तेली

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मराठी तेली संत संताजी की रायपुर छत्तीसगढ़ में स्थापित प्रतिमा
बैल से चलने वाली परम्परागत कोल्हू और उस पर बैठा तेली बालक

तेली परंपरागत रूप से भारत, पाकिस्तान और नेपाल में तेल उत्पाद करने और बेचने वाले तेल व्यापारी- बनिया लोग है। जिन्हे वर्तमान में तेली समाज या साहू वैश्य समाज के नाम से जाना जाता है। तेली शब्द को संस्कृत में तैलिक कहते है। तेली समाज के लोग हिंदू, मुस्लिम,जैन, बौद्ध और पारसी इन सभी धर्मो में पाए जाते हैं। हिंदू तेली समाज के सरनेम– गुप्ता, साहू, तैल्याकार, सहुवान, साव ,साहूकार है। तेली समाज को गुजरात में मोढ़ घांची (तेली) के नाम से जाना जाता है। जो सन 2000 के पहले वैश्य उपजाति के रूप में सामान्य वर्ग(ऊंची जाति) में आती थी। जिसे सन 2002 में मोढ घांची के नाम से अन्य पिछड़ा वर्ग में सुचिबध कर दिया गया। गुजराती मोढ़ घांची (तेली ) समाज के सरनेम– मोदी, चौधरी और गांधी है। दक्षिण भारत में तेली समाज को वनियार, चेट्टियार, चेट्टी, गनिगा के नाम से जाना जाता हैं। मुस्लिम तेली समाज को मलिक के नाम से जाना जाता है। देश में केवल हिंदू तेली/साहू समाज की जनसंख्या 14% है। महाराष्ट्र के यहूदी समुदाय (जिसे बैन इज़राइल कहा जाता है) शीलवीर तेली नामक तेली जाति में एक उप-समूह के रूप में भी जाना जाता था, अर्थात् शबात पर काम करने से उनके यहूदी परंपरा के विरूद्ध अर्थात् शनिवार के तेल प्रदाताओं।

वर्ण स्थिति[संपादित करें]

तेली समाज में शुरुवात से वर्ण व्यवस्था को लेकर अलग अलग मतभेद रहा है, कुछ अपने को तेल के व्यापारी होने के कारण अपने को वैश्य कहते है, और कुछ अपने को क्षत्रिय कहते है, एवम कुछ लोग कहते है, हमारे गुप्त वंश के पूर्वजों ने कभी भी अपने को किसी वर्ण का नही बताया है नाही उनके द्वारा लिखवाए किसी भी शिलालेखो में उनके वर्ण के बारे में लिखा है,यानी हमारे पूर्वज वर्ण व्यवस्था को नही मानते थे और वो सभी धर्मो का सम्मान करते थे।े

तेली समाज के महापुरुष[संपादित करें]

गुरु संताजी जगनाडे महाराज ( जो संत तुकाराम के परम शिष्य थे। गुरु संताजी द्वारा लिखे अभंगो को पांचवा वेद कहा जाता है)

गुरु गोरखनाथ ( गुरु गोरखनाथ ने स्वयं अपने श्लोक में अपनी जाति तेली बताई है। गुरु गोरखनाथ को ही नाथ सम्प्रदाय के विस्तार का श्रेय जाता है)

देवी मां कर्मा ( भगवान जगन्नाथ स्वयं प्रातः कालीन सुबह मां कर्मा के घर खिचड़ी का भोग लगाने आते थे। इस पर बहुत सी कहानियां प्रचलित है। और इसी कारण आज भी जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है)

राजा भामाशाह (भामाशाह और महाराणा प्रताप बचपन के परममित्र थे। जब महाराणा प्रताप को मुगलों से युद्ध करने के लिए आपार धन और सैनिकों की जरूरत थी, उसी वक्त उनके बचपन के मित्र भामाशाह ने अपने सारे धन दौलत को महाराणा को देश की रक्षा के लिए दान दे दिया,और भामाशाह ने भील और मीणाओं की सेना एकत्र कर तब महाराणा प्रताप और भामाशाह ने मुगलों से युद्ध किया था)

वीर महाबली तेली ( वीर महाबली और छत्रसाल दोनो ही बचपन के परममित्र थे। वीर महाबली ने अपने पूर्वजों की सारी धन संपत्ति को दान कर छत्रसाल को युद्ध के लिए तैयार किया। तब बुंदेलखंड के दोनो शेरो छत्रसाल और महाबली ने मुगलों से युद्ध किया। और मुगलों को पराजित भी किया)


नरेंद्र मोदी  :- प्रधानमंत्री

रघुवर दास  :- पूर्व मुख्यमंत्री (झारखंड).राज्यपाल (ओडिशा)

सुशील कुमार मोदी  :- पूर्व मुख्यमंत्री बिहार


राजनीति[संपादित करें]

बिहार[संपादित करें]

2000 के दशक के अंत में, तेली सेना द्वारा आयोजित बिली के तेली समुदाय में से कुछ, वोट बैंक की राजनीति में शामिल थे क्योंकि उन्होंने राज्य में सबसे पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकरण प्राप्त करने की मांग की थी। प्रारंभ में, वे भारत की आधिकारिक सकारात्मक भेदभाव योजना में इस तात्पर्य को प्राप्त करने में विफल रहे, विपक्षी अन्य समूहों से आ रहे थे जिन्होंने तेली को बहुत अधिक आबादी वाले और सामाजिक-आर्थिक रूप से प्रभावशाली माना और परिवर्तन को सही ठहराया। अप्रैल 2015 में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की सूची में तेली जाति को शामिल करने का फैसला किया।[1][2] बिहार जाति आधारित गणना 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में तेली की आबादी 2.81% है।[3][4]

झारखंड[संपादित करें]

2004 में, झारखंड सरकार ने अर्जुन मुंडा के अधीन झारखंड में अनुसूचित जनजाति में तेली जाति को दर्जा देने की सिफारिश की, लेकिन यह कदम 2015 के रूप में अमल नहीं किया गया।[5] 2014 में, रघुवर दास झारखंड के पहले तेली मुख्यमंत्री बने

छत्तीसगढ़ में तेली जाति के लोगो की जनसंख्या ज्यादा है|

मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित तेली का मन्दिर तेली समुदाय ने 9 वी सदी में बनवाया था ।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "बिहारः जातियों के दर्जे में बदलाव से होगा फ़ायदा ?". मूल से 11 मई 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 अप्रैल 2018.
  2. "Bihar: BJP, JD(U) set for a war of sops ahead of Assembly polls". मूल से 9 दिसंबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 दिसंबर 2017.
  3. "Bihar Caste Survey: बिहार में किस जाति की कितनी आबादी, देखें पूरी सूची".
  4. "Bihar Caste Survey Report LIVE: बिहार में 63% पिछड़े, 19% दलित, 15% सवर्ण, जाति गणना रिपोर्ट में यादव सबसे ज्यादा".
  5. "Teli show of strength at Gumla". मूल से 8 नवंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 दिसंबर 2017.