर्ग और बनवासी आदि स्थानों में प्रथम सहस्राब्दी में बौद्ध धर्म की जड़े पनपीं। गुलबर्ग जिले में १९८६ में हुई अकस्मात खोज में मिले मौर्य काल के अवशेष और अभिलेखों से ज्ञात हुआ कि कृष्णा नदी की तराई क्षेत्र में बौद्ध धर्म के महायन और हिनायन मतों का खूब प्रचार हुआ था।

मैसूर दशहरा मैसूर राज्य में नाड हब्बा (राज्योत्सव) के रूप में मनाया जाता है। यह मैसूर के प्रधान त्यौहारों में से एक है।[57] उगादि (कन्नड़ नव वर्ष), मकर संक्रांति, गणेश चतुर्थी, नाग पंचमी, बसव जयंती, दीपावली आदि कर्नाटक के प्रमुख त्यौहारों में से हैं।

भाषा[संपादित करें]

कन्नड़ भाषा में प्राचीनतम अभिलेख ४५० ई. के हल्मिडी शिलालेखों में मिलते हैं।

राज्य की आधिकारिक भाषा है कन्नड़, जो स्थानीय निवासियों में से ६५% लोगों द्वारा बोली जाती है।[58][59] कन्नड़ भाषा ने कर्नाटक राज्य की स्थापना में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है, जब १९५६ में राज्यों के सृजन हेतु भाषायी सांख्यिकी मुख्य मानदंड रहा था। राज्य की अन्य भाषाओं में कोंकणी एवं कोडव तक हैं, जिनका राज्य में लंबा इतिहास रहा है। यहां की मुस्लिम जनसंख्या द्वारा उर्दु भी बोली जाती है। अन्य भाषाओं से अपेक्षाकृत कम बोली जाने वाली भाषाओं में ब्यारी भाषा व कुछ अन्य बोलियां जैसे संकेती भाषा आती हैं। कन्नड़ भाषा का प्राचीन एवं प्रचुर साहित्य है, जिसके विषयों में काफी भिन्नता है और जैन धर्म, वचन, हरिदास साहित्य एवं आधुनिक कन्नड़ साहित्य है। अशोक के समय की राजाज्ञाओं व अभिलेखों से ज्ञात होता है कि कन्नड़ लिपि एवं साहित्य पर बौद्ध साहित्य का भी प्रभाव रहा है। हल्मिडि शिलालेख ४५० ई. में मिले कन्नड़ भाषा के प्राचीनतम उपलब्ध अभिलेख हैं, जिनमें अच्छी लंबाई का लेखन मिलता है। प्राचीनतम उपलब्ध साहित्य में ८५० ई. के कविराजमार्ग के कार्य मिलते हैं। इस साहित्य से ये भी सिद्ध होता है कि कन्नड़ साहित्य में चट्टान, बेद्दंड एवं मेलवदु छंदों का प्रयोग आरंभिक शताब्दियों से होता आया है।[60]

