बनिया

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बनिया एक भारतीय जाति हैं,इनमे विशेषतःसवर्ण वैश्य पोद्दार, मधेशिया,जैन,रौनियार,गर्ग कसौंधन,केसरवानी, गुप्ता गोंड़ साहू,बरनवाल, कर्णवाल, अग्रवाल, जिंदल, पोरवाल (राजस्थान व उतरप्रदेश के कुछ जिलों मे बहुतायत रूप से है आदि सम्मिलित है.. प्राचीन काल से इनमे व्यापार को उत्कृष्ट रूप से चलाने की अपार विद्या समाहित हैं। ये वाणिज्य और व्यवसाय से सम्बंधित हैं। बनिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द वाणिज्य से माना जाता हैं सामान्यत: पैसा उधार देने वालों तथा मसाले एवं औषधी वनस्पती, अनाज एवं तेल सोना चाँदी मूल्यवान रत्न कपडे के व्यापारियों का भारतीय जाति, मुख्यत: उत्तरी और पश्चिमी भारत में पाई जाती हैं, हालाकि संकीर्ण अर्थ में कई व्यापारी समुदाय बनिए नहीं हैं और विलोमत: कुछ बनिए व्यापारी नहीं हैं।

भारतीय समाज की चतुष्वर्णीय व्यवस्था में असंख्य बनिया उपजातियों, जैसे सवर्ण वैश्य बनिया पोद्दार, मद्धेशिया,अग्रवाल,बरनवाल मारवाडी गर्ग मितल सिंघल गोयल आदि अग्रहरि,गुप्ता,गोंड लोहिया, पोरवाल/पुरवार, स्वर्णकार (jewellar ) सोने चाँदि मूल्यवान रत्नों के व्यपारी कुछ गहना निमार्ण भी करते है गहनों को गिरवी रखने वाला सेठ साहूकार मारवाडी शाह सोनी भामा कहा जाता है आदि को वैश्य वर्ण का सदस्य माना जाता है। धार्मिक अर्थों में वे सामान्यत: वैष्णव होते हैं ।

नामकरण[संपादित करें]

उत्तर वैदिककाल के उल्लेखों में पण, पण्य, पणि जैसे शब्द आए हैं। पण या पण्य का अर्थ हुआ वस्तु, सामग्री, सम्पत्ति। बाद में पण का प्रयोग मुद्रा के रूप में भी हुआ। पणि से तात्पर्य व्यापारी समाज के लिए भी था। पणि उस दौर के महान व्यापारिक बुद्धिवाले लोग थे। सवर्ण पणियों की रिश्तेदारी आज के बनिया शब्द से है। पणि (फिनीशियन) आर्यावर्त में व्यापार करते थे। उनके बड़े-बड़े पोत चलते थे। वे ब्याजभोजी थे। आज का 'बनिया' शब्द वणिक का अपभ्रंश ज़रूर है मगर इसके जन्मसूत्र पणि में ही छुपे हुए हैं। व्यापार करने वाले ब्याजभोजियों के प्रति आर्यों की घृणा स्वाभाविक थी। आर्य आगंतुक थे और पणियों का प्रधान व्यवसाय व्यापार और लेन-देन था। पणिक या फणिक शब्द से ही वणिक भी जन्मा है। आर्यों ने पणियों का उल्लेख अलग अलग सन्दर्भों में किया है मगर हर बार उनके व्यापार पटु होने का संकेत ज़रूर मिलता है। हिन्दी में व्यापार के लिए वाणिज्य शब्द भी प्रचलित है। वाणिज्य की व्युत्पत्ति भी पण् से ही मानी जाती है। यह बना है वणिज् से जिसका अर्थ है सौदागर, व्यापारी अथवा तुलाराशि। गौरतलब है कि व्यापारी हर काम तौल कर ही करता है। वणिज शब्द की व्युत्पत्ति आप्टे कोश के मुताबिक पण+इजी से हुई है। इससे ही बना है “वाणिज्य” और “वणिक” जो कारोबारी, व्यापारी अथवा वैश्य समुदाय के लिए खूब इस्तेमाल होता है। पणिक की वणिक से साम्यता पर गौर करें। बोलचाल की हिन्दी में वणिक के लिए बनिया शब्द कहीं ज्यादा लोकप्रिय है जो वणिक का ही अपभ्रंश है इसका क्रम कुछ यूं रहा- वणिक, बणिक, बनिआ, बनिया।[1][2]

चित्र वीथिका[संपादित करें]

प्रसिद्ध सवर्ण बनिया लोग[संपादित करें]

महात्मा गाँधी[संपादित करें]

महात्मा गाँधी वैश्य वर्ण में मोढ गांधी जाती के हैं |</ref https://en.wikipedia.org/wiki/Gandhi_(surname)>

नरेन्द्र मोदी[संपादित करें]

नरेन्द्र मोदी गुजराती वैश्य सम्प्रदाय के हैं |

राज मद्धेशिया मध्यप्रदेश वैश्य सम्प्रदाय के हैं । KAilash Gupta

 देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; Schrader1997 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  2. Monier-Williams, Monier (1986). A Sanskrit-English dictionary etymologically and philologically arranged with special reference to cognate Indo-European languages (New ed., greatly enl. and improved. संस्करण). Delhi: Motilal Banarsidass. पृ॰ 915. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-208-0065-6.