अग्रवाल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्राचीन भारतीय राजवंश | अग्रेयवंशी क्षत्रिय ही वर्तमान मे अग्रवाल नाम से जाने जाते हैं | इनकी एक शाखा राजवंशी भी कहलाती है| युनानी बादशाह सिकंदर के आक्रमण के फलस्वरूप अग्रेयगणराज्य का पतन हो गया और अधिकांश अग्रेयवीर वीरगति को प्राप्त हो गये| बचे हुवे अग्रेयवंशी अग्रोहा से निष्क्रमण कर सुदूर भारत मे फैल गये और आजीविका के लिये तलवार छोड़ तराजू पकड़ ली | आज इस समुदाय के बहुसंख्य लोग वाणिज्य व्यवसाय से जुड़े हुवे हैं और इनकी गणना विश्व के सफलतम उद्यमी समुदायों मे होती है| पिछले दो हजार वर्षों से इनकी आजीविका का आधार वाणिज्य होने से इनकी गणना क्षत्रिय वर्ण होने के बावजूद वैश्य वर्ग मे होती है और स्वयं अग्रवाल समाज के लोग अपने आप को वैश्य समुदाय का एक अभिन्न अंग मानते हैं| इनके १८ गोत्र हैं| संस्थापक : महाराजा अग्रसेन वंश : सुर्यवंश एवं नागवंश (इस वंश की अठारह शाखाओं मे से १० सुर्यवंश की एवं ८ नागवंश की हैं) गद्दी : अग्रोहा प्रवर : पंचप्रवर कुलदेवी: महालक्षमी गोत्र : १८ गर्ग, गोयन,गोयल, कंसल , बंसल , सिंहल, मित्तल, जिंदल, बिंदल , नागल , कुच्छल , भंदल, धारण , तायल, तिंगल, ऐरण, मधुकुल , मंगल|

उपनाम वाले लोग[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]