राष्ट्रकवि कुवेंपु, २०वीं शताब्दी के कन्नड़ साहित्य के प्रतिष्ठित कवि

कुवेंपु, प्रसिद्ध कन्नड़ कवि एवं लेखक थे, जिन्होंने जय भारत जननीय तनुजते लिखा था, जिसे अब राज्य का गीत (एन्थम) घोषित किया गया है।[61] इन्हें प्रथम कर्नाटक रत्न सम्मान दिया गया था, जो कर्नाटक सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। अन्य समकालीन कन्नड़ साहित्य भी भारतीय साहित्य के प्रांगण में अपना प्रतिष्ठित स्थान बनाये हुए है। सात कन्नड़ लेखकों को भारत का सर्वोच्च साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है, जो किसी भी भारतीय भाषा के लिये सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान होता है।[62] तुळु भाषा मुख्यतः राज्य के तटीय जिलों उडुपी और दक्षिण कन्नड़ में बोली जाती है। तुळु महाभारतो, अरुणब्ज द्वारा इस भाषा में लिखा गया पुरातनतम उपलब्ध पाठ है।[63] तिगळारि लिपि के क्रमिक पतन के कारण तुलु भाषा अब कन्नड़ लिपि में ही लिखी जाती है, किन्तु कुछ शताब्दी पूर्व तक इस लिपि का प्रयोग होता रहा था। तिगळारि लिपि मूलतः संस्कृत भाषा लिखने के लिए प्रयोग करते थे। कोडव जाति के लोग, जो मुख्यतः कोडगु जिले के निवासी हैं, कोडव तक्क् बोलते हैं। इस भाषा की दो क्षेत्रीय बोलियां मिलती हैं: उत्तरी मेन्डले तक्क् और दक्षिणी किग्गाति टक।[64] कोंकणी मुख्यतः उत्तर कन्नड़ जिले में और उडुपी एवं दक्षिण कन्नड़ जिलों के कुछ समीपस्थ भागों में बोली जाती है। कोडव तक्क् और कोंकणी, दोनों में ही कन्नड़ लिपि का प्रयोग किया जाता है। कई विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी है और अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियों तथा प्रौद्योगिकी-संबंधित कंपनियों तथा बीपीओ में अंग्रेज़ी का प्रयोग ही होता है।

राज्य की सभी भाषाओं को सरकारी एवं अर्ध-सरकारी संस्थाओं का संरक्षण प्राप्त है। कन्नड़ साहित्य परिषत एवं कन्नड़ साहित्य अकादमी कन्नड़ भाषा के उत्थान हेतु एवं कन्नड़ कोंकणी साहित्य अकादमी कोंकणी साहित्य के लिये कार्यरत है।[65] टुलु साहित्य अकादमी एवं कोडव साहित्य अकादमी अपनी अपनी भाषाओं के विकास में कार्यशील हैं।

शिक्षा[संपादित करें]

भारतीय विज्ञान संस्थान, भारत का एक प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थान, बंगलुरु में स्थित है

२००१ की जनसंख्या अनुसार, कर्नाटक की साक्षरता दर ६७.०४% है, जिसमें ७६.२९% पुरुष तथा ५७.४५% स्त्रियाँ हैं।[66] राज्य में भारत के कुछ प्रतिष्ठित शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान भी स्थित हैं, जैसे भारतीय विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कर्नाटक और भारतीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय

मार्च २००६ के अनुसार, कर्नाटक में ५४,५२९ प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें २,५२,८७५ शिक्षक तथा ८४.९५ लाख विद्यार्थी हैं।[67] इसके अलावा ९४९८ माध्यमिक विद्यालय जिनमें ९२,२८७ शिक्षक तथा १३.८४ लाख विद्यार्थी हैं।[67] राज्य में तीन प्रकार के विद्यालय हैं, सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त निजी (सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त) एवं पूर्णतया निजी (कोई सरकारी सहायता नहीं)। अधिकांश विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम कन्नड़ एवं अंग्रेज़ी है। विद्यालयों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम या तो सीबीएसई, आई.सी.एस.ई या कर्नाटक सरकार के शिक्षा विभाग के अधीनस्थ राज्य बोर्ड पाठ्यक्रम (एसएसएलसी) से निर्देशित होता है। कुछ विद्यालय ओपन स्कूल पाठ्यक्रम भी चलाते हैं। राज्य में बीजापुर में एक सैनिक स्कूल भि है।

विद्यालयों में अधिकतम उपस्थिति को बढ़ावा देने हेतु, कर्नाटक सरकार ने सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में विद्यार्थियों हेतु निःशुल्क अपराह्न-भोजन योजना आरंभ की है।[68] राज्य बोर्ड परीक्षाएं माध्यमिक शिक्षा अवधि के अंत में आयोजित की जाती हैं, जिसमें उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को द्विवर्षीय विश्वविद्यालय-पूर्व कोर्स में प्रवेश मिलता है। इसके बाद विद्यार्थी स्नातक पाठ्यक्रम के लिये अर्हक होते हैं।

