वार्ता:दांगी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

दांगी/ दांगी समाज का एक परिचय दांंगी जाति आपने आप में एक अतिप्राचीन हैं , दांगी प्राचीन भारतीय क्षत्रिय जाति हैं जिसका अपना गौरवशाली अतीत और संस्कृति रहीं हैं। दांगी समाज के अंदर एक नहीं अनेक राजा महाराजा,जमीदार और जागीरदार हुए ,जिसका इतिहास गवाह हैं।

दांगी राजाओं द्वारा कई दुर्ग किलो का निर्माण किया गया। जिनमें से अभी भी कुछ किले हैं जैसे @गढ़पहरा का किला, सागर, @कुराई का किला , कुराई , सागर, सागर का शीशमहल, @नरवर का किला , शिवपुरी,यह सभी मध्यप्रदेश में है,जबकि विराटा का किला ,उत्तरप्रदेश झांसी के पास , आदि इसके स्वर्णिम इतिहास के उदाहरण है जो आज भी विद्यमान हैं।

दांगी समाज एक पहचान दांगी समाज भारत वर्ष के कई प्रदेशों में निवासरत हैं,और उसकी अपनी क्षेत्रीयता के आधार पर पहचान हैं । मध्यप्रदेश में दांगियो को दांगी ठाकुर, दांगी राजपूत और कहीं दांगी पटेल और मौर्य, कचवाह के नाम से जाना जाता है , राजस्थान में दांगी पटेल और दांगी पटेल पाटीदार के नाम से जाने जाते है, वहीं महाराष्ट्र में दांगी परदेशी और ठाकुर के नाम से अपनी पहचान बनाए हुए हैं,दिल्ली, हरियाणा में दांगी जाट और उत्तरप्रदेश में दांगियो की पहचान दांगी राजपूत से भी होती है, अगर बिहार और झारखंड,पश्चिम बंगाल की बात करे तो दांगी प्रसाद, सिन्हा, कुमार आदि आपने सरनेम में उपयोग करते हैं। दांगी समाज भारत के इन राज्यो के आलावा गुजरात, ओड़िशा,आसाम,हिमाचल , उत्तराखंड नोर्थ ईस्ट के साथ साथ नेपाल, भूटान ,म्यांमार, मॉरिशस, फिजी, अमेरिका आदि जगहों पर बी पाए जाते हैं। दांगी एक जाति नहीं बल्कि एक आर्य सभ्यता हैं,दांगी समाज मध्यप्रदेश के मालवा और बुंदेलखंड , राजस्थान के मेवाल, मेवाड़ चितौड़गढ़ क्षेत्र में बहुसंख्य हैं और बिहार के गया ,पटना के आसपास बहुत बड़ी संख्या में निवास करती हैं, नेपाल में खासकर डांग जिले में बहुलता में दांगी समाज पाई जाति हैं। गुजरात के डांग जिले में भी दांगी जनजाति के लोग रहते हैं। हिमाचल का लोकनृत्य दांगी हैं , जबकि कई जगहों पर दांगी बोली भी हैं, दंडकारण्य में दांगी नाम से नदी हैं , जबकि पुराणों में हमारा उल्लेख दण्ड और दंडक जनपद जो आज का दंडकारण्य वाला क्षेत्र से पाया जाता है।

दांगी समाज के इतिहासिक क़िले[संपादित करें]

मध्यप्रदेश में दांगी समाज के कई किले दुर्ग हैं जो समाज के स्वर्णिम व गौरवशाली इतिहास का साक्षी हैं।

१. #गढ़पहरा का किला :- यह किला सागर जिले में स्थिति हैं, जिसे पुराना सागर भी का जाता हैं,इस किले में दांगी राजा द्वारा निर्मित शीश महल इसकी खूबसूरती को बढ़ाता है।


2. सागर का किला :- सागर किला का निर्माण दांगी राजा उदयानशाह द्वारा किया गया था। वर्तमान समय में इसे जवाहर लाल नेहरू पुलिस आकदमी के नाम से जाना जाता है। इसमें पुलिस ट्रैनिंग सेंटर संचालित हो रहा है

3 खुरई का किला :- यह किला भी सागर जिले की खुरई तहसील में स्थिति है, जिसका निर्माण दांगी राजा खेमचंद जी द्वारा किया गया था, जिसमें एक सुंदर तालाब और मंदिर हैं। दांगी देव ठाकुर (वार्ता) 11:17, 31 मई 2019 (UTC)