त्यागी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

त्यागी अर्थात ब्राह्मण आदि वंशज यानि अयाचक ब्राह्मणों को सम्पूर्ण भारतवर्ष में विभिन्न उपनामों जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के कुछ भागों में त्यागी, पूर्वी उत्तर प्रदेश, व बंगाल में ब्राह्मण, जम्मू कश्मीर, पंजाब व हरियाणा के कुछ भागों में महियाल, मध्य प्रदेश व राजस्थान में गालव, गुजरात में अनाविल, महाराष्ट्र में चितपावन एवं कार्वे, कर्नाटक में अयंगर एवं हेगडे, केरल में नम्बूदरीपाद, तमिलनाडु में अयंगर एवं अय्यर, आंध्र प्रदेश में नियोगी एवं राव आदि उपनामों से जाना जाता है। अयाचक ब्राह्मण अपने विभिन्न नामों के साथ भिन्न भिन्न क्षेत्रों में अभी तक तो अधिकतर कृषि कार्य करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

अयाचक ब्राह्मणों की उत्पत्ति:- हमारे देश आर्यावर्त में 7200 विक्रमसम्वत् पूर्व देश, धर्म व संस्कृति की रक्षा हेतु एक विराट युद्ध सहस्रबाहु सहित समस्त आर्यावर्त के 21 राज्यों के क्षत्रिय राजाओ के विरूद्ध हुआ, जिसका नेतृत्व ऋषि जमदग्नि के पुत्र ब्रह्म भगवान परशुराम ने किया, इस युद्ध में आर्यावर्त के अधिकतर ब्राह्मणों ने भाग लिया और इस युद्ध में भगवान परशुराम की विजय हुई तथा इस युद्ध के उपरान्त अधिकतर ब्राह्मण अपना धर्मशास्त्र एवं ज्योतिषादि का कार्य त्यागकर समय-समय पर कृषि क्षेत्र में संलग्न होते गये, जिन्हे अयाचक ब्राह्मण व खांडवायन कहा जाने लगा जोकि कालान्तर में त्यागी, महियाल, गालव, चितपावन, नम्बूदरीपाद, नियोगी, अनाविल, कार्वे, राव, हेगडे, अयंगर एवं अय्यर आदि कई अन्य उपनामों से पहचाने जाने लगे।

त्यागी ब्राह्मणों को महाभारत काल से ही जाना जाता है

क्योकि महाभारत काल में इनका एक नगर था जो कांपिल्य नगर के नाम से जाना जाता था .

जब पांडव अज्ञात वास में थे . तभी इन त्यागी ब्राह्मणों ने पांडवो को अपने नगर में रहने का स्थान दिया था .

और अज्ञात वास में पांडवो का पुरे तरह सहयोग किया था .

त्यागी ब्राह्मणों का भूमि प्राप्त रहस्ये .

बताया जाता है की त्यागी उन ब्राह्मणों में से निकले त्यागी ब्राह्मण है . जब भगवान् परसुराम ने क्षत्रियों से युद्ध किया था. उस युद्ध में जो ब्राह्मण भगवान् परसुराम के साथ थे .

अतः जिन ब्राह्मणों ने भगवान् परशुराम को सैनिक बल दिया था . वो त्यागी ब्राह्मण थे. खुद भगवान् परशुराम ने उन्हें त्यागी ब्राह्मण की उपाधि दी . और जो भूमि युद्ध में जीती गयी वो सब उन ही त्यागी ब्राह्मणों को दी गयी थी जिससे वो अपने कर्मकणों का त्याग करके स्वयं अपनी मेहनत से अन्नोत्पादन करने लगे और अपनी जीविका चलाने लगे . तो भगवान् परशुराम ने ही त्याग करना और ब्राह्मणों को स्वयं पर निर्भर रहना सिखाया .