राज्य में यहां के विश्वविद्यालयों जैसे बंगलुरु विश्वविद्यालय,गुलबर्ग विश्वविद्यालय, कर्नाटक विश्वविद्यालय, कुवेंपु विश्वविद्यालय, मंगलौर विश्वविद्यालय तथा मैसूर विश्वविद्यालय, आदि से मान्यता प्राप्त ४८१ स्नातक महाविद्यालय हैं।[69] १९९८ में राज्य भर के अभियांत्रिकी महाविद्यालयों को नवगठित बेलगाम स्थित विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत्त लाया गया, जबकि चिकित्सा महाविद्यालयों को राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अधिकारक्षेत्र में लाया गया था। इनमें से कुछ अच्छे महाविद्यालयों को मानित विश्वविद्यालय का दर्जा भि प्रदान किया गया था। राज्य में १२३ अभियांत्रिकी, ३५ चिकित्सा ४० दंतचिकित्सा महाविद्यालय हैं।[70] राज्य में वैदिक एवं संस्कृत शिक्षा हेतु उडुपी, शृंगेरी, गोकर्ण तथा मेलकोट प्रसिदध स्थान हैं। केन्द्र सरकार की ११वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत्त मुदेनहल्ली में एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की सथापना को स्वीकृति मिल चुकी है। ये राज्य का प्रथम आई.आई.टी संस्थान होगा।[71] इसके अतिरिक्त मेदेनहल्ली-कानिवेनारायणपुरा में विश्वेश्वरैया उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान का ६०० करोड़ रुपये की लागत से निर्माण प्रगति पर है।[72]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संर्दभ[संपादित करें]

