डाँगी
डाँगी पटेल उत्तरी भारत की एक कृषक हिंदू जाति है। इन्हें डांगी पटेल, आजना पटेल, डांगी भी कहते हैं| इनका पारंपरिक व्यवसाय खेती है। ये कई भाषाएँ बोलते हैं, लेकिन हिंदी उनमें से सबसे अधिक समझी जाने वाली भाषा है। इनकी सर्व प्रथम कुलदेवी मां कालिका, पावागढ़, गुजरात में स्थित हैं | इनकी आबादी गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश में ज्यादा है | पुरानी पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा डांग जो कि जन्मजेय के पुत्र थे | राजा डांग की विरासत जूनागढ़, गुजरात थी | वे अपनी कुलदेवी माँ कालिका पावागढ़, गुजरात की देवी को मानते थे | किसी श्राप के कारण उनका पूरा साम्राज्य समाप्त हो गया था | कई सालों गौर तपस्या करने के बाद माता कालिका ने उन्हें खेती करने की सलाह दी | उसी समय से उन्होंने खेती करना प्रारंभ कर दि | भगवान शिव ने "सर्वप्रथम गन्ने का बीज राजा डांग को दिया था " और भगवान शिव ने कहा इसकी खेती करने से कभी भी तेरे घर में खाने की कमी नहीं होगी | राजा डांग के नाम से इनके पुत्रों की संतानों को " डांगी " उपजाति नाम मिला | इन्हें पाटीदार भी कहते है, खेत के एक बहुत बड़े भाग को " पाटी "कहते इसी से इन्हें पाटीदार भी कहते हैं
पहनावा
[संपादित करें]पुरुष धोती, अंगरखा,पहनते हैं तथा महिलाएं घाघरा, कांछली, चुंदड़ी या पोमछा ओढ़तीं है।
आभूषणों में महिलाएं कड़ियां, नेवरियां, जांजरियां, सड़प, गाणी, नथ, बोर, कंदोरा, हांली, ऑगञा, गाळा, फोलरी, दामणा आदि पहनतीं हैं तो पुरुष मिरकी, लंगर, कंदोरा, मूंदड़ी आदि पहनते हैं।[उद्धरण चाहिए]