बरनवाल

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बरनवाल (वर्णवाल भी वर्तनी) एक भारतीय सूर्यवंशी समुदाय है।

प्राचीन भारतीय राजवंश | बरनवंशी क्षत्रिय ही वर्तमान में बरनवाल नाम से जाने जाते हैं। इनकी एक शाखा राजवंशी भी कहलाती है। भारत मे मुगल शासक के आक्रमण के फलस्वरूप बरनशहर का पतन हो गया और अधिकांश बरनवंशी वीरगति को प्राप्त हो गये। बचे हुवे बरनवंशी बरनशहर (बुलन्दशहर) से निष्क्रमण कर सुदूर भारत में फैल गये और आजीविका के लिये तलवार छोड़ तराजू पकड़ ली। आज इस समुदाय के बहुसंख्य लोग वाणिज्य व्यवसाय से जुड़े हुवे हैं और इनकी गणना विश्व के सफलतम उद्यमी समुदायों में होती है। पिछले दो हजार वर्षों से इनकी आजीविका का आधार वाणिज्य होने से इनकी गणना क्षत्रिय वर्ण होने के बावजूद "वैश्य बनिया" पोद्दार वर्ग में होती है और स्वयं बरनवाल समाज के लोग अपने आप को "वैश्य बनिया" पोद्दार समुदाय का एक अभिन्न अंग मानते हैं। इनके ३६ गोत्र हैं। संस्थापक : महाराजा अहिबरन वंश : सुर्यवंश गद्दी : बरनशहर, कुलदेवी: महालक्षमी

गोत्रों के नाम
गर्ग वत्सिल गोयल गोहिल करव देवल कश्यप वत्स अत्रि वामदेव कपिल गालब सिंहल आरण्य काशील उपमन्यु यामिनी पाराशर
कौशिक मुनास कत्यापन कौन्डिल्य पुलिश भृगु सर्वे अंगीरा क्रिश्नाभी उद्धालक आश्वलायन भारद्वाज कनखल मुद्गल यमद्गिरी च्यवण वेदप्रमिति सान्स्कृत्तायन

कथा[संपादित करें]

बरनवाल समाज राजा अहिबरन से वंश होने का दावा करती है। राजा अहिबरन सूर्यवंशी राजपूत क्षत्रिय थे जिन्हें राजा अग्रसेन का वंशज भी मन जाता है।[1][page needed][2]

बरनवाल समाज में ३६ गोत्र होते हैं: गर्ग, वत्सिल, गोयल, गोहिल, करव, देवल, कश्यप, वत्स, अत्रि, वामदेव, कपिल, गालब, सिंहल, आरण्य, काशील, उपमन्यु, यामिनी, पाराशर, कौशिक, मुनास, कत्यापन, कौन्डिल्य, पुलिश, भृगु, सर्वे, अंगीरा, क्रिश्नाभी, उद्धालक, आश्वलायन, भारद्वाज, कनखल, मुद्गल, यमद्गिरी, च्यवण, वेदप्रमिति और सान्स्कृत्तायन।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Asian Folklore Institute; Society for Asian Folklore (1972). Asian Folklore Studies. Asian Folklore Institute. अभिगमन तिथि 19 December 2011.
  2. Singh, Kumar Suresh (2008). People of India, Volume 16, Part 1 (1st संस्करण). India: Anthropological Survey of India. पृ॰ 131. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7046-302-5. अभिगमन तिथि 16 May 2011.
  3. "2". Baranwal Samvad. Gorakhpur, India: Akhil Bhartiya Baranwal Vaishya Mahasabha. 2010.

बाहरी लिंक[संपादित करें]