  1. "स्टैटिस्टिकल हैण्दबुक - इकोनॉमिक इंडिकेटर्स फ़ॉर ऑल स्टेट्स". तमिल नाडु सरकार: अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग. तमिल नाडु सरकार. मूल से 2007-02-22 को पुरालेखित.
  2. "स्टेटस-वाइज़ ब्रेक-अप ऑफ नेशनल पार्क्स". वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट्स ऑफ इण्डिया. भारत सरकार.
  3. देखें लॉर्ड मैकॉले'ज़ लाइफ़ ऑफ क्लाइव एण्ड जेम्स टॉलबॉयज़ व्हीलर: अर्ली हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इण्डिया, लंदन (१८७८), पृ.९८। The principal meaning is the western half of this area, but the rulers there controlled the Coromandel Coast as well.
  4. Menon, Parvathi. "Karnataka's agony". The Frontline, Volume 18 - Issue 17, 18–31 अगस्त 2001. Frontline. अभिगमन तिथि 2007-05-04.
  5. अगुम्बे के सर्वाधिक वर्षा पाने का उल्लेख Ghose, Arabinda. "Link Godavari, Krishna & Cauvery". The Central Chronicle, dated 2007-03-28. 2007, Central Chronicle. अभिगमन तिथि 2007-05-16.
  6. "Karnataka - An Introduction". Official website of the Karnataka legislature. अभिगमन तिथि 2007-10-04.
  7. "टू न्यू डिस्ट्रिक्ट्स नोटीफाइड इन बैंगलॉर". द टाइम्स ऑफ इण्डिया, ६ अगस्त २००७.
  8. "कर्नाटका, पॉपुलेशन: पर्सन्स (टोटल)". भारत की जनगणना, २००१.
  9. "सेन्सस पॉपुलेशन" (पीडीएफ). सेन्सस ऑफ इण्डिया. वित्त मंत्रालय, भारत सरकार. अभिगमन तिथि १८ फ़रवरी २००८.
  10. "इण्डिया (रिलीजन), सेन्सस (२००१)". भारत की जनगणना. महालेखाधिकारी, भारत सरकार.
  11. ए आर फ़ातिही. "कर्नाटक में उर्दु". लैंग्वेज इन इण्डिय़ा, खण्ड-२: ९ दिसम्बर २००२. एम एस तिरुमलै, प्रबधन शंपादक, लैंग्वेज इन इण्डिय़ा. अभिगमन तिथि २९ जून २००७.
  12. "एन्विसेजिंग अ हैल्दी ग्रोथ". द फ़्रंटलाइन. द हिन्दू. अभिगमन तिथि २१ जून २००७.
  13. "कर्नाटक बैट्स बिग ऑन हेलथकेयर टुरिज़्म". द हिन्दू बिज़्नेस लाइन, तथि:२३ नवम्बर २००४. २००४, द हिन्दू. अभिगमन तिथि २१ जून २००७.
  14. "टिकिंग चाइल्ड हेलथकेयर टाइम बॉम्ब". द एड्युकेशन वर्ल्ड. एड्युकेशन वर्ल्ड. अभिगमन तिथि २१ जून २००७.
  15. "स्टैटिस्टिक्स – कर्नाटक स्टेट". वन विभाग. कर्नाटक सरकार. अभिगमन तिथि ४ जून २००७.
  16. "कर्नाटक पॉलिटिक्स – सस्पेन्स टिल २७ जनवरी". OurKarnataka.com. OurKarnataka.Com,Inc. अभिगमन तिथि ४ जून २००७.
  17. "'गवर्न्मेंट नॉट कीन ऑन सॉल्विंग कसरगोड डिस्प्यूट'" (अंग्रेज़ी में). द हिन्दू. २४ अक्टूबर २००५. अभिगमन तिथि २५ अक्टूबर २००७.
  18. "बॉर्डर रो: गवर्न्मेन्ट टोल्ड टू फ़ाइण्ड पर्मानेन्ट सॉल्यूशन" (अंग्रेज़ी में). द हिन्दू. २९ सितंबर २००६. अभिगमन तिथि २५ अक्टूबर २००७.
  19. "बॉर्डर डिस्प्यूट सॉल्व्स एन.सी.पी द ब्लशेज़". द टाइम्स ऑफ इण्डिया. २६ सितंबर २००६. अभिगमन तिथि १ नवम्बर २००७.
  20. "हाईलाईट्स ऑफ कर्नाटक्स बजट २००८-०९" (पीडीएफ़). वित्त विभाग. कर्नाटक सरकार. अभिगमन तिथि १९ अगस्त २००८.
  21. ए. श्रीनिवास. "कर्नाटक्स बजट बेस्ड ऑन ५% इन्फ़्लेशन रेट". द हिन्दू, २१ जुलाई २००८. २००८, द हिन्दू बिज़्नेस लाइन. अभिगमन तिथि १९ अगस्त २००८.
  22. "स्टेटमेन्ट: ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रॉडक्ट ऍट करेन्ट प्राइसेज़". सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय. भारत सरकार. अभिगमन तिथि ११ जून २००७.
  23. "इन टर्म्स ऑफ पर कैपिटा जीडीपी — कर्नाटक, बंगाल फ़ास्टेस्ट ग्रोइंग स्टेट्स". द हिन्दु, ९ जून २००५. द हिन्दू, २००५. अभिगमन तिथि ११ जून २००७.
  24. भारत सरकार. "फ़ॉरेन डयरेक्ट इन्वेस्टमेंट" (पीडीएफ़). इण्डियन बजट - २००७. अभिगमन तिथि ११ जून २००७.
  25. भारत सरकार. "एम्प्लॉयमेंट एण्ड अनेम्प्लॉयमेंट" (पीडीएफ). इण्डियन बजट - २००७. अभिगमन तिथि १९ जून २००७.
  26. "बजट २००६-२००७". वित्त विभाग. कर्नाटक सरकार. अभिगमन तिथि १९ जून २००७.
  27. "पोवर्टी एस्टिमेट्स फ़ॉर २००४-२००५" (पीडीएफ). योजना आयोग. भारत सरकार. अभिगमन तिथि १८ जुलाई २००७.
  28. "कर्नाटक ह्यूमन डवलपमेंट रिपोर्ट २००५" (पीडीएफ़). योजना आयोग. भारत सरकार. अभिगमन तिथि ४ जून २००७.
  29. "कर्नाटक एग्रीकल्चरल पॉलिसी २००६" (पीडीएफ़). कृषि विभाग. कर्नाटक सरकार. अभिगमन तिथि ४ जून २००७.
  30. "आईटी एक्स्पोर्ट्स फ़्रॉम कर्नाटक एक्सीड्स रु.५०के करोड़". द फ़ाइनेन्शियल एक्स्प्रेस, २२ मई २००७. २००७: इण्डियन एक्स्प्रेस न्यूज़पेपर (मुंबई) लि. अभिगमन तिथि ५ जून २००७.
  31. http://www.hindu.com/2010/01/29/stories/2010012953620400.htm
  32. "India in Business". Ministry of External affairs. भारत सरकार. अभिगमन तिथि 2007-06-11.
  33. "बैंगलौर टॉप्स बायोक्लस्टर लिस्ट विद रु.१४०० करोड़ रेवेन्यु". द हिन्दू बिज़्नेस लाइन, ८ जून. २००६. © २००६, द हिन्दू बिज़्नेस लाइन. अभिगमन तिथि ५ जून २००६.
  34. "फ्लोरीकल्चर". वन इण्डिया न्यूज़, १२ जून २००७. www.Karnataka.com. अभिगमन तिथि १२ जून २००७.
  35. रवि शर्मा. "बिल्डिंग ऑन अ स्ट्रॉन्ग बेस". द फ़्रंटलाइन, खण्ड २२, इशू-२१ अक्टूबर २००५. फ़्रंटलाइन. अभिगमन तिथि २१ जून २००७.
  36. रवि शर्मा. "ए पायोनियर्स प्रॉग्रेस". द फ़्रंटलाईन, खण्ड २०, इशु:१५, १९ जुलाई,-१ अगस्त २००३. फ़्रंटलाईन. अभिगमन तिथि २१ जून २००७.
  37. "स्टेट/यूनियन टेरिटरी वाइज़ नंबर ऑफ ब्रांचेज़ ऑफ शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक्स एण्ड एवरेज पॉपुलेशन पर बैंक ब्रांच– मार्च २००२" (पीडीएफ़). भारतीय रिज़र्व बैंक का ऑनलाइन वेबपेज. अभिगमन तिथि २१ जून २००७.
  38. सिल्क सिटी टू कम अप नियर बंगलौर
  39. कर्नाटक के रेशम बुनकर वैश्वीकरण के चलते घाटे में गिरते जा रहे हैं
  40. "५ एयरपोर्ट्स टू बी ऑपरेश्नल सून". डेक्कन हेराल्ड, ऑनलाइन; तिथि: ५ जून २००७. २००७, द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा.लि. अभिगमन तिथि २९ जून २००७.
  41. "प्राइम मिनिस्टर टू डेडिकेट कोंकण रेलवे लाइन टू द नेशन ऑन १ मई". पी.आई.बी. भारत सरकार. अभिगमन तिथि 2007-07-18.
  42. "पायलट प्रोजेक्ट: जीपीएस सिस्टम ऑन बंगलौर-हुबली जन शताब्दी". डेकन हेराल्ड, ऑनलाइन, ति:२५, दिसम्बर, २००६. २००५, द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा.लि. अभिगमन तिथि ६ मई २००७.
  43. जी.एस. प्रसन्न कुमार. "कर्नाटक एण्ड इण्डियन रेलवेज़, Colossal wastage of available resources or is it sheer madness of the authorities concerned". ऑनलाईन वेबपेज:OurKarnataka.com. OurKarnataka.Com, इंका. अभिगमन तिथि 2007-04-20.
  44. "माइनर पोर्ट्स ऑफ कर्नाटक". Online Webpage of Karnataka Ports Department. कर्नाटक सरकार. अभिगमन तिथि 2007-05-06.
  45. कर्नाटक पोर्ट्स.इन
  46. "अबाउट के.एस.आर.टी.सी". ऑनलाइन वेबपेज KSRTC. KSRTC. अभिगमन तिथि 2007-05-06.
  47. मुख्य संपादक:एच चित्तरंजन। २००५। हैण्डबुक ऑफ कर्नाटक। राजपत्र विभाग, कर्नाटक सरकार। अध्याय-१३। पृष्ठ:३३२-३३७
  48. मुख्य संपादक:एच चित्तरंजन। २००५। हैण्डबुक ऑफ कर्नाटक। राजपत्र विभाग, कर्नाटक सरकार। अध्याय-१३। पृष्ठ:३५०-३५२
  49. कर्नाटक म्यूज़िक ऍज़ ऍस्थेटिक फ़ॉर्म/ आर सत्यनारायण। नई दिल्ली। सेन्टर फ़ॉर स्टडीज़ इन सिविलाइज़ेशन्स, २००४, त्रयोदश, पृ. १८५, ISBN 81-87586-16-8.
  50. डॉ॰ज्योत्सना कामत. "पुरंदर दास". कामत्स पॉट पौरी. अभिगमन तिथि ३१ दिसम्बर २००६.
  51. कामत (२००१), पृ. २८३
  52. के.जेशी. "रीविज़िटिंग टैक्स्टाइल ट्रैडीशंस". हिन्दू का ऑनलाइन संस्करण, १२ सितंबर २००६. द हिन्दू. अभिगमन तिथि २४ जुलाई २००७.
  53. कामत (२००१) पृ.१५०-१५२
  54. कामत (२००१), पृ. १५३-१५४
  55. शास्त्री (१९५५), पृ.३९६
  56. शास्त्री (१९५५), पृ.३९८
  57. "दशहरा फ़ेस्ट पैनल मीट्स थर्स्डे". द टाइम्स ऑफ इण्डिया, दि. २२ जुलाई २००३. टाइम्स इंटरनेट लि. अभिगमन तिथि १७ जुलाई २००७.
  58. "The Karnataka Local Authorities (Official Language) Act, 1981" (PDF). Official website of Government of Karnataka. Government of Karnataka. अभिगमन तिथि 2007-07-26.
  59. "Declaration of Telugu and Kannada as classical languages". Press Information Bureau. Ministry of Tourism and Culture, भारत सरकार. अभिगमन तिथि 2008-10-31.
  60. नरसिंहाचार्य (१९८८), पृ. १२, १७
  61. "पोयम डिक्लेयर्ड स्टेट सॉन्ग". ऑनलाइन वेबपेज ऑफ द हिन्दू. द हिन्दू. अभिगमन तिथि १५ जुलाई २००७.
  62. एच एस व्यंकटेश, मूर्ति. "ग्लोबल थॉट्स इन द लोकल टंग". ऑनलाईन एडिशन, द हिन्दू: ३१ अक्टूबर २००२. अभिगमन तिथि १ नवम्बर २००७.
  63. रवि प्रसाद कामिल. "टुलु अकादमी येट टू रियलाइज़ इट्स गोल". द हिन्दू, ऑनलाईन वेबपेज: १३ नवम्बर २००४. द हिन्दू. अभिगमन तिथि ५ मई २००७.
  64. के एस राज्यश्री. "कोदव स्पीच कम्युनिटी: एन एथनोलिंग्विस्टिक स्टडी". लैंग्वेज इण्डिया.कॉम. एम एस तिरुमलै. अभिगमन तिथि ६ मई २००७.
  65. "कोंकण प्रभा रिलीज़्ड". डेक्कन हेरल्ड, १६ सितंबर २००५. २००५, द प्रिंटर्स (मैसूर) प्रा. लि. अभिगमन तिथि ६ मई २००७.
  66. "Literacy Rate State/UT Wise". National Literacy Mission, भारत. अभिगमन तिथि 2007-11-01.
  67. "Number of schools in Karnataka as of 31-03-2006" (PDF). Department of Public Instruction. Government of Karnataka. अभिगमन तिथि 2007-06-06.
  68. "Mid-day meal scheme extended". द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया , dated 2007-05-16. Times Internet Limited. अभिगमन तिथि 2007-06-06.
  69. "Districtwise and Universitywise degree college statistics for 2006-07" (PDF). The Department of Collegiate Education. Government of Karnataka. अभिगमन तिथि 2007-06-06.
  70. "CET brochure 2007" (PDF). The Common Entrance Test Cell. Government of Karnataka. अभिगमन तिथि 2007-06-06.
  71. http://www.deccanherald.com/content/15938/iit-muddenahalli-moily.html
  72. http://www.hindu.com/edu/2009/09/07/stories/2009090750220300.htm